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राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति ने गन्ने के रस से एथेनॉल उत्पादन को दी हरी झंडी — मिलों को प्रोत्साहन

Randhir Patil Randhir Patil Sep 1, 2026 3 min read
राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति ने गन्ने के रस से एथेनॉल उत्पादन को दी हरी झंडी — मिलों को प्रोत्साहन
अंतिम अपडेट: September 1, 2026 7:50 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

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नई दिल्ली / लखनऊ: केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति (NBCC) ने आगामी एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 (नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027) के लिए चीनी मिलों द्वारा गन्ने के सीधे रस (Sugarcane Juice/Syrup) और बी-हैवी शीरे (B-Heavy Molasses) से एथेनॉल उत्पादन पर लगे पूर्व प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाते हुए व्यापक आपूर्ति कोटे को अंतिम मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक की चीनी डिस्टिलरियों को भारी वित्तीय प्रोत्साहन मिलेगा।

समिति द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार, तेल विपणन कंपनियों (OMCs - इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) द्वारा जारी किए गए 950 करोड़ लीटर के वार्षिक एथेनॉल टेंडर में से लगभग 380 करोड़ लीटर एथेनॉल का आवंटन चीनी उद्योग (गन्ना रस व शीरा आधारित डिस्टिलरीज) के लिए आरक्षित किया गया है।

गन्ने के रस से बने एथेनॉल की खरीद दर ₹65.61 प्रति लीटर

पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बैठक के बाद बताया, “देश में पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) का लक्ष्य समय से पहले हासिल किया जा चुका है। अब हमारा ध्यान आगामी पेराई सत्र में चीनी के बफर स्टॉक और जैव ईंधन उत्पादन के बीच संतुलन बनाने पर है। गन्ने के सीधे रस से बनने वाले एथेनॉल के लिए तेल कंपनियां चीनी मिलों को ₹65.61 प्रति लीटर और बी-हैवी शीरे से बनने वाले एथेनॉल के लिए ₹60.73 प्रति लीटर का आकर्षक मूल्य भुगतान करेंगी।”

उत्तर प्रदेश डिस्टिलरीज एसोसिएशन (UPDA) के अध्यक्ष ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा एथेनॉल उत्पादक राज्य है, जिसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 200 करोड़ लीटर पार कर चुकी है। गन्ने के रस से एथेनॉल बनाने की स्पष्ट अनुमति मिलने से मिलों को पेराई सत्र के पहले दिन (15 अक्टूबर) से ही सीधे डिस्टिलरी चलाने का अवसर मिलेगा, जिससे मिलों के पास अतिरिक्त लिक्विडिटी (नकदी) रहेगी और किसानों का 14 दिन का भुगतान चक्र बिना किसी रुकावट के चलेगा।”

चीनी मिलों को समय से पहले पेराई शुरू करने का निर्देश

एनबीसीसी के इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के गन्ना आयुक्त ने राज्य की सभी 85 डिस्टिलरी-युक्त चीनी मिलों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने एथेनॉल भंडारण टैंकों और ऑटोमैटिक ब्लेंडिंग इकाइयों का वार्षिक ऑडिट 30 सितंबर तक पूरा कर लें।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि चालू सत्र में उत्तर प्रदेश में लगभग 18 से 20 लाख टन चीनी के समतुल्य सुक्रोज को सीधे एथेनॉल में डायवर्ट किया जाएगा। इससे घरेलू बाजार में चीनी का अतिरिक्त अधिशेष नहीं बनेगा, चीनी के दाम स्थिर रहेंगे और मिलों की वित्तीय सेहत मजबूत बनी रहेगी।

विदेशी मुद्रा की बचत और हरित ऊर्जा का विस्तार

पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने पिछले 10 वर्षों में एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के माध्यम से ₹1.97 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा (क्रूड ऑयल आयात बिल) की बचत की है और 500 लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन कम किया है।

गन्ने के रस से एथेनॉल बनाने की यह खुली छूट देश को आगामी वर्षों में E27 और E30 (पेट्रोल में 30% एथेनॉल मिश्रण) के नए राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर करेगी, जिसका सीधा आर्थिक लाभ देश के 5 करोड़ से अधिक गन्ना किसानों को अतिरिक्त आमदनी के रूप में मिलेगा।

Randhir Patil
लेखक

Randhir Patil

गन्ना उद्योग विशेषज्ञ — ChiniMandi पर 425+ लेख। गन्ना खेती, शुगर मिल, MSP रेट, सरकारी योजनाओं पर विश्वसनीय जानकारी।

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