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मुजफ्फरनगर के गन्ना किसानों के लिए आज आखिरी मौका: इंडेंट (बेसिक कोटा) आपत्ति की अंतिम तारीख 30 सितंबर — देर से कोई सुधार नहीं

Aamir Raza Aamir Raza • Sep 30, 2026 • 6 min read
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मुजफ्फरनगर के गन्ना किसानों के लिए आज आखिरी मौका: इंडेंट (बेसिक कोटा) आपत्ति की अंतिम तारीख 30 सितंबर — देर से कोई सुधार नहीं
अंतिम अपडेट: September 30, 2026 1:22 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

मुजफ्फरनगर जनपद के लगभग सवा दो लाख गन्ना किसानों के लिए आज 30 सितंबर का दिन बहुत अहम है। गन्ना इंडेंट, यानी आपके बेसिक कोटा से जुड़ी किसी भी शिकायत या आपत्ति को दर्ज कराने की आज आखिरी तारीख है। जिला गन्ना अधिकारी ने साफ कर दिया है कि आज के बाद आपका रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा और फिर किसी भी तरह का संशोधन नहीं होगा। अगर कैलेंडर, रकबे या बेसिक कोटे में कोई गलती है, तो आज ही अपनी गन्ना समिति पहुंचकर उसे ठीक करा लें — वरना पूरे पेराई सत्र 2026-27 में उसी गलत रिकॉर्ड के आधार पर गन्ना आपूर्ति करनी होगी।

मुजफ्फरनगर में इस बार चीनी मिलों का नया पेराई सत्र पिछले साल से लगभग 15 दिन पहले, यानी 15 अक्टूबर के बाद शुरू होने जा रहा है। प्रशासन ने जनपद की सभी आठ मिलों में अक्टूबर के पहले सप्ताह तक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में इंडेंट और कैलेंडर का रिकॉर्ड समय पर दुरुस्त होना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।

आज आखिरी तारीख: क्या करनी है किसान को आपत्ति

पेराई सत्र 2026-27 की तैयारियों के बीच गन्ना विभाग ने मुजफ्फरनगर के किसानों से 30 सितंबर तक गन्ना इंडेंट (बेसिक कोटा) से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण के लिए आपत्तियां मांगी थीं। बेसिक कोटा वही आधार है, जिसके हिसाब से पूरे सीजन में आपकी पर्चियां बनती हैं — कोटा गलत हुआ तो पर्ची भी गलत बनेगी।

आपत्ति चीनी मिलों की समितियों पर दर्ज कराई जा सकती है। विभाग और मिल प्रशासन ने सभी गन्ना समितियों पर गन्ने के रकबे, बेसिक कोटे और पर्चियों की जानकारी के लिए मेले लगाए हैं। इन मेलों में किसान अपने दस्तावेज लेकर पहुंचे, सट्टा सूची से अपना रिकॉर्ड मिलाएं और गलती मिलने पर वहीं आपत्ति दर्ज कराकर सुधार करा सकते हैं। गन्ना विकास परिषद को ऑनलाइन शिकायत भेजने की सुविधा भी उपलब्ध है।

डेडलाइन के बाद क्या होगा: अधिकारी का साफ संदेश

जिला गन्ना अधिकारी संजय सिंह सिसौदिया ने साफ शब्दों में कहा है कि 30 सितंबर तक किसान समितियों पर लगे मेलों में जाकर अपनी समस्या का समाधान करा सकते हैं। इसके बाद किसी भी पोर्टल पर आंकड़े अपलोड कर दिए जाएंगे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित तिथि के बाद संशोधन नहीं किया जाएगा। यानी आज शाम के बाद जो रिकॉर्ड पोर्टल पर चला जाएगा, वही अंतिम माना जाएगा। पोर्टल पर डाटा फीडिंग का काम पूरा होते ही पक्के (फाइनल) कैलेंडर वितरित कर दिए जाएंगे, और इसी पक्के कैलेंडर के आधार पर किसानों को चीनी मिलों में गन्ने की आपूर्ति करनी होगी। इसलिए विभाग की सलाह है कि एक-एक आंकड़ा — नाम, रकबा, किस्म, बेसिक कोटा — ध्यान से जांच लें।

सवा दो लाख किसानों को प्राथमिक कैलेंडर बांटे गए, फिर भी शिकायतें

जनपद के आठ शुगर मिल क्षेत्रों से जुड़े लगभग सवा दो लाख किसानों को प्राथमिक गन्ना सप्लाई कैलेंडर वितरित कर दिए गए हैं। यह कैलेंडर किसानों को उनके रकबे, बेसिक कोटे और पर्चियों की जानकारी देता है, ताकि सीजन शुरू होने से पहले गड़बड़ी पकड़ी जा सके।

लेकिन बड़ी संख्या में किसानों ने शिकायत दर्ज कराई है कि उन्हें अभी तक कैलेंडर नहीं मिला है। अगर आप भी उनमें से हैं, तो आज का दिन आपके लिए और जरूरी है: अपनी गन्ना समिति पर पहुंचकर प्राथमिक कैलेंडर लें, आंकड़े जांचें, और गलती मिलने पर तुरंत आपत्ति दर्ज कराएं।

सट्टा प्रदर्शन मेलों में क्या-क्या हो रहा है

मुजफ्फरनगर की गन्ना समितियों में गन्ना सर्वे, सट्टा प्रदर्शन और समाधान मेलों का शुभारंभ पहले ही हो चुका है। रोहना और मंसूरपुर की समितियों में शुरू हुए इन मेलों का उप गन्ना आयुक्त सहारनपुर मंडल ओपी सिंह ने जनप्रतिनिधियों के साथ निरीक्षण भी किया। इन मेलों में किसान अपने गन्ना क्षेत्रफल, सट्टा विवरण और आपूर्ति रिकॉर्ड की जानकारी पाकर मौके पर ही त्रुटियों का सुधार करा सकते हैं। सहारनपुर मंडल की सभी गन्ना समितियों में ऐसे मेले आयोजित किए जा रहे हैं, और मंडल के तीनों जनपदों के 2164 गांवों के सभी किसानों तक प्राथमिक कैलेंडर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग के अनुसार कैलेंडर वितरण अभियान में गन्ना विभाग और चीनी मिलों की टीमें मिलकर काम कर रही हैं।

आपत्ति दर्ज कराते समय किन बातों का रखें ध्यान

अपनी आपत्ति या सुधार के आवेदन में ये बातें जरूर जांचें और लिखें:

  • नाम और खाता विवरण: सट्टा सूची में आपका नाम, पिता का नाम और खाता/खसरा संख्या सही दर्ज हो।
  • गन्ना रकबा: आपके खेत में जितना गन्ना खड़ा है, उतना ही रकबा दर्ज होना चाहिए — कम या ज्यादा नहीं।
  • गन्ने की किस्म: अगेती, पछेती या सामान्य — किस्म सही लिखी हो, क्योंकि भाव किस्म के हिसाब से तय होता है।
  • बेसिक कोटा: पिछले सीजन की आपूर्ति और इस बार के रकबे के हिसाब से कोटा उचित हो।
  • बैंक खाता: भुगतान सीधे खाते में आता है, इसलिए खाता संख्या और आईएफएससी सही होनी चाहिए।

आवेदन के साथ आधार कार्ड, खतौनी या खसरा की प्रति जैसे दस्तावेज जरूर रखें। किसी समस्या की स्थिति में किसान मुख्यालय स्तर पर संचालित टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

15 अक्टूबर के बाद शुरू होगा नया पेराई सत्र

मुजफ्फरनगर में चीनी मिलों ने नए पेराई सत्र की तैयारी तेज कर दी है। प्रशासन के निर्देशों के अनुसार अक्टूबर के प्रथम सप्ताह तक सभी आठ मिलों में तैयारियां पूरी हो जानी हैं, जिसके बाद 15 अक्टूबर के बाद नए सत्र का आगाज हो जाएगा — पिछले साल से लगभग 15 दिन पहले।

जल्दी पेराई से किसान अपने खेत जल्दी खाली करके रबी गेहूं की बुवाई समय पर कर सकेंगे। लेकिन इंडेंट, कैलेंडर और पर्ची का पूरा चक्र भी पहले शुरू होगा — इसलिए आज की डेडलाइन चूकना इस बार और भारी पड़ सकता है। ध्यान रहे, प्रदेश स्तर पर गन्ना समिति की नई सदस्यता और उपज बढ़ोतरी के आवेदनों की अंतिम तिथि भी आज 30 सितंबर ही है।

आपके सवाल

गन्ना इंडेंट (बेसिक कोटा) क्या होता है? इंडेंट यानी बेसिक कोटा, चीनी मिल को आपके खेत से खरीदे जाने वाले गन्ने की तय मात्रा है। इसी के आधार पर पूरे पेराई सत्र में आपकी पर्चियां बनती हैं — कोटा गलत होगा तो आपूर्ति में दिक्कत आएगी।

अगर आज आपत्ति दर्ज नहीं करा पाया तो क्या होगा? जिला गन्ना अधिकारी के अनुसार 30 सितंबर के बाद आंकड़े पोर्टल पर अपलोड हो जाएंगे और निर्धारित तिथि के बाद कोई संशोधन नहीं होगा। देर से आई आपत्ति पर विचार नहीं होगा और पूरे सीजन में गलत रिकॉर्ड ही चलेगा।

कैलेंडर में आमतौर पर कौन-कौन सी गलतियां मिलती हैं? नाम की वर्तनी में गलती, रकबा कम-ज्यादा दर्ज होना, गन्ने की किस्म गलत लिखी होना, बेसिक कोटा कम आंका जाना और बैंक खाते की जानकारी पुरानी होना — ये सबसे आम गलतियां हैं।

ऑनलाइन शिकायत कैसे करें? गन्ना विकास परिषद को ऑनलाइन शिकायत भेजी जा सकती है। इसके अलावा टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर भी अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं।

पक्का कैलेंडर कब मिलेगा और पेराई कब शुरू होगी? पोर्टल पर डाटा फीडिंग पूरी होते ही पक्के कैलेंडर वितरित कर दिए जाएंगे। मुजफ्फरनगर में नया पेराई सत्र 15 अक्टूबर के बाद शुरू होने की तैयारी है, जो पिछले साल से लगभग 15 दिन पहले है।

स्रोत: दैनिक जागरण, मुजफ्फरनगर (20 सितंबर 2026); लाइव हिंदुस्तान, मुजफ्फरनगर; कृषिटाइम्स, लखनऊ (24 सितंबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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