होम › मिलों के खुलने से पहले मुजफ्फरनगर में 50 …

मिलों के खुलने से पहले मुजफ्फरनगर में 50 से ज्यादा कोल्हू चालू: किसानों को ₹380/क्विंटल भाव, भोकरहेड़ी में रोज 500 क्विंटल गुड़

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 11, 2026 • 6 min read
Google पर हमें फ़ॉलो करें
शेयर करें:
मिलों के खुलने से पहले मुजफ्फरनगर में 50 से ज्यादा कोल्हू चालू: किसानों को ₹380/क्विंटल भाव, भोकरहेड़ी में रोज 500 क्विंटल गुड़
अंतिम अपडेट: October 11, 2026 6:34 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

मुजफ्फरनगर के गांवों में अक्टूबर की ठंडक के साथ ही एक परिचित खुशबू फैलने लगी है — गुड़ पकने की। चीनी मिलों का नया पेराई सत्र शुरू होने से पहले ही जिले में 50 से ज्यादा कोल्हू चलने लगे हैं, और किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में गन्ना भरकर कोल्हुओं की ओर पहुंचने लगे हैं। फिलहाल किसानों को ₹380 प्रति क्विंटल का औसत भाव मिल रहा है। सरसों या अगेती गेहूं की बुवाई करने वाले किसान मिलों का इंतजार किए बिना खेत खाली करने की दौड़ में हैं, और कोल्हू संचालक मिलों से पहले ज्यादा से ज्यादा गन्ना खरीदने की होड़ में पेराई तेज कर चुके हैं।

यह खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों का 2026-27 का पेराई सत्र 20 अक्टूबर के बाद शुरू होने की संभावना है, जबकि 2026-27 सत्र के गन्ना भाव (एसएपी) की घोषणा अभी तक नहीं हुई है। ऐसे में किसान की नजर इस बात पर है कि कोल्हू पर मिलने वाला भाव उसके लिए फायदेमंद है या मिल का इंतजार करना बेहतर होगा।

कहां-कहां चले कोल्हू: 50 से ज्यादा इकाइयां सक्रिय

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जिले में अलग-अलग जगहों पर 50 से ज्यादा कोल्हू चलने लगे हैं। बुढ़ाना मार्ग पर हरसौली में तीन कोल्हू एक साथ चल रहे हैं, जबकि पीन्ना गांव के बाईपास पर भी कोल्हू शुरू हो गए हैं। सबसे बड़ी गतिविधि भोकरहेड़ी कस्बे में दिख रही है, जो गुड़ उत्पादन के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है — यहां करीब 35 गन्ना कोल्हू संचालित हो रहे हैं और गन्ने की आवक बढ़ने के साथ उत्पादन की रफ्तार भी तेज हो गई है।

भोकरहेड़ी में नई तकनीक से संचालित गन्ना कोल्हू का भी शुभारंभ हुआ है। कोल्हू संचालक नाजिम अंसारी के मुताबिक क्षेत्र के कई संचालकों के कोल्हू इस सीजन में चल रहे हैं।

₹380 का भाव: ठेकेदार के हवाले से सामने आया आंकड़ा

गन्ना खरीद के भाव को लेकर जिले के ठेकेदार नरेंद्र सिंह ने बताया है कि फिलहाल कोल्हुओं पर ₹380 प्रति क्विंटल पर गन्ना खरीदा जा रहा है। यह औसत भाव है — अलग-अलग कोल्हुओं पर थोड़ा बहुत फर्क संभव है।

इस भाव को पिछले सत्र के सरकारी भाव से तुलना करके समझना जरूरी है। 2025-26 सत्र में उत्तर प्रदेश का एसएपी अगेती प्रजाति के लिए ₹400 प्रति क्विंटल और सामान्य प्रजाति के लिए ₹390 प्रति क्विंटल रहा था। इस लिहाज से ₹380 का भाव पिछले सत्र के अगेती भाव से ₹20 प्रति क्विंटल कम है। लेकिन ध्यान रहे — 2026-27 सत्र के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है, इसलिए इस साल का सरकारी भाव क्या होगा, यह तय नहीं है। 7 अक्टूबर को लखनऊ में गन्ना आयुक्त कार्यालय में हुई बैठक में किसान प्रतिनिधियों ने ₹600 प्रति क्विंटल भाव की मांग रखी थी, और कई किसान संगठन लगातार इसी मांग को उठा रहे हैं।

भोकरहेड़ी में रोज 500 क्विंटल गुड़: उत्पादन के बड़े आंकड़े

भोकरहेड़ी की इकाइयों से जुड़े आंकड़े इस पारंपरिक उद्योग के पैमाने को बताते हैं। कोल्हू संचालकों के अनुसार इन इकाइयों में प्रतिदिन करीब 4,500 क्विंटल गन्ने की पेराई हो रही है, जिससे लगभग 500 क्विंटल गुड़ तैयार हो रहा है। गन्ने की पेराई से लेकर रस को बड़े कड़ाहों में पकाने, गुड़ तैयार करने, उसकी ढलाई, पैकिंग और बाजार तक पहुंचाने तक पूरी श्रृंखला में बड़ी संख्या में श्रमिकों की जरूरत पड़ती है।

गुड़ उत्पादन का यह कारोबार सिर्फ कोल्हू संचालकों तक सीमित नहीं है। गन्ना कटाई, ढुलाई, भट्ठी संचालन, गुड़ की ढलाई, पैकिंग, लोडिंग-अनलोडिंग और परिवहन से जुड़े लोगों को भी इस सीजन में काम मिलता है। ठंड बढ़ने के साथ पेराई और गुड़ उत्पादन में और तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।

किसान कोल्हू की ओर क्यों जा रहे हैं

सबसे पहले वे किसान गन्ना बेच रहे हैं जिन्हें सरसों या अगेती गेहूं की बुवाई करनी है — उनके लिए खेत जल्दी खाली करना प्राथमिकता है। दूसरा कारण प्रतिस्पर्धा है: कोल्हू संचालक मिलों के खुलने से पहले ज्यादा से ज्यादा गन्ना खरीदना चाहते हैं, इसलिए पेराई समय से पहले शुरू कर दी है। हालांकि मिल का सरकारी भाव और 14 दिन में भुगतान की कानूनी व्यवस्था किसान को अलग सुरक्षा देती है — देर से भुगतान पर 15 प्रतिशत ब्याज का सुप्रीम कोर्ट का हालिया आदेश इसी व्यवस्था को मजबूत करता है।

मिलें कब खुलेंगी: 20 अक्टूबर के बाद का अनुमान

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मुजफ्फरनगर में चीनी मिलों का पेराई सत्र 20 अक्टूबर के बाद शुरू होने की संभावना है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मिलों में बॉयलर पूजा और स्टीम ट्रायल अक्टूबर के पहले सप्ताह तक पूरे करने की तैयारी चल रही है। सहारनपुर के उप गन्ना आयुक्त ओपी सिंह के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें से 71 से ज्यादा पश्चिमी यूपी में स्थित हैं।

मिलों के खुलने के साथ ही किसानों की निगाहें नए सत्र के एसएपी पर भी टिकी हैं। 9 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक में भाव की घोषणा नहीं हुई थी। किसान संगठनों का तर्क है कि बढ़ती लागत को देखते हुए भाव में उचित वृद्धि जरूरी है, और पेराई सत्र शुरू होने से पहले घोषणा की उम्मीद की जा रही है।

किसान के लिए इसका क्या मतलब है

अगर आपको अगेती गेहूं या सरसों की बुवाई करनी है, तो कोल्हू तत्काल विकल्प है — लेकिन भाव की तुलना जरूर करें, क्योंकि कोल्हू पर भाव स्थान और दिन के हिसाब से बदलता है। बेचने से पहले 2-3 कोल्हुओं पर भाव पूछ लें, और पूरा गन्ना एक ही जगह बेचने की जल्दबाजी न करें। 2026-27 के एसएपी की घोषणा पर नजर रखें — वही इस सत्र के भाव का आधार तय करेगा।

आपके सवाल

क्या कोल्हू पर ₹380 प्रति क्विंटल का भाव पूरे जिले में एक जैसा है? नहीं। ₹380 प्रति क्विंटल औसत भाव है जो ठेकेदार नरेंद्र सिंह के हवाले से सामने आया है। अलग-अलग कोल्हुओं और अलग-अलग दिनों में भाव में थोड़ा बहुत अंतर हो सकता है। बेचने से पहले स्थानीय कोल्हुओं पर भाव की पुष्टि जरूर करें।

मुजफ्फरनगर में चीनी मिलें कब खुलेंगी? रिपोर्टों के अनुसार 20 अक्टूबर के बाद पेराई सत्र शुरू होने की संभावना है। मिलों में बॉयलर पूजा और स्टीम ट्रायल की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

2026-27 सत्र का गन्ना भाव (एसएपी) घोषित हुआ क्या? अभी नहीं। 9 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक में घोषणा नहीं हुई थी। किसान संगठन ₹600 प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं, जबकि पिछले सत्र (2025-26) का भाव अगेती के लिए ₹400 और सामान्य प्रजाति के लिए ₹390 प्रति क्विंटल था।

भोकरहेड़ी में इतना गुड़ कहां जाता है? भोकरहेड़ी का गुड़ अपने स्वाद और गुणवत्ता के लिए आसपास के क्षेत्रों में पहचाना जाता है। कोल्हू संचालकों का कहना है कि बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार संपर्क मिले तो यह गुड़ स्थानीय बाजार से आगे बड़े शहरों तक पहुंच सकता है।

कोल्हू पर गन्ना बेचने में क्या सावधानी रखें? भाव लिखित में तय करें, तौल की निगरानी खुद करें और भुगतान की शर्त पहले से स्पष्ट कर लें। मिल की तरह कोल्हू पर 14 दिन के भुगतान की कानूनी व्यवस्था लागू नहीं होती, इसलिए यह बात ध्यान में रखें।

स्रोत: आज की न्यूज़ (8 अक्टूबर 2026), रॉयल बुलेटिन (8 अक्टूबर 2026)

🌾 CaneUp किसान सहायता पोर्टल

अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें

गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।

1 जिला व मिल चुनें
2 गांव व नाम डालें
3 समस्या लिखकर भेजें
उत्तर प्रदेश का अपना जनपद चुनें
आपके जिले से संबंधित चीनी मिलें
इस नंबर पर आपको पर्ची और भुगतान के व्हाट्सएप अपडेट्स मिलेंगे
जितना स्पष्ट लिखेंगे, उतनी जल्दी सटीक समाधान मिलेगा

🔒 आपकी निजी जानकारी 100% सुरक्षित है। हम कोई स्पैम नहीं भेजते। केवल आपकी मिल से जुड़े आधिकारिक अपडेट्स शेयर किए जाते हैं।

✓
Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

यह आर्टिकल कैसा लगा?

📬 गन्ना अपडेट पाएं

MSP रेट, पर्ची कैलेंडर, सरकारी योजनाएं — सीधे आपके इनबॉक्स में