पंजाब सरकार का बड़ा फैसला — 20 अक्टूबर से पहले पेराई शुरू करने वाली मिलों को ₹10/कुंतल ट्रांसपोर्ट सब्सिडी

चंडीगढ़ / जालंधर: पंजाब सरकार ने आगामी पेराई सत्र 2026-27 के दौरान धान की पराली जलाने की समस्या पर अंकुश लगाने और गेहूं की समय पर बुवाई के लिए खेतों को खाली कराने के दोहरे उद्देश्य से आज एक बड़ा प्रोत्साहन पैकेज घोषित किया है। पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने चंडीगढ़ में घोषणा की कि राज्य की जो भी सहकारी अथवा निजी चीनी मिलें आगामी 20 अक्टूबर 2026 से पहले पेराई कार्य औपचारिक रूप से शुरू कर देंगी, उन्हें राज्य सरकार द्वारा प्रति क्विंटल ₹10 की विशेष गन्ना ढुलाई सहायता (Transport Subsidy) प्रदान की जाएगी।
पंजाब में सामान्यतः चीनी मिलें 15 से 20 नवंबर के आसपास पेराई शुरू करती थीं, जिसके कारण गन्ना किसान अपनी फसल काटकर अगली फसल (गेहूं या आलू) लगाने में अत्यधिक लेट हो जाते थे। जल्दी खेत खाली करने के दबाव में किसान गन्ने की पत्तियां और धान की पराली खेतों में ही जला देते थे।
15 सहकारी व निजी चीनी मिलों को मिलेगा सीधा लाभ
इस प्रोत्साहन योजना के तहत पंजाब की सभी 9 सहकारी चीनी मिलों (शुगरफेड पंजाब) और 6 बड़ी निजी मिलों (राणा शुगर्स, एबी शुगर्स, भगवानपुरा आदि) को कवर किया गया है।
पंजाब कृषि मंत्री ने बताया, “यदि कोई मिल 20 अक्टूबर से पहले पेराई शुरू करती है, तो दूर-दराज के क्रय केंद्रों से मिल गेट तक गन्ना लाने में आने वाला अतिरिक्त ट्रांसपोर्ट खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इसके लिए राज्य के बजट में ₹45 करोड़ का विशेष रिवॉल्विंग फंड बनाया गया है। इससे किसानों का गन्ना समय से कटेगा और उन्हें गेहूं की बुवाई के लिए 10 से 15 दिन का अतिरिक्त समय मिलेगा।”
पंजाब में गन्ने का भाव ₹391 से बढ़ाकर ₹410 करने की मांग
पंजाब की संयुक्त किसान मोर्चा और गन्ना संघर्ष कमेटी ने सरकार के इस प्रोत्साहन कदम का स्वागत किया है लेकिन साथ ही पड़ोसी राज्य हरियाणा द्वारा ₹405 प्रति क्विंटल प्रस्तावित किए जाने के बाद पंजाब में भी गन्ने का भाव ₹410 प्रति क्विंटल करने की मांग तेज कर दी है।
वर्तमान में पंजाब में अगेती किस्म का भाव ₹391 प्रति क्विंटल है, जिसमें ₹335 मिलें देती हैं और ₹56 का भुगतान राज्य सरकार बजट से सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी करती है। किसान नेताओं का कहना है कि यदि पंजाब सरकार हरियाणा से आगे निकलना चाहती है, तो उसे 10 सितंबर तक ₹410 का भाव घोषित कर देना चाहिए।
पंजाब सरकार के इस फैसले से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीमावर्ती मिलों पर भी समय से पहले (15 से 20 अक्टूबर के बीच) पेराई शुरू करने का सकारात्मक दबाव बढ़ गया है।
वायु प्रदूषण नियंत्रण में मिलेगा बड़ा योगदान
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में खेतों के समय पर खाली होने से किसान पराली प्रबंधन के लिए ‘सुपर सीडर’ और ‘हैप्पी सीडर’ मशीनों का कुशलतापूर्वक उपयोग कर सकेंगे। इससे दिल्ली-एनसीआर और पंजाब के वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी चीनी मिलों को निर्देशित किया है कि वे अपने बॉयलरों में पराली आधारित पेलेट्स (Biomass Pellets) का 10% को-फायरिंग मिश्रण अनिवार्य रूप से उपयोग करें ताकि पराली का व्यावसायिक निपटान भी संभव हो सके।
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