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20 अक्टूबर से पेराई शुरू: गन्ना मिल ले जाने से पहले ये 7 जरूरी काम आज ही निपटाएं, भुगतान में नहीं आएगी दिक्कत

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 7, 2026 • 6 min read
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20 अक्टूबर से पेराई शुरू: गन्ना मिल ले जाने से पहले ये 7 जरूरी काम आज ही निपटाएं, भुगतान में नहीं आएगी दिक्कत
अंतिम अपडेट: October 7, 2026 11:30 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें 20 अक्टूबर के आसपास पेराई सत्र 2026-27 शुरू करने की तैयारी में हैं, और गन्ना किसानों के पास तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए अब गिने-चुने दिन बचे हैं। गन्ना समिति की सदस्यता की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर है, उसके बाद सर्वे रिकॉर्ड, बैंक खाता और पर्ची कैलेंडर जैसे काम बचे हैं। जो किसान ये 7 काम समय पर निपटा लेंगे, उन्हें न तो गन्ना आपूर्ति में रुकावट आएगी और न ही भुगतान अटकेगा।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और मुरादाबाद की मिलों में बॉयलर पूजा और स्टीम ट्रायल अक्टूबर के पहले हफ्ते तक पूरे होने की उम्मीद है, और मौसम अनुकूल रहा तो 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू हो सकती है। सहारनपुर के उप गन्ना आयुक्त ओपी सिंह के अनुसार प्रदेश में 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें कम से कम 71 पश्चिमी यूपी में हैं। यानी लाखों किसानों के लिए यह सीजन अब दरवाजे पर है।

1. गन्ना समिति की सदस्यता: 10 अक्टूबर तक आखिरी मौका

पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना समिति की सदस्यता और उपज बढ़ोत्तरी के आवेदन की अंतिम तिथि पहले 30 सितंबर थी, जिसे बढ़ाकर 10 अक्टूबर 2026 कर दिया गया है। गन्ना आयुक्त के आदेश से यह छूट दी गई है, क्योंकि हाल की बारिश और बाढ़ से फसल को नुकसान पहुंचा था और कई किसान समय पर सदस्यता नहीं ले पाए थे।

जो किसान अभी तक समिति के सदस्य नहीं बने हैं, वे 10 अक्टूबर तक सदस्यता लेकर इस सीजन में चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति का लाभ उठा सकते हैं।

2. गन्ना सर्वेक्षण रिकॉर्ड की जांच करा लें

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार किसानों को अपने गन्ना सर्वेक्षण रिकॉर्ड — रकबा और फसल की किस्म — का सत्यापन करा लेना चाहिए। इस साल यूपी में जीपीएस आधारित सर्वेक्षण नीति लागू है, और सर्वे में दर्ज रकबे व किस्म के आधार पर ही सट्टा और पर्ची बनती है।

अगर रकबा या किस्म गलत दर्ज है, तो समिति कार्यालय जाकर सुधरवाएं। गलत रिकॉर्ड पर बनी पर्ची से आपूर्ति और भुगतान दोनों में दिक्कत आती है, इसलिए पेराई शुरू होने से पहले ही सुधार करा लें।

3. बैंक खाता सक्रिय रखें और आधार से लिंक कराएं

गन्ना मूल्य का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में जाता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि खाता सक्रिय हो और आवश्यक पहचान दस्तावेजों से लिंक हो, ताकि भुगतान में देरी न हो।

निष्क्रिय खाते, आधार से न जुड़े खाते और गलत आईएफएससी से हर साल हजारों किसानों का भुगतान अटकता है। बैंक जाकर खाते की स्थिति, मोबाइल लिंकेज और केवाईसी की पुष्टि करा लें।

4. ई-गन्ना पोर्टल पर सट्टा और पर्ची कैलेंडर देखें

गन्ना आपूर्ति की व्यवस्था अब ई-गन्ना और कैनअप पोर्टल पर ऑनलाइन है। सट्टा सूची, पर्ची कैलेंडर और आपूर्ति टिकट की जानकारी पोर्टल या मोबाइल ऐप पर जांच लें — सरकार का एसएमएस शॉर्टकोड 51969 भी सक्रिय है।

पर्ची कैलेंडर में आपूर्ति की तारीखें पहले से नोट कर लें, ताकि कटाई और ढुलाई की योजना बन सके। अगर पोर्टल पर नाम, रकबा या सट्टा विवरण नहीं दिख रहा है, तो तुरंत समिति से संपर्क करें।

5. इस सीजन का गन्ना भाव समझ लें: एफआरपी तय, यूपी का एसएपी बाकी

गन्ने के मूल्य को लेकर स्थिति स्पष्ट रखें। केंद्र सरकार ने चीनी सीजन 2026-27 के लिए उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो पिछले सीजन के 355 रुपये से 10 रुपये अधिक है। यह जानकारी द हिंदू, इकोनॉमिक टाइम्स और बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्टों में दर्ज है।

लेकिन ध्यान दें: उत्तर प्रदेश का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) 2026-27 के लिए अभी घोषित नहीं हुआ है। 2025-26 सीजन का एसएपी अगेती किस्म के लिए 400 रुपये और सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल था। जब तक नया एसएपी घोषित नहीं होता, पुराने दर को इस सीजन का भाव न मानें — आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें और अफवाहों से बचें।

6. क्रय केंद्र और तौल व्यवस्था पर नजर रखें

गन्ना तुलाई के समय पर्ची पर वजन जांचने का अधिकार किसानों को है। अपना गन्ना तुलवाते समय पर्ची पर सकल वजन, खाली ट्रॉली का वजन और शुद्ध वजन ध्यान से पढ़ें।

अगर तौल में गड़बड़ी का संदेह हो, तो समिति के शिकायत अधिकारी या गन्ना विभाग के टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर संपर्क करें, जो चौबीसों घंटे संचालित है।

7. समय पर कटाई और आपूर्ति की योजना बनाएं

पेराई जल्दी शुरू होने से किसान खेत जल्दी खाली कर सकेंगे और गेहूं की बुवाई सही समय पर कर पाएंगे। पर्ची कैलेंडर के हिसाब से कटाई की तारीखें तय करें और मजदूर व ट्रॉली की व्यवस्था पहले से कर लें। अगेती गन्ने की कटाई को प्राथमिकता दें — देर से कटाई में चीनी परता घटने का खतरा रहता है।

पेराई से पहले की संक्षिप्त जांच सूची

  • 10 अक्टूबर तक समिति सदस्यता और उपज बढ़ोत्तरी का आवेदन
  • सर्वेक्षण में रकबा-किस्म का रिकॉर्ड सही करवाना
  • बैंक खाता सक्रिय, आधार व मोबाइल से लिंक
  • ई-गन्ना पोर्टल पर सट्टा-पर्ची कैलेंडर की जांच
  • एफआरपी 365 रुपये; यूपी एसएपी की घोषणा का इंतजार
  • तौल पर्ची पर वजन की जांच; गड़बड़ी पर 1800-121-3203
  • कटाई-ढुलाई की अग्रिम योजना, अगेती गन्ने को प्राथमिकता

पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिमी यूपी में पेराई सत्र 2026-27 कब शुरू होगा? टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार पश्चिमी यूपी की मिलें 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं। बॉयलर पूजा और स्टीम ट्रायल अक्टूबर के पहले हफ्ते तक पूरे होने की उम्मीद है, लेकिन अंतिम तिथि मौसम पर निर्भर करेगी।

गन्ना समिति की सदस्यता की अंतिम तिथि क्या है? पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना समिति की सदस्यता और उपज बढ़ोत्तरी आवेदन की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर 2026 है। पहले यह 30 सितंबर थी, जिसे बारिश-बाढ़ के कारण बढ़ाया गया। सदस्यता के बिना इस सीजन में मिल को गन्ना आपूर्ति नहीं हो सकेगी।

2026-27 सीजन में गन्ने का भाव क्या है? केंद्र ने एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। उत्तर प्रदेश का एसएपी 2026-27 अभी घोषित नहीं हुआ है — 2025-26 का एसएपी अगेती के लिए 400 रुपये और सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये था, जो इस सीजन का भाव नहीं है।

गन्ना भुगतान में दिक्कत हो तो कहां शिकायत करें? गन्ना विकास विभाग का टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 चौबीसों घंटे संचालित है। इसके अलावा अपनी गन्ना समिति के शिकायत अधिकारी या जिला गन्ना अधिकारी से भी संपर्क किया जा सकता है।

पर्ची कैलेंडर ऑनलाइन कैसे देखें? ई-गन्ना और कैनअप पोर्टल या मोबाइल ऐप पर सट्टा सूची, पर्ची कैलेंडर और आपूर्ति टिकट देखे जा सकते हैं। सरकार के एसएमएस शॉर्टकोड 51969 से भी पर्ची संबंधी सूचनाएं मिलती हैं।

सर्वे में रकबा गलत दर्ज है तो क्या करें? अपनी गन्ना समिति कार्यालय जाकर सर्वेक्षण रिकॉर्ड में सुधार करवाएं। पेराई शुरू होने से पहले सुधार कराना आसान होता है; गलत रिकॉर्ड पर बनी पर्ची से आपूर्ति और भुगतान दोनों में दिक्कत आती है।

स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया, लाइव हिंदुस्तान, किसान इंडिया, कृषि टाइम्स, द हिंदू

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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