मवाना में गन्ना ब्याज की मांग पर धरना: 7 अक्टूबर की डेडलाइन बीती, 1996-97 से 2025-26 तक का सालवार ब्यौरा मांगा

पेराई सत्र 2026-27 सिर पर है और बकाया गन्ना भुगतान का हिसाब-किताब एक बार फिर सड़क पर आ गया है। मेरठ जिले के मवाना में 5 अक्टूबर (सोमवार) को सहकारी गन्ना विकास समिति परिसर में सैकड़ों किसानों ने राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के बैनर तले धरना दिया। इस धरने की सबसे अलग मांग थी — गन्ने की कीमत नहीं, बल्कि बकाया भुगतान पर देय ब्याज (ब्याज) का साल-दर-साल का पूरा ब्यौरा। किसानों ने कहा कि 14 दिन से अधिक की देरी से किए गए गन्ना भुगतान पर नियमानुसार बनता ब्याज, वर्ष 1996-97 से 2025-26 तक, सालवार हिसाब के साथ लिखित में उपलब्ध कराया जाए।
गन्ना विभाग के अधिकारी के साथ हुई वार्ता में आश्वासन मिला कि 7 अक्टूबर को समिति सचिव के आने पर किसानों को ब्याज का सालवार विवरण लिखित रूप में दे दिया जाएगा। इसी आश्वासन पर धरना दो दिन के लिए स्थगित किया गया। अब 7 अक्टूबर की डेडलाइन बीत चुकी है — और सवाल यही है कि किसानों को उनका हिसाब मिला या नहीं। संगठन के जिला अध्यक्ष ने पहले ही चेतावनी दे दी थी कि यदि समय पर ब्यौरा नहीं मिला तो दोबारा आंदोलन किया जाएगा।
धरने में क्या-क्या हुआ
मवाना टाइम्स और अमर उजाला की रिपोर्टों के अनुसार, धरने का नेतृत्व संगठन के मंडल अध्यक्ष चौधरी रामवीर सिंह ने किया और सैकड़ों किसान जुटे। किसानों ने कहा कि गन्ना भुगतान निर्धारित समय से अधिक देरी से किया गया, लेकिन उस देरी पर बनता ब्याज का स्पष्ट ब्यौरा कभी नहीं मिला। रिपोर्टों के अनुसार, किसानों ने उच्च न्यायालय के 11 जुलाई 2026 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि विलंबित भुगतान पर देय ब्याज का विवरण देना आवश्यक है।
धरने की सूचना मिलने पर गन्ना विभाग के डिप्टी स्तर के अधिकारी ने किसानों से वार्ता की और आश्वस्त किया कि 7 अक्टूबर को गन्ना समिति सचिव के आने पर ब्याज का सालवार ब्यौरा लिखित रूप में उपलब्ध करा दिया जाएगा। इसी आश्वासन पर धरना दो दिन के लिए स्थगित हुआ। लेकिन जिला अध्यक्ष दिनेश प्रधान ने साफ चेतावनी दी — यदि तय समय में ब्याज का ब्यौरा नहीं दिया गया तो संगठन दोबारा आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
ब्याज का नियम: 14 दिन की सीमा
किसानों की यह मांग हवा में नहीं उठी है। नियमों के अनुसार, मिल को गन्ना खरीद के बाद 14 दिन के भीतर किसान को भुगतान करना होता है। जब भुगतान इस अवधि से आगे खिसकता है, तो विलंब की अवधि के लिए किसान को ब्याज देय बनता है — यही वह प्रावधान है जिसका हिसाब मवाना के किसान मांग रहे हैं।
व्यवहार में समस्या यह रही है कि मूल भुगतान तो किश्तों में या विलंब से हो ही जाता है, लेकिन उस विलंब पर बनने वाले ब्याज का सालवार हिसाब किसान तक पहुंचता ही नहीं। करीब तीन दशक के ब्याज की मांग ही बताती है कि मामला कितना पुराना और कितना लंबित है।
ब्याज का मुद्दा प्रदेशभर में क्यों गरम
मवाना का धरना कोई अकेली घटना नहीं है। गन्ना भुगतान पर ब्याज का मुद्दा इन दिनों पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चर्चा में है। वेबवार्ता की रिपोर्ट के अनुसार, किसान युवा संसद में “ब्याज नहीं तो वोट नहीं” का नारा बुलंद किया गया, और कहा गया कि जो भी नेता अब वोट मांगने आएगा, उससे ब्याज और गन्ना मूल्य का हिसाब लिया जाएगा। भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि ब्याज किसानों का वैधानिक अधिकार है और यह मामला अदालत में भी है।
इसी कड़ी में पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का भाव कम से कम 500 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की मांग भी उठाई गई है। रिपोर्टों के अनुसार, कोल्हू-क्रेशर पर इस समय गन्ने की खरीद 490 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक हो रही है, जबकि 2025-26 सत्र का एसएपी अगेती किस्म के लिए 400 रुपये और सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल रहा था।
7 अक्टूबर के बाद: अब क्या होगा
मवाना के किसानों के लिए अगला पड़ाव साफ है — 7 अक्टूबर को गन्ना समिति सचिव से ब्याज का सालवार ब्यौरा लिखित में मिलना था। यदि मिल गया, तो यह प्रदेश के अन्य समिति क्षेत्रों के लिए मिसाल बनेगा; यदि नहीं मिला, तो संगठन की पहले से दी गई चेतावनी के अनुसार दोबारा आंदोलन तय है। ध्यान रहे, ब्याज का ब्यौरा मिलना और ब्याज का वास्तविक भुगतान होना दो अलग-अलग बातें हैं — पहले चरण में किसान सिर्फ यह जानना चाहते हैं कि उनका बनता ब्याज कितना है।
किसानों के लिए आगे की राह
अगर आपका गन्ना भुगतान कभी 14 दिन की सीमा से आगे खिसका है, तो अपना भुगतान रिकॉर्ड (ई-गन्ना पोर्टल या समिति की पर्चियां) संभालकर रखें — ब्याज का दावा तभी मजबूत होगा जब विलंब का रिकॉर्ड आपके पास हो। समिति सचिव से ब्याज के सालवार ब्यौरे की मांग लिखित में करें, और डेलीगेटों या संगठन के माध्यम से समूह में उठाएं — अकेले की मांग दबी रह जाती है। मवाना में 7 अक्टूबर का वादा क्या पूरा हुआ, इस पर नजर रखें: अगर पूरा हुआ तो आपके क्षेत्र में भी यही मांग दोहराई जा सकती है।
पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत से पहले ब्याज का यह मुद्दा किसानों और मिल प्रबंधन के बीच का सबसे संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। CaneUp इस खबर पर नजर बनाए रखेगा — मवाना से अगली अपडेट मिलते ही आपको यहां मिलेगी।
जवाब जानिए
सवाल: मवाना में धरना किस मांग को लेकर हुआ था? जवाब: 5 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने सहकारी गन्ना विकास समिति परिसर में धरना दिया। मांग थी कि 14 दिन से अधिक विलंबित गन्ना भुगतान पर देय ब्याज का 1996-97 से 2025-26 तक का सालवार विवरण लिखित में दिया जाए।
सवाल: अधिकारियों ने क्या आश्वासन दिया था? जवाब: रिपोर्टों के अनुसार, गन्ना विभाग के अधिकारी ने आश्वस्त किया कि 7 अक्टूबर को समिति सचिव के आने पर किसानों को ब्याज का सालवार ब्यौरा लिखित रूप में उपलब्ध करा दिया जाएगा। इसी पर धरना दो दिन के लिए स्थगित किया गया।
सवाल: गन्ना भुगतान पर ब्याज क्यों बनता है? जवाब: नियमों के अनुसार मिल को गन्ना खरीद के 14 दिन के भीतर किसान को भुगतान करना होता है। जब भुगतान इस अवधि से आगे खिसकता है, तो विलंब की अवधि के लिए किसान को ब्याज देय बनता है — यही प्रावधान मवाना के किसान लागू कराने की मांग कर रहे हैं।
सवाल: कितने वर्षों के ब्याज का हिसाब मांगा गया है? जवाब: वर्ष 1996-97 से 2025-26 तक — यानी करीब तीन दशक की अवधि का सालवार ब्यौरा।
सवाल: अगर 7 अक्टूबर को ब्यौरा नहीं मिला तो क्या होगा? जवाब: संगठन के जिला अध्यक्ष दिनेश प्रधान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि तय समय में ब्याज का ब्यौरा नहीं दिया गया तो संगठन दोबारा आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
सवाल: ब्याज के अलावा और क्या मांगें उठ रही हैं? जवाब: रिपोर्टों के अनुसार, पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का भाव कम से कम 500 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की मांग भी उठ रही है, और किसान युवा संसद में “ब्याज नहीं तो वोट नहीं” का नारा दिया गया है।
स्रोत: मवाना टाइम्स (6 अक्टूबर 2026), अमर उजाला — मेरठ (5 अक्टूबर 2026), वेबवार्ता (5 अक्टूबर 2026)
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
यह आर्टिकल कैसा लगा?



