मुजफ्फरनगर मंडी में नया गुड़ ₹4,400 प्रति क्विंटल: त्योहारी मांग में भारी उछाल — कोल्हू पर गन्ना डालने से किसानों को तुरंत कैश

मुजफ्फरनगर / शामली (CaneUp विशेष ब्यूरो — 25 सितंबर 2026 सुबह 7:54 बजे): पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक और एशिया की सबसे बड़ी गुड़ एवं देसी शक्कर मंडी मुजफ्फरनगर (Nai Mandi Muzaffarnagar) में नए पेराई सत्र 2026-27 के ताज़ा गुड़ का कारोबार अपने चरम पर पहुंच गया है। आगामी त्योहारी सीजन (करवाचौथ, अहोई अष्टमी, धनतेरस, दीपावली और छठ महापर्व) के मद्देनजर गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब और दिल्ली-एनसीआर के बड़े थोक व्यापारियों की आक्रामक लिवाली के चलते नए बाल्टी गुड़ के थोक भाव ₹4,200 से ₹4,450 प्रति क्विंटल के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गए हैं।
मंडी में आज सुबह 7:00 बजे तक 5,200 से अधिक बोरियों (प्रति बोरी 40 किग्रा / 1 मन) की ताज़ा आवक दर्ज की गई। गुड़ के इन उछलते भावों का सीधा और क्रांतिकारी लाभ देहात के गन्ना किसानों को मिल रहा है, क्योंकि मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ और बागपत में धधक रही 1,500 से अधिक कोल्हू भट्ठियों के संचालक किसानों से ₹375 से ₹385 प्रति क्विंटल के नकद भाव पर कच्चा गन्ना खरीद रहे हैं।
📈 आज 25 सितंबर 2026 के मुजफ्फरनगर गुड़ मंडी के आधिकारिक थोक भाव
मंडी समिति मुजफ्फरनगर और फेडरेशन ऑफ गुड मर्चेंट्स एसोसिएशन द्वारा जारी दैनिक भाव पत्रक:
| गुड़ / शक्कर की श्रेणी (Jaggery Variety) | थोक भाव (प्रति 40 किग्रा / मन) | प्रति क्विंटल समतुल्य दर | प्रमुख मांग एवं उपभोग क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| ताज़ा नया बाल्टी गुड़ (सुपर फर्स्ट क्वालिटी) | ₹1,740 - ₹1,780 | ₹4,350 - ₹4,450 | गुजरात (अहमदाबाद, सूरत), राजस्थान |
| देसी शक्कर (ब्राउन शुगर - दानेदार) | ₹1,880 - ₹1,950 | ₹4,700 - ₹4,875 | दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ |
| खुरपापाड़ा गुड़ (डार्क गुड़ - बिना मसाला) | ₹1,620 - ₹1,660 | ₹4,050 - ₹4,150 | आयुर्वेदिक औषधियां, पशु आहार उद्योग |
| ड्राई फ्रूट मसाला गुड़ (काजू, बादाम, सोंठ युक्त) | ₹2,250 - ₹2,400 | ₹5,625 - ₹6,000 | प्रीमियम गिफ्टिंग, मेट्रो एक्सपोर्ट |
| चाकू गुड़ (चौकोर बट्टी गुड़) | ₹1,700 - ₹1,740 | ₹4,250 - ₹4,350 | मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश के स्थानीय बाजार |
🌾 चीनी मिलों से पहले कोल्हू पर गन्ना डालने के पीछे किसानों का 4-सूत्रीय अर्थशास्त्र
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें 20 से 28 अक्टूबर के बीच चलेंगी, यानी मिलों के शुरू होने में अभी लगभग एक महीने का समय शेष है। ऐसे में किसान कोल्हू पर गन्ना क्यों बेच रहे हैं? इसके पीछे ठोस व्यावहारिक और वित्तीय कारण हैं:
- हाथों-हाथ नकद भुगतान (Instant Cash Flow): चीनी मिलों में गन्ना डालने पर 14 दिन या डिफाल्टर मिलों में महीनों तक भुगतान का इंतजार करना पड़ता है। कोल्हू पर किसान सुबह ट्रॉली खाली करता है और शाम 4:00 बजे कांटे पर ही ₹380 प्रति क्विंटल के हिसाब से नकद गड्डी जेब में रखकर घर लौटता है।
- आलू और लाही (सरसों) की अगेती बुवाई: पश्चिमी यूपी के किसान जानते हैं कि जो किसान 05 अक्टूबर तक अगेती आलू (पुखराज या चिप्सोना) या लाही बो देता है, उसे मंडी में आलू का ₹2,000 प्रति कट्टा का भाव मिलता है। यदि वे मिल का इंतजार करेंगे तो खेत नवंबर में खाली होगा और आलू का भाव गिरकर ₹600 रह जाएगा।
- पशुओं के लिए पौष्टिक हरा अगौला: सितंबर-अक्टूबर में चारे की भारी किल्लत होती है। गन्ने की कटाई से किसानों को अपने दुधारू पशुओं के लिए प्रचुर मात्रा में मीठा हरा अगौला मिल रहा है, जिससे दूध उत्पादन में 20% की वृद्धि हुई है।
- घटतौली से मुक्ति का आसान उपाय: किसान अपनी ट्रॉली का वजन पहले किसी स्वतंत्र सरकारी धर्मकांटे पर करा लेते हैं और फिर कोल्हू के कांटे से मिलान करने के बाद ही गन्ना अनलोड करते हैं।
⚖️ क्या कोल्हू पर गन्ना डालने से मिल के सट्टे पर कोई आंच आती है?
उत्तर प्रदेश गन्ना पूर्ति नीति के अनुसार, प्रत्येक किसान का एक ‘बेसिक कोटा’ होता है।
- किसान को अपने बेसिक कोटे का न्यूनतम 85% गन्ना चीनी मिल को आपूर्ति करना अनिवार्य होता है ताकि उसका आगामी वर्ष का सट्टा सुरक्षित रहे।
- जो किसान अपने खेत में अतिरिक्त गन्ने की पैदावार (अतिरिक्त सट्टा) रखते हैं, वे अपनी अगेती पेड़ी फसल का 15% से 20% हिस्सा कोल्हू पर आसानी से बेच सकते हैं। इससे मिल के सट्टे पर कोई विधिक या प्रशासनिक पेनल्टी नहीं लगती।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: कोल्हू पर गन्ने का सरकारी रेट क्या तय है?
उत्तर: कोल्हू और खांडसारी इकाइयां असंगठित निजी क्षेत्र में आती हैं। इनका कोई वैधानिक न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं होता, बल्कि इनका भाव मंडी में गुड़ और शक्कर की दैनिक मांग और आपूर्ति पर तय होता है। वर्तमान में ₹375 से ₹385 का भाव मिल के अनुमानित SAP भाव के लगभग बराबर है।
प्रश्न 2: गुड़ में मिलावट की पहचान कैसे करें?
उत्तर: शुद्ध प्राकृतिक गुड़ का रंग गहरा भूरा या हल्का लालिमा लिए होता है और उसका स्वाद शुद्ध मीठा होता है। यदि गुड़ बहुत अधिक सफेद या पीला चमकदार दिखे, तो उसमें हाइड्रोस (सोडियम हाइड्रोसल्फाइट) केमिकल की मिलावट हो सकती है, जिससे बचना चाहिए।
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