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22 अक्टूबर को होगी नवाबगंज चीनी मिल की नीलामी: बिजली कटी, मिल सील — 70 करोड़ गन्ना बकाया चुकाने की आस

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 11, 2026 • 6 min read
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22 अक्टूबर को होगी नवाबगंज चीनी मिल की नीलामी: बिजली कटी, मिल सील — 70 करोड़ गन्ना बकाया चुकाने की आस
अंतिम अपडेट: October 11, 2026 6:59 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

नवाबगंज/बरेली (CaneUp ब्यूरो — 11 अक्टूबर 2026): बरेली के गन्ना किसानों के लिए पिछले दस दिनों में सबसे बड़ी राहत की खबर नवाबगंज तहसील से आई है। तीन साल से किसानों का करीब 70 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान दबाए बैठी ओसवाल चीनी मिल को प्रशासन ने पूरी तरह सील कर दिया है। मिल की बिजली काट दी गई, कर्मचारियों और उनके परिवारों को परिसर से बाहर कर दिया गया और मिल मालिक के आवास पर भी ताला जड़ दिया गया। अब इस मिल की नीलामी की तारीख तय हो गई है — 22 अक्टूबर को नवाबगंज तहसील परिसर में नीलामी होगी, और इसमें सीतापुर, बुलंदशहर और महाराष्ट्र के बड़े औद्योगिक समूहों के शामिल होने की उम्मीद है।

यह कार्रवाई एक अक्टूबर को एसडीएम नवाबगंज सचिन यादव और जिला गन्ना अधिकारी के नेतृत्व में राजस्व तथा गन्ना विभाग की संयुक्त टीम ने की। बिजली काटने और सभी कर्मियों को बाहर निकालने के बाद मिल को सील कर कब्जे में ले लिया गया, और नीलामी का नोटिस मिल के गेट पर चस्पा कर दिया गया।

सीलिंग के दिन मिल में क्या-क्या हुआ

जागेश्वर न्यूज़ और लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्टों के अनुसार कार्रवाई के दौरान टीम ने पहले मिल परिसर का निरीक्षण किया। मिल में रहने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों को आवास खाली करने के निर्देश दिए गए। मिल मालिक के आवास को भी सील किया गया। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया कि नीलामी प्रक्रिया पूरी होने तक बिना अनुमति किसी भी व्यक्ति को मिल परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

मिल परिसर के भीतर स्थित धार्मिक स्थलों के लिए प्रशासन ने अलग व्यवस्था की है — गुरुद्वारे के जत्थेदार और मंदिर के पुजारियों को धार्मिक कार्यों के लिए आने-जाने की अनुमति रहेगी, और सुरक्षा के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया है। कार्रवाई के दौरान जिला गन्ना अधिकारी दिलीप कुमार सिंह, तहसीलदार सतेंद्र कटियार और नायब तहसीलदार शुभम पांडेय समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।

22 अक्टूबर की नीलामी: प्रचार-प्रसार जोरों पर

नीलामी की जानकारी अधिक से अधिक संभावित खरीदारों तक पहुंचाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार हो रहा है — तहसील परिसर, बरेली कलेक्ट्रेट, ओसवाल चीनी मिल के गेट और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बैनर लगाए गए हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि सीतापुर, बुलंदशहर और महाराष्ट्र के बड़े औद्योगिक समूह नीलामी में भाग लेंगे; जितने ज्यादा गंभीर बोलीदाता आएंगे, किसानों के बकाए की वसूली उतनी ही पक्की होगी। नीलामी से प्राप्त राशि से सबसे पहले किसानों के गन्ना मूल्य के बकाए का भुगतान किया जाएगा — यही रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) प्रक्रिया का मकसद है, जिसके तहत मिल की भूमि और संपत्तियों की वसूली की कार्रवाई पहले ही शुरू की जा चुकी है।

तीन साल पुराना 70 करोड़ का बकाया: साल-दर-साल का हिसाब

किसानों का यह बकाया एक रात में नहीं बना। पेराई सत्र 2023-24 के दौरान मिल पर किसानों का कुल 107.12 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान बकाया था। मिल प्रबंधन ने इसमें से 91.64 करोड़ रुपये तो चुकाए, लेकिन 15.48 करोड़ रुपये अटक गए। पेराई सत्र 2024-25 में स्थिति और बिगड़ी — मिल ने किसानों से 39.45 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा, लेकिन एक रुपये का भी भुगतान नहीं किया। इस तरह मूल बकाया राशि बढ़कर 54.93 करोड़ रुपये हो गई, और जब इसमें विलंब की अवधि का ब्याज जोड़ा गया तो पूरा आंकड़ा ब्याज सहित करीब 70 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। एक स्थानीय रिपोर्ट में ब्याज सहित कुल बकाया करीब 74 करोड़ रुपये भी बताया गया है — अंतर ब्याज की गणना की अवधि का है, लेकिन मूल बकाया और तीन साल की देरी के तथ्य दोनों रिपोर्टों में एक जैसे हैं।

नियमानुसार मिल को गन्ना खरीद के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है। देरी होने पर विलंब की अवधि का ब्याज किसान को देय बनता है। तीन साल की लंबी देरी ही इस बकाए को इतना बड़ा बना गई — बकाया की लड़ाई में ब्याज का हिसाब किसानों का सबसे बड़ा हथियार है, और इसीलिए नीलामी से मिली राशि में ब्याज का हिस्सा भी किसानों को मिलना चाहिए।

180 करोड़ का मूल्यांकन: किसानों के लिए सुरक्षा कवच

निवेश की नजर से देखें तो किसानों की स्थिति मजबूत है। करीब दो सप्ताह पहले पुणे के वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट की तीन सदस्यीय तकनीकी टीम ने मिल की संपत्तियों का विस्तृत मूल्यांकन किया था, जिसमें मिल की कीमत करीब 180 करोड़ रुपये आंकी गई। किसानों का करीब 70 करोड़ का बकाया इस मूल्यांकन का लगभग 40 प्रतिशत ही बैठता है।

इसका सीधा मतलब यह है कि नीलामी से मिली राशि किसानों का बकाया चुकाने के लिए पर्याप्त होनी चाहिए — इसीलिए किसान संगठनों को भरोसा है कि इस बार उनका पैसा नहीं डूबेगा। जिलाधिकारी ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एसडीएम नवाबगंज सचिन यादव की अध्यक्षता में एक कमेटी भी गठित की है।

एफआईआर, आरसी, कुर्की — और अब नीलामी

यह पहली बार नहीं है जब प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। इससे पहले शासन के निर्देश पर मिल प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई, फिर रिकवरी सर्टिफिकेट जारी कर चीनी मिल की जमीन भी कुर्क कराई गई — लेकिन भुगतान नहीं हुआ। पिछले पेराई सत्र में स्थिति यहां तक पहुंच गई कि मिल को गन्ना ही आवंटित नहीं किया गया, यानी मिल ने पेराई ही नहीं की। प्रशासन अब मान चुका है कि मौजूदा प्रबंधन से भुगतान की उम्मीद नहीं बची — 22 अक्टूबर की नीलामी इसी रास्ते का निर्णायक कदम है।

किसानों को अब क्या करना चाहिए

नवाबगंज क्षेत्र के जिन किसानों का भुगतान बकाया है, वे अपनी पर्ची, तुल पर्ची और भुगतान से जुड़े सभी कागजात संभालकर रखें — नीलामी से मिली राशि के वितरण के समय यही दस्तावेज आधार बनेंगे। शिकायत के लिए गन्ना विभाग के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर संपर्क करें, या 51969 पर एसएमएस भेजें। पेराई सत्र 2026-27 के लिए पर्ची और सर्वे रिकॉर्ड (रकबा, किस्म) अपडेट रखें और बैंक खाता आधार से जुड़ा तथा सक्रिय रखें, ताकि भुगतान में देरी न हो।

जवाब जानिए

प्रश्न: नवाबगंज की ओसवाल चीनी मिल की नीलामी कब और कहां होगी? उत्तर: 22 अक्टूबर को नवाबगंज तहसील परिसर में। नीलामी का नोटिस मिल के गेट पर चस्पा कर दिया गया है।

प्रश्न: मिल पर किसानों का कितना बकाया है? उत्तर: मूल बकाया 54.93 करोड़ रुपये है, जो पेराई सत्र 2023-24 और 2024-25 के भुगतान से बना। तीन साल के विलंब का ब्याज जोड़ने पर यह राशि करीब 70 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

प्रश्न: मिल को सील क्यों किया गया? उत्तर: एफआईआर, रिकवरी सर्टिफिकेट और जमीन कुर्की के बावजूद भुगतान नहीं हुआ। एक अक्टूबर को एसडीएम सचिन यादव के नेतृत्व में टीम ने बिजली काटकर और कर्मचारियों को बाहर निकालकर मिल सील कर दी।

प्रश्न: क्या नीलामी से किसानों को पूरा पैसा मिलेगा? उत्तर: मिल का मूल्यांकन करीब 180 करोड़ रुपये हुआ है, जबकि बकाया करीब 70 करोड़ है। यानी नीलामी की राशि किसानों का बकाया चुकाने के लिए पर्याप्त होनी चाहिए, और वसूली में किसानों के भुगतान को प्राथमिकता मिलेगी।

प्रश्न: नीलामी में कौन-कौन भाग ले सकता है? उत्तर: प्रशासन ने व्यापक प्रचार किया है — सीतापुर, बुलंदशहर और महाराष्ट्र के बड़े औद्योगिक समूहों के शामिल होने की उम्मीद है। नीलामी की शर्तें तहसील प्रशासन से प्राप्त की जा सकती हैं।

प्रश्न: बकाए की शिकायत कहां दर्ज कराएं? उत्तर: टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर कॉल करें, 51969 पर एसएमएस भेजें, या जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं।

स्रोत: लाइव हिंदुस्तान (बरेली), जागेश्वर न्यूज़

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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