अक्टूबर में 8.45 लाख टन चीनी बनी, पिछले साल से साढ़े आठ गुना ज्यादा — यूपी को नवंबर में 4.17 लाख टन बिक्री कोटा मिला

नए गन्ना पेराई सीजन 2026-27 की शुरुआत चीनी उद्योग के लिए रिकॉर्ड तोड़ रही है। अक्टूबर 2026 में देशभर में 8.45 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ, जो पिछले साल इसी महीने के महज 1 लाख टन के मुकाबले साढ़े आठ गुना ज्यादा है। अक्टूबर के अंत तक देश की 152 चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी थी, जबकि पिछले साल इसी समय तक सिर्फ 31 मिलें ही चल पाई थीं।
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए इस खबर का दूसरा पहलू भी अहम है। प्रदेश की तीन मिलों में अक्टूबर के दौरान पेराई शुरू होने के बावजूद महीने भर में चीनी का उत्पादन दर्ज नहीं हुआ। वहीं केंद्र सरकार ने नवंबर के पहले पखवाड़े के लिए चीनी बिक्री का कोटा जारी कर दिया है, जिसमें उत्तर प्रदेश की मिलों को 4.17 लाख टन चीनी बेचने की अनुमति मिली है।
अक्टूबर के आंकड़े एक नजर में
अक्टूबर में देशभर की 152 मिलों ने कुल 105.43 लाख टन गन्ने की पेराई की और उससे 8.45 लाख टन चीनी तैयार हुई। पिछले साल अक्टूबर में सिर्फ 1 लाख टन चीनी बनी थी, यानी उत्पादन में 7.45 लाख टन की बढ़ोतरी हुई है। चीनी की औसत रिकवरी दर अक्टूबर में 8.04 प्रतिशत रही।
महाराष्ट्र आगे, यूपी में अब तक शून्य उत्पादन
अक्टूबर के रिकॉर्ड उत्पादन की सबसे बड़ी वजह महाराष्ट्र की मिलें रहीं। राज्य की 123 मिलों ने समय से पहले पेराई शुरू की और अकेले 7.20 लाख टन चीनी तैयार की। यह देश के कुल अक्टूबर उत्पादन का 85 प्रतिशत से भी ज्यादा है। महाराष्ट्र में मिलों के जल्दी चलने से पूरे देश के आंकड़े ऊपर गए।
कर्नाटक में अक्टूबर के दौरान सिर्फ 7 मिलों ने पेराई की, लेकिन उन्होंने 8.33 लाख टन गन्ना पेरकर 80,000 टन चीनी बनाई। वहां की रिकवरी दर 9.6 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है। उत्तर प्रदेश की तस्वीर इससे अलग है: अक्टूबर में प्रदेश की तीन मिलों में पेराई शुरू हुई, लेकिन महीने भर में चीनी का उत्पादन दर्ज नहीं हुआ। पिछले साल अक्टूबर में प्रदेश की 10 मिलों ने 10,000 टन चीनी बनाई थी। यूपी की ज्यादातर मिलें नवंबर के पहले और दूसरे सप्ताह में चालू हो रही हैं, इसलिए प्रदेश का उत्पादन नवंबर के आंकड़ों में दिखेगा।
नवंबर का कोटा: यूपी को 4.17 लाख टन
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने नवंबर के पहले पखवाड़े, यानी 1 से 15 नवंबर तक, घरेलू बाजार में बिक्री के लिए 13 लाख टन चीनी का कोटा तय किया है। यह कोटा देश की 587 चीनी मिलों के लिए जारी हुआ है। इसमें महाराष्ट्र को 4.78 लाख टन, उत्तर प्रदेश को 4.17 लाख टन और कर्नाटक को 2.63 लाख टन मिला है। बाकी राज्यों में करीब 1.4 लाख टन का कोटा बांटा गया है।
कोटा व्यवस्था का मकसद बाजार में चीनी की आपूर्ति संतुलित रखना और दामों में अचानक उछाल रोकना है।
कोटे से ऊपर बेचने की छूट: 13.60 लाख टन अतिरिक्त
केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए मिलों को एक और बड़ी राहत दी है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने 30 अक्टूबर को जारी आदेश में कहा है कि अक्टूबर और नवंबर में पेराई शुरू करने वाली मिलें 15 नवंबर तक बनी चीनी को तय कोटे से ऊपर भी बेच सकेंगी। इसके लिए कुल 13.60 लाख टन चीनी की अतिरिक्त मात्रा तय की गई है।
यह सुविधा अक्टूबर में पेराई शुरू कर चुकी मिलों और नवंबर में पेराई शुरू करने वाली मिलों, दोनों को दी गई है। सरकार ने इसके लिए मिलवार सूची भी जारी की है। किसानों के लिए इस छूट का मतलब यह है कि मिलों के पास चीनी बेचकर नकदी जुटाने का ज्यादा मौका रहेगा, जिससे गन्ना मूल्य का भुगतान समय पर होने की संभावना बढ़ जाती है।
चीनी के दाम और किसान पर असर
रिकॉर्ड उत्पादन और पर्याप्त कोटे का सीधा असर बाजार पर पड़ता है। जब बाजार में चीनी की आपूर्ति भरपूर रहती है, तो खुदरा दाम स्थिर रहते हैं। किसानों के नजरिए से स्थिर दाम का मतलब है कि मिलों पर अचानक घाटे का दबाव नहीं बनता और भुगतान चक्र चलता रहता है।
एसएपी का सवाल: 2026-27 की घोषणा अभी बाकी
पेराई सत्र शुरू होने के बावजूद उत्तर प्रदेश में गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य, यानी एसएपी, की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती किस्म का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का 390 रुपये प्रति क्विंटल था। यह आंकड़ा पिछले सत्र का है, इसे नए सत्र का घोषित भाव न समझें। किसान संगठनों ने भाव बढ़ाने की मांग तेज कर दी है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने गन्ने के दाम में कम से कम 100 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की मांग की है और भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने को कहा है। बागपत में किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर गन्ने का भाव 550 रुपये प्रति क्विंटल से कम हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
यूपी के किसानों के लिए इसका क्या मतलब है
प्रदेश के 47 लाख से अधिक किसान चीनी मिलों को गन्ना बेचते हैं और चालू पेराई सत्र में राज्य के 28.14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती की गई है। यूपी की 122 चीनी मिलों में से अब तक सिर्फ 9 में पेराई शुरू हुई है और 33 मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी किया है।
किसानों के लिए इस समय तीन बातों पर नजर रखना जरूरी है: अपनी मिल की पेराई और इंडेंट की तारीख, ताकि गन्ना समय पर तुले और खेत रबी की बुवाई के लिए खाली हो सके; एसएपी की घोषणा, क्योंकि उसी से तय होगा कि इस सत्र के गन्ने का भाव क्या मिलेगा; और भुगतान की स्थिति, क्योंकि नवंबर में चीनी की बिक्री बढ़ने से मिलों की नकदी सुधरने की उम्मीद है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अक्टूबर 2026 में देश में कितनी चीनी बनी? अक्टूबर 2026 में देशभर में 8.45 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ, जबकि पिछले साल इसी महीने सिर्फ 1 लाख टन चीनी बनी थी।
नवंबर के पहले पखवाड़े के लिए चीनी का बिक्री कोटा कितना है? खाद्य मंत्रालय ने 1 से 15 नवंबर के लिए 13 लाख टन चीनी का बिक्री कोटा जारी किया है। इसमें यूपी को 4.17 लाख टन, महाराष्ट्र को 4.78 लाख टन और कर्नाटक को 2.63 लाख टन मिला है।
यूपी में अक्टूबर में चीनी का उत्पादन क्यों नहीं दर्ज हुआ? अक्टूबर के दौरान यूपी की सिर्फ तीन मिलों में पेराई शुरू हुई थी। प्रदेश की ज्यादातर मिलें नवंबर के पहले और दूसरे सप्ताह में चालू हो रही हैं, इसलिए प्रदेश का उत्पादन नवंबर के आंकड़ों में दिखेगा।
क्या मिलें कोटे से ज्यादा चीनी बेच सकती हैं? हां, सरकार ने 30 अक्टूबर के आदेश से मिलों को 15 नवंबर तक बनी चीनी को तय कोटे से ऊपर बेचने की अनुमति दी है। इसके लिए 13.60 लाख टन की अतिरिक्त मात्रा तय की गई है।
2026-27 के लिए यूपी में गन्ने का एसएपी घोषित हुआ है? नहीं, 2026-27 सत्र के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती किस्म का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल था।
स्रोत: दैनिक जागरण, किसान इंडिया, गांव जंक्शन, कृषक जगत, रूरल वॉयस, ट्रैक्टर जंक्शन, अमर उजाला
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