मेरठ के फाफुंडा में किसान अधिकार यात्रा की बड़ी बैठक: गन्ना बकाया समय पर भुगतान और एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत 6 बड़ी मांगें

हापुड़ रोड पर फाफुंडा गांव में सोमवार को किसानों का बड़ा जमावड़ा लगा। कांग्रेस की किसान अधिकार यात्रा के बैनर तले सैकड़ों किसान जुटे और गन्ने के बकाये के समय पर भुगतान से लेकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी तक — छह बड़ी मांगें बुलंद कीं। बैठक के बाद गांव में पैदल मार्च भी निकाला गया, जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की गन्ना बेल्ट में यात्रा का संदेश दूर-दूर तक पहुंचा।
ये छह मांगें थीं: गन्ने के बकाये का तय समय पर भुगतान, एमएसपी की कानूनी गारंटी, खाद की समय पर उपलब्धता, बीज की किल्लत का समाधान, कृषि बिजली की दरों में राहत और बढ़ती खेती लागत के साथ ग्रामीण रोजगार का सवाल। कांग्रेस के नेताओं ने इन सभी मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही मांगी — ठीक उस समय जब पेराई सत्र 2026-27 बस दिनों की दूरी पर है।
बैठक में क्या हुआ
द हंस इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक बैठक उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी और किसान कांग्रेस की ओर से फाफुंडा में आयोजित की गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। बैठक के बाद गांव में पैदल मार्च निकाला गया। बैठक के बाद नेताओं ने मेरठ के लोहीयानगर में धरने पर बैठे किसानों से भी मुलाकात कर उनकी शिकायतें सुनीं। चीनीमंडी के हिंदी संस्करण की रिपोर्ट में भी इसी बैठक का जिक्र है — गन्ने के बकाये के समय पर भुगतान और न्यूनतम समर्थन मूल्य को प्रमुख मुद्दा बताया गया है।
छह बड़ी मांगें: एक-एक कर समझें
1. गन्ने के बकाये का समय पर भुगतान। नियम के मुताबिक मिलों को गन्ना खरीद के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है, लेकिन कई मिलें इस समय सीमा का पालन नहीं करतीं। बकाया मिलने में देरी से किसानों की पूरी आर्थिक योजना बिगड़ जाती है, क्योंकि अगली फसल की तैयारी के लिए यही पैसा काम आता है।
2. एमएसपी की कानूनी गारंटी। कांग्रेस प्रवक्ता अभिमन्यु त्यागी ने सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी पर जवाबदेही मांगी। गन्ने के लिए केंद्र एफआरपी तय करता है और राज्य अपना एसएपी घोषित करते हैं, लेकिन बैठक में यह मांग व्यापक किसान हितों के संदर्भ में उठी।
3. खाद की उपलब्धता। बुवाई और बढ़वार के समय खाद की किल्लत पश्चिमी यूपी के किसानों का हर साल का संकट है। मांग उठी कि सहकारी समितियों और कृषि केंद्रों पर डीएपी और यूरिया समय पर और पर्याप्त मात्रा में मिले।
4. बीज की किल्लत का समाधान। नई और उन्नत किस्मों के प्रमाणित बीज का समय पर मिलना गन्ना किसानों के लिए उतना ही अहम है, जितना खाद।
5. कृषि बिजली की दरों में राहत। ट्यूबवेल चलाने की लागत बढ़ने से सिंचाई महंगी हो रही है। मांग है कि कृषि बिजली की दरें किसान के बजट के भीतर रहें।
6. बढ़ती खेती लागत और ग्रामीण रोजगार। खाद, बीज, डीजल, बिजली और कृषि उपकरणों की बढ़ती कीमतों ने खेती की लागत बढ़ा दी है, और खेती से जुड़े परिवारों के लिए आय के वैकल्पिक स्रोत जरूरी हैं।
नेताओं ने क्या कहा
अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अखिलेश शुक्ला ने कहा कि यात्रा का मकसद गांव-गांव जाकर किसानों से मिलना और उनकी समस्याएं उठाना है — बढ़ती लागत के दौर में किसानों को उपज का लाभकारी मूल्य और गन्ने का समय पर भुगतान मिलना चाहिए।
कांग्रेस नेता रोहित जाखड़ ने कहा कि पश्चिमी यूपी की अर्थव्यवस्था खेती पर टिकी है, और भुगतान में देरी, आवारा पशुओं से नुकसान तथा बढ़ती लागत यहां के किसानों की सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। प्रवक्ता अभिमन्यु त्यागी ने सरकार से जवाबदेही मांगी।
यात्रा का रूट और सियासी मकसद
यह बैठक कांग्रेस की किसान अधिकार यात्रा का हिस्सा है — 2 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर से शुरू हुई यह यात्रा 7 अक्टूबर को लोनी और जेवर में समाप्त होगी। अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा सरकार को घेरना भी इसका सियासी मकसद बताया जा रहा है।
गन्ना किसानों के लिए क्यों अहम है यह बैठक
पश्चिमी उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी गन्ना बेल्ट है — यूपी की 122 चीनी मिलों का बड़ा हिस्सा यहीं चलता है। पेराई सत्र 2026-27 सिर पर है, लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक नया एसएपी घोषित नहीं किया है। केंद्र ने 2026-27 के लिए एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल तय कर दिया है — पिछले सत्र 2025-26 में यूपी का एसएपी अगेती किस्म के लिए ₹400 प्रति क्विंटल था।
भुगतान को लेकर सरकार और किसानों के दावे अलग हैं। गन्ना विकास विभाग के आंकड़ों के हवाले से सितंबर की रिपोर्टों में कहा गया था कि पेराई सत्र 2025-26 में 102 चीनी मिलों ने 100 प्रतिशत भुगतान किया और कुल बकाये का 94.86 प्रतिशत चुकाया गया। लेकिन किसान संगठनों का कहना है कि कई मिलों का बकाया अब भी अटका है और देरी पर ब्याज का प्रावधान लागू नहीं होता — यही वजह है कि “समय पर भुगतान” की मांग हर मंच पर गूंज रही है।
एक और अहम कड़ी 12 अक्टूबर की है — उस दिन केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी नई दिल्ली में गन्ना किसानों से बैठक करेंगे, जिसमें चीनी की एमएसपी और बकाया भुगतान जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। उससे पहले पश्चिमी यूपी की ये बैठकें किसानों की मांगों को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का दबाव बना रही हैं।
आगे क्या
यात्रा 7 अक्टूबर को लोनी और जेवर के कार्यक्रमों के साथ समाप्त होगी। इसके बाद नजर 12 अक्टूबर की दिल्ली बैठक पर रहेगी, जहां किसान संगठन चीनी की एमएसपी और बकाया भुगतान की मांग लेकर पहुंच रहे हैं। यूपी के किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि नए पेराई सत्र से पहले एसएपी की घोषणा कब होती है।
स्रोत: द हंस इंडिया (6 अक्टूबर 2026), द प्रिंट (पीटीआई, 2 अक्टूबर 2026), चीनीमंडी हिंदी (6 अक्टूबर 2026)
पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: मेरठ में किसान अधिकार यात्रा की बैठक कब और कहां हुई? उत्तर: सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को मेरठ के फाफुंडा गांव (हापुड़ रोड) में। आयोजन उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी और किसान कांग्रेस ने किया था, और बैठक के बाद गांव में पैदल मार्च भी निकाला गया।
प्रश्न: बैठक में गन्ना किसानों की कौन-कौन सी मांगें उठीं? उत्तर: छह प्रमुख मांगें — गन्ने के बकाये का समय पर भुगतान, एमएसपी की कानूनी गारंटी, खाद की उपलब्धता, बीज की किल्लत का समाधान, कृषि बिजली की दरों में राहत और बढ़ती खेती लागत के साथ ग्रामीण रोजगार का मुद्दा।
प्रश्न: किसान अधिकार यात्रा कब तक चलेगी? उत्तर: यात्रा 2 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर से शुरू हुई थी और 7 अक्टूबर तक चलेगी — समापन गाजियाबाद के लोनी और गौतमबुद्धनगर के जेवर में होगा। यह यात्रा पश्चिमी यूपी की गन्ना बेल्ट से होकर गुजर रही है।
प्रश्न: पेराई सत्र 2026-27 के लिए यूपी का एसएपी घोषित हुआ क्या? उत्तर: नहीं। केंद्र ने 2026-27 के लिए एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल तय कर दिया है, लेकिन यूपी सरकार ने नया एसएपी अभी घोषित नहीं किया है। पिछले सत्र 2025-26 में एसएपी अगेती किस्म के लिए ₹400 प्रति क्विंटल था।
प्रश्न: गन्ने के बकाये के भुगतान का नियम क्या है? उत्तर: मिलों को गन्ना खरीद के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है। देरी पर ब्याज का प्रावधान है, लेकिन किसान संगठनों का आरोप है कि यह जमीनी स्तर पर लागू नहीं होता।
प्रश्न: 12 अक्टूबर को दिल्ली में क्या होने वाला है? उत्तर: केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी नई दिल्ली में गन्ना किसानों और किसान संगठनों से बैठक करेंगे। इसमें चीनी की एमएसपी बढ़ाने, बकाया भुगतान और एफआरपी जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी है।
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