आज मुजफ्फरनगर में 'किसान बचाओ, देश बचाओ' महापंचायत: 15 हजार किसानों का दावा, गन्ना भाव 600 रुपये समेत 22 मांगें

पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने से ठीक पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसान राजनीति में आज एक बड़ा दिन था। 7 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान में भारतीय किसान यूनियन (तोमर) की ‘किसान बचाओ, देश बचाओ’ महापंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें संगठन ने 6 जिलों से करीब 15 हजार किसानों के जुटने का दावा किया। केंद्र में गन्ना था — किसानों ने 2026-27 सत्र के लिए भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल तय करने समेत 22 मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम अधिकारियों को सौंपने की योजना बनाई।
मुजफ्फरनगर और आसपास के जिलों में गन्ना ही मुख्य नकदी फसल है। पेराई शुरू होने से चंद दिन पहले भाव, बकाया भुगतान और ब्याज पर किसान संगठन हर साल दबाव बनाते हैं — लेकिन इस बार समय खास है: 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी चल रही है, और गन्ना मूल्य हर चुनाव में पश्चिमी यूपी का बड़ा मुद्दा रहता है।
तैयारियां और दावे: जीआईसी मैदान में बड़ा मंच
आयोजन से एक दिन पहले, 6 अक्टूबर को संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी संजीव तोमर खुद जीआईसी मैदान पहुंचे और तैयारियों का जायजा लिया। मैदान में बड़ा मंच तैयार कराया गया, बाहर से आने वाले किसानों के लिए पानी, भोजन और पार्किंग की व्यवस्था की गई। तोमर ने महापंचायत को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने की अपील भी की।
22 मांगें: गन्ना किसान के लिए क्या है खास
महापंचायत में उठाई जाने वाली 22 सूत्रीय मांगों में गन्ना किसानों से जुड़ी मांगें सबसे ऊपर रहीं:
गन्ने का लाभकारी भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल: यह सबसे बड़ी मांग रही — पेराई सत्र 2026-27 के लिए भाव कम से कम 600 रुपये तय हो। मौजूदा स्थिति: केंद्र ने 2026-27 का एफआरपी 365 रुपये (1 अक्टूबर से लागू) तय किया है; यूपी का एसएपी 2025-26 में अगेती के लिए 400 रुपये था, और 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है। किसानों की 600 रुपये की मांग उसी के संदर्भ में है।
बकाया गन्ना भुगतान और कर्जमाफी: नियम के मुताबिक गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के भीतर भुगतान होना चाहिए, लेकिन कई मिलों में देरी आम है — इसके समाधान और संपूर्ण कर्जमाफी की मांग भी दोहराई गई।
स्मार्ट मीटर पर रोक और 50 प्रतिशत छूट: बिजली के स्मार्ट मीटरों का विरोध और बिजली, खाद व पानी पर 50 प्रतिशत छूट की मांग उठाई गई।
एम्स और हाईकोर्ट बेंच: मुजफ्फरनगर में एम्स अस्पताल, पश्चिमी यूपी के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच, और क्षेत्र में प्रदूषण पर रोक व इलाज की व्यवस्था की मांग भी रखी गई।
केलापुर अंडरपास मुद्दा: मीरापुर के गांव केलापुर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर कट और अंडरपास की मांग को लेकर ग्रामीण सात महीनों से धरना दे रहे हैं। गांव के बीचों-बीच चौराहे से हादसों का खतरा है — इस मुद्दे को महापंचायत में प्रमुखता से उठाने का ऐलान किया गया था।
गन्ने का भाव: मांग और हकीकत में कितना फासला
कैबिनेट समिति ने चीनी सीजन 2026-27 (अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027) के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर आधारित है। रिकवरी हर 0.1 प्रतिशत बढ़ने पर 3.56 रुपये प्रति क्विंटल प्रीमियम मिलेगा, और 9.5 प्रतिशत से कम रिकवरी वाली मिलों में न्यूनतम 338.30 रुपये प्रति क्विंटल की गारंटी है। यह पिछले सत्र के 355 रुपये से 10 रुपये ज्यादा है।
उत्तर प्रदेश में हालांकि मिलें एसएपी पर भुगतान करती हैं, जो एफआरपी से ऊपर होता है। किसानों का तर्क है कि कोल्हू-क्रेशर पर गन्ना 490 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है, ऐसे में मिलों का भाव भी बढ़ना चाहिए। 2026-27 का एसएपी घोषित होते ही असली तस्वीर साफ होगी — और यही वजह है कि पेराई शुरू होने से पहले किसान संगठन भाव को लेकर दबाव बना रहे हैं।
चुनावी साल और आगे की तारीखें
2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने हैं, और गन्ना पश्चिमी यूपी की चुनावी राजनीति का केंद्रबिंदु रहता है। पेराई शुरू होने से पहले महापंचायतें सरकार पर भाव बढ़ाने का दबाव बनाने का सबसे असरदार जरिया मानी जाती हैं। आगे दो तारीखें अहम हैं: 12 अक्टूबर को केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक के गन्ना किसानों को दिल्ली में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ बैठक के लिए बुलाया है — इसमें एसएपी और एफआरपी जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा से यूपी के किसानों पर भी असर पड़ सकता है। और 15 से 20 अक्टूबर — पश्चिमी यूपी की कई मिलों को इसी अवधि में पेराई शुरू करने के निर्देश हैं।
गन्ना किसानों के लिए एक और जरूरी तारीख 10 अक्टूबर है — पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना समिति की सदस्यता और उपज बढ़ोतरी के आवेदन की अंतिम तिथि। जिन किसानों ने पहली बार या लंबे अंतराल के बाद गन्ना बोया है, उनके लिए समिति की सदस्यता जरूरी है, तभी वे सरकारी भाव पर मिलों को गन्ना बेच पाएंगे।
आपके सवाल
सवाल: मुजफ्फरनगर महापंचायत में गन्ने को लेकर सबसे बड़ी मांग क्या थी? जवाब: पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की मांग सबसे प्रमुख रही। इसके साथ बकाया भुगतान, कर्जमाफी, स्मार्ट मीटर पर रोक और 60 वर्ष के बाद पेंशन समेत 22 मांगों का ज्ञापन तैयार किया गया।
सवाल: 2026-27 सत्र में गन्ने का सरकारी भाव अभी क्या है? जवाब: केंद्र का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल (1 अक्टूबर 2026 से लागू) तय है। उत्तर प्रदेश का एसएपी 2026-27 के लिए अभी घोषित नहीं हुआ है। पिछले सत्र में एसएपी अगेती के लिए 400 रुपये और सामान्य प्रजाति के लिए 390 रुपये था।
सवाल: 600 रुपये भाव की मांग क्यों उठ रही है? जवाब: किसानों का कहना है कि कोल्हू-क्रेशर पर गन्ना 490 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है, जबकि मिलों का भाव उससे काफी कम है। बढ़ती लागत को देखते हुए वे मिलों के भाव में बड़ी बढ़ोतरी चाहते हैं।
सवाल: महापंचायत में कितने किसान जुटे? जवाब: आयोजक संगठन भाकियू (तोमर) का दावा है कि 6 जिलों से करीब 15 हजार किसान जीआईसी मैदान पहुंचे। यह संगठन का दावा है, प्रशासनिक पुष्टि आनी बाकी है।
सवाल: गन्ना समिति की सदस्यता की अंतिम तारीख क्या है? जवाब: पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना समिति की सदस्यता और उपज बढ़ोतरी आवेदन की अंतिम तारीख 10 अक्टूबर 2026 है। पहले यह 30 सितंबर थी, बारिश-बाढ़ के हालात को देखते हुए बढ़ाई गई है।
स्रोत: डायनामाइट न्यूज (6 अक्टूबर 2026, अपडेट) — महापंचायत की तैयारियां, 22 मांगें, 15 हजार किसानों का दावा; रॉयल बुलेटिन — ‘किसान बचाओ, देश बचाओ’ महापंचायत का ऐलान, 22 सूत्रीय मांगें, केलापुर अंडरपास मुद्दा; किसान इंडिया — एफआरपी 2026-27: 365 रुपये प्रति क्विंटल (कैबिनेट निर्णय); वेबवार्ता — 2025-26 एसएपी (अगेती 400 रुपये, सामान्य 390 रुपये)।
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