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6 लाख का लोन सिर्फ 6% ब्याज पर: योगी सरकार की कृषक समृद्धि योजना से गन्ना किसानों को सिंचाई और मशीनरी में मिलेगी राहत

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 4, 2026 • 6 min read
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6 लाख का लोन सिर्फ 6% ब्याज पर: योगी सरकार की कृषक समृद्धि योजना से गन्ना किसानों को सिंचाई और मशीनरी में मिलेगी राहत
अंतिम अपडेट: October 4, 2026 6:32 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

गन्ने की फसल साल भर खेत में रहती है और इस दौरान सिंचाई पर सबसे ज्यादा पैसा खर्च होता है। ट्यूबवेल लगवाना हो, ड्रिप सिंचाई बिछानी हो या ट्रैक्टर-ट्रॉली जैसे उपकरण खरीदने हों — हर काम में एकमुश्त बड़ी रकम चाहिए होती है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यही सबसे बड़ी रुकावट बन जाती है, क्योंकि बैंक से मिलने वाले कृषि ऋण पर ब्याज 11 से 11.50 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। अब उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बोझ को आधा करने वाली एक नई योजना को हरी झंडी दे दी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 15 सितंबर 2026 को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना को मंजूरी मिली है। इस योजना के तहत प्रदेश के लघु एवं सीमांत किसानों को अधिकतम 6 लाख रुपये तक का दीर्घकालीन कृषि ऋण सिर्फ 6 प्रतिशत की रियायती वार्षिक ब्याज दर पर मिलेगा। योजना के लिए सरकार ने 384 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता को भी स्वीकृति दी है, जो उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड के माध्यम से किसानों तक पहुंचेगी।

योजना में किसानों को क्या-क्या मिलेगा

नई योजना का सबसे बड़ा फायदा ब्याज दर में कटौती है। मौजूदा व्यवस्था में उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक को नाबार्ड से अपेक्षाकृत महंगी दर पर पुनर्वित्त मिलता है, इसलिए किसानों को कृषि ऋण करीब 11 से 11.50 प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध होता है। नई योजना में राज्य सरकार की ओर से ब्याज अनुदान दिए जाने से पात्र किसानों के लिए यह दर घटकर 6 प्रतिशत रह जाएगी।

योजना का पैसा सिर्फ रोजमर्रा की खेती के खर्च के लिए नहीं मिलेगा, बल्कि खेती से जुड़ी जरूरी सुविधाएं तैयार करने में भी लगाया जा सकेगा। किसान इसका इस्तेमाल सिंचाई की व्यवस्था बनाने, कृषि से जुड़ी परिसंपत्तियां खड़ी करने और दूसरे दीर्घकालीन कृषि निवेश के लिए कर सकेंगे। यानी अगर किसी किसान को खेत में स्थायी सुधार के लिए एक बार में ज्यादा पैसा लगाना है, तो यह योजना उसी जरूरत को पूरा करेगी।

समाचार रिपोर्टों के मुताबिक सरकार का लक्ष्य इस योजना से करीब 5 लाख किसानों को जोड़ने का है।

गन्ना किसानों के लिए क्यों है खास मौका

गन्ना बारह महीने की फसल है और इसकी पैदावार सीधे सिंचाई की नियमितता से जुड़ी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट में जिन किसानों के पास अपना ट्यूबवेल नहीं है, उन्हें पानी के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है — और पेराई के समय पानी की एक भी देरी चीनी की रिकवरी घटा देती है।

इस लोन से किसान ट्यूबवेल बोरिंग, समरसेबल पंप, पाइपलाइन या ड्रिप सिंचाई जैसे स्थायी काम करा सकते हैं। ड्रिप सिंचाई पर सरकार पहले से ही 90 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है — कृषक समृद्धि योजना का लोन और ड्रिप अनुदान मिलकर सिंचाई की लागत को काफी हद तक घटा सकते हैं। इसी तरह ट्रेंच विधि से बुवाई करने वाले किसान ट्रैक्टर-उपकरणों में निवेश के लिए भी इस दीर्घकालीन ऋण का इस्तेमाल कर सकते हैं, क्योंकि अल्पकालीन फसली ऋण में इतनी बड़ी एकमुश्त राशि मिलना मुश्किल होता है।

6 प्रतिशत ब्याज कैसे संभव होगा: 5 प्रतिशत अनुदान की गणित

योजना में ब्याज दर 6 प्रतिशत तक लाने के लिए सरकार 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान देगी। इसका मतलब है कि बैंक तो अपना सामान्य ब्याज (लगभग 11 प्रतिशत) वसूलेगा, लेकिन उसमें से 5 प्रतिशत का बोझ सरकार उठाएगी और किसान के हिस्से में सिर्फ 6 प्रतिशत ब्याज आएगा।

लेकिन यहां एक अहम शर्त है — ब्याज अनुदान का लाभ सिर्फ उन्हीं किसानों को मिलेगा जो ऋण की किस्तें तय समय पर चुकाएंगे। निर्धारित देय तिथि तक किस्त जमा करने वाले पात्र किसानों को ही यह राहत दी जाएगी। देरी से किस्त चुकाने पर अनुदान का लाभ छूट सकता है, इसलिए लोन लेने से पहले अपनी चुकौती क्षमता का हिसाब जरूर लगा लें।

जो किसान पहले से कर्जदार हैं और अपना कर्ज समय पर चुकाते आ रहे हैं, उनके लिए भी योजना में प्रावधान रखा गया है। समय पर लोन चुकाने वाले ऐसे किसानों को ब्याज अनुदान का लाभ दिया जा सकेगा, जिससे उन्हें अतिरिक्त राहत मिलने की उम्मीद है।

किसान क्रेडिट कार्ड से कैसे है अलग

कई किसानों के मन में सवाल होगा कि जब किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) पर पहले से ही सस्ता ब्याज मिलता है, तो यह नई योजना अलग कैसे है। फर्क साफ है — केसीसी अल्पकालीन फसली ऋण है, जो एक फसल चक्र के खर्च के लिए मिलता है और समय पर चुकाने पर उस पर प्रभावी ब्याज करीब 4 प्रतिशत पड़ता है। गन्ना किसानों के लिए केसीसी की पूरी जानकारी यहां पढ़ सकते हैं।

वहीं कृषक समृद्धि योजना दीर्घकालीन ऋण है — यानी ट्यूबवेल, पंप सेट, पाइपलाइन, कृषि उपकरण या खेत में स्थायी सुधार जैसे कामों के लिए, जिनका फायदा कई साल तक मिलता है। दोनों योजनाएं एक-दूसरे की पूरक हैं: रोज के फसल खर्च के लिए केसीसी और बड़े एकमुश्त निवेश के लिए कृषक समृद्धि योजना।

पात्रता और आवेदन: अभी क्या पता है

योजना लघु एवं सीमांत किसानों के लिए बनाई गई है। ऋण उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड के माध्यम से दिया जाएगा, जिसके लिए सरकार ने 384 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की है।

आवेदन की विस्तृत प्रक्रिया — कौन से दस्तावेज लगेंगे, बैंक शाखा में फॉर्म कहां मिलेगा, ऑनलाइन आवेदन होगा या नहीं — इन बिंदुओं पर अभी आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी होने बाकी हैं। मंत्रि-परिषद की मंजूरी के बाद अब विभागीय स्तर पर योजना के नियम-कायदे तय किए जा रहे हैं। जैसे ही आवेदन प्रक्रिया का आधिकारिक ऐलान होगा, उसकी पूरी जानकारी यहां अपडेट की जाएगी। तब तक किसान अपनी नजदीकी सहकारी बैंक शाखा या जिला कृषि कार्यालय से योजना की ताजा स्थिति की जानकारी ले सकते हैं।

आपके सवाल

क्या इस योजना में 6 लाख से ज्यादा लोन मिल सकता है? नहीं। योजना में अधिकतम सीमा 6 लाख रुपये तय की गई है। इससे ज्यादा राशि के लिए सामान्य बैंक ऋण प्रक्रिया ही लागू होगी।

ब्याज अनुदान हर किसान को मिलेगा या कोई शर्त है? 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान सिर्फ उन्हीं किसानों को मिलेगा जो ऋण की किस्तें निर्धारित देय तिथि तक जमा करेंगे। समय पर भुगतान इस योजना की सबसे अहम शर्त है।

क्या गन्ना किसान इस लोन से ड्रिप सिंचाई लगवा सकते हैं? हां। योजना का उद्देश्य कृषि में दीर्घकालीन निवेश है, जिसमें सिंचाई व्यवस्था भी शामिल है। ड्रिप सिंचाई पर मिलने वाले 90 प्रतिशत अनुदान के साथ यह लोन किसानों के लिए दोहरा फायदा दे सकता है।

केसीसी धारक भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं? योजना लघु एवं सीमांत किसानों के लिए है और केसीसी से अलग दीर्घकालीन ऋण देती है। दोनों का उद्देश्य अलग-अलग है, इसलिए केसीसी होने से इस योजना की पात्रता पर असर नहीं पड़ना चाहिए — फिर भी अंतिम पात्रता नियम आधिकारिक दिशा-निर्देशों में स्पष्ट होंगे।

योजना कब से लागू होगी? 15 सितंबर 2026 को मंत्रि-परिषद ने योजना को मंजूरी दे दी है। आवेदन प्रक्रिया और वितरण की तारीखों का ऐलान विभागीय दिशा-निर्देशों के साथ होगा।

स्रोत: एबीपी लाइव (2 अक्टूबर 2026), ट्रैक्टर जंक्शन (3 अक्टूबर 2026), कृषक जगत (29 सितंबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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