20 अक्टूबर से 10 दिन पहले शुरू होगी पेराई: गन्ना किसान आज ही निपटा लें ये 7 काम, वरना फंसेगा गन्ना और अटकेगा भुगतान

ट्रॉली के पहिए की हालत, मजदूरों की व्यवस्था, बैंक खाते की केवाईसी — पेराई शुरू होने से पहले यही छोटे-छोटे काम तय करते हैं कि गन्ना समय पर मिलेगा या मिल के गेट पर ट्रॉलियां अटकी रहेंगी। इस बार समय और कम है: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें पेराई सत्र 2026-27 को पिछले साल से करीब 10 दिन पहले, यानी 20 अक्टूबर के आसपास शुरू करने की तैयारी में हैं। जो किसान अभी से तैयारी कर लेगा, उसका गन्ना पहले जाएगा और भुगतान की लाइन में भी वह आगे रहेगा। नीचे वही 7 काम दिए गए हैं जो पेराई से पहले हर गन्ना किसान को निपटा लेने चाहिए।
10 दिन पहले पेराई — मिलों की तैयारी क्या कहती है
बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और मुरादाबाद की मिलों में मरम्मत का काम तेज चल रहा है। द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक सहारनपुर के उप गन्ना आयुक्त ओपी सिंह ने कहा है कि प्रदेश में 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें से कम से कम 71 पश्चिमी यूपी में हैं। उनके अनुसार इस बार पेराई पिछले साल से 10 दिन पहले शुरू हो सकती है, हालांकि सब कुछ मौसम पर निर्भर करेगा।
खबर का दूसरा पहलू भी समझिए। गन्ने का क्षेत्रफल इस बार 47,000 हेक्टेयर घटा है — 28.87 लाख हेक्टेयर से घटकर 28.4 लाख हेक्टेयर रह गया है, जिसमें बिजनौर, लखीमपुर और पीलीभीत जैसे बड़े जिलों में गिरावट दर्ज हुई है। किसानों के मुताबिक बढ़ती लागत, मजदूरी और सिंचाई खर्च, देर से भुगतान और गन्ने के लंबे फसल चक्र की वजह से कई किसानों ने दूसरी फसलों की ओर रुख किया है।
और हां, इस तैयारी के बीच किसानों की मांगें भी तेज हैं — 22 सितंबर को बिजनौर में किसान मजदूर संगठन ने महापंचायत करके गन्ने का ऊंचा भाव, मिलों के जल्द खुलने और देरी से भुगतान पर ब्याज की मांग रखी थी।
गन्ने के भाव की असली तस्वीर: घोषित क्या है, मांग क्या है
भाव को लेकर भ्रम न रहे, इसलिए स्थिति साफ शब्दों में रख देते हैं। केंद्र सरकार ने पेराई सत्र 2026-27 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) ₹10 प्रति क्विंटल बढ़ाकर ₹365 प्रति क्विंटल कर दिया है — यह दर 10.25 प्रतिशत रिकवरी वाली बुनियादी शर्त पर है। फॉर्च्यून इंडिया के मुताबिक इस बढ़ोतरी से देश के करीब 5.5 करोड़ गन्ना किसानों को फायदा होगा।
लेकिन याद रहे — यह एफआरपी है, केंद्र की दर। उत्तर प्रदेश में किसानों को जो भाव मिलता है वह राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) होता है, जिसकी घोषणा राज्य सरकार अलग से करती है। एफआरपी और एसएपी के अंतर को समझने के लिए यह गाइड पढ़ें।
और 2026-27 का एसएपी? इसकी घोषणा अभी बाकी है। किसान संगठनों की तरफ से ₹500 से ₹600 प्रति क्विंटल तक की मांगें उठ रही हैं — ये मांगें हैं, घोषित दर नहीं। पेराई शुरू होने से पहले एसएपी घोषित हो, यही किसानों की सबसे बड़ी अपेक्षा है।
पेराई से पहले के 7 काम — पूरी चेकलिस्ट
1. सर्वे रिकॉर्ड मिलाएं — सबसे पहला काम
गन्ना विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपने गन्ना सर्वे रिकॉर्ड जांच लें — क्षेत्रफल और किस्म दोनों। रिकॉर्ड में गड़बड़ रही तो पर्ची और कैलेंडर में परेशानी होगी। यह काम गन्ना विकास समिति के सचिव के पास या caneup पोर्टल और ई-गन्ना ऐप पर देखा जा सकता है। ई-गन्ना ऐप पर रिकॉर्ड देखने की पूरी गाइड पहले ही तैयार है। समिति सदस्यता की आखिरी तारीख 10 अक्टूबर तक बढ़ाई गई है — जो किसान सदस्य नहीं बने हैं, समय न गंवाएं।
2. बैंक खाता और केवाईसी दुरुस्त रखें
अधिकारियों की साफ सलाह है कि बैंक खाता सक्रिय रहे और जरूरी पहचान दस्तावेजों से जुड़ा हो, वरना भुगतान में देरी होगी। आधार-लिंक्ड बैंक खाता (एनपीसीआई-डीबीटी) ही भुगतान की राह खोलता है। खाता निष्क्रिय हो, मोबाइल नंबर बदला हो या केवाईसी अधूरी हो — पेराई से पहले बैंक जाकर ठीक करा लें। गन्ने का पैसा सीधे खाते में आता है, इसलिए यह काम सबसे अहम है।
3. क्रय केंद्र की जानकारी पहले से लें
खरीद केंद्रों की व्यवस्था अक्टूबर के पहले सप्ताह में अंतिम हो जाने की उम्मीद है। पेराई शुरू होते ही भीड़ लगती है, इसलिए अपना गन्ना क्रय केंद्र और सट्टा नीति के नियम पहले से पता कर लें। गन्ना पर्ची ऑनलाइन चेक करने का तरीका जान लें, ताकि मिल खुलते ही आपूर्ति में देरी न हो।
4. कटाई और परिवहन की तैयारी करें
मिल खुलने के बाद कटाई के लिए मजदूर मिलना मुश्किल और महंगा हो जाता है। ट्रॉली, रस्सी और मजदूरों की व्यवस्था पहले से कर लें। अपने मिल क्षेत्र में कटाई-परिवहन की तय दरें भी पता कर लें, ताकि बाद में विवाद न हो।
5. गिरी और भीगी फसल को संभालें
हाल की बारिश और तेज हवाओं में कई खेतों में गन्ना गिर गया है और कहीं-कहीं पानी भरा है। गिरा हुआ गन्ना लंबे समय तक जमीन पर पड़ा रहा तो गुणवत्ता घटने का खतरा रहता है। मौसम साफ होते ही खेत से अतिरिक्त पानी निकालें और गिरे गन्ने को सीधा करके बांध दें। बीज वाले गन्ने को खासतौर से सुरक्षित रखें — बुवाई के समय उसी की जरूरत पड़ेगी।
6. खेत खाली होते ही रबी की योजना बनाएं
जल्दी पेराई का सबसे बड़ा फायदा यही है — खेत जल्दी खाली होगा और गेहूं सही समय पर बोया जा सकेगा। सहफसली करने वाले किसान अभी से बीज और खाद की व्यवस्था कर लें। इस बार छह रबी फसलों के एमएसपी में भी बढ़ोतरी हुई है — गेहूं ₹2,610 और सरसों ₹6,613 प्रति क्विंटल तय हुआ है।
7. पर्ची का हिसाब रखें, भुगतान पर नजर रखें
गन्ना देते समय हर पर्ची संभालकर रखें — तौल, किस्म और दर सब दर्ज हो। भुगतान में देरी हो तो जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें या टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 / 1800-180-5129 पर शिकायत दर्ज कराएं; एसएमएस के लिए सरकारी शॉर्टकोड 51969 भी उपलब्ध है। caneup पोर्टल पर भुगतान की स्थिति ऑनलाइन देखने की पूरी प्रक्रिया यहां दी गई है।
आपके सवाल
पश्चिमी यूपी में पेराई कब शुरू होगी? मौसम अनुकूल रहा तो 20 अक्टूबर के आसपास — पिछले साल से करीब 10 दिन पहले। स्टीम ट्रायल अक्टूबर के पहले सप्ताह में पूरे होने की उम्मीद है।
सर्वे रिकॉर्ड में गलती हो तो क्या करें? अपनी गन्ना विकास समिति के सचिव से संपर्क करें या caneup पोर्टल और ई-गन्ना ऐप पर रिकॉर्ड जांचें। पेराई से पहले सुधार कराना सबसे सुरक्षित है।
बैंक खाता आधार से लिंक न हो तो भुगतान अटकेगा? हां, भुगतान सीधे खाते में डीबीटी से आता है। निष्क्रिय खाता या अधूरी केवाईसी देरी की सबसे बड़ी वजह है — पेराई से पहले बैंक जाकर ठीक करा लें।
इस सीजन का एसएपी घोषित हुआ क्या? अभी नहीं। 2026-27 के एसएपी की घोषणा बाकी है। 2025-26 में एसएपी अगेती का ₹400 और सामान्य का ₹390 प्रति क्विंटल था। केंद्र ने एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल घोषित किया है।
खेत में पानी भरा है, गन्ना सड़ने से कैसे बचाएं? सबसे पहले खेत से अतिरिक्त पानी निकालें। गिरे गन्ने को सीधा करके बांध दें। लंबे समय तक पानी में डूबा गन्ना गुणवत्ता खो देता है।
स्रोत: द टाइम्स ऑफ इंडिया, एग्रीइनसाइट, फॉर्च्यून इंडिया, चीनीमंडी
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