चीनी मिलों को एथेनॉल का बड़ा बूस्ट — OMCs ने जारी किया 280 करोड़ लीटर का टेंडर, यूपी की 85 डिस्टिलरियों को भारी आवंटन

मुख्य बिंदु (Quick Summary): भारत सरकार के राष्ट्रीय जैव ईंधन कार्यक्रम और 20% एथेनॉल मिश्रण (E20) लक्ष्य को रफ्तार देने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने आगामी एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 के पहले चक्र के लिए 280 करोड़ लीटर का मेगा टेंडर आवंटित कर दिया है। इसमें उत्तर प्रदेश की 85 चीनी मिल डिस्टिलरियों को लगभग 120 करोड़ लीटर का विशाल आवंटन मिला है, जिससे मिलों की नकदी स्थिति मजबूत होगी और किसानों को समय पर भुगतान मिलेगा।
नई दिल्ली/लखनऊ (CaneUp कमोडिटी डेस्क — 11 सितंबर 2026): भारतीय चीनी उद्योग और गन्ना किसानों के लिए ऊर्जा क्षेत्र से अत्यंत सकारात्मक और उत्साहवर्धक खबर आई है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तत्वावधान में तीनों प्रमुख तेल विपणन कंपनियों (OMCs)—इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)—ने आगामी आपूर्ति वर्ष 2026-27 (नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027) के प्रथम चरण के लिए 280 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीद का टेंडर औपचारिक रूप से आवंटित कर दिया है।
इस राष्ट्रीय आवंटन में देश के सबसे बड़े एथेनॉल उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश की 85 एकीकृत चीनी मिल डिस्टिलरियों को लगभग 120 करोड़ लीटर (42.8% हिस्सेदारी) का सबसे बड़ा अनुबंध प्राप्त हुआ है।
🛢️ फीडस्टॉक-वार निर्धारित दरें और आवंटन विवरण
| कच्चा माल (Feedstock) | तय खरीद दर (₹ प्रति लीटर) | यूपी की मिलों को आवंटन (करोड़ लीटर) | प्रमुख उत्पादक मिल समूह |
|---|---|---|---|
| गन्ने का सीधा रस / सिरप (Cane Juice) | ₹65.61 / लीटर | 48.5 करोड़ लीटर | बलरामपुर चीनी, त्रिवेणी, डालमिया |
| बी-हैवी शीरा (B-Heavy Molasses) | ₹60.73 / लीटर | 52.0 करोड़ लीटर | धामपुर, डीसीएम श्रीराम, मवाना |
| सी-हैवी शीरा (C-Heavy Molasses) | ₹49.41 / लीटर | 19.5 करोड़ लीटर | सहकारी एवं स्वतंत्र चीनी मिलें |
| कुल (उत्तर प्रदेश) | — | 120.0 करोड़ लीटर | 85 आधुनिक डिस्टिलरी इकाइयां |
💵 गन्ना किसानों को कैसे मिलेगा सीधा फायदा?
इस मेगा एथेनॉल टेंडर से गन्ना किसानों को तीन प्रत्यक्ष लाभ मिलने जा रहे हैं:
- 10 से 14 दिन में त्वरित भुगतान: चीनी मिलों को ओएमसी द्वारा एथेनॉल की आपूर्ति करने के 7 दिनों के भीतर ऑनलाइन भुगतान कर दिया जाता है। इस त्वरित लिक्विडिटी (Cash Flow) से मिलों को किसानों का गन्ना मूल्य चुकाने में बैंक कर्ज पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
- चीनी के अधिशेष संकट से मुक्ति: यूपी में लगभग 35 से 40 लाख टन चीनी को सीधे एथेनॉल उत्पादन में डायवर्ट किया जा रहा है, जिससे बाजार में चीनी के थोक भाव में गिरावट नहीं आएगी और मिलों की वित्तीय सेहत मजबूत बनी रहेगी।
- एस्क्रो खाते में सीधी कटौती: सरकार के नए नियमों के तहत तेल कंपनियों द्वारा मिलों को दिया जाने वाला 85% भुगतान सीधे जिला प्रशासन द्वारा नियंत्रित एस्क्रो खाते में जमा होता है, जहां से यह राशि स्वतः किसानों के बैंक खातों में डीबीटी हो जाती है।
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के महानिदेशक ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि समय पर टेंडर फाइनल होने से 15 अक्टूबर से शुरू हो रहे नए पेराई सत्र में चीनी मिलें पूरी क्षमता से गन्ने की पेराई और डिस्टिलरी संचालन कर सकेंगी।
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