12 अक्टूबर को दिल्ली में गन्ना किसानों से मिलेंगे मंत्री प्रहलाद जोशी: चीनी की एमएसपी, ₹365 एफआरपी और बकाया भुगतान पर बड़ी चर्चा

गन्ना किसानों के लिए दिल्ली से बड़ी खबर आई है। केंद्रीय खाद्य, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी ने 12 अक्टूबर को नई दिल्ली में गन्ना किसानों से बैठक करने की घोषणा की है। इस बैठक में किसानों की मांगों पर सीधी चर्चा होगी, जिनमें सबसे ऊपर चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बढ़ाने की मांग है।
यह ऐलान शुक्रवार, 2 अक्टूबर को हुब्बली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया गया। मंत्री ने कहा, “हम तानाशाह नहीं हैं। इसीलिए किसानों के साथ बैठक बुलाई गई है।” उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए यह बैठक इसलिए खास है क्योंकि यूपी देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है और पेराई सत्र 2026-27 सिर पर है — पश्चिमी यूपी में मिलें करीब 20 अक्टूबर से चलने की तैयारी में हैं।
क्यों बुलानी पड़ी यह बैठक
इस बैठक की जड़ में गन्ना किसानों का प्रदर्शन है। मंत्री के हुब्बली स्थित आवास के पास गन्ना किसानों ने प्रदर्शन किया था, जिसके बाद मंत्री ने किसानों को दिल्ली आकर बात करने का न्योता दिया।
एक और अहम मुद्दा कर्नाटक से जुड़ा है। मंत्री ने कर्नाटक सरकार से राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) तय करने की मांग की है, जो केंद्र के एफआरपी से ऊपर हो। कर्नाटक देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में तीसरे नंबर पर है — यूपी और महाराष्ट्र के बाद — लेकिन वहां राज्य सरकार एसएपी तय नहीं करती। जबकि यूपी, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और तमिलनाडु जैसे प्रमुख उत्पादक राज्य एफआरपी से ऊपर एसएपी घोषित करते हैं।
यूपी में एसएपी की व्यवस्था पहले से लागू है — राज्य की 122 चीनी मिलों पर एसएपी के हिसाब से भुगतान अनिवार्य है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती गन्ने का एसएपी ₹400 प्रति क्विंटल था; 2026-27 के नए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।
बैठक में किन मांगों पर होगी चर्चा
12 अक्टूबर की बैठक का मुख्य एजेंडा किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांगें हैं:
चीनी की एमएसपी बढ़ाने की मांग: किसानों की सबसे बड़ी मांग है कि चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाया जाए। मंत्री ने बताया कि चीनी की एमएसपी उस समय शुरू की गई थी जब बाजार में चीनी के दाम तेजी से गिर गए थे। इसका मकसद था कि चीनी तय न्यूनतम कीमत से नीचे न बिके।
गन्ना भुगतान में देरी: पेराई सत्र शुरू होने वाला है, और किसानों की चिंता बकाया भुगतान को लेकर है। एमएसपी बढ़ने से मिलों की आर्थिक सेहत सुधरेगी, जिससे समय पर भुगतान आसान होगा।
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें: मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार एम.एस. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू कर रही है। कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश इथेनॉल उत्पादन के प्रमुख राज्य हैं, और इथेनॉल से मिलों की आय बढ़ने का सीधा फायदा किसानों तक पहुंचता है।
डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी किसानों की शिकायतें सुनेंगे।
मंत्री की अहम बात: चीनी की एमएसपी और गन्ने का दाम अलग मुद्दे
बैठक से पहले मंत्री ने एक अहम फर्क साफ किया है। मंत्री का कहना है कि चीनी की एमएसपी और गन्ना किसानों को मिलने वाला दाम दो अलग-अलग चीजें हैं। चीनी की एमएसपी बढ़ने का मतलब यह नहीं कि गन्ना किसानों को मिलने वाला भुगतान अपने आप बढ़ जाएगा — दोनों कीमतें सीधे तौर पर जुड़ी नहीं हैं। यानी सरकार चीनी का न्यूनतम मूल्य बढ़ाए, तो यह गारंटी नहीं कि मिलें गन्ने का दाम भी उतना ही बढ़ा देंगी।
इसका व्यावहारिक मतलब यह है कि किसानों को बैठक में सिर्फ चीनी की एमएसपी पर नहीं, बल्कि गन्ने के दाम — यानी एफआरपी और एसएपी — पर भी जोर देना होगा। एफआरपी और एसएपी के गणित को समझने के लिए यह लेख पढ़ें।
₹365 एफआरपी: यूपी के किसानों के हिसाब पर असर
केंद्र सरकार ने 2026-27 चीनी सत्र के लिए गन्ने का एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है, जो 1 अक्टूबर 2026 से लागू है। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सीसीईए ने लिया था, जिसकी घोषणा अश्विनी वैष्णव ने की थी।
एफआरपी का गणित इस तरह है: 10.25 प्रतिशत की आधार रिकवरी दर पर एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल है — पिछले सत्र (2025-26) के ₹355 से ₹10 यानी 2.81 प्रतिशत की बढ़ोतरी। 10.25 प्रतिशत से ऊपर हर 0.1 प्रतिशत रिकवरी पर ₹3.56 प्रति क्विंटल का प्रीमियम मिलेगा, जबकि 9.5 प्रतिशत से कम रिकवरी वाली मिलों को देने वाले किसानों की कोई कटौती नहीं होगी — उन्हें कम से कम ₹338.3 प्रति क्विंटल मिलेगा।
यूपी के लिए क्या मायने हैं इस बैठक के
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है — यहां 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें से कम से कम 71 पश्चिमी यूपी में हैं। सहारनपुर के उप गन्ना आयुक्त ओ.पी. सिंह के मुताबिक इस बार पेराई सत्र पिछले साल से करीब 10 दिन पहले, लगभग 20 अक्टूबर से शुरू हो सकता है।
बैठक के नतीजे यूपी के किसानों को तीन तरह से प्रभावित कर सकते हैं: पहला, अगर चीनी की एमएसपी बढ़ती है तो मिलों की आर्थिक सेहत सुधरेगी और समय पर भुगतान आसान होगा। दूसरा, बैठक में राज्यों के एसएपी का मुद्दा उठेगा — यूपी में 2026-27 के नए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है, और चर्चा से बढ़ोतरी का माहौल बन सकता है। तीसरा, किसान समय पर भुगतान की ठोस गारंटी की मांग कर सकते हैं — मंत्री ने पहले भी भुगतान में तेजी के दावे किए हैं।
किसान अभी क्या करें: 4 जरूरी कदम
- गन्ना सर्वे रिकॉर्ड जांचें: अपना रकबा और किस्म का सर्वे रिकॉर्ड सत्यापित कर लें।
- बैंक खाता सक्रिय रखें: भुगतान सीधे बैंक खाते में आता है। खाता सक्रिय हो और जरूरी पहचान दस्तावेजों से जुड़ा हो, वरना देरी होगी।
- गन्ना समिति की सदस्यता: अभी तक सदस्य नहीं बने हैं तो 10 अक्टूबर 2026 से पहले सदस्यता ले लें।
- पर्ची कैलेंडर पर नजर: मिल चलने से पहले अपना प्री-कैलेंडर और पर्ची कैलेंडर ऑनलाइन जांचते रहें, ताकि कटाई और आपूर्ति का सही समय पता रहे।
आपके सवाल
12 अक्टूबर की बैठक कहां होगी? नई दिल्ली में। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने इसकी घोषणा की है। डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी किसानों की बात सुनेंगे।
बैठक में किसानों की मुख्य मांग क्या है? चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बढ़ाने की मांग सबसे ऊपर है। इसके साथ ही गन्ने के बेहतर दाम और समय पर भुगतान की मांग भी एजेंडे में है।
क्या चीनी की एमएसपी बढ़ने से गन्ने का दाम भी बढ़ेगा? नहीं, अपने आप नहीं। मंत्री ने साफ किया है कि चीनी की एमएसपी और गन्ने का दाम दो अलग मुद्दे हैं और सीधे जुड़े नहीं हैं।
2026-27 के लिए गन्ने का एफआरपी कितना है? ₹365 प्रति क्विंटल, जो 1 अक्टूबर 2026 से लागू है। यह 10.25 प्रतिशत की आधार रिकवरी दर पर है।
यूपी में 2026-27 का एसएपी कब घोषित होगा? अभी घोषणा बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती गन्ने का एसएपी ₹400 प्रति क्विंटल था।
यूपी में पेराई सत्र कब शुरू होगा? पश्चिमी यूपी में मिलें करीब 20 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं, जो पिछले साल से लगभग 10 दिन पहले है।
स्रोत: द हिंदू (2 अक्टूबर 2026), डेक्कन हेराल्ड (2 अक्टूबर 2026), एग्रीइनसाइट, द इकोनॉमिक टाइम्स।
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
यह आर्टिकल कैसा लगा?



