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1 बीघे में 24 हजार का गन्ना, हाथ आए सिर्फ 5130 रुपये — मुरादाबाद के किसानों ने खोला लागत का पूरा गणित, 0238 की लाल सड़न ने बढ़ाई आफत

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 22, 2026 • 7 min read
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1 बीघे में 24 हजार का गन्ना, हाथ आए सिर्फ 5130 रुपये — मुरादाबाद के किसानों ने खोला लागत का पूरा गणित, 0238 की लाल सड़न ने बढ़ाई आफत
अंतिम अपडेट: October 22, 2026 7:47 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

छजलैट ब्लाक के संदलीपुर गांव के प्रगतिशील किसान गौरव कुमार करीब 150 बीघा जमीन पर गन्ना उगाते हैं। उनका हिसाब हैरान करने वाला है — 1 बीघे में 60 क्विंटल गन्ना पैदा करने पर 18,870 रुपये का खर्च आता है और गन्ना 400 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिके तो कुल 24,000 रुपये मिलते हैं। फसल तैयार करने, छिलाई और ढुलाई का पूरा खर्च निकालने के बाद किसान के हाथ बचते हैं महज 5,130 रुपये। यह आंकड़ा दैनिक जागरण की 21 अक्टूबर की रिपोर्ट में दर्ज है, जिसमें मुरादाबाद के गन्ना किसानों की बढ़ती लागत और घटती आमदनी का पूरा गणित सामने रखा गया है।

यह खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि पेराई सत्र 2026-27 बस दरवाजे पर है। 23 अक्टूबर को लखनऊ में भाकियू की महापंचायत में 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग उठने वाली है — और मुरादाबाद का यह ₹5,130 वाला हिसाब उसी मांग के पीछे का असली तर्क है।

1 बीघे का पूरा हिसाब — 18,870 रुपये कहां-कहां खर्च

गौरव कुमार के अनुभव के मुताबिक अच्छी पैदावार होने पर 1 बीघे से करीब 60 क्विंटल गन्ना मिलता है। इस गन्ने को खेत से मिल तक पहुंचाने की राह में कई खर्च हैं — जुताई और बुवाई, बीज, उर्वरक और कीटनाशक, सिंचाई का पानी, निराई-गुड़ाई और देखभाल, फसल कटाई, पत्ती की छिलाई और अंत में ढुलाई। किसान के बताए मुताबिक इन सब खर्चों को जोड़ें तो 1 बीघे पर कुल 18,870 रुपये लग जाते हैं। गन्ना अगर सरकार के तय भाव 400 रुपये प्रति क्विंटल पर बिके तो 60 क्विंटल से 24,000 रुपये की बिक्री होगी, यानी शुद्ध बचत सिर्फ 5,130 रुपये।

यह गणित तब और चिंताजनक हो जाता है जब यह समझें कि इसमें किसान की अपनी मेहनत की मजदूरी शामिल नहीं है। अगर अपनी श्रम लागत भी जोड़ दी जाए, तो कई किसानों के लिए यह खेती लगभग बराबर का सौदा रह जाता है। मुरादाबाद के किसानों का कहना है कि अब खेती में मेहनत और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं, लेकिन पैदावार घटने से कमाई का गणित लगातार बिगड़ रहा है।

0238 में लाल सड़न — सबसे बड़ा झटका

किसानों की आय घटने के पीछे सबसे बड़ी वजह है गन्ने की सबसे लोकप्रिय किस्म 0238 में लगा लाल सड़न रोग। गौरव कुमार बताते हैं कि कभी 0238 प्रजाति से अच्छी पैदावार होती थी, लेकिन लाल सड़न रोग ने इस प्रजाति को बड़ा नुकसान पहुंचाया। अब किसान दूसरी प्रजातियों की ओर रुख कर रहे हैं, मगर उनका उत्पादन अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिल रहा।

लाल सड़न गन्ने की सबसे खतरनाक फफूंद जनित बीमारियों में गिनी जाती है। इससे ग्रस्त गन्ने की तीसरी-चौथी पत्ती पीली पड़ती है, तने को चीरने पर अंदर लाल रंग के बीच सफेद धब्बे दिखते हैं और अल्कोहल जैसी गंध आती है। एक बार यह रोग लग जाए तो इसका कोई इलाज नहीं है, इसलिए शुरुआती रोकथाम ही एकमात्र उपाय है।

यह समस्या सिर्फ मुरादाबाद तक सीमित नहीं है। ट्रैक्टर जंक्शन की 19 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के गढ़ खादर क्षेत्र में भी गन्ने की को-238 प्रजाति में लाल सड़न का प्रकोप दर्ज हुआ है। रिपोर्ट में किसानों को सलाह दी गई है कि रोगग्रस्त खेत से बीज न लें, स्वस्थ और उपचारित बीज का इस्तेमाल करें और खेत की सफाई पर ध्यान दें।

नई किस्मों का कम उत्पादन, महंगा बीज — दोहरी मार

0238 के बाद किसानों ने जिन नई किस्मों को अपनाया, वहां दूसरी परेशानी खड़ी हो गई। गौरव कुमार के मुताबिक नई किस्मों से उत्पादन उम्मीद के अनुरूप नहीं मिल रहा, जबकि गन्ने का बीज लगातार महंगा हो रहा है। यानी एक तरफ प्रति बीघा पैदावार घट रही है, दूसरी तरफ बुवाई की लागत बढ़ रही है।

इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर ने 6 पुरानी और कमजोर किस्मों को अनुपयुक्त घोषित करके चरणबद्ध तरीके से खेती से बाहर करने का फैसला लिया है, ताकि किसान नई अधिक पैदावार वाली किस्मों की ओर बढ़ें। लेकिन किसानों का सवाल वाजिब है — नई किस्मों का बीज महंगा मिले और उत्पादन भी 0238 के सुनहरे दिनों जैसा न हो, तो किसान जाए तो कहां जाए।

600 रुपये की मांग के पीछे यही गणित है

गौरव कुमार की एक बात पर गौर कीजिए — उनका कहना है कि चीनी का थोक मूल्य बढ़ाने से भी किसानों और चीनी मिलों को राहत मिल सकती है। किसानों को चीनी के दाम बढ़ने से परेशानी नहीं है, जरूरत गन्ने का उचित मूल्य मिलने की है।

संदर्भ के लिए समझें: उत्तर प्रदेश सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) अगेती प्रजाति पर 400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। किसान संगठनों का तर्क है कि इतने भाव में बढ़ी हुई लागत के सामने कमाई नहीं बचती, इसीलिए वे 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं। पेराई सत्र 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है — सरकार ने नए सत्र का भाव अभी तय नहीं किया है, और किसानों की नजर उसी ऐलान पर टिकी है।

मुरादाबाद का यह हिसाब दिखाता है कि 400 रुपये के भाव पर 1 बीघे में सिर्फ 5,130 रुपये की बचत होती है। अगर भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल होता, तो 60 क्विंटल पर बिक्री 36,000 रुपये होती और वही बचत बढ़कर करीब 17,130 रुपये हो जाती — यही वह अंतर है जिसके लिए किसान सड़कों पर हैं।

लागत घटाने के रास्ते: मशीनें और बेहतर तकनीक

खर्च घटाने का एक रास्ता खेती में मशीनीकरण है। दैनिक जागरण की ही 21 अक्टूबर की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा के पलवल में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि मजदूरों की कमी और बढ़ती मजदूरी के इस दौर में बिजाई से कटाई तक आधुनिक यंत्र अपनाए जाएं। गन्ना श्रम प्रधान फसल है और मजदूरी बढ़ने से लागत लगातार ऊपर जा रही है। मशीनों से काम समय पर और कम लागत में हो सकता है, साथ ही सरकार कृषि यंत्रों पर अनुदान भी देती है।

कृषि वैज्ञानिकों की एक और सलाह है — बुवाई की विधि बदलना। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) से जुड़े प्रयोगों में पंक्तियों के बीच अधिक दूरी रखकर बुवाई करने से बीज की जरूरत आधी रह गई और बुवाई की लागत में 25-30 फीसदी तक की कमी दर्ज की गई, साथ ही उत्पादन भी बढ़ा। किसान अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करके ऐसी विधियां अपना सकते हैं।

क्या करें गन्ना किसान — अभी से तैयारी

पेराई सत्र शुरू होने से पहले किसान कुछ बातों का ध्यान रखें। पहला — बीज का चुनाव सोच-समझकर करें; लाल सड़न से ग्रस्त खेत का बीज बिल्कुल न लें। दूसरा — बुवाई से पहले मिट्टी की जांच कराएं ताकि खाद का खर्च बेवजह न बढ़े। तीसरा — मिल की पर्ची और कैलेंडर पर नजर रखें, ताकि गन्ना समय पर तुले और घटतौली से बचा जा सके। चौथा — कृषि यंत्रों पर मिलने वाले अनुदान की जानकारी अपने ब्लाक के कृषि अधिकारी से लें।

आपके सवाल, जवाब जानिए

सवाल: 1 बीघे गन्ने की खेती में कुल कितना खर्च आता है? जवाब: मुरादाबाद के किसान गौरव कुमार के मुताबिक 1 बीघे में 60 क्विंटल गन्ना पैदा करने पर जुताई, बीज, खाद, सिंचाई, कटाई, छिलाई और ढुलाई समेत कुल 18,870 रुपये का खर्च आता है। यह आंकड़ा दैनिक जागरण की 21 अक्टूबर की रिपोर्ट में दर्ज है।

सवाल: 1 बीघे गन्ने से कितना मुनाफा होता है? जवाब: 400 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से 60 क्विंटल गन्ने की बिक्री 24,000 रुपये की होती है। 18,870 रुपये का खर्च निकालने के बाद शुद्ध बचत करीब 5,130 रुपये रह जाती है, जिसमें किसान की अपनी मेहनत की मजदूरी शामिल नहीं है।

सवाल: 0238 गन्ने में लाल सड़न रोग क्या है? जवाब: यह गन्ने की एक खतरनाक फफूंद जनित बीमारी है, जिससे ग्रस्त गन्ने की पत्तियां पीली पड़ती हैं, तना अंदर से लाल हो जाता है और फसल सूख जाती है। एक बार रोग लगने पर इसका कोई इलाज नहीं है। पश्चिमी यूपी के हापुड़ में भी को-238 में इसका प्रकोप दर्ज हुआ है।

सवाल: गन्ने का मौजूदा भाव क्या है और नया भाव कब तय होगा? जवाब: पेराई सत्र 2025-26 के लिए यूपी सरकार ने अगेती गन्ने का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। पेराई सत्र 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। किसान संगठन 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं।

सवाल: गन्ने की खेती की लागत कैसे घटाई जा सकती है? जवाब: मशीनीकरण अपनाकर मजदूरी का खर्च घटाया जा सकता है, बुवाई की आधुनिक विधियों से बीज की बचत होती है, मिट्टी जांच से खाद का बेवजह खर्च रुकता है और कृषि यंत्रों पर सरकारी अनुदान का लाभ लिया जा सकता है।

स्रोत: दैनिक जागरण, मुरादाबाद (21 अक्टूबर 2026); ट्रैक्टर जंक्शन (19 अक्टूबर 2026); दैनिक जागरण, पलवल (21 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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