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₹180 करोड़ में बिकेगी नवाबगंज चीनी मिल: 3 साल से फंसे ₹70 करोड़ गन्ना बकाए का भुगतान अब खरीदार से होगा

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 8, 2026 • 6 min read
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₹180 करोड़ में बिकेगी नवाबगंज चीनी मिल: 3 साल से फंसे ₹70 करोड़ गन्ना बकाए का भुगतान अब खरीदार से होगा
अंतिम अपडेट: October 8, 2026 12:02 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

बरेली जिले के गन्ना किसानों के लिए बड़ी खबर है। प्रशासन ने नवाबगंज स्थित चीनी मिल को पूरी तरह बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुणे की तकनीकी टीम ने इस मिल का मूल्यांकन 180 करोड़ रुपये किया है, और अब संभावित खरीदारों की तलाश तेज कर दी गई है। इस पूरी कवायद का मकसद एक ही है — किसानों का लगभग 70 करोड़ रुपये का बकाया गन्ना भुगतान चुकाना, जो तीन साल से अटका हुआ है।

यह मिल बरेली की ओसवाल चीनी मिल के नाम से जानी जाती है। बकाया दिलाने के लिए प्रशासन तीन साल से मिल प्रबंधन पर दबाव बना रहा था, लेकिन एक रुपये का भी भुगतान नहीं हो सका। जब एफआईआर, आरसी और जमीन कुर्की जैसे कड़े कदम भी बेअसर रहे, तो अब सरकार ने अंतिम रास्ता चुना है — मिल बेचकर किसानों का हिसाब चुकता करना।

70 करोड़ का बकाया कैसे बना: साल-दर-साल का हिसाब

किसानों का बकाया एक रात में नहीं बना, यह धीरे-धीरे बढ़ता गया। पेराई सत्र 2023-24 के दौरान मिल पर किसानों का कुल 107.12 करोड़ रुपये बकाया था। मिल प्रबंधन ने इसमें से 91.64 करोड़ रुपये का भुगतान किया, लेकिन फिर भी 15.48 करोड़ रुपये की राशि अटकी रह गई।

इसके बाद पेराई सत्र 2024-25 में स्थिति और बिगड़ गई। मिल ने किसानों से 39.45 करोड़ रुपये का गन्ना तो खरीदा, लेकिन इस बार एक भी रुपये का भुगतान नहीं किया। इस तरह मूल बकाया राशि बढ़कर सीधे 54.93 करोड़ रुपये हो गई। जब इस मूल बकाए में ब्याज की राशि जोड़ी गई, तो पूरा आंकड़ा बढ़कर लगभग 70 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। दोनों ही प्रकाशनों की रिपोर्टों में यही आंकड़े दर्ज हैं, जो इस खबर की पुष्टि करते हैं।

नियमानुसार गन्ना खरीद के 14 दिन के भीतर मिल को भुगतान करना होता है। देरी पर विलंब की अवधि का ब्याज भी किसान को देय बनता है। तीन साल की लंबी देरी ने ही 54.93 करोड़ के मूल बकाए को करीब 70 करोड़ तक पहुंचा दिया — बकाया की लड़ाई में ब्याज का हिसाब सबसे बड़ा हथियार है।

180 करोड़ का मूल्यांकन और खरीदार की तलाश

पहले मिल की संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन फिर पुणे के वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट की तीन सदस्यीय तकनीकी टीम ने मिल का विस्तृत मूल्यांकन किया और इसका मूल्य 180 करोड़ रुपये आंका। इसी मूल्यांकन के आधार पर अब पूरी मिल बेचने का रास्ता खुला है।

जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने बिक्री की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उप जिलाधिकारी नवाबगंज सचिन यादव की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर दी है। प्रशासनिक अधिकारी अब चीनी मिल के लिए खरीदार तलाश रहे हैं। जिला गन्ना अधिकारी डीके सैनी का कहना है कि अब मिल की जमीन नहीं, बल्कि पूरी चीनी मिल की बिक्री की प्रक्रिया चल रही है, और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही चीनी मिल बिक जाएगी।

180 करोड़ के मूल्यांकन के मुकाबले किसानों का 70 करोड़ का बकाया करीब 40 प्रतिशत बैठता है। यानी मिल बिकने पर किसानों का पूरा बकाया चुकाने के बाद भी काफी राशि बचेगी — इससे किसानों को भरोसा है कि इस बार उनका पैसा नहीं डूबेगा।

एफआईआर, आरसी, जमीन कुर्क — पहले क्यों नहीं मिला भुगतान

शासन के निर्देश पर मिल प्रबंधन और अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इसका भी कोई असर नहीं पड़ा तो आरसी जारी कर चीनी मिल की जमीन भी कुर्क करा ली गई — फिर भी भुगतान नहीं हुआ। पिछले पेराई सत्र में स्थिति यहां तक पहुंच गई कि मिल को गन्ना ही आवंटित नहीं किया गया, यानी मिल ने पेराई ही नहीं की। किसानों के लिए इसका मतलब साफ है — प्रशासन ने माना कि मौजूदा प्रबंधन से भुगतान की उम्मीद नहीं बची, इसलिए संपत्ति बेचकर पैसा वसूला जाएगा।

किसानों के खातों तक पैसा कैसे पहुंचेगा

मिल बिकने के बाद किसानों का पैसा उनके खातों तक कैसे पहुंचेगा? प्रक्रिया के अनुसार, बिक्री की राशि में से सबसे पहले किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाएगा, क्योंकि यह कानूनन प्राथमिकता वाली देनदारी होती है। किसानों को अपना गन्ना सर्वे रिकॉर्ड, बैंक खाता (सक्रिय और आधार से जुड़ा) और पर्ची-तौल पर्ची के कागजात तैयार रखने चाहिए — बकाया के दावे में यही दस्तावेज काम आएंगे।

पेराई सत्र से पहले का समय क्यों अहम है

यह घटनाक्रम ऐसे समय हो रहा है जब नया पेराई सत्र 2026-27 सिर पर है — पश्चिमी यूपी की मिलें करीब 10 दिन पहले, लगभग 20 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं। उत्तर प्रदेश में 122 चीनी मिलें हैं और सरकार का दावा है कि 2025-26 के 94.86 प्रतिशत से अधिक बकाए का भुगतान हो चुका है। फिर भी नवाबगंज जैसी मिलों के मामले बताते हैं कि कुछ जगह बकाया गंभीर बना हुआ है — नया सत्र शुरू होने से पहले पुराना बकाया चुकाना किसानों की सबसे बड़ी मांग है।

दूसरे जिलों के किसान क्या सीखें

नवाबगंज का मामला सिर्फ बरेली का नहीं — जिन किसानों की मिलों पर बकाया अटका है, उनके लिए यह मिसाल है। पहली सीख — 14 दिन से अधिक की देरी पर बनता ब्याज ही 54.93 करोड़ को 70 करोड़ तक ले गया, इसलिए ब्याज का हिसाब सबसे बड़ा हथियार है। दूसरी — शिकायत के रास्ते खुले रखें: टोल-फ्री 1800-121-3203, 1800-180-5129, एसएमएस 51969, और upcane.gov.in व ई-गन्ना ऐप पर पर्ची-भुगतान की स्थिति। तीसरी — सामूहिक दबाव काम करता है; तीन साल के प्रशासनिक दबाव के बाद ही बिक्री का फैसला हुआ।

आपके सवाल

सवाल: नवाबगंज चीनी मिल क्यों बेची जा रही है? जवाब: मिल पर किसानों का लगभग 70 करोड़ रुपये का गन्ना बकाया तीन साल से अटका है। एफआईआर, आरसी और जमीन कुर्की के बाद भी भुगतान नहीं हुआ, इसलिए प्रशासन ने मिल बेचकर बकाया चुकाने का फैसला किया है।

सवाल: मिल का मूल्यांकन किसने और कितना किया? जवाब: पुणे के वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट की तीन सदस्यीय तकनीकी टीम ने मिल का मूल्यांकन 180 करोड़ रुपये किया है। इसी आधार पर खरीदार की तलाश चल रही है।

सवाल: 70 करोड़ के बकाए का सालवार ब्यौरा क्या है? जवाब: 2023-24 में 107.12 करोड़ बकाया था, 91.64 करोड़ चुकाया गया, 15.48 करोड़ बचा। 2024-25 में 39.45 करोड़ का गन्ना खरीदा गया पर कोई भुगतान नहीं हुआ। मूल 54.93 करोड़ और ब्याज मिलाकर कुल लगभग 70 करोड़ बनता है।

सवाल: बिक्री की प्रक्रिया कौन देख रहा है? जवाब: जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने एसडीएम नवाबगंज सचिन यादव की अध्यक्षता में कमेटी गठित की है। जिला गन्ना अधिकारी डीके सैनी के अनुसार अब जमीन नहीं, पूरी मिल बेची जा रही है।

सवाल: क्या मिल बिकने पर किसानों को पूरा पैसा मिलेगा? जवाब: 180 करोड़ के मूल्यांकन के मुकाबले 70 करोड़ का बकाया करीब 40 प्रतिशत है, इसलिए पूरा बकाया चुकने की प्रबल संभावना है। गन्ना बकाया कानूनन प्राथमिकता वाली देनदारी होती है।

सवाल: किसान बकाया भुगतान की शिकायत कहां करें? जवाब: टोल-फ्री 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर, या 51969 पर एसएमएस से। upcane.gov.in और ई-गन्ना ऐप पर भी पर्ची और भुगतान की स्थिति देखी जा सकती है।

स्रोत: दैनिक जागरण (29 सितंबर 2026), डाइनामाइट न्यूज़ (30 सितंबर 2026); पेराई सत्र संदर्भ: चिनीमंडी/द टाइम्स ऑफ इंडिया

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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