महाराष्ट्र में सूखे से चीनी उत्पादन 12% घटा — 90.18 लाख टन पर आया अनुमान, यूपी के गन्ना किसानों के लिए क्या मतलब है

महाराष्ट्र के गन्ना बेल्ट से आई एक खबर ने पूरे देश के चीनी बाजार का गणित बदल दिया है। राज्य के चीनी आयुक्तालय ने 2026-27 सीजन के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान घटाकर 90.18 लाख टन कर दिया है। सितंबर में यही अनुमान 102.5 लाख टन था — यानी एक महीने में 12.32 लाख टन की कटौती, करीब 12 फीसदी की गिरावट।
पिछले सीजन (2025-26) में महाराष्ट्र ने 99 लाख टन से ज्यादा चीनी बनाई थी और देश में पहले नंबर पर रहा था। नए अनुमान के हिसाब से इस बार उत्पादन पिछले साल से भी करीब 9 लाख टन कम रहेगा।
यूपी के किसान के मन में सबसे पहला सवाल यही है — इससे हमें क्या? सीधा जवाब: देश में चीनी की सप्लाई घटने का मतलब है चीनी के दाम मजबूत बने रहना, और मजबूत दाम का मतलब है गन्ने के दाम पर दबाव बढ़ना। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि कल से ही एसएपी बढ़ जाएगा। पूरी तस्वीर के लिए आंकड़े देखिए।
90.18 लाख टन: नया अनुमान क्या कहता है
यह संशोधन कम बारिश और गन्ने की गुणवत्ता खराब होने की आशंका के बीच हुआ है। राज्य सरकार ने विभाग को अनुमान का दोबारा आकलन करने का निर्देश दिया था।
चीनी आयुक्त संजय कोलते के मुताबिक संशोधित अनुमान अगस्त तक के आंकड़ों पर आधारित है। सितंबर के आंकड़े आने पर इसमें मामूली बदलाव हो सकता है।
गन्ने के आंकड़े और साफ तस्वीर देते हैं। नए अनुमान में करीब 1,127 लाख टन गन्ना, 15.43 लाख हेक्टेयर से ज्यादा रकबा, 74 टन प्रति हेक्टेयर पैदावार और 9.5 फीसदी रिकवरी आंकी गई है — यानी 100 किलो गन्ने से 9.5 किलो चीनी। पिछले सीजन में 1,316 लाख टन गन्ना, 16 लाख हेक्टेयर से ज्यादा रकबा और 95 टन प्रति हेक्टेयर पैदावार थी — करीब 21 टन प्रति हेक्टेयर की गिरावट।
आधिकारिक अनुमान और उद्योग का अनुमान — फर्क क्यों
उद्योग संगठन का अनुमान इससे भी नीचे है। वेस्ट इंडिया शुगर मिल्स एसोसिएशन (विस्मा) के अध्यक्ष बी. बी. थोंबरे के मुताबिक उत्पादन करीब 20 फीसदी घटकर लगभग 80 लाख टन रह सकता है। प्रति एकड़ पैदावार 30 से 40 फीसदी घट रही है, और मराठवाड़ा, विदर्भ, सोलापुर व अहिल्यानगर में करीब 45 दिन से बारिश नहीं हुई है।
फर्क की वजह यह है कि सरकारी अनुमान अगस्त तक के आंकड़ों पर आधारित है, जबकि उद्योग का अनुमान खेतों की सीधी रिपोर्टों पर टिका है। दोनों एक ही दिशा में इशारा कर रहे हैं — उत्पादन घटेगा। सवाल सिर्फ इतना है कि गिरावट 9 लाख टन की होगी या 19 लाख टन की।
देश के स्तर पर भी तस्वीर चिंता वाली है। द हिंदू बिज़नेसलाइन के एक आकलन में 2026-27 में भारत का कुल उत्पादन करीब 270 लाख टन (करीब 15 फीसदी कम) आंका गया है — महाराष्ट्र करीब 88, यूपी करीब 96 और कर्नाटक करीब 46 लाख टन। यह सरकारी अनुमान नहीं, निजी आकलन है।
यूपी क्यों अलग दिख रहा है
इसी आकलन में यूपी के लिए राहत वाली बात है — उत्पादन करीब 96 लाख टन पर मोटे तौर पर स्थिर रहने का अनुमान है। वजह सिंचाई है: यूपी के गन्ना बेल्ट में नहर-ट्यूबवेल का जाल बारिश पर निर्भरता कम करता है, जबकि महाराष्ट्र के कई इलाकों में गन्ना बारिश पर ही टिका है।
लेकिन यूपी पूरी तरह बेअसर नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक यूपी में गन्ने का रकबा करीब 47,000 हेक्टेयर घटकर 28.87 से 28.4 लाख हेक्टेयर रह गया है — वजह बढ़ती लागत, मजदूरी-सिंचाई का खर्च, भुगतान में देरी और गन्ने की लंबी फसल अवधि है।
यूपी में कुल 122 चीनी मिलें हैं। 2025-26 के लिए एसएपी अगैती पर 400 और सामान्य पर 390 रुपये प्रति क्विंटल था। 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है — पुराने भाव को नए सीजन का भाव बताने वाली पोस्टों से भ्रमित न हों।
यूपी के किसान के लिए इसका क्या मतलब है
पहला, चीनी के दाम। सप्लाई घटेगी तो दाम मजबूत रहेंगे, मिलों की कमाई बेहतर रहेगी, और यही एसएपी बढ़ोतरी की मांग को ताकत देगा। 7 अक्टूबर को लखनऊ की बैठक में किसान प्रतिनिधियों ने 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग रखी थी — यह मांग है, फैसला नहीं।
दूसरा, जल्दी पेराई का फायदा। पश्चिमी यूपी की मिलें करीब 20 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं — पिछले साल से करीब 10 दिन पहले। खेत जल्दी खाली होगा तो गेहूं की बुवाई सही समय पर होगी। महाराष्ट्र में भी 15 अक्टूबर से पेराई शुरू हो रही है।
तीसरा, सावधानी। चीनी की कमी की खबर सुनकर गन्ना रोककर दाम बढ़ने का इंतजार करना खतरनाक है। गन्ना खेत में जितना रुकेगा, वजन और मिठास दोनों घटेंगे। मिल के कैलेंडर और पर्ची के हिसाब से गन्ना देना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।
पेराई से पहले यूपी की तैयारियां
सीतापुर में मिलों ने मरम्मत का करीब 80 फीसदी काम पूरा कर लिया है, और वहां अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह के बीच पेराई शुरू होने की उम्मीद है। जिलाधिकारी की बैठक में मिलों तक की सड़कों की मरम्मत, गड्ढामुक्त सड़कें और ढीले बिजली के तार ठीक कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मुजफ्फरनगर की मोरना स्थित गंगा किसान सहकारी चीनी मिल को 26 अक्टूबर तक चालू करने की तैयारी है। पश्चिमी यूपी की बाकी मिलों में भी बॉयलर पूजा और स्टीम ट्रायल अंतिम चरण में है। संदेश साफ है — इस बार पेराई में देरी की गुंजाइश कम रखी जा रही है।
किसान अभी क्या करें
पहला, गन्ना सर्वे रिकॉर्ड जांच लीजिए — रकबा, किस्म और खेत का ब्योरा सही हो। दूसरा, ई-गन्ना ऐप या समिति से कैलेंडर-पर्ची की स्थिति देख लीजिए। तीसरा, बैंक खाता चालू और सही दस्तावेजों से जुड़ा हो, वरना भुगतान अटकेगा।
चौथा, हरा या कमजोर गन्ना मिल के कैलेंडर से पहले मत काटिए। पांचवां, एसएपी की खबरों के लिए सरकारी घोषणा का इंतजार कीजिए — व्हाट्सऐप के भावों पर भरोसा मत कीजिए। छठा, शिकायत हो तो गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क कीजिए। टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 तथा एसएमएस शॉर्टकोड 51969 भी उपलब्ध हैं।
महाराष्ट्र की खबर यूपी के किसान को यही सिखाती है कि मौसम अब गन्ने की खेती का सबसे बड़ा जोखिम बन गया है। सिंचाई, सही किस्म और समय पर पेराई — यही तीन चीजें इस जोखिम से बचाती हैं।
जवाब जानिए
महाराष्ट्र का चीनी उत्पादन कितना घटने का अनुमान है? सरकारी अनुमान: 102.5 से घटकर 90.18 लाख टन — करीब 12 फीसदी गिरावट। विस्मा का अनुमान और नीचे, करीब 80 लाख टन।
क्या इससे यूपी में गन्ने का दाम बढ़ेगा? गारंटी नहीं। सप्लाई घटने से दाम मजबूत रहेंगे, जो एसएपी मांग को ताकत देंगे। 600 रुपये की मांग रखी गई है, पर 2026-27 एसएपी की घोषणा बाकी है।
2026-27 के लिए यूपी का एसएपी क्या है? अभी घोषित नहीं हुआ है। 2025-26 के लिए एसएपी अगैती किस्म पर 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म पर 390 रुपये प्रति क्विंटल था।
यूपी में पेराई कब शुरू होगी? पश्चिमी यूपी में करीब 20 अक्टूबर से, मोरना मिल 26 अक्टूबर तक, और सीतापुर में अक्टूबर अंत–नवंबर शुरू के बीच पेराई की उम्मीद है।
भुगतान या पर्ची की शिकायत कहां करें? अपनी गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें। टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 तथा एसएमएस शॉर्टकोड 51969 भी उपलब्ध हैं।
स्रोत: बिज़नेस स्टैंडर्ड (हिंदी), चीनीमंडी, एग्रीइनसाइट, द हिंदू बिज़नेसलाइन, टाइम्स ऑफ इंडिया, कपिलवस्तु पोस्ट।
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