होम › एथेनॉल से बदला चीनी उद्योग का …

एथेनॉल से बदला चीनी उद्योग का अर्थशास्त्र, गन्ने के रस से सीधे फ्यूल उत्पादन और 10 दिन में भुगतान

Aamir Raza Aamir Raza • Aug 30, 2026 • 3 min read
Google पर हमें फ़ॉलो करें
शेयर करें:
एथेनॉल से बदला चीनी उद्योग का अर्थशास्त्र, गन्ने के रस से सीधे फ्यूल उत्पादन और 10 दिन में भुगतान
अंतिम अपडेट: August 30, 2026 10:30 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

एथेनॉल से बदला चीनी उद्योग का अर्थशास्त्र, गन्ने के रस से सीधे फ्यूल उत्पादन और 10 दिन में भुगतान

By
Aamir Raza - 2026-08-30

गोरखपुर/मेरठ (विशेष संवाददाता)। राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति और 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य ने उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों की वित्तीय सेहत सुधार दी है। गोरखपुर की पिपराइच सहकारी चीनी मिल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की निजी डिस्टिलरीज (धामपुर, असमौली, टिकौला, चंदनपुर) ने सीधे गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे से रिकॉर्ड बायो-एथेनॉल बनाकर सरकारी तेल कंपनियों को आपूर्ति की है।

इस व्यवस्था का सीधा असर गन्ना किसानों के भुगतान पर पड़ा है। तेल कंपनियों से 7 से 10 दिनों में नकद भुगतान मिलने के कारण किसानों का गन्ना भुगतान कानूनन निर्धारित 14 दिनों से पहले ही बैंक खातों में भेजा जा रहा है।

गन्ने के रस से एथेनॉल का गणित

चीनी मिल संघ के प्रतिनिधियों के अनुसार, सीधे गन्ने के रस से बने एथेनॉल की सरकारी खरीद दर 65.61 रुपये प्रति लीटर और बी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल की दर 60.73 रुपये प्रति लीटर निर्धारित है।

चीनी उद्योग विशेषज्ञों का कहना है, “पहले मिलों को केवल चीनी बिक्री पर निर्भर रहना पड़ता था। बाजार में चीनी का स्टॉक बढ़ने पर कीमतें गिर जाती थीं और मिलें घाटे में चली जाती थीं। अब एथेनॉल से मिलों को साल भर नियमित नकद प्रवाह मिल रहा है, जिससे वे किसानों का भुगतान समय पर कर पा रही हैं।”

चीनी मिलस्थानडिस्टिलरी क्षमताऔसत भुगतान अवधि
पिपराइच मिलगोरखपुर120 केएलपीडी (रस से)7 से 10 दिन
असमौली चीनी मिलसंभल / अमरोहा100 केएलपीडी8 से 12 दिन
धामपुर शुगरबिजनौर350 केएलपीडीशत-प्रतिशत समय पर
टिकौला मिलमुजफ्फरनगर150 केएलपीडी10 दिन औसत

सह-उत्पादों से मिलों की बढ़ी वित्तीय ताकत

एथेनॉल के अलावा चीनी मिलें गन्ने की खोई से बायोमास बिजली पैदा कर राज्य विद्युत ग्रिड को बेच रही हैं और प्रेसमड से बायो-सीएनजी और जैविक खाद तैयार कर रही हैं।

असमौली चीनी मिल के महाप्रबंधक ने बताया, “एथेनॉल और सह-उत्पादों के विविधीकरण से चीनी पर हमारी निर्भरता 40 प्रतिशत तक घट गई है। तेल कंपनियां हर पखवाड़े हमारे एस्क्रो खाते में सीधे भुगतान ट्रांसफर करती हैं, जिससे किसानों के खातों में बिना किसी अड़चन के पैसा पहुंचता है।”

विदेशी मुद्रा की बचत और पर्यावरण लाभ

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, एथेनॉल संमिश्रण से देश ने अब तक 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत की है। इसके साथ ही वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में 35 प्रतिशत की कमी आई है।

अमरोहा जिले की चीनी मिलों के किसान भाई अपना सट्टा और पर्ची ब्योरा विभागीय पोर्टल enquiry.caneup.in पर देख सकते हैं। नए पेराई सत्र की समयसारिणी के लिए गन्ना पर्ची कैलेंडर 2026-27 देखें और ई-गन्ना ऐप डाउनलोड करें।

🌾 CaneUp किसान सहायता पोर्टल

अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें

गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।

1 जिला व मिल चुनें
2 गांव व नाम डालें
3 समस्या लिखकर भेजें
उत्तर प्रदेश का अपना जनपद चुनें
आपके जिले से संबंधित चीनी मिलें
इस नंबर पर आपको पर्ची और भुगतान के व्हाट्सएप अपडेट्स मिलेंगे
जितना स्पष्ट लिखेंगे, उतनी जल्दी सटीक समाधान मिलेगा

🔒 आपकी निजी जानकारी 100% सुरक्षित है। हम कोई स्पैम नहीं भेजते। केवल आपकी मिल से जुड़े आधिकारिक अपडेट्स शेयर किए जाते हैं।

✓
Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

यह आर्टिकल कैसा लगा?

📬 गन्ना अपडेट पाएं

MSP रेट, पर्ची कैलेंडर, सरकारी योजनाएं — सीधे आपके इनबॉक्स में