मुरादाबाद की 7 मिलों को 110.52 लाख क्विंटल गन्ना: अक्टूबर अंत तक पेराई शुरू, किसानों को क्या मिलेगा

चीनी के बढ़ते दामों पर अंकुश लगाने और किसानों को गन्ना मूल्य का समय से भुगतान दिलाने के लिए प्रदेश शासन ने एक बड़ी पहल की है। मुरादाबाद मंडल की सात चीनी मिलों को मेरठ और बरेली मंडल की चीनी मिलों के क्षेत्र से 110.52 लाख क्विंटल अतिरिक्त गन्ना आवंटित किया गया है। यह आवंटन गन्ना सुरक्षण आदेश के तहत किया गया है, और इसके लिए 76 क्रय केंद्र निर्धारित किए गए हैं। शासन की कोशिश है कि अक्टूबर के अंत तक पेराई सत्र 2026-27 शुरू हो जाए, ताकि उत्पादन समय से हो और बाजार में उपलब्धता बनी रहे।
मुरादाबाद मंडल में इस बार गन्ने के रकबे में कमी आने से मिलों की पेराई क्षमता के अनुरूप गन्ना जुटाना चुनौती बन गया था, इसलिए दूसरे मंडलों से आवंटन करके आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
किस मिल को कितना गन्ना मिला
उप गन्ना आयुक्त हरपाल सिंह ने बताया कि मेरठ मंडल की सिम्भावली चीनी मिल के क्षेत्र से मुरादाबाद मंडल की छह चीनी मिलों को गन्ना आवंटित किया गया है। सातवीं मिल को बरेली मंडल से गन्ना मिलेगा।
मेरठ मंडल (सिम्भावली चीनी मिल के क्षेत्र से):
- चांगीपुर चीनी मिल, बिजनौर — 30.38 लाख क्विंटल गन्ना और 23 क्रय केंद्र (सबसे अधिक)
- रजपुरा चीनी मिल, संभल — 14.82 लाख क्विंटल गन्ना और 12 क्रय केंद्र
- अगवानपुर चीनी मिल, मुरादाबाद — 14.62 लाख क्विंटल गन्ना और 10 क्रय केंद्र
- असमोली चीनी मिल — 12.94 लाख क्विंटल गन्ना और 7 क्रय केंद्र
- मझावली चीनी मिल — 12.44 लाख क्विंटल गन्ना और 10 क्रय केंद्र
- चंदनपुर चीनी मिल, अमरोहा — 9.30 लाख क्विंटल गन्ना और 5 क्रय केंद्र
बरेली मंडल से:
- मिलक नरायनपुर चीनी मिल, रामपुर — बहेड़ी चीनी मिल के क्षेत्र से 17.48 लाख क्विंटल गन्ना और 9 क्रय केंद्र
इस तरह सातों चीनी मिलों के लिए दूसरे मंडलों से गन्ने की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। अमर उजाला की 23 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार भी इन सात मिलों को कुल 110.52 लाख क्विंटल गन्ना और 76 क्रय केंद्र आरक्षित किए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर माह के अंत तक गन्ना मिलों का संचालन शुरू हो जाएगा और नए सत्र में मंडल में गन्ने की कमी नहीं रहेगी।
किसानों को क्या फायदा मिलेगा
किसान के नजरिए से इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मिलों को अपनी पेराई क्षमता के अनुरूप गन्ना मिलेगा, जिससे पेराई समय से शुरू होगी और गन्ना मूल्य का भुगतान भी समय पर होने की संभावना बढ़ेगी। अतिरिक्त क्रय केंद्रों का मतलब है कि किसानों को गन्ना तुलवाने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा — चांगीपुर जैसी मिल के किसानों को तो 23 नए केंद्रों की सुविधा मिलेगी।
पेराई जितनी जल्दी शुरू होगी, किसान उतनी ही जल्दी अपने खेत खाली करके गेहूं की बुआई की तैयारी कर सकेंगे। हालांकि भुगतान में वास्तविक सुधार मिलों की वित्तीय स्थिति और बकाया राशि की नियमित निगरानी पर ही निर्भर करेगा।
जिन मिलों का क्षेत्र काटा गया, उनकी हालत क्या है
इस आवंटन का एक दिलचस्प पहलू यह है कि जिन चीनी मिलों का क्षेत्र काटकर मुरादाबाद मंडल की चीनी मिलों को दिया गया है, उनकी भुगतान की स्थिति खराब रही है। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, बरेली की बहेड़ी चीनी मिल तो बंद होने के कगार पर है।
यानी जिन क्षेत्रों के किसान पहले से कमजोर भुगतान वाली मिलों से जुड़े थे, उन्हें अब नई मिलों के साथ जुड़ने का अवसर मिलेगा। यह व्यवस्था किसानों के हित में है, बशर्ते गन्ना सुरक्षण आदेश का क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता के साथ हो और किसानों की पर्ची, तौल और भुगतान में कोई कटौती न हो।
चीनी के दाम और स्टॉक की ताजा स्थिति
त्योहारी सीजन में चीनी के दाम लगातार चर्चा में हैं। अमर उजाला की 12 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी के दाम पांच दिनों में 25 प्रतिशत तक बढ़ गए थे। मुरादाबाद के थोक बाजार में चीनी 50 किलो की बोरी 2,900 रुपये में बिक रही थी, जबकि फुटकर बाजार में चीनी 60 रुपये किलो और बूरा 70 रुपये किलो तक पहुंच गया था। गुड़ की कीमत भी 70 से 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी।
उप गन्ना आयुक्त हरपाल सिंह ने बताया था कि मंडल में 23 चीनी मिलें हैं, जिनमें कुल 18.35 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक उपलब्ध है। कालाबाजारी रोकने के लिए डीलरों के स्टॉक की जांच की बात भी कही गई थी।
वहीं, 14 अक्टूबर को उप गन्ना आयुक्त मुरादाबाद ने बताया था कि 1 अक्टूबर को परिक्षेत्र में चीनी का कुल स्टॉक 21.75 लाख क्विंटल था और 14 अक्टूबर को 12.91 लाख क्विंटल स्टॉक उपलब्ध था, जो त्योहारी सीजन की मांग के हिसाब से पर्याप्त बताया गया। उप गन्ना आयुक्त ने कहा था कि पेराई अक्टूबर के अंत में या नवंबर के पहले सप्ताह में शुरू होगी, और अफवाहों व कालाबाजारी पर अंकुश के लिए चीनी स्टॉक की औचक जांच के निर्देश दिए गए थे।
गन्ना किसान अब क्या करें
- अपने क्षेत्र के क्रय केंद्र की जानकारी लें — 76 नए/आरक्षित केंद्रों की सूची जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय और गन्ना समितियों से मिलेगी। जानें कि आपका गन्ना किस मिल और किस केंद्र से जुड़ा है।
- पर्ची और सट्टा की स्थिति जांचें — नए आवंटन के बाद सट्टा-परिवर्तन में देरी संभव है। पर्ची मिलने से पहले खेत की कटाई शुरू न करें।
- बैंक खाते और आधार की जांच कराएं — भुगतान सीधे खाते में आता है; सक्रिय बैंक खाता और आधार लिंकेज सुनिश्चित रखें।
- ताजा गन्ना ही भेजें — गन्ना काटने के 24 घंटे के अंदर मिल पहुंचाने की कोशिश करें। बासी गन्ना वजन और रिकवरी घटाता है, जिसका नुकसान आपके भुगतान पर पड़ता है।
आपके सवाल — जवाब जानिए
प्रश्न: मुरादाबाद मंडल की कितनी मिलों को गन्ना आवंटित हुआ है? उत्तर: सात चीनी मिलों को कुल 110.52 लाख क्विंटल गन्ना आवंटित हुआ है। छह मिलों को मेरठ मंडल की सिम्भावली चीनी मिल के क्षेत्र से और एक मिल (मिलक नरायनपुर, रामपुर) को बरेली मंडल की बहेड़ी चीनी मिल के क्षेत्र से गन्ना मिलेगा।
प्रश्न: यह आवंटन किस कानून के तहत हुआ है? उत्तर: यह आवंटन गन्ना सुरक्षण आदेश (Cane Reservation Order) के तहत किया गया है। इसके तहत शासन किसी मिल के क्षेत्र को बदलकर दूसरे क्षेत्र की मिल को गन्ना आपूर्ति का अधिकार दे सकता है।
प्रश्न: पेराई सत्र 2026-27 कब शुरू होगा? उत्तर: शासन की कोशिश है कि अक्टूबर 2026 के अंत तक मुरादाबाद मंडल की चीनी मिलों का पेराई सत्र शुरू हो जाए। उप गन्ना आयुक्त के अनुसार अधिकतम नवंबर के पहले सप्ताह तक संचालन आरंभ हो जाएगा।
प्रश्न: क्या इस फैसले से चीनी के दाम कम होंगे? उत्तर: इसका सीधा उद्देश्य चीनी का उत्पादन समय से शुरू करके बाजार में आपूर्ति बनाए रखना है, जिससे कीमतों पर अंकुश लग सके। त्योहारी सीजन में चीनी फुटकर में 60 रुपये किलो तक बिक रही थी। पेराई समय से शुरू होने पर नई चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी।
प्रश्न: किसानों को भुगतान समय पर मिलेगा? उत्तर: शासन ने किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान समय से दिलाने को इस फैसले का एक उद्देश्य बताया है। हालांकि भुगतान में वास्तविक सुधार मिलों की वित्तीय स्थिति और बकाया राशि की नियमित निगरानी पर निर्भर करेगा।
स्रोत: दैनिक जागरण (22 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (12 और 23 अक्टूबर 2026), वार्ता न्यूज एजेंसी (14 अक्टूबर 2026)।
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