7 अक्टूबर को मिलेगा गन्ना ब्याज का सालवार हिसाब: मवाना में सैकड़ों किसानों का धरना, 1996-97 से बकाया ब्यौरा मांगा

सोमवार, 5 अक्टूबर को मेरठ के मवाना में गन्ना किसानों का गुस्सा सहकारी गन्ना विकास समिति के परिसर में धरने के रूप में सामने आया। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के बैनर तले सैकड़ों किसान इस मांग के साथ धरने पर बैठे कि देरी से हुए गन्ना भुगतान पर मिलने वाले ब्याज का सालवार हिसाब लिखित में दिया जाए। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि आज, 7 अक्टूबर 2026 को समिति सचिव के आने पर बकाया ब्याज का पूरा सालवार ब्यौरा उपलब्ध करा दिया जाएगा। फिलहाल किसानों ने दो दिन का समय देकर धरना स्थगित किया है, लेकिन संगठन ने चेतावनी दी है कि ब्यौरा न मिला तो आंदोलन फिर शुरू होगा।
क्या हुआ मवाना में: सैकड़ों किसान समिति परिसर में धरने पर बैठे
सोमवार को संगठन के मंडल अध्यक्ष चौधरी रामवीर सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों किसान मवाना स्थित सहकारी गन्ना विकास समिति के परिसर में एकत्रित हुए और धरना शुरू कर दिया। धरने में जिला उपाध्यक्ष पवन त्यागी, मंडल अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, जिला सचिव नीतू भाटी (अमर उजाला के अनुसार जीतू भाटी), तहसील सचिव कंवरपाल सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
किसानों का मुख्य मुद्दा था — 14 दिन से अधिक की देरी से हुए गन्ना भुगतान पर देय ब्याज का हिसाब। धरने पर बैठे किसानों ने कहा कि लंबे समय से ब्याज का मामला लंबित है, लेकिन उन्हें अभी तक इसका स्पष्ट सालवार हिसाब नहीं मिल पाया है। प्रदर्शन की सूचना मिलने पर डिप्टी भूपेंद्र राय (अमर उजाला के अनुसार डिप्टी भूपेश राय) मौके पर पहुंचे और किसानों से वार्ता की।
किसानों की मांग: 1996-97 से 2025-26 तक का ब्याज हिसाब दो
धरने पर किसानों ने साफ मांग उठाई — 1996-97 से 2025-26 तक के बकाया गन्ना भुगतान पर देय ब्याज का पूरा सालवार विवरण दिया जाए। किसानों ने उच्च न्यायालय के 11 जुलाई 2026 के आदेश का हवाला भी दिया, जिसके अनुसार विलंबित भुगतान पर ब्याज का ब्यौरा दिया जाना आवश्यक है। मंडल अध्यक्ष चौधरी रामवीर सिंह ने कहा कि मेहनत की फसल देने के बाद समय से भुगतान न मिलना किसानों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ाता है — देरी पर ब्याज उनका हक है।
अधिकारियों का आश्वासन: 7 अक्टूबर को लिखित में मिलेगा सालवार ब्यौरा
धरने के दौरान डिप्टी भूपेंद्र राय ने किसानों से वार्ता की और आश्वासन दिया कि 7 अक्टूबर 2026 को समिति सचिव के आने पर बकाया ब्याज का सालवार विवरण लिखित रूप में दे दिया जाएगा। आश्वासन के बाद किसानों ने धरना स्थगित कर दिया।
अमर उजाला के अनुसार किसानों ने वार्ता के आधार पर दो दिन का समय देकर धरना स्थगित किया है। यानी आज का दिन निर्णायक है — लिखित ब्यौरा मिला तो मामला शांत, नहीं मिला तो आंदोलन तेज होगा।
मांग पूरी नहीं हुई तो दोबारा आंदोलन: संगठन की चेतावनी
संगठन के जिला अध्यक्ष दिनेश प्रधान ने चेतावनी दी है कि यदि 7 अक्टूबर को ब्याज का पूरा विवरण नहीं दिया गया तो संगठन दोबारा धरना और उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होगा।
यह चेतावनी इसलिए भी गंभीर है क्योंकि मवाना क्षेत्र में ही भाकियू संघर्ष मोर्चा ने गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल और बकाया भुगतान पर 15 प्रतिशत ब्याज की मांग पहले ही उठाई थी। ब्याज और गन्ना भाव का मुद्दा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लगातार गर्मा रहा है।
14 दिन का नियम: बकाया गन्ना भुगतान पर ब्याज किसानों का हक
नियम के अनुसार गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के भीतर मिलों को भुगतान कर देना चाहिए। 14 दिन से अधिक देरी पर बकाया राशि पर किसानों को ब्याज मिलने का हक बनता है। मवाना के किसानों की मांग का आधार यही नियम है — वे केवल इतना पूछ रहे हैं कि जिन वर्षों में भुगतान में देरी हुई, उन सभी वर्षों का ब्याज हिसाब साल-दर-साल लिखित में दिया जाए, ताकि हर किसान जान सके कि उसका कितना ब्याज बनता है।
पेराई सत्र 2025-26 का भुगतान: बड़ी तस्वीर क्या कहती है
मवाना के धरने को समझने के लिए प्रदेश के भुगतान की बड़ी तस्वीर भी जानना जरूरी है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार पेराई सत्र 2025-26 में 102 चीनी मिलों ने शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया और कुल 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान पूरा हो चुका है। सहकारी क्षेत्र की 23 मिलों ने 2820.89 करोड़ और राज्य चीनी निगम की तीन मिलों ने 543.51 करोड़ का भुगतान किया।
सरकार का दावा है कि अब तक गन्ना किसानों को 3.25 लाख करोड़ रुपये सीधे खातों में हस्तांतरित किए गए हैं और औसत आय में 40,720 रुपये प्रति हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। लेकिन मवाना जैसे धरने बताते हैं कि भुगतान की समयबद्धता और देरी पर ब्याज का मुद्दा जमीन पर अभी जीवित है — किसान आंकड़ों से नहीं, समय पर पैसे न मिलने से परेशान हैं।
किसान क्या करें: ब्याज का हिसाब मांगने के 5 जरूरी कदम
- पर्ची और भुगतान का रिकॉर्ड संभालें — गन्ना देने और भुगतान आने की तारीखें 14 दिन के नियम की जांच का सबसे जरूरी सबूत हैं।
- गन्ना समिति से लिखित ब्यौरा मांगें — अपनी सहकारी गन्ना विकास समिति से बकाया भुगतान पर देय ब्याज का सालवार हिसाब लिखित में लें।
- बैंक खाता सक्रिय रखें — निष्क्रिय खाते या आधार लिंक न होने से भुगतान अटकता है; नए पेराई सत्र से पहले खाता जांच लें।
- सर्वे रिकॉर्ड सत्यापित करवाएं — सर्वे में रकबा और किस्म सही दर्ज हो, ताकि भुगतान में अड़चन न आए।
- सामूहिक रूप से मांग रखें — ज्ञापन और वार्ता का असर अकेली मांग से ज्यादा होता है, जैसा मवाना में हुआ।
आगे क्या: 7 अक्टूबर की घड़ी
आज, 7 अक्टूबर को समिति सचिव के आने पर किसानों को लिखित सालवार ब्यौरा मिलने की उम्मीद है। संतोषजनक ब्यौरा मिला तो यह ब्याज आंदोलन के लिए मिसाल बनेगा; आश्वासन पूरा न हुआ तो संगठन की चेतावनी के अनुसार आंदोलन फिर शुरू हो जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मवाना में किसान किस मांग को लेकर धरने पर बैठे थे? राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के सैकड़ों किसान बकाया गन्ना भुगतान पर देय ब्याज का सालवार हिसाब (1996-97 से 2025-26) लिखित में मांगे जाने की मांग को लेकर सहकारी गन्ना विकास समिति, मवाना में धरने पर बैठे थे।
14 दिन से अधिक देरी पर ब्याज का नियम क्या है? गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के भीतर भुगतान होना चाहिए। इससे अधिक देरी होने पर बकाया राशि पर किसानों को ब्याज मिलने का हक बनता है, जैसा किसानों ने उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देकर कहा।
किसानों को लिखित ब्यौरा कब मिलेगा? डिप्टी भूपेंद्र राय ने आश्वासन दिया है कि 7 अक्टूबर 2026 को समिति सचिव के आने पर बकाया गन्ना ब्याज का सालवार विवरण लिखित रूप में उपलब्ध करा दिया जाएगा।
यदि ब्यौरा नहीं मिला तो क्या होगा? संगठन के जिला अध्यक्ष दिनेश प्रधान ने चेतावनी दी है कि यदि 7 अक्टूबर को ब्याज का पूरा विवरण नहीं दिया गया तो संगठन दोबारा धरना-प्रदर्शन और उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होगा।
पेराई सत्र 2025-26 में भुगतान की स्थिति क्या है? राज्य सरकार के अनुसार 102 चीनी मिलों ने शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है और कुल 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान पूरा हो चुका है।
स्रोत: मवाना टाइम्स (6 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (5 अक्टूबर 2026), हिंदुस्तान, फ्री प्रेस जर्नल।
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