₹600 गन्ना भाव की मांग तेज: मुरादाबाद में भाकियू ने सौंपा 11 सूत्री ज्ञापन, बारिश से बर्बाद फसल का मुआवजा भी मांगा

कांठ (मुरादाबाद)। गन्ने के दाम को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार (1 अक्टूबर 2026) को कांठ तहसील में बैठक के बाद एसडीएम स्निग्धा चतुर्वेदी से मिलकर 11 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन की सबसे बड़ी मांग है — पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने से पहले गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाए। साथ ही बारिश और तेज हवा से गन्ने व धान की फसल को हुए नुकसान का शीघ्र सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग भी रखी गई है।
बैठक का नेतृत्व तहसील अध्यक्ष चौधरी दर्शन सिंह ने किया। इसमें प्रदेश उपाध्यक्ष (पश्चिमी यूपी) चौधरी ऋषिपाल सिंह सहित कई पदाधिकारी और क्षेत्र के किसान मौजूद रहे। नेताओं ने कहा कि किसानों की कई पुरानी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और यदि अनदेखी जारी रही तो आंदोलन किया जाएगा। एसडीएम ने समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना मूल्य बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक भाकियू समेत गन्ना उत्पादक पेराई सत्र 2026-27 के लिए 600 रुपये प्रति क्विंटल के भाव की मांग कर रहे हैं, और संगठन ने मुजफ्फरनगर से रात्रि पंचायतें शुरू कर दी हैं। मुरादाबाद का यह ज्ञापन उसी बड़ी मुहिम की अगली कड़ी है।
11 सूत्री मांगों में क्या-क्या शामिल है
ज्ञापन में किसानों की रोजमर्रा की परेशानियों से जुड़ी कई मांगें हैं:
- गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल घोषित हो पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने से पहले।
- पुराने गन्ना भुगतान पर ब्याज दिलाया जाए।
- बारिश से बर्बाद फसल का मुआवजा: बारिश और तेज हवा से गन्ने व धान की फसल को हुए नुकसान का शीघ्र सर्वे कराकर मुआवजा दिलाया जाए।
- तौल की दो वैकल्पिक श्रेणियां: सभी गन्ना क्रय केंद्रों पर 18 और 27 क्विंटल की दो वैकल्पिक तौल श्रेणियां लागू हों।
- क्रय केंद्रों के प्लेटफॉर्म बढ़ाने का चीनी मिलों का पुराना वादा पूरा किया जाए।
- तेंदुओं के हमले रोकने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर पिंजरे लगाए जाएं।
इसके अलावा सड़क निर्माण और अतिक्रमण हटाने जैसी स्थानीय मांगें भी रखी गई हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि सहकारी गन्ना समिति मिलों के इशारे पर किसानों की अनदेखी कर रही है।
600 रुपये का गणित: किसान क्यों मांग रहे हैं इतना भाव
किसानों का तर्क सीधा है — जब उनकी लागत बढ़ रही है और मिलों को चीनी के बढ़े दाम का फायदा मिल रहा है, तो उसका हिस्सा किसानों तक भी पहुंचना चाहिए। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यूपी के कोल्हू और क्रेशरों पर इस समय गन्ना 490 से 500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से खरीदा जा रहा है। शुगर मिलें अक्टूबर में चलेंगी, लेकिन कोल्हू सितंबर में ही चल गए हैं। जब कोल्हू खुद 500 रुपये दे रहे हैं, तो किसानों का सवाल जायज है कि सरकार मिलों के लिए निर्धारित भाव (SAP) क्यों नहीं बढ़ाती।
किसानों का कहना है कि खाद, बीज, सिंचाई, बुवाई, गुड़ाई, मजदूरी और डीजल — हर चीज के भाव बढ़े हैं, लेकिन गन्ने का दाम उस रफ्तार से नहीं बढ़ा। लागत निकालने के लिए गन्ने का मूल्य बढ़ाना अब वक्त की जरूरत है। एफआरपी और एसएपी का फर्क आसान भाषा में समझें
2026-27 का भाव अभी घोषित नहीं, दीपावली पर तोहफे की उम्मीद
एक जरूरी तथ्य स्पष्ट कर देना चाहिए — पेराई सत्र 2026-27 के लिए यूपी का SAP अभी घोषित नहीं हुआ है। केंद्र सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए FRP 365 रुपये प्रति क्विंटल तय कर दिया है, लेकिन राज्य स्तर पर दाम की घोषणा बाकी है। किसान नेता चौधरी पुष्पेंद्र सिंह का कहना है कि जिस तरह केंद्र एमएसपी और एफआरपी समय से पहले तय करता है, उसी तरह राज्य सरकार को भी सत्र शुरू होने से पहले गन्ना मूल्य घोषित कर देना चाहिए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दीपावली पर सरकार किसानों को बढ़े गन्ना मूल्य का तोहफा दे सकती है। अनुमान लगाया जा रहा है कि 40 से 50 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हो सकती है, हालांकि सरकार की तरफ से अभी कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है। इतिहास देखें तो 2021-22 में चुनाव से पहले भाव 25 रुपये बढ़ाकर 350 रुपये, 2023-24 में लोकसभा चुनाव से पहले 20 रुपये बढ़ाया गया था, और 2025-26 के लिए 30 रुपये बढ़ाकर अगैती का भाव 400 रुपये तथा सामान्य का 390 रुपये प्रति क्विंटल किया गया था।
किसान अभी क्या करें: 4 जरूरी कदम
भाव की घोषणा और मुआवजे का इंतजार करते हुए ये काम अभी पूरे कर लें:
- सट्टा रिकॉर्ड जांचें: अपनी गन्ना समिति में जाकर सट्टा सूची का मिलान करें। रकबा, किस्म या आपूर्ति रिकॉर्ड में त्रुटि हो तो तुरंत सुधार कराएं। प्री-कैलेंडर ऑनलाइन कैसे देखें, यहां जानें
- सदस्यता पक्की करें: जो किसान अभी तक गन्ना समिति के सदस्य नहीं बने हैं, वे 10 अक्टूबर 2026 तक सदस्यता ले लें — बिना सदस्यता सरकारी भाव पर मिलों को गन्ना नहीं बेच पाएंगे। अंतिम तिथि की पूरी जानकारी
- बैंक खाता सक्रिय रखें: भुगतान सीधे खाते में आता है, इसलिए खाता सक्रिय और आधार से लिंक रखें। पश्चिम यूपी की मिलें करीब 10 दिन पहले पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं।
- शिकायत हो तो हेल्पलाइन: गन्ना सर्वे, सदस्यता, सट्टा या पर्ची से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए विभाग के टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर संपर्क करें। आधिकारिक जानकारी के लिए caneup.in पोर्टल भी देखें।
जवाब जानिए
क्या 2026-27 सीजन के लिए गन्ने का भाव घोषित हो गया है? नहीं। पेराई सत्र 2026-27 के लिए यूपी का SAP अभी घोषित नहीं हुआ है। केंद्र ने FRP 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है; 2025-26 में SAP अगैती के लिए 400 रुपये और सामान्य के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल था।
मुरादाबाद के ज्ञापन में मुख्य मांगें क्या हैं? भाकियू टिकैत ने कांठ तहसील में 11 सूत्री ज्ञापन सौंपा है। मुख्य मांगें — गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करना, बारिश से बर्बाद फसल का सर्वे कराकर मुआवजा, पुराने बकाए पर ब्याज, और क्रय केंद्रों पर 18 व 27 क्विंटल की वैकल्पिक तौल श्रेणियां।
कोल्हुओं पर गन्ना कितने भाव बिक रहा है? रिपोर्टों के मुताबिक यूपी के कोल्हू-क्रेशरों पर गन्ना 490 से 500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से खरीदा जा रहा है। यही वजह है कि किसानों की 600 रुपये की मांग को बल मिल रहा है।
शिकायत कहां दर्ज करें? गन्ना सर्वे, सदस्यता, सट्टा या पर्ची से जुड़ी शिकायत के लिए टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर संपर्क करें।
स्रोत: अमर उजाला (मुरादाबाद), नवभारत टाइम्स
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