2 दिन में गन्ना दाम पर हाई-लेवल बैठक: ₹4500 प्रति टन पहली किस्त की मांग, चीनी एमएसपी ₹50 होने से यूपी को क्या फायदा

गन्ना दाम को लेकर चल रहा गतिरोध अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। महाराष्ट्र सरकार ने दो दिन के भीतर किसानों, चीनी मिलों और सरकार के बीच हाई-लेवल बैठक बुलाने का ऐलान किया है, जिसमें गन्ने की कीमत और मिलों की दिक्कतों के बीच बीच का रास्ता निकालने की कोशिश होगी। किसान नेता पहली किस्त के तौर पर 4500 रुपये प्रति टन की मांग पर अड़े हैं, जबकि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 50 रुपये प्रति किलो तक बढ़ाने की मांग भी एजेंडे में रहेगी।
इस फैसले का असर सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा। चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य केंद्र सरकार तय करती है, इसलिए उसमें बदलाव का असर उत्तर प्रदेश समेत देश भर की मिलों की भुगतान क्षमता पर पड़ेगा। यूपी के लिए भी यह बैठक अहम है, क्योंकि 2026-27 सत्र के लिए यूपी के गन्ना मूल्य की घोषणा अभी बाकी है।
कोल्हापुर की बैठक में क्या हुआ
कोल्हापुर के सरकारी विश्राम गृह में किसान प्रतिनिधियों और चीनी मिल प्रबंधनों के बीच बैठक हुई, जिसके बाद कोल्हापुर के संरक्षक मंत्री प्रकाश आबिटकर ने हाई-लेवल बैठक का ऐलान किया। इस बैठक में स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के नेता और पूर्व सांसद राजू शेट्टी भी मौजूद थे। मिलों की ओर से शरद सहकारी चीनी मिल के अध्यक्ष और विधायक राजेंद्र पाटिल यड्रावकर तथा पूर्व सांसद संजय मांडलिक ने पक्ष रखा।
बैठक के बाद आबिटकर ने कहा कि दाम और मिलों की समस्याओं के बीच बीच का रास्ता निकालने के लिए दो दिन बाद हाई-लेवल बैठक होगी। उन्होंने यह भी कहा कि सूखे और गन्ने के रकबे को देखते हुए मिलों को जल्द पेराई शुरू करनी होगी।
4500 रुपये प्रति टन की मांग के पीछे का गणित
राजू शेट्टी ने बैठक में गन्ने की पहली किस्त के रूप में 4500 रुपये प्रति टन की मांग रखी। उन्होंने इस मांग के समर्थन में एक वित्तीय विश्लेषण भी पेश किया, जो आने वाले सत्र में चीनी की अनुमानित कीमतों और पिछले साल की औसत बिक्री पर आधारित था। शेट्टी का तर्क है कि खेती की लागत बढ़ गई है, जबकि गन्ने की रिकवरी घट रही है और दर्ज वजन भी कम आ रहा है। इन तीनों वजहों से किसानों की आमदनी पर सीधा दबाव पड़ रहा है।
साफ रहे कि 4500 रुपये प्रति टन की यह मांग पहली किस्त की है, यानी पेराई के समय मिलने वाली शुरुआती रकम की। इससे पहले शेट्टी की ओर से 5000 रुपये प्रति टन की मांग भी सामने आई थी, जिसमें मिलों से बिना देर किए खरीद मूल्य घोषित करने को कहा गया था। दोनों आंकड़े अलग-अलग मौकों की मांगें हैं।
चीनी का एमएसपी: 31 रुपये से 50 रुपये की मांग
बैठक का दूसरा बड़ा मुद्दा चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य यानी एमएसपी रहा। किसानों की मांग है कि चीनी का एमएसपी बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो किया जाए। चर्चा में यह बात भी सामने आई कि मिलें ज्यादा गन्ना दाम तभी दे पाएंगी जब केंद्र सरकार एमएसपी पर फैसला करे और बाजार में चीनी की कीमतें भी साथ दें।
यह मांग यूं ही नहीं उठ रही। चीनी का एमएसपी फरवरी 2019 से 31 रुपये प्रति किलो पर ही अटका हुआ है। सात साल से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ, जबकि खेती की लागत, मजदूरी, डीजल, खाद और परिवहन सब महंगा हो गया है। मिलों का कहना है कि बिक्री की न्यूनतम कीमत सात साल पुरानी होने से वे ज्यादा दाम देने की स्थिति में नहीं हैं। किसान संगठनों का जवाब है कि एमएसपी बढ़ने से मिलों की कमाई और उधारी की क्षमता सुधरेगी, जिससे समय पर बेहतर भुगतान मिल सकेगा।
पानी को लेकर भी गरमाया माहौल
गन्ना दाम के साथ-साथ पानी का मुद्दा भी इस विवाद में जुड़ गया है। शनिवार सुबह स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के कार्यकर्ताओं ने सांगली में कृष्णा नदी के सूखे किनारे पर प्रदर्शन किया। प्रशासन ने कोल्हापुर और सांगली जिलों में कृषि पंपों से पानी उठाने पर रोक लगा दी है और बांधों से नदियों में पानी छोड़ना भी बंद कर दिया है। शेट्टी का आरोप है कि कोयना बांध में करीब 90 प्रतिशत पानी होने के बावजूद पानी रोका गया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि पानी न छोड़ा गया तो प्रदर्शनकारी खुद कोयनानगर जाकर पानी छोड़ेंगे।
कर्नाटक और केंद्र में भी हलचल
महाराष्ट्र की बैठक से ठीक पहले कर्नाटक में भी गन्ना दाम पर बड़ी बैठक होने जा रही है। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 26 अक्टूबर को बेलगावी में गन्ना किसानों और मिल प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई है। शेट्टी ने 25 अक्टूबर को कोल्हापुर जिले में मोटरसाइकिल रैली का ऐलान भी किया था। केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भरोसा दिया है कि गन्ना मुद्दों की जांच समिति चीनी के एमएसपी में संशोधन पर 20 नवंबर से पहले फैसला लेगी।
यूपी के किसानों के लिए इसका मतलब क्या है
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है और यहां 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें से 71 से ज्यादा पश्चिमी यूपी में हैं। यूपी में भी 2026-27 पेराई सत्र की तैयारियां चल रही हैं। ऐसे में महाराष्ट्र और कर्नाटक में दाम पर जो भी फैसला होगा, वह यूपी की बहस में भी गूंजेगा।
यूपी के किसानों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि 2026-27 सत्र के लिए राज्य सरकार के गन्ना मूल्य यानी एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 के लिए एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल (अगेती) घोषित हुआ था, जिसमें 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई थी। लेकिन यह दर पिछले सत्र की है — इसे इस सत्र की दर समझने की भूल न करें। 7 अक्टूबर को लखनऊ में गन्ना आयुक्त कार्यालय में हुई उप-समिति की बैठक में 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग भी उठी थी, लेकिन उस पर कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
जब तक यूपी का नया एसएपी घोषित नहीं होता, किसानों को अपनी योजना आने वाली घोषणा को ध्यान में रखकर बनानी चाहिए। पेराई सत्र में अपना गन्ना सर्वेक्षण रिकॉर्ड जांच लें — रकबा और किस्म का ब्योरा सही होना चाहिए, वरना पर्ची और भुगतान में दिक्कत आ सकती है। बैंक खाता सक्रिय और पहचान दस्तावेजों से जुड़ा रखें।
आगे क्या देखना होगा
अब सबकी नजर दो दिन बाद होने वाली हाई-लेवल बैठक पर है। इसमें तीन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है — पहली किस्त कितनी होगी, चीनी के एमएसपी पर केंद्र का रुख क्या होगा और पेराई समय पर क्या व्यवस्था बनेगी। अगर बीच का रास्ता निकला तो पेराई सत्र बिना बड़े टकराव के आगे बढ़ सकता है। अगर गतिरोध बना रहा तो किसान संगठनों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दे रखी है।
जवाब जानिए
सवाल: महाराष्ट्र में हाई-लेवल बैठक कब होगी? जवाब: कोल्हापुर में हुई बैठक के बाद संरक्षक मंत्री प्रकाश आबिटकर ने दो दिन के भीतर हाई-लेवल बैठक बुलाने का ऐलान किया है।
सवाल: किसानों की मुख्य मांग क्या है? जवाब: गन्ने की पहली किस्त के रूप में 4500 रुपये प्रति टन और चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 50 रुपये प्रति किलो करने की मांग उठी है।
सवाल: चीनी का एमएसपी अभी कितना है? जवाब: चीनी का एमएसपी फरवरी 2019 से 31 रुपये प्रति किलो पर अटका हुआ है। सात साल से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
सवाल: 2026-27 के लिए यूपी का गन्ना मूल्य घोषित हो गया है क्या? जवाब: नहीं, 2026-27 सत्र के लिए यूपी के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। 400 रुपये प्रति क्विंटल (अगेती) की दर 2025-26 सत्र की है।
स्रोत: द टाइम्स ऑफ इंडिया (24 अक्टूबर 2026), डेक्कन हेराल्ड (25 अक्टूबर 2026), चीनीमंडी (9 और 22 अक्टूबर 2026)।
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