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3 नवंबर मेरठ महापंचायत: गन्ना भाव 700 रुपये की मांग लेकर ट्रैक्टरों से पहुंचेंगे किसान, पेराई के बीच बढ़ा दबाव

Aamir Raza Aamir Raza • Nov 1, 2026 • 6 min read
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3 नवंबर मेरठ महापंचायत: गन्ना भाव 700 रुपये की मांग लेकर ट्रैक्टरों से पहुंचेंगे किसान, पेराई के बीच बढ़ा दबाव
अंतिम अपडेट: November 1, 2026 3:21 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

परसों, यानी 3 नवंबर को मेरठ में गन्ना मूल्य को लेकर एक किसान महापंचायत होने जा रही है, और इसकी तैयारी गांव-गांव में चल रही है। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने सरधना में जनसंपर्क चलाकर किसानों से ट्रैक्टरों के साथ मेरठ पहुंचने का आह्वान किया है। यह महापंचायत ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है, लेकिन इस सत्र का गन्ना मूल्य यानी एसएपी अब तक घोषित नहीं हुआ है। बुलंदशहर में किसान रैली निकालकर गन्ने का भाव 700 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर चुके हैं।

सरधना में जनसंपर्क, ट्रैक्टरों के साथ पहुंचने का आह्वान

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, 3 नवंबर को मेरठ में प्रस्तावित किसान महापंचायत की तैयारियों के लिए भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने सरधना में जनसंपर्क अभियान चलाया। संगठन के पदाधिकारियों ने झिटकरी, महादेव, कालंद और छबड़िया गांव में किसानों से संपर्क किया और महापंचायत में पहुंचने की अपील की। जिला संगठन मंत्री अमित छाबड़िया ने ट्रैक्टरों के साथ मेरठ पहुंचने का आह्वान किया। उनका कहना है कि गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी किसानों की प्रमुख मांग है। जनसंपर्क अभियान में श्रीपाल, समर सिंह, राजा जयानंद, अर्जुन सिंह, शिवदत्त, निर्मल सिंह, मुनेश सिंह, मुकेश, गोलू और अनुभव सहित कई कार्यकर्ता शामिल रहे।

बुलंदशहर में पहले ही उठ चुकी है 700 रुपये की मांग

मेरठ महापंचायत से ठीक पहले बुलंदशहर में किसानों ने शक्ति प्रदर्शन कर दिया है। रॉयल बुलेटिन की 31 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय किसान यूनियन महाशक्ति ने बुलंदशहर में गन्ना रैली निकाली, जो बाईपास स्थित संगठन के राष्ट्रीय कार्यालय से शुरू होकर डीएवी फ्लाईओवर और लल्ला बाबू चौराहा होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची। रैली में सैकड़ों महिला और पुरुष किसान शामिल हुए। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर धर्मेंद्र सिंह ने गन्ने का भाव 700 रुपये और गेहूं का भाव 5,000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से जिलाधिकारी को सौंपा गया, और संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

लखनऊ की महापंचायत से शुरू हुई यह लड़ाई

भाव की यह लड़ाई अचानक नहीं शुरू हुई है। इंडिया टुडे हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, 23 अक्टूबर को लखनऊ के डालीबाग स्थित गन्ना संस्थान में हुई किसान मजदूर महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने गन्ने का लाभकारी मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक करने, बकाया भुगतान जल्द कराने और देरी पर नियमानुसार ब्याज देने की मांग की थी। इस महापंचायत में 22 अक्टूबर से ही किसान लखनऊ पहुंचने लगे थे, और 23 अक्टूबर को मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर और बदायूं सहित कई जिलों से किसान पहुंचे थे। संयुक्त गन्ना आयुक्त सत्येंद्र सिंह ने मांगों को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया था, लेकिन टिकैत ने उच्चस्तरीय अधिकारियों से सीधे वार्ता कराने पर जोर दिया और चेतावनी दी कि ठोस पहल नहीं हुई तो आंदोलन तेज होगा। मेरठ की 3 नवंबर की महापंचायत उसी सिलसिले की अगली कड़ी है।

लागत का गणित: एक हेक्टेयर पर 10,477 रुपये की बढ़ोतरी

किसानों की मांग के पीछे सबसे बड़ा तर्क बढ़ती लागत है। किसान संगठनों के अनुसार, पौध और पैड़ी को मिलाकर इस सत्र में गन्ने की औसत उत्पादन लागत करीब 2,22,520 रुपये प्रति हेक्टेयर है, जबकि पिछले वर्ष यह 2,12,043 रुपये थी — यानी लगभग 10,477 रुपये प्रति हेक्टेयर की वृद्धि। पौध फसल में खेत तैयार करने, बीज, खाद और निराई-गुड़ाई पर अधिक खर्च आता है, जबकि पैड़ी फसल की लागत अपेक्षाकृत कम रहती है।

मिलों का पक्ष: एक क्विंटल चीनी पर 4,200 रुपये से अधिक की लागत

दूसरी ओर चीनी मिल संचालक बढ़ते परिचालन खर्च का हवाला देकर मूल्य वृद्धि का विरोध कर रहे हैं। इंडिया टुडे हिंदी के अनुसार, मिलों के आकलन में एक क्विंटल चीनी बनाने में औसतन नौ क्विंटल गन्ना लगता है। 400 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से इसकी लागत 3,600 रुपये बैठती है। इसके अतिरिक्त गन्ने की ढुलाई पर करीब 20 रुपये प्रति क्विंटल तक और कर्मचारियों के वेतन तथा चीनी बनाने की प्रक्रिया पर लगभग 50 से 55 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खर्च बताया जाता है। इन मदों को जोड़ने पर एक क्विंटल चीनी की उत्पादन लागत करीब 4,200 से 4,300 रुपये तक पहुंचती है। एक क्विंटल गन्ने से औसतन 10 से 11 किलोग्राम चीनी और करीब पांच किलोग्राम सी-हैवी शीरा प्राप्त होता है।

2026-27 एसएपी की स्थिति: घोषणा अब भी बाकी है

सबसे जरूरी बात साफ-साफ समझ लें: 2026-27 एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले पेराई सत्र में एसएपी 2025-26 में अगेती किस्म के लिए 400 रुपये, सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये और अनुपयुक्त किस्म के लिए 355 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित हुआ था। मीडिया में 28 से 40 रुपये की बढ़ोतरी की अटकलें भी हैं, लेकिन यह आधिकारिक घोषणा नहीं है, और सरकार की अधिसूचना आने तक किसी दावे को पक्का न मानें। गन्ना विकास विभाग के सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों और मिल प्रतिनिधियों के बीच मूल्य बदलाव पर चर्चा हुई है। अंतिम निर्णय राज्य मंत्रिमंडल को लेना है। यूपी में कुल 122 चीनी मिलें हैं, और सरकार का दावा है कि 2017 से अब तक गन्ना किसानों के बैंक खातों में सीधे 3.25 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

पेराई के बीच किसानों के लिए क्या जरूरी है

पेराई सत्र शुरू हो चुका है और कई मिलों में पर्चियां चल रही हैं, इसलिए किसानों के सामने दो काम एक साथ हैं: अपनी पर्ची और कटाई का काम न रुकने देना, और भाव की मांग में अपनी आवाज भी दर्ज कराना। महापंचायत में जाने वाले किसान अपनी पर्ची की तारीख पहले जांच लें, ताकि कटाई और आपूर्ति का क्रम न टूटे। ट्रैक्टर से जाने वाले किसान ईंधन और वापसी के समय का हिसाब पहले से रखें। भुगतान में देरी हो तो गन्ना समिति और जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें। सत्यापित हेल्पलाइन: टोल-फ्री 1800-121-3203 और 1800-180-5129, एसएमएस शॉर्टकोड 51969। अनजान नंबर पर पर्ची, बैंक खाता या ओटीपी साझा न करें।

आपके सवाल

प्रश्न: मेरठ में किसान महापंचायत कब और क्यों हो रही है? उत्तर: 3 नवंबर को मेरठ में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) की महापंचायत गन्ना मूल्य बढ़ोतरी की मांग को लेकर हो रही है। सरधना में जनसंपर्क चलाकर ट्रैक्टरों के साथ पहुंचने का आह्वान किया गया है।

प्रश्न: किसान गन्ने का कितना भाव मांग रहे हैं? उत्तर: लखनऊ में 500 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक और बुलंदशहर में 700 रुपये प्रति क्विंटल की मांग उठी है। ये मांगें हैं, घोषित भाव नहीं।

प्रश्न: 2026-27 का गन्ना एसएपी घोषित हो गया है क्या? उत्तर: नहीं, घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र एसएपी 2025-26 में अगेती के लिए 400 रुपये, सामान्य के लिए 390 रुपये और अनुपयुक्त किस्म के लिए 355 रुपये प्रति क्विंटल था।

प्रश्न: गन्ने की लागत कितनी बढ़ी है? उत्तर: औसत उत्पादन लागत करीब 2,22,520 रुपये प्रति हेक्टेयर है, जो पिछले वर्ष के 2,12,043 रुपये से लगभग 10,477 रुपये अधिक है।

प्रश्न: बुलंदशहर में किसानों ने और क्या मांगें रखी हैं? उत्तर: गन्ने का भाव 700 रुपये और गेहूं का भाव 5,000 रुपये प्रति क्विंटल, अन्य फसलों के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी और सभी बैंकों के ऋण का ब्याज माफ करने की मांग की गई है। मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया है।

स्रोत: अमर उजाला, रॉयल बुलेटिन, इंडिया टुडे हिंदी, नवभारत टाइम्स

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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