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2 नवंबर से रोहाना कलां मिल में पेराई शुरू: मंत्री ने डाली गन्ने की पहली ट्रॉली, किसानों को समय पर भुगतान का भरोसा

Aamir Raza Aamir Raza • Nov 2, 2026 • 6 min read
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2 नवंबर से रोहाना कलां मिल में पेराई शुरू: मंत्री ने डाली गन्ने की पहली ट्रॉली, किसानों को समय पर भुगतान का भरोसा
अंतिम अपडेट: November 2, 2026 2:05 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

मुजफ्फरनगर जिले के गन्ना किसानों के लिए 2 नवंबर की सुबह अच्छी खबर लेकर आई। जिले की रोहाना कलां चीनी मिल में पेराई सत्र 2026-27 का विधिवत शुभारंभ हो गया। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने मिल परिसर में फीता काटकर और कांटा पूजन के बाद गन्ने से भरी पहली ट्रॉली की तौल कराकर नए सत्र की शुरुआत की। इस शुभारंभ के साथ ही क्षेत्र के हजारों किसानों का इंतजार खत्म हो गया।

रोहाना कलां मिल का समय पर शुरू होना इसलिए भी अहम है क्योंकि इस बार पेराई का आगाज बारिश और गन्ना मूल्य की घोषणा में देरी के बीच हुआ है। अक्टूबर के आखिर की लगातार बारिश से गन्ने की कटाई करीब एक सप्ताह पिछड़ गई थी।

ढोल-नगाड़ों के बीच किसानों का स्वागत

पेराई सत्र के पहले दिन मिल परिसर में उत्सव जैसा माहौल नजर आया। पहला गन्ना लेकर पहुंचे किसानों का मिल प्रबंधन और जनप्रतिनिधियों ने फूल-मालाएं पहनाकर, तिलक लगाकर और मिठाई खिलाकर गर्मजोशी से स्वागत किया। नया पेराई सत्र समय से शुरू होने पर क्षेत्रीय किसानों के चेहरों पर खुशी साफ देखी गई।

शुभारंभ समारोह में गन्ना समिति के चेयरमैन अनिल त्यागी, मिल प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। अनिल त्यागी ने आश्वस्त किया कि पेराई के दौरान गन्ना तौल में पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी और तौल केंद्रों पर किसानों को कोई असुविधा नहीं होने दी जाएगी।

समय पर भुगतान का भरोसा

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है। चीनी मिलों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि पेराई का काम बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चले और किसानों को उनके गन्ना मूल्य का भुगतान तय समय सीमा के भीतर कराया जाए। मिल प्रबंधन ने भी भरोसा दिलाया कि मिल अपनी पूरी क्षमता के साथ संचालित होगी।

भुगतान का मुद्दा इस सत्र में और भी अहम है, क्योंकि पिछले सत्रों में कई मिलों पर बकाया को लेकर किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ा था। मेरठ की किनौनी मिल के मामले में किसानों ने करीब 2 करोड़ रुपये का बकाया पेराई से पहले चुकाने की मांग की थी। ऐसे में समय पर भुगतान का सार्वजनिक आश्वासन भरोसे की बात है, हालांकि इसकी असली परख आने वाले हफ्तों में भुगतान की रफ्तार से होगी।

वेस्ट यूपी में पेराई की तस्वीर

रोहाना कलां अकेली मिल नहीं है जो इस समय चल पड़ी है। बागपत की मलकपुर मिल में सबसे पहले पेराई शुरू हुई थी। इसके बाद 31 अक्टूबर को मोदीनगर में पेराई शुरू हुई, और 1 नवंबर को बुलंदशहर व साबितगढ़ की मिलों के साथ गंगा किसान सहकारी मिल (मोरना) में भी तैयारी थी।

गन्ना विभाग के मुताबिक 2 नवंबर को मवाना, दौराला, नंगला मल, रमाला, अनामिका और धामपुर मिलों में पेराई शुरू होनी है। सकौती 4 नवंबर से और किनौनी 5 नवंबर से चलेगी, जबकि मोहिउद्दीनपुर और टिकौला 7 नवंबर से शुरू करेंगी। बुढ़ाना, खतौली, मंसूरपुर और तितावी के भी नवंबर के पहले सप्ताह में चालू होने की संभावना है। सहारनपुर में शेरमऊ और खाईखेड़ी पहले ही चल पड़ी हैं, और देवबंद, रोहाना, गांगनौली व नानौता में 3 नवंबर से तैयारी है।

मुजफ्फरनगर में कुल 8 चीनी मिलें हैं, जो अक्टूबर के अंत से नवंबर के पहले सप्ताह के बीच क्रमबद्ध तरीके से चल रही हैं। जिले की सबसे बड़ी मिल त्रिवेणी इंजीनियरिंग, खतौली में भी 1-2 नवंबर से पेराई की तैयारी थी।

2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं

पेराई शुरू होने के बावजूद एक बड़ा सवाल अनुत्तरित है — गन्ने का मूल्य, यानी एसएपी। सरकार ने अभी तक पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य घोषित नहीं किया है। किसान लंबे समय से मूल्य बढ़ाने और पेराई शुरू होने से पहले इसकी घोषणा करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई घोषणा नहीं हुई है।

पिछले सत्र 2025-26 में अगैती का मूल्य 400 रुपये और पछेती का 390 रुपये प्रति क्विंटल था। इस बार माना जा रहा है कि चुनावी साल में सरकार मूल्य में 28 से 40 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी कर सकती है। वहीं, किसान न्यूनतम 500 और अधिकतम 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं, क्योंकि डीजल, खाद, मजदूरी और सिंचाई की लागत लगातार बढ़ी है।

किसानों को यह साफ समझ लेना चाहिए कि जब तक 2026-27 के एसएपी की आधिकारिक घोषणा नहीं हो जाती, तब तक पिछले सत्र का 400 रुपये वाला भाव ही संदर्भ है। नई दर की अटकलों को पक्का भाव न मानें।

बारिश ने बढ़ाई मुश्किल, कोल्हू पर भाव गिरा

इस बार पेराई की शुरुआत में मौसम ने भी किसानों की परीक्षा ली है। अक्टूबर के आखिर में हुई बारिश से खेतों में पानी भर गया और गन्ने की कटाई कम से कम एक सप्ताह पिछड़ गई। बारिश से गन्ने में चीनी की रिकवरी भी कम आ रही है, जिससे मिलें सत्र शुरू करने में देरी कर रही हैं।

मिलें न चलने का सीधा असर किसानों की जेब पर पड़ा है। मुजफ्फरनगर के किसानों के मुताबिक, कोल्हू पर गन्ने का दाम 380-400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास मिल रहा है, जबकि सीजन की शुरुआत में कोल्हू संचालकों ने 430-450 रुपये का भाव दिया था। यानी देरी से किसानों को प्रति क्विंटल 30-50 रुपये का नुकसान हो रहा है।

किसानों के लिए जरूरी बातें

रोहाना कलां क्षेत्र के किसानों को सलाह है कि वे पर्ची और आपूर्ति कार्यक्रम ध्यान से देखें और तय तारीख पर ही साफ-सुथरा गन्ना तौल केंद्र पर लेकर पहुंचें। गंदा या सूखा गन्ना तौल में कटौती और भुगतान में देरी का कारण बन सकता है। तौल के समय पर्ची पर दर्ज वजन और कांटे पर दिख रहे वजन का मिलान जरूर करें।

भुगतान को लेकर पर्चियों का रिकॉर्ड संभालकर रखें और पर्ची की फोटो मोबाइल में सेव करें, ताकि देरी होने पर आपके पास पक्का सबूत रहे। पर्ची, तौल और भुगतान की स्थिति ई-गन्ना ऐप व पोर्टल पर देखी जा सकती है। समस्या होने पर गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर संपर्क करें; एसएमएस के लिए शॉर्टकोड 51969 है।

आने वाले दिनों में दो बातों पर नजर रहेगी: सरकार 2026-27 का एसएपी कब और कितना घोषित करती है, और मिलें भुगतान तय समय में करती हैं या नहीं। उत्तर प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं, और नवंबर आगे बढ़ने के साथ लगभग सभी चल पड़ेंगी।

आपके सवाल

रोहाना कलां चीनी मिल का पेराई सत्र कब शुरू हुआ? 2 नवंबर 2026 को। कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने फीता काटकर और पहली ट्रॉली की तौल कराकर सत्र की शुरुआत की।

2026-27 के लिए गन्ने का एसएपी कितना है? घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में अगैती का एसएपी 400 रुपये और पछेती का 390 रुपये प्रति क्विंटल था।

मुजफ्फरनगर की बाकी मिलें कब चलेंगी? जिले की 8 मिलें अक्टूबर के अंत से नवंबर के पहले सप्ताह के बीच क्रमबद्ध तरीके से चल रही हैं।

गन्ना भुगतान में देरी हो तो कहां शिकायत करें? टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर। एसएमएस के लिए शॉर्टकोड 51969 है।

बारिश के बाद गन्ना आपूर्ति में क्या सावधानी बरतें? खेत सूखने के बाद ही गन्ना काटें; गीला गन्ना तौल में कटौती का कारण बन सकता है।

स्रोत: रॉयल बुलेटिन (2 नवंबर 2026), नवभारत टाइम्स (30 अक्टूबर 2026), रूरल वॉयस (31 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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