आज से पश्चिमी यूपी में बारिश शुरू: 15 अक्टूबर को 22 जिलों में अलर्ट, गन्ना गिरने से बचाने के लिए करें ये 5 काम

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए अगले दो दिन सावधानी वाले हैं। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक पश्चिमी यूपी के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण यानी पश्चिमी विक्षोभ की वजह से 14 अक्टूबर से बारिश का दौर शुरू हो गया है। आज सहारनपुर समेत कुछ जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है, जबकि 15 अक्टूबर को बारिश का दायरा बढ़ेगा और करीब 22 जिलों में बारिश का अनुमान है। पेराई सत्र सिर पर है और खेतों में गन्ना पूरी तरह तैयार खड़ा है — ऐसे में दो दिन की यह बारिश और हवा गन्ने को गिरा सकती है और ढुलाई की राह भी मुश्किल कर सकती है। अच्छी खबर यह है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में मौसम साफ रहेगा और 16 अक्टूबर के बाद पश्चिमी यूपी में भी मौसम शुष्क होने का अनुमान है।
आज 14 अक्टूबर: कहां-कितनी बारिश का अनुमान है
मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ बारिश की बौछारें पड़ सकती हैं, और वज्रपात की चेतावनी भी दी गई है। सबसे ज्यादा असर सहारनपुर में दिख सकता है, जहां अनेक स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बारिश का अनुमान है। शामली, मुजफ्फरनगर और बिजनौर में एक या दो जगहों पर बारिश हो सकती है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए राहत की खबर है। वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, बस्ती और देवरिया समेत पूर्वांचल के जिलों में आज मौसम साफ रहेगा और बारिश की कोई चेतावनी नहीं दी गई है। राजधानी लखनऊ में भी आज मौसम शुष्क रहेगा और दिनभर धूप खिली रहेगी। यानी यह बारिश का दौर मुख्य रूप से पश्चिमी यूपी तक सीमित है, पूरे प्रदेश में एक जैसा नहीं बरसेगा।
15 अक्टूबर: बारिश का दायरा बढ़ेगा, 22 जिलों में अनुमान
असली सावधानी 15 अक्टूबर को बरतनी है। अनुमान के मुताबिक गुरुवार को बारिश के दायरे में और बढ़ोतरी होगी और नोएडा-गाजियाबाद समेत करीब 22 जिलों में बारिश हो सकती है। उस दिन गरज-चमक के साथ हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा रहने और झोंकों में 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने का अनुमान है। इतनी तेज झोंकेदार हवा खड़े गन्ने के लिए सबसे बड़ा खतरा है, क्योंकि पके हुए गन्ने का तना भारी होता है और हवा के झोंके से पूरा प्लॉट एक तरफ लेट सकता है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में 15 अक्टूबर को भी बारिश की खास संभावना नहीं है, और 16 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर हल्की-छिटपुट बारिश हो सकती है। लखनऊ के लिए पूर्वानुमान में 15 अक्टूबर को दिन में ज्यादातर धूप और बारिश की महज 10 फीसदी संभावना बताई गई है।
गन्ने की फसल पर क्या असर पड़ेगा
बारिश और तेज हवा का सीधा असर गन्ने की खड़ी फसल पर पड़ता है। पहला खतरा गन्ना गिरने यानी लॉजिंग का है। जब खेत की मिट्टी बारिश से गीली और नरम हो जाती है और ऊपर से तेज हवा का झोंका आता है, तो गन्ने की जड़ें पकड़ छोड़ देती हैं और पूरा प्लॉट जमीन पर बिछ जाता है। गिरा हुआ गन्ना लंबे समय तक जमीन पर पड़ा रहे तो उसकी गांठों के पास नुकसान शुरू हो जाता है, वजन घटता है और चीनी की रिकवरी पर भी असर पड़ता है।
दूसरा खतरा जलभराव का है। जिन खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था कमजोर है, वहां दो दिन की बारिश भी पानी भर सकती है। खेत में पानी भरा रहने से गन्ने की जड़ों को हवा नहीं मिलती और फसल कमजोर पड़ने लगती है। तीसरा असर ढुलाई पर पड़ता है — कच्ची पगडंडियों और मेड़ों पर कीचड़ हो जाने से ट्रैक्टर-ट्रॉली का निकलना मुश्किल हो जाता है।
गन्ना गिरने से बचाने के लिए अभी करें ये 5 काम
पहला काम — खेत से पानी की निकासी अभी से ठीक करें। खेत के निचले हिस्से की नाली खोल दें ताकि बारिश का पानी खेत में ठहरे नहीं। पानी भरे खेत में गन्ना सबसे जल्दी गिरता है।
दूसरा काम — ऊंचे और भारी गन्ने वाले प्लॉट की बांधाई जांच लें। बांधी हुई रस्सी या पट्टी ढीली हो तो उसे कस दें। हवा के झोंके से पहले बंधा हुआ गन्ना अकेले खड़े गन्ने से कहीं ज्यादा टिकता है।
तीसरा काम — कटाई और ढुलाई का कार्यक्रम दो दिन आगे-पीछे करें। अगर आपकी पर्ची की तारीख 15 अक्टूबर के आसपास है और खेत में पानी भरने का डर है, तो समिति या क्रय केंद्र पर पहले ही बात कर लें।
चौथा काम — गिरे हुए गन्ने को जल्दी उठाएं और अलग रखें। अगर हवा से कोई प्लॉट गिर जाए तो उसे ज्यादा दिन जमीन पर न छोड़ें — सूखने और सड़ने से पहले मिल या क्रय केंद्र तक पहुंचाएं। गिरे गन्ने को खड़े गन्ने के साथ मिलाकर तौल पर न ले जाएं, इससे तौल और रिकवरी दोनों को लेकर विवाद हो सकता है।
पांचवां काम — खाद और कीटनाशक का छिड़काव दो दिन टाल दें। बारिश से पहले किया गया छिड़काव धुल जाता है और पैसा बर्बाद होता है। गरज-चमक के दौरान बिजली के खंभों और ढीले तारों वाले रास्तों से ढुलाई के समय दूरी रखें।
पेराई सत्र पर क्या असर पड़ेगा
पेराई सत्र को लेकर किसानों को यह समझना जरूरी है कि दो दिन की यह बारिश सत्र को टालने वाली बारिश नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक सरकार को उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश में करीब 10 से 15 चीनी मिलें 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू कर देंगी, और बारिश का यह दौर 16 अक्टूबर तक थमने का अनुमान है।
फिर भी, जिन किसानों की पर्ची 15 या 16 अक्टूबर की है, उन्हें अपने क्रय केंद्र से संपर्क में रहना चाहिए। अगर बारिश की वजह से किसी केंद्र पर तौल या ढुलाई में रुकावट आती है, तो इसकी जानकारी समिति को समय पर दें। गन्ना विभाग के टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर जानकारी ली जा सकती है। बारिश के साथ तापमान में भी मामूली बदलाव आएगा — अगले दो दिनों में अधिकतम तापमान में दो डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है और इसके बाद इतनी ही बढ़ोतरी होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पूरे उत्तर प्रदेश में बारिश होगी? नहीं। बारिश का दौर मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित है। 14 अक्टूबर को सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर और बिजनौर में बारिश का अनुमान है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश और लखनऊ समेत मध्य यूपी में मौसम शुष्क रहेगा।
हवा कितनी तेज चलेगी? 15 अक्टूबर को गरज-चमक के साथ हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा रहने और झोंकों में 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने का अनुमान है।
क्या बारिश से पेराई सत्र टलेगा? इस बारिश से पेराई सत्र टलने की संभावना कम है। रिपोर्टों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में करीब 10 से 15 मिलें 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू कर सकती हैं और 16 अक्टूबर तक मौसम साफ होने का अनुमान है।
गिरे हुए गन्ने का क्या करें? गिरे हुए गन्ने को ज्यादा दिन जमीन पर न छोड़ें। उसे जल्दी उठाकर अलग रखें और जल्दी मिल या क्रय केंद्र तक पहुंचाएं।
खाद-कीटनाशक का छिड़काव करें या टालें? दो दिन टाल दें। बारिश से पहले किया गया छिड़काव धुल जाता है। मौसम साफ होने के बाद ही छिड़काव करें।
स्रोत: एबीपी लाइव (14 अक्टूबर 2026), लाइव हिंदुस्तान (14 अक्टूबर 2026), वेदर डॉट कॉम (लखनऊ पूर्वानुमान) और द हिंदू बिजनेस लाइन (पेराई शुरू होने का संदर्भ)।
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