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प्रति एकड़ ₹15,000 गन्ना इनपुट सब्सिडी: ओडिशा सरकार का बड़ा ऐलान — यूपी के किसानों को भी जानना चाहिए

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 7, 2026 • 6 min read
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प्रति एकड़ ₹15,000 गन्ना इनपुट सब्सिडी: ओडिशा सरकार का बड़ा ऐलान — यूपी के किसानों को भी जानना चाहिए
अंतिम अपडेट: October 7, 2026 1:24 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

भुवनेश्वर में राज्य की प्राथमिक कृषि साख समितियों के ‘संबंध’ अभियान के मंच से ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने गन्ना किसानों के लिए ऐसा ऐलान किया, जो पूरे देश के गन्ना किसानों का ध्यान खींच रहा है। सहकारी चीनी मिलों के दायरे में आने वाले गन्ना किसानों को अब प्रति एकड़ 15,000 रुपये की इनपुट सब्सिडी मिलेगी। यह घोषणा 5 अक्टूबर को हुई और योजना का नाम रखा गया है — “सहकारी चीनी उद्योग क्षेत्रों में गन्ना उत्पादन प्रोत्साहन”।

यह खबर उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए इसलिए अहम है, क्योंकि यहां किसानों को राहत भाव (SAP/FRP) के रूप में मिलती है, जबकि ओडिशा ने सीधे खेती की लागत घटाने वाला रास्ता चुना है। बीज, खाद और कीटनाशक पर खर्च कम होगा तो गन्ना उगाना आर्थिक रूप से आसान होगा — यही मॉडल अब चर्चा में है।

क्या है ₹15,000 प्रति एकड़ इनपुट सब्सिडी की योजना

कृषक जगत की 5 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा सरकार ने राज्य के सहकारी चीनी मिलों के दायरे में आने वाले गन्ना किसानों के लिए इनपुट सब्सिडी बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री ने बड़ंबा और आसिका सहकारी चीनी मिल क्षेत्रों के किसानों के लिए प्रति एकड़ 15,000 रुपये की इनपुट सब्सिडी वाली योजना की घोषणा की। इनपुट सब्सिडी का मतलब है खेती के लिए जरूरी आदान — बीज, खाद और कीटनाशक — पर सीधी आर्थिक मदद।

सरकार के मुताबिक यह योजना केवल पैसा बांटने की योजना नहीं है। इसके साथ ही अधिक चीनी मात्रा वाली बेहतर बीज किस्में भी उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि मिलों की चीनी रिकवरी दर में सुधार हो सके। ज्यादा रिकवरी दर का सीधा फायदा मिल और किसान दोनों को मिलता है, क्योंकि गन्ने की कीमत भी उसकी चीनी मात्रा से जुड़ी होती है।

‘संबंध’ अभियान: जिस मंच से हुई घोषणा

यह घोषणा मुख्यमंत्री ने राज्यभर में प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) और बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों (LAMPCS) के लिए शुरू किए गए ‘संबंध’ नामक सदस्यता अभियान के मंच से की। इस अभियान का सीधा मकसद ज्यादा से ज्यादा किसानों को इन सहकारी ढांचों से जोड़ना है। सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण क्षेत्र के हर घर से कम से कम एक व्यक्ति सहकारी समिति का सदस्य बने।

सहकारी ढांचे की इस पुनर्रचना में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है — पहली बार राज्य की प्राथमिक कृषि साख समितियों के किसान सदस्यों को सीधे लाभांश का भुगतान शुरू किया गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए लाभांश का वितरण 322 समितियों में शुरू हो चुका है, और आगे चलकर 500 से ज्यादा समितियों के जरिये 8 लाख से अधिक किसानों तक इसका फायदा पहुंचेगा। सदस्यता को आसान बनाने के लिए एक समर्पित मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया गया है, ताकि कागजी प्रक्रिया कम हो और डिजिटल नामांकन हो सके। गन्ना किसानों के लिए इनपुट सब्सिडी इसी बड़े सहकारी नेटवर्क के भीतर दी जा रही पहलों का हिस्सा है।

बड़ंबा चीनी मिल का पुनरुद्धार: 360 करोड़ का निवेश

ओडिशा सरकार की इस योजना का दूसरा बड़ा पहलू है बंद पड़ी बड़ंबा सहकारी चीनी मिल को फिर से चालू करना। एफएनबी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन पोटाश लिमिटेड ने ओडिशा सरकार के साथ समझौता किया है, जिसके तहत बड़ंबा सहकारी चीनी मिल के पुनरुद्धार में करीब 360 करोड़ रुपये का निवेश होगा। यह मिल 15 साल से ज्यादा समय से बंद पड़ी है।

परियोजना के तहत कटक जिले में स्थित बड़ंबा चीनी मिल का आधुनिकीकरण और विस्तार होगा। चालू होने के बाद मिल की पेराई क्षमता 3,500 टन प्रतिदिन होगी। इसके साथ ही 16 मेगावाट का को-जनरेशन बिजली संयंत्र और रोजाना 10 टन का बायो-सीएनजी संयंत्र भी बनेगा। यह समझौता केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुआ है। परियोजना से बड़ंबा ब्लॉक के करीब 10,000 किसानों को सीधा फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि गन्ने की खेती दोबारा शुरू होगी और रोजगार के अवसर बनेंगे।

आसिका चीनी मिल की क्षमता बढ़ेगी

सरकार की योजना में दूसरी मिल — आसिका सहकारी चीनी मिल — की क्षमता को मजबूत करना भी शामिल है। दोनों कारखानों के कमान क्षेत्रों के किसानों को लक्षित प्रोत्साहन दिया जाएगा। उद्देश्य स्पष्ट है: गन्ने की खेती बढ़े और मिलों को गन्ने की उपलब्धता सुनिश्चित हो।

यूपी के गन्ना किसानों के लिए क्या मतलब

अब सबसे अहम सवाल — यह खबर उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए क्यों मायने रखती है? पहला, यह एक तुलना का मौका है। यूपी में किसानों को राहत मुख्य रूप से गन्ने के भाव (SAP) के जरिये मिलती है — 2025-26 सत्र में अगेती किस्म का SAP ₹400 प्रति क्विंटल था, और 2026-27 सत्र के SAP की घोषणा अभी बाकी है। ओडिशा का मॉडल इसके ठीक उल्टा है: भाव के बजाय खेती की लागत सीधे घटाओ। दोनों के अपने-अपने फायदे हैं — भाव बढ़ने से आमदनी बढ़ती है, लागत घटने से मुनाफा बढ़ता है।

दूसरा, ओडिशा का ‘संबंध’ जैसा सहकारी ढांचा यूपी के लिए भी सबक है। यूपी में भी सहकारी चीनी मिलें और गन्ना समितियां हैं, लेकिन समितियों को लाभांश बांटने वाले संस्थान बनाने का विचार नया है। तीसरा, बंद पड़ी मिलों के पुनरुद्धार का मॉडल — निजी कंपनी के साथ समझौता करके 360 करोड़ का निवेश — यूपी की उन बंद या बीमार मिलों के लिए भी रास्ता दिखाता है, जिनके दोबारा चालू होने की मांग किसान लंबे समय से कर रहे हैं।

यह भी समझना जरूरी है कि ओडिशा की यह योजना फिलहाल दो मिल क्षेत्रों तक सीमित है, पूरे राज्य के लिए नहीं। इसलिए इसे सीधे यूपी से तुलना करना जल्दबाजी होगी, लेकिन नीति की दिशा — लागत घटाओ, बेहतर बीज दो, बंद मिलें चालू करो — हर गन्ना किसान के हित में है, चाहे वह किसी भी राज्य का हो।

आपके सवाल

क्या ओडिशा की यह सब्सिडी यूपी के किसानों को भी मिलेगी?

नहीं। यह योजना ओडिशा सरकार की है और केवल ओडिशा के बड़ंबा और आसिका सहकारी चीनी मिल क्षेत्रों के गन्ना किसानों के लिए घोषित की गई है। यूपी के किसानों को राज्य सरकार की अपनी योजनाओं और SAP व्यवस्था का लाभ मिलता है।

इनपुट सब्सिडी और भाव (SAP) में क्या अंतर है?

इनपुट सब्सिडी खेती की लागत घटाती है — बीज, खाद और कीटनाशक पर सीधी मदद मिलती है। SAP गन्ने के बिक्री भाव को तय करता है, यानी उपज बेचने पर मिलने वाली रकम बढ़ती है। एक लागत घटाता है, दूसरा आमदनी बढ़ाता है।

बड़ंबा चीनी मिल कब से चालू होगी?

मिल 15 साल से ज्यादा समय से बंद है। इंडियन पोटाश के साथ हुए समझौते के बाद आधुनिकीकरण का काम शुरू होगा। चालू होने की कोई निश्चित तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।

‘संबंध’ अभियान क्या है?

यह ओडिशा सरकार का सहकारी सदस्यता अभियान है, जिसका लक्ष्य हर ग्रामीण घर से कम से कम एक व्यक्ति को प्राथमिक कृषि साख समिति (PACS) या बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति (LAMPCS) से जोड़ना है। इसके साथ ही समितियों के लाभांश का सीधा भुगतान भी किसान सदस्यों को शुरू किया गया है।

क्या यूपी में भी ऐसी इनपुट सब्सिडी की मांग उठ सकती है?

संभव है। किसान संगठन अक्सर लागत घटाने की मांग करते हैं। फिलहाल यूपी में ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई है, और 2026-27 सत्र के SAP का इंतजार है।

स्रोत: कृषक जगत (5 अक्टूबर 2026), कालिंगा टीवी, चिनीमंडी, एफएनबी न्यूज

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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