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पुरकाज़ी से सरधना तक चौपाल में एक ही आवाज़: गन्ने का दाम बढ़ाओ — 20 अक्टूबर से पेराई से पहले किसानों की 5 मांगें

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 14, 2026 • 6 min read
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पुरकाज़ी से सरधना तक चौपाल में एक ही आवाज़: गन्ने का दाम बढ़ाओ — 20 अक्टूबर से पेराई से पहले किसानों की 5 मांगें
अंतिम अपडेट: October 14, 2026 1:13 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

पुरकाज़ी के पीरना गांव में चौपाल लगी थी, तो बात घूम-फिरकर एक ही जगह आकर रुकी — गन्ने के दाम पर। वहां बैठे किसान सुमित मलिक ने चुनाव की बात छिड़ते ही सीधा कहा कि हम तो गन्ना किसान हैं, हमारे गन्ने का दाम बढ़ा दो, बस। 14 अक्टूबर को प्रकाशित एक ग्राउंड रिपोर्ट में पुरकाज़ी, सरधना, मोदीनगर और सहारनपुर की चौपालों से यही आवाज़ सुनाई दी — दाम बढ़ाओ, खाद समय पर दो, नहर का पानी पहुंचाओ। पेराई सत्र शुरू होने में अब गिनती के दिन बचे हैं, इसलिए इन मांगों का वज़न और बढ़ गया है।

पुरकाज़ी की चौपाल से उठी सबसे सीधी मांग

ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी यूपी की गन्ना पट्टी में किसानों की नाराज़गी साफ दिखती है, लेकिन यह नाराज़गी किस दिशा में जाएगी, इस पर किसान बंटे हुए हैं। पीरना के एक बुज़ुर्ग किसान ने कहा कि दाम बढ़ा दो तो खूब दुआएं देंगे, और अगर न बढ़ा तो भी उम्मीद योगी से ही रखेंगे।

यह दोहरी भावना ही पश्चिमी यूपी की मौजूदा तस्वीर है। एक तरफ दाम, खाद और सिंचाई को लेकर गुस्सा है, दूसरी तरफ कानून-व्यवस्था को लेकर संतोष भी है। सरधना की चौपाल में बैठे धीरज अहलावत सरकार के आलोचक हैं। उन्होंने कहा कि खेत बेच-बेचकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं और नौकरी मांगो तो लाठी चल जाती है। लेकिन इसी बातचीत में उन्होंने यह भी माना कि पिछले एक दशक में पश्चिमी यूपी में कानून-व्यवस्था सुधरी है।

दाम का गणित: चीनी महंगी, गन्ना वहीं का वहीं

मोदीनगर के एक किसान ने चौपाल में वह बात कही जो इस समय हर गन्ना किसान के मन में है — चीनी महंगी हो गई है, इथेनॉल की मांग बढ़ गई है, पर गन्ना किसान वहीं का वहीं है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार चीनी का औसत खुदरा भाव 55.28 रुपये प्रति किलो तक पहुंचा, जो पिछले साल से करीब 20 प्रतिशत ज़्यादा है। किसान संगठनों का दावा है कि कई जगह भाव 60 रुपये किलो से ऊपर निकल गया है।

दूसरी तरफ गन्ने का दाम कहां खड़ा है, यह समझना ज़रूरी है। केंद्र सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय की है। उत्तर प्रदेश में पिछले सत्र 2025-26 के लिए एसएपी अगेती किस्म के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल था। 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। किसान संगठनों की मांग 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है, और यही अंतर इस समय टकराव की सबसे बड़ी वजह है।

खाद, नहर और सिंचाई — चौपाल की दूसरी शिकायतें

दाम के बाद चौपालों में सबसे ज़्यादा चर्चा खाद और पानी की हुई। एक युवा मतदाता आदित्य ने कहा कि किसानों की कमर टूटी हुई है। खाद समय पर नहीं मिलता, नहर का पानी हम तक पहुंचता नहीं, सिंचाई व्यवस्था सुधरनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि योगी जी को ही इन जायज़ मुद्दों का हल निकालना चाहिए।

यह बात पेराई सत्र से ठीक पहले इसलिए अहम है क्योंकि गन्ने की कटाई और गेहूं की बुवाई का समय एक-दूसरे से जुड़ा है। पेराई जल्दी शुरू होगी तो खेत जल्दी खाली होगा और गेहूं की बुवाई सही समय पर हो पाएगी।

2022 से 2027: पश्चिमी यूपी का सियासी समीकरण

पश्चिमी यूपी राजनीतिक रूप से इसलिए अहम है क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव में किसान आंदोलन को सपा-रालोद गठबंधन को बढ़त दिलाने वाले कारणों में गिना गया था। मुज़फ़्फ़रनगर में छह में से पांच सीटें सपा-रालोद के पास गई थीं। 2024 में कैराना से सपा और सहारनपुर से कांग्रेस जीती। तब से समीकरण बदले हैं — रालोद प्रमुख जयंत चौधरी एनडीए में शामिल हो गए।

16 अक्टूबर का प्रदर्शन और किसानों की 5 मांगें

चौपाल की नाराज़गी अब सड़क पर भी दिखने वाली है। भाकियू अराजनैतिक ने 16 अक्टूबर को सभी जिलाधिकारी कार्यालयों पर प्रदर्शन और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन का ऐलान किया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष हरनाम सिंह वर्मा के अनुसार प्रदेश में करीब 45 लाख गन्ना किसान हैं।

चौपालों और किसान संगठनों की बातों को मिलाकर इस समय किसानों की 5 मुख्य मांगें बनती हैं:

  1. गन्ने का दाम बढ़े: 2026-27 के लिए एसएपी जल्द घोषित हो, किसान संगठन 500 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं।
  2. बकाया भुगतान समय पर हो: पेराई शुरू होने से पहले पुराना बकाया साफ हो, और नए सत्र में 14 दिन के कानूनी समय में भुगतान हो।
  3. खाद समय पर मिले: बुवाई और कटाई के समय खाद की किल्लत न हो, वितरण व्यवस्था पारदर्शी हो।
  4. नहर का पानी खेत तक पहुंचे: सिंचाई व्यवस्था सुधरे, टेल तक पानी पहुंचे।
  5. तौल और रिकवरी में पारदर्शिता हो: गन्ने की तौल और चीनी रिकवरी के आंकड़ों में गड़बड़ी की शिकायतों पर वैज्ञानिक जांच हो।

पेराई से पहले किसान क्या करें

पश्चिमी यूपी में पेराई सत्र करीब 20 अक्टूबर के आसपास शुरू होने की संभावना है, जो पिछले साल से करीब 10 दिन पहले होगा। यह मौसम पर निर्भर करेगा। उत्तर प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें से कम से कम 71 पश्चिमी यूपी में हैं। इस बार गन्ने का रकबा करीब 47,000 हेक्टेयर घटा है — 28.87 लाख हेक्टेयर से घटकर 28.40 लाख हेक्टेयर रह गया है। पेराई शुरू होने से पहले किसानों को ये काम निपटा लेने चाहिए।

पहला, अपने गन्ना सर्वे का रिकॉर्ड जांच लें — रकबा और किस्म सही दर्ज है या नहीं। दूसरा, बैंक खाता चालू रखें और ज़रूरी पहचान दस्तावेज़ों से लिंक कराएं ताकि भुगतान में देरी न हो। तीसरा, अपने क्रय केंद्र की जानकारी पहले से ले लें। चौथा, रिकॉर्ड में गड़बड़ी दिखे तो गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं। टोल-फ्री किसान हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर भी मदद ली जा सकती है।

आपके सवाल

प्रश्न: 2026-27 के लिए यूपी में गन्ने का एसएपी कितना है? उत्तर: 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। 2025-26 में एसएपी अगेती किस्म के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल था। केंद्र का एफआरपी 2026-27 के लिए 365 रुपये प्रति क्विंटल है।

प्रश्न: पश्चिमी यूपी में पेराई कब शुरू होगी? उत्तर: पेराई करीब 20 अक्टूबर के आसपास शुरू होने की संभावना है, जो पिछले साल से करीब 10 दिन पहले होगा। अंतिम तारीख मौसम और मिल की तैयारी पर निर्भर करेगी।

प्रश्न: 16 अक्टूबर को क्या होने वाला है? उत्तर: भाकियू अराजनैतिक के आह्वान पर 16 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलाधिकारी कार्यालयों पर प्रदर्शन होगा और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। मुख्य मांग गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करना है।

प्रश्न: भुगतान में देरी हो तो किसान के पास क्या अधिकार है? उत्तर: नियम के अनुसार मिल को गन्ना लेने के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है। देरी पर ब्याज का प्रावधान है। शिकायत गन्ना समिति, जिला गन्ना अधिकारी या टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर की जा सकती है। तौल में गड़बड़ी लगे तो तौल की पर्ची संभालकर रखें और गन्ना समिति में लिखित शिकायत दें।

स्रोत: न्यूज़18 (ग्राउंड रिपोर्ट, 14 अक्टूबर 2026), रॉयल बुलेटिन (12 अक्टूबर 2026), टाइम्स ऑफ इंडिया / एग्रीइनसाइट (पेराई सत्र तैयारी), फाइनेंशियल एक्सप्रेस (चीनी भाव)।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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