₹1.40 प्रति आंख पर मिलेगा नई किस्म का गन्ना बीज: पीलीभीत में सरकारी दरें जारी, मिनी सीड किट की बुकिंग भी शुरू

शरदकालीन गन्ना बुवाई के सीजन में किसानों की सबसे बड़ी चिंता अच्छी क्वालिटी का बीज होता है। इसी परेशानी को देखते हुए पीलीभीत में गन्ना विकास विभाग ने शरदकालीन और वसंतकालीन बुवाई के लिए प्रजनक बीज गन्ने की सरकारी दरें जारी कर दी हैं। ये दरें उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर ने अनुमोदित की हैं, यानी अब किसानों को प्रमाणित बीज तय दामों पर आसानी से मिलेगा। सबसे खास बात — नई अगैती किस्मों का प्रजनक बीज मात्र ₹1.40 प्रति आंख की दर पर दिया जाएगा, जबकि छोटे किसानों के लिए मिनी सीड किट ₹2 प्रति आंख पर उपलब्ध होगी।
किस बीज का क्या भाव: पूरी सरकारी दर सूची
गन्ना विकास विभाग ने बीज की श्रेणी के हिसाब से अलग-अलग दरें तय की हैं। जिला गन्ना अधिकारी खुशीराम ने बताया कि उच्च गुणवत्ता वाले प्रजनक बीज से खेतों में जमाव बेहतर होता है, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ती है और किसानों की आय में इजाफा होता है।
तय दरें इस प्रकार हैं:
- नई अगैती किस्में (रिलीज के पहले दो वर्ष): प्रजनक बीज ₹1.40 प्रति आंख
- नई अगैती किस्मों की मिनी सीड किट: ₹2 प्रति आंख
- 3 से 6 वर्ष पुरानी नई अगैती किस्में: बीज गन्ना ₹500 प्रति क्विंटल
- अगैती एवं सामान्य बीज गन्ना: ₹475 प्रति क्विंटल
ये दरें शरदकालीन और वसंतकालीन, दोनों सीजन की बुवाई पर लागू हैं। यानी शरदकालीन बुवाई करने वालों और फरवरी-मार्च में वसंतकालीन बुवाई करने वालों — दोनों को इन्हीं सरकारी दरों पर प्रमाणित बीज मिलेगा।
नई अगैती किस्मों पर सरकार का खास जोर
इस बार दर सूची में सबसे ज्यादा ध्यान नई अगैती किस्मों पर दिया गया है। रिलीज के शुरुआती दो वर्षों में इनका बीज ₹1.40 प्रति आंख की सबसे सस्ती दर पर दिया जा रहा है, ताकि किसानों के खेतों तक नई और उन्नत किस्में तेजी से पहुंचें। छोटे किसानों के लिए मिनी सीड किट की व्यवस्था है — सिर्फ ₹2 प्रति आंख पर नई किस्मों की किट लेकर किसान पहले छोटा प्लॉट तैयार कर सकते हैं, और फिर उसी से बड़े खेत की बुवाई कर सकते हैं।
मिनी सीड किट: 9 अक्टूबर से ऑनलाइन बुकिंग शुरू
शाहजहांपुर स्थित उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद ने नई गन्ना किस्मों के सिंगल बड मिनी सीड किट के लिए ऑनलाइन बुकिंग 9 अक्टूबर को सुबह 10 बजे से शुरू कर दी है। किसान गन्ना विभाग की वेबसाइट enquiry.caneup.in के माध्यम से पंजीकरण करा सकते हैं। इस बार मिनी सीड किट के लिए ऑफलाइन बुकिंग बिल्कुल स्वीकार नहीं की जाएगी।
इस वर्ष किसानों के लिए दो नई किस्मों के कुल 3 लाख सिंगल बड उपलब्ध कराए जा रहे हैं — को.शा. 23232 के 2 लाख बड और को.शा. 19231 के 1 लाख बड। परिषद के अनुसार, इनसे किसानों को बेहतर उत्पादकता, अधिक शर्करा प्रतिशत और रोग-कीटों के प्रति बेहतर प्रतिरोध का लाभ मिल सकता है।
बुकिंग की प्रक्रिया पारदर्शी रखी गई है। एक किसान अपने कृषक कोड से केवल एक बार ही ऑनलाइन बुकिंग कर सकेगा। बुकिंग के बाद पंजीकृत मोबाइल नंबर पर चार अंकों का पंजीकरण नंबर एसएमएस से भेजा जाएगा। मिनी सीड किट लेने किसान को स्वयं आना होगा और पंजीकरण नंबर के साथ आधार कार्ड की मूल प्रति दिखानी होगी। सत्यापन के बाद टोकन मिलेगा, फिर निर्धारित काउंटर से किट प्राप्त होगी।
अक्टूबर में आयोजित होने वाले मिठास मेला-2026 में भी किसानों को मिनी सीड किट मिलेंगी — यह उन किसानों के लिए अवसर होगा जो ऑनलाइन बुकिंग के दौरान सीमित स्टॉक के कारण किट नहीं ले पाए थे।
को.शा. 23232 की मांग क्यों बढ़ रही है
नई किस्म को.शा. 23232 को लेकर किसानों में खासा उत्साह है — रिपोर्टों के अनुसार, ऑनलाइन बुकिंग शुरू होने पर इस किस्म के 2 लाख बड महज 5 मिनट में बुक हो गए थे। इसे उत्तर भारत की को.शा. 8119 और दक्षिण भारत की को. 775 किस्मों के संकरण से तैयार किया गया है। अनुसंधान परिषद के अनुसार, इसमें दूसरी किस्मों की तुलना में प्रति क्विंटल करीब 10 प्रतिशत अधिक वजन मिलता है, गन्ने लंबे-मोटे होते हैं और चीनी की मात्रा भी अधिक है। जल्दी पकने की विशेषता के कारण यह समय पर कटाई चाहने वाले किसानों के लिए उपयोगी विकल्प है।
बीज कहां से लें और क्या करें
डीसीओ खुशीराम ने किसानों से अपील की है कि वे शोध परिषद की निर्धारित दरों पर प्रमाणित प्रजनक बीज लेकर उन्नत खेती की ओर कदम बढ़ाएं। शुद्ध बीज से न सिर्फ पैदावार बढ़ती है, बल्कि फसल रोगों से भी सुरक्षित रहती है। उन्नत किस्म का बीज चाहिए तो अपने क्षेत्र के गन्ना पर्यवेक्षक से संपर्क करें — वही बताएगा कि आपके इलाके के लिए कौन सी किस्म सही रहेगी और बीज कहां से मिलेगा। एक सलाह यह भी है कि हर तीन वर्ष में बीज बदल लें — लगातार एक ही किस्म की बुवाई से कीट-रोग की आशंका बढ़ जाती है। बुवाई से पहले एक आंख के टुकड़ों को फफूंदनाशक से उपचारित करना न भूलें।
पेराई सत्र की तैयारियां भी जोरों पर
पीलीभीत जिले की चारों मिलें — एलएच पीलीभीत, किसान सहकारी पीलीभीत की पूरनपुर और बीसलपुर इकाइयां, तथा बजाज बरखेड़ा — नवीन पेराई सत्र 2026-27 के लिए अक्टूबर के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। बिजनौर के धामपुर क्षेत्र में भी विभाग ने शरदकालीन बुवाई के लिए तीन नई प्रजातियों का 530 क्विंटल बीज आवंटित किया है, जहां सिंगल बड बीज 140 पैसे प्रति बड की दर पर अनुदान के साथ दिया जा रहा है।
कुल मिलाकर इस बार बुवाई के सीजन में किसानों के पास प्रमाणित बीज के कई विकल्प हैं — पीलीभीत में सरकारी दर सूची, ऑनलाइन मिनी सीड किट बुकिंग और अक्टूबर में मिठास मेला। समझदारी इसी में है कि बीज की व्यवस्था समय रहते कर ली जाए।
जवाब जानिए
प्रश्न: प्रजनक बीज गन्ना और सामान्य बीज में क्या अंतर है? उत्तर: प्रजनक बीज अनुसंधान परिषद द्वारा प्रमाणित और गुणवत्ता-परीक्षित होता है — इसमें रोग नहीं होते और जमाव बेहतर होता है। सामान्य बीज खेत या खुले बाजार से मिलता है, जिसकी गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं होती।
प्रश्न: नई अगैती किस्मों का बीज ₹1.40 प्रति आंख पर कौन ले सकता है? उत्तर: कोई भी गन्ना किसान अपने क्षेत्र के गन्ना पर्यवेक्षक से संपर्क करके इस दर पर बीज ले सकता है। यह दर रिलीज के शुरुआती दो वर्षों की नई अगैती किस्मों के प्रजनक बीज के लिए तय की गई है।
प्रश्न: मिनी सीड किट की ऑनलाइन बुकिंग कैसे करें? उत्तर: enquiry.caneup.in पर अपने कृषक कोड से पंजीकरण करें। एक किसान एक बार ही बुकिंग कर सकता है। बुकिंग के बाद पंजीकृत मोबाइल पर चार अंकों का पंजीकरण नंबर एसएमएस से आएगा। किट लेते समय आधार कार्ड की मूल प्रति साथ रखें।
प्रश्न: अगर कोई तय दर से ज्यादा दाम पर बीज बेचे तो क्या करें? उत्तर: तुरंत अपने गन्ना पर्यवेक्षक या जिला गन्ना अधिकारी को सूचना दें। सरकारी दर सूची के खिलाफ ज्यादा दाम वसूलना नियमों का उल्लंघन है।
प्रश्न: शरदकालीन बुवाई के लिए बीज कब तक ले लेना चाहिए? उत्तर: शरदकालीन बुवाई अक्टूबर में होती है, इसलिए बीज की बुकिंग और खरीदारी समय रहते कर लें। पीलीभीत की मिलें अक्टूबर के अंत तक पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं, यानी सीजन पूरी रफ्तार पर है।
स्रोत: लाइव हिंदुस्तान (पीलीभीत संस्करण, 12 अक्टूबर 2026), चीनीमंडी (7 अक्टूबर 2026), किसानतक (12 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (बिजनौर संस्करण, 28 सितंबर 2026)
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