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फसल बीमा का बड़ा फैसला — अगस्त की बारिश और जलभराव से नुकसान का सैटेलाइट सर्वे शुरू

Randhir Patil Randhir Patil Sep 3, 2026 3 min read
फसल बीमा का बड़ा फैसला — अगस्त की बारिश और जलभराव से नुकसान का सैटेलाइट सर्वे शुरू
अंतिम अपडेट: September 3, 2026 8:15 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

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लखनऊ / बिजनौर: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खादर और तराई अंचलों में अगस्त के अंतिम सप्ताह और सितंबर की शुरुआत में हुई रिकॉर्ड बारिश के कारण गन्ने के खेतों में हुए जलभराव से किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया (AIC) और उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने आज 3 सितंबर से इसरो (ISRO) के रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट और सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) के माध्यम से फसल क्षति का स्वचालित डिजिटल सर्वे शुरू कर दिया है।

कृषि निदेशक उत्तर प्रदेश ने बताया कि बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत जिलों के गंगा, यमुना और घाघरा नदियों के कछारी इलाकों में जहां 72 घंटे से अधिक समय तक 2 से 3 फीट पानी भरा रहा, वहां खेतों का गाटा-वार सैटेलाइट डेटा एकत्र किया जा रहा है।

बिना किसी कागजी औपचारिकता के खाते में आएगा क्लेम

पहले किसानों को जलभराव से नुकसान होने पर 72 घंटे के भीतर बैंक या कृषि अधिकारी को लिखित सूचना देनी पड़ती थी और लेखपाल की भौतिक रिपोर्ट में महीनों लग जाते थे। लेकिन नई सैटेलाइट आधारित तकनीक में पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और स्वचालित है:

  • पानी ठहराव का सटीक समय: सैटेलाइट इमेजरी से यह स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड हो रहा है कि किस खसरा नंबर के खेत में पानी कितने दिन तक खड़ा रहा और गन्ने की हरी पत्तियों के क्लोरोफिल में कितनी गिरावट आई।
  • फसल गिरने (Lodging) का आकलन: तेज हवाओं और पानी के बहाव से जमीन पर गिरे गन्ने का 3D रडार मैपिंग से प्रतिशत निकाला जा रहा है।
  • सीधा डीबीटी भुगतान: 33% से अधिक क्षति पाए जाने वाले सभी बीमित किसानों की सूची सीधे पोर्टल पर तैयार होकर बीमा कंपनी द्वारा उनके आधार-सीडेड बैंक खातों में क्लेम राशि ट्रांसफर की जाएगी।

गैर-बीमित किसानों के लिए राज्य आपदा राहत कोष

राहत आयुक्त कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों ने फसल बीमा नहीं कराया था, उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे राजस्व टीमों को फील्ड में भेजकर राज्य आपदा मोचक निधि (SDRF) के तहत प्रति हेक्टेयर ₹17,000 की अनुग्रह सहायता का प्रस्ताव 15 सितंबर तक शासन को भेजें।

कृषि विभाग ने जलभराव प्रभावित किसानों से अपील की है कि वे खेत से पानी उतरते ही तुरंत जलनिकासी नालियां साफ करें और जड़ों में फफूंदनाशक का प्रयोग करें ताकि खड़ी फसल को पूरी तरह सड़ने से बचाया जा सके। किसान किसी भी प्रकार की बीमा सहायता के लिए राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल के टोल-फ्री नंबर 14447 पर कॉल कर सकते हैं।

ड्रोन टीमों द्वारा ग्राउंड ट्रुथिंग सत्यापन

सैटेलाइट डेटा की सत्यता की पुष्टि के लिए संबंधित तहसीलों में कृषि विभाग के ड्रोन पायलटों द्वारा 5% खेतों का रैंडम फिजिकल वीडियो सर्वे भी कराया जा रहा है, जिससे किसी भी पात्र किसान का नाम क्लेम सूची से छूटने न पाए।

Randhir Patil
लेखक

Randhir Patil

गन्ना उद्योग विशेषज्ञ — ChiniMandi पर 425+ लेख। गन्ना खेती, शुगर मिल, MSP रेट, सरकारी योजनाओं पर विश्वसनीय जानकारी।

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