98 फीसदी गन्ना भुगतान पूरा, 5 साल बकाए वाला दौर खत्म: मंत्री का बड़ा दावा — यूपी के गन्ना किसानों को क्या मिलेगा?

नई दिल्ली। 30 सितंबर को केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने देश के चीनी क्षेत्र का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए बड़ा दावा किया — इस चीनी वर्ष में गन्ना किसानों के 98 फीसदी बकाए का भुगतान हो गया है, और पिछले साल यह आंकड़ा 99 फीसदी था। मंत्री ने कहा कि पहले किसानों को अपना पैसा पाने के लिए पांच-पांच साल तक इंतजार करना पड़ता था।
यह बयान ऐसे समय आया है जब कर्नाटक के गन्ना किसान एफआरपी बढ़ोतरी की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं, और उत्तर प्रदेश में आज 1 अक्टूबर से नया चीनी वर्ष 2026-27 शुरू हो गया है। मंत्री के दावे, यूपी सरकार के आंकड़े और जमीनी हकीकत — पूरा विश्लेषण।
मंत्री का दावा: इस चीनी वर्ष में 98 फीसदी भुगतान
आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक 30 सितंबर को नई दिल्ली में मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि उनकी कोशिश थी कि किसान आंदोलन करने की बजाय सीधे आकर बात करें। उन्होंने गन्ना किसानों को धूप में आंदोलन करने की बजाय दिल्ली आकर बातचीत का प्रस्ताव दिया।
मंत्री ने शुगर सेक्टर में केंद्र सरकार के सुधारों का ब्योरा देते हुए दावा किया कि पीएम मोदी के कार्यकाल में एफआरपी में लगातार बढ़ोतरी हुई है, 14 दिन में गन्ना भुगतान की अनिवार्यता लागू हुई है और एथेनॉल क्रांति ने सेक्टर की तस्वीर बदल दी है। उनके शब्दों में, “मौजूदा शुगर ईयर में 98 फीसदी और पिछले साल 99 फीसदी गन्ना भुगतान हो चुका है, जबकि पहले किसानों को 5 साल तक भी भुगतान नहीं मिलता था।”
मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि इस साल भी एफआरपी में बढ़ोतरी की जाएगी। यह बयान कर्नाटक में चल रहे एफआरपी विवाद की पृष्ठभूमि में अहम है, जहां किसान गन्ने के उचित मूल्य की मांग को लेकर आंदोलित हैं।
एफआरपी हर साल बढ़ी, इस साल भी बढ़ेगी
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक सरकार ने हर साल एफआरपी बढ़ाई है और इस साल भी बढ़ोतरी की जाएगी। गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य केंद्र सरकार तय करती है — यही वह न्यूनतम मूल्य है जो चीनी मिलों को किसानों को चुकाना होता है।
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए एक बात साफ समझ लेनी चाहिए — केंद्र की एफआरपी के अलावा राज्य सरकार अपना राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) भी घोषित करती है, जो अमूमन एफआरपी से अधिक होता है। 2025-26 में यूपी का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल (अगेती) रहा था; 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है।
एथेनॉल खरीद 38 से बढ़कर 1200 करोड़ लीटर
मंत्री ने एथेनॉल के आंकड़े भी पेश किए। उनके मुताबिक पहले सरकार चीनी मिलों से महज 38 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदती थी, जो अब बढ़कर 1200 करोड़ लीटर हो गई है। मंत्री ने कहा कि मिलों में जो भी एथेनॉल बनता है, सरकार लगभग सारा खरीद लेती है। उन्होंने यह भी बताया कि फैक्ट्रियों ने अलग-अलग स्रोतों से भी एथेनॉल बनाना शुरू कर दिया है।
यह आंकड़ा यूपी के किसानों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि प्रदेश की कई मिलों ने एथेनॉल प्लांट लगाए हैं, और एथेनॉल से मिलों की नकदी स्थिति सुधरती है, जिससे किसानों के भुगतान में मदद मिलती है।
कर्नाटक में किसान आंदोलन, मंत्री ने दिल्ली बातचीत का दिया न्योता
कर्नाटक राज्य रैता संघ ने हुब्बली में बड़े प्रदर्शन की घोषणा की है। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने शहर में सुरक्षा कड़ी कर दी है, और मंत्री के आवास व कार्यालय के पास बैरिकेड लगाए गए हैं।
प्रभासाक्षी की रिपोर्ट के मुताबिक मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की चिंताओं को गंभीरता से लेगी। पड़ोसी राज्यों के किसान संगठनों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
यूपी के किसानों के लिए इसका क्या मतलब
मंत्री के दावे राष्ट्रीय स्तर के हैं, लेकिन यूपी देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है, इसलिए यहां के आंकड़े जानना जरूरी है। राज्य सरकार के दावों के मुताबिक 2025-26 पेराई सत्र में मिलों ने किसानों के 94.86 फीसदी से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान पूरा किया। 102 निजी मिलों ने शत-प्रतिशत भुगतान किया, और सहकारी क्षेत्र की 23 मिलों ने भी 2,820.89 करोड़ रुपये का शत-प्रतिशत भुगतान किया। सरकार के अनुसार अब तक किसानों के खातों में रिकॉर्ड 3.25 लाख करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य सीधे हस्तांतरित हुआ है।
लेकिन जमीनी तस्वीर में कुछ दाग भी हैं। बरेली की नवाबगंज (ओसवाल) चीनी मिल पर किसानों का करीब 70 करोड़ रुपये का बकाया है, और प्रशासन अब 180 करोड़ रुपये के मूल्यांकन वाली इस पूरी मिल को बेचने की प्रक्रिया चला रहा है। दैनिक जागरण और डाइनामाइट न्यूज के मुताबिक मिल की बिक्री के लिए खरीदार की तलाश तेज है। यानी एक तरफ भुगतान के बड़े दावे हैं, तो दूसरी तरफ कुछ मिलों का वर्षों पुराना बकाया अब भी किसानों का इंतजार कर रहा है।
यूपी के किसानों को यह भी याद रखना चाहिए कि प्रदेश में कुल 122 चीनी मिलें हैं, और नया सत्र आज से शुरू हो गया है। सट्टा प्रदर्शन और सदस्यता की तिथियां बीत चुकी हैं, इसलिए अब नजर पेराई शुरू होने की तारीख और नए एसएपी की घोषणा पर टिकी है।
नया चीनी वर्ष शुरू, SAP की घोषणा बाकी
आज 1 अक्टूबर से 2026-27 का नया चीनी वर्ष शुरू हो गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मिलें इस बार करीब 10 दिन पहले पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं, और 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू होने की उम्मीद है। लेकिन नए सत्र का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है — नई घोषणा आने तक किसान पिछले सत्र के भाव को ही संदर्भ मान सकते हैं, नया भाव नहीं।
किसानों के लिए सबसे समझदारी भरा रास्ता यही है कि वे गन्ना समिति के रिकॉर्ड, सट्टा सूची और भुगतान की स्थिति caneup.in पोर्टल पर नियमित जांचते रहें। बकाए की शिकायत के लिए टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर संपर्क किया जा सकता है।
आपके सवाल
प्रश्न: मंत्री ने गन्ना भुगतान को लेकर क्या दावा किया?
उत्तर: केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 30 सितंबर 2026 को दावा किया कि इस चीनी वर्ष में 98 फीसदी और पिछले साल 99 फीसदी भुगतान हो गया है। पहले किसानों को 5 साल तक भी भुगतान नहीं मिलता था, यह भी उन्होंने कहा।
प्रश्न: क्या इस साल एफआरपी बढ़ेगी?
उत्तर: मंत्री के मुताबिक सरकार ने हर साल एफआरपी बढ़ाई है और इस साल भी बढ़ोतरी की जाएगी। नई एफआरपी की आधिकारिक घोषणा अभी आनी बाकी है।
प्रश्न: यूपी का नया एसएपी कब घोषित होगा?
उत्तर: 2026-27 सत्र का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है। 2025-26 में यह 400 रुपये प्रति क्विंटल (अगेती) था, लेकिन नया भाव सरकार की नई घोषणा से ही तय होगा।
प्रश्न: कर्नाटक में किसान क्यों आंदोलन कर रहे हैं?
उत्तर: कर्नाटक के गन्ना किसान गन्ने के उचित मूल्य (एफआरपी) में बढ़ोतरी की मांग को लेकर आंदोलित हैं। मंत्री ने उन्हें आंदोलन की बजाय दिल्ली आकर बातचीत का न्योता दिया है।
प्रश्न: बकाया भुगतान की शिकायत कहां करें?
उत्तर: टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर शिकायत दर्ज कराएं। caneup.in पोर्टल पर भुगतान की स्थिति भी ऑनलाइन देखी जा सकती है।
स्रोत: आईएएनएस (समाचारनामा और पंजाब केसरी, 30 सितंबर 2026), प्रभासाक्षी (29 सितंबर 2026), दैनिक जागरण (29 सितंबर 2026), डाइनामाइट न्यूज (30 सितंबर 2026), चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग, उत्तर प्रदेश।
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