गेहूं ₹2,610/क्विंटल, सरसों ₹6,613: 6 रबी फसलों का एमएसपी बढ़ा — गन्ना किसानों को दीपावली से पहले डबल राहत

दीपावली से ठीक पहले उत्तर प्रदेश के किसान परिवारों के लिए सरकार की तरफ से दोहरी खुशखबरी आई है। केंद्र सरकार ने 30 सितंबर को छह रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है, जिससे गेहूं, चना, मसूर, जौ, सरसों और कुसुम उगाने वाले करोड़ों किसानों को सीधा फायदा होगा। वहीं गन्ना बेल्ट के किसानों के लिए भी अच्छी खबर है — प्रदेश के गन्ना मंत्री ने 30 अक्टूबर तक ढाई हजार करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान कराने का भरोसा दिया है। यानी रबी की बुवाई से पहले किसान के हाथ में पैसा और उपज का बेहतर दाम, दोनों की उम्मीद बंधी है।
एमएसपी में बढ़ोतरी का यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में लिया गया। यह बढ़ोतरी विपणन वर्ष 2027-28 के लिए लागू होगी, यानी इस रबी में बोई गई फसल जो अगले साल बेची जाएगी, उस पर नई दरें मिलेंगी। यूपी के लिए यह फैसला इसलिए खास है, क्योंकि यहां गन्ने के साथ लाखों किसान गेहूं-सरसों भी उगाते हैं — कई खेतों में गन्ने के साथ गेहूं की सहफसली तक होती है।
6 रबी फसलों के नए एमएसपी — पूरी सूची
सरकारी बयान के मुताबिक इस बार सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कुसुम के एमएसपी में की गई है। फसलवार सूची इस प्रकार है:
- गेहूं: एमएसपी में ₹25 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी — नई दर ₹2,610 प्रति क्विंटल (पिछले विपणन वर्ष में ₹2,585 थी)
- जौ: ₹136 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी — नई दर ₹2,286 प्रति क्विंटल
- चना: ₹83 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी — नई दर ₹5,958 प्रति क्विंटल
- मसूर: ₹390 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी — नई दर ₹7,390 प्रति क्विंटल
- सरसों-रेपसीड: ₹413 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी — नई दर ₹6,613 प्रति क्विंटल
- कुसुम (सैफ्लावर): ₹675 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी — नई दर ₹7,215 प्रति क्विंटल
सरसों के ₹6,613 और कुसुम के ₹7,215 प्रति क्विंटल के भाव को देखते हुए पश्चिमी यूपी के कई किसान इस रबी में सरसों का रकबा बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं।
गन्ना किसानों के लिए इस फैसले का क्या मतलब है
यूपी का गन्ना किसान सिर्फ गन्ने पर निर्भर नहीं रहता। शरदकालीन गन्ने की बुवाई के साथ गेहूं की सहफसली होती है, और पेड़ी के खेतों में भी कई किसान रबी की फसल लेते हैं। गेहूं के ₹2,610 और सरसों के ₹6,613 के एमएसपी का सीधा मतलब है कि किसान की रबी की उपज को सरकारी खरीद में बेहतर दाम मिलेगा।
सरकार का कहना है कि एमएसपी में उत्पादन लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत का मार्जिन सुनिश्चित किया गया है — गेहूं पर करीब 106 प्रतिशत, सरसों पर 96 प्रतिशत और मसूर पर 92 प्रतिशत का मार्जिन है। आधिकारिक अनुमान के मुताबिक 2027-28 के विपणन वर्ष में 324 लाख टन की खरीद पर किसानों को कुल ₹90,962 करोड़ का भुगतान होगा।
एक और अहम बात — गन्ने का भुगतान कई बार अटकता है, ऐसे में एमएसपी पर बिकने वाली गेहूं-सरसों की फसल किसान के घर का खर्च और अगली बुवाई का इंतजाम दोनों संभालती है।
30 अक्टूबर तक ₹2,500 करोड़ गन्ना भुगतान का भरोसा
गन्ना बेल्ट की सबसे बड़ी चिंता यानी बकाया भुगतान पर भी ताजा बयान आया है। जी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, बरेली पहुंचे प्रदेश के कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा है कि 30 अक्टूबर तक ढाई हजार करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान करा दिया जाएगा। मंत्री निकाय चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के लिए बरेली आए थे, जहां उन्होंने मीडिया से बातचीत में यह जानकारी दी।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत 1 अक्टूबर से हो चुकी है। गन्ना विभाग के आंकड़ों के मुताबिक सत्र 2025-26 में राज्य की 102 चीनी मिलों ने शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया था और कुल 94.86 प्रतिशत बकाया चुकाया जा चुका है। अब देखना यह है कि 30 अक्टूबर की यह डेडलाइन कितनी मिलें पूरी करती हैं।
SAP 2025-26: ₹400/क्विंटल — और 2026-27 की घोषणा अभी बाकी
गन्ने के भाव को लेकर किसान के मन में एक सवाल हमेशा रहता है — इस सीजन का एसएपी क्या होगा? फिलहाल की स्थिति साफ है: पेराई सत्र 2025-26 के लिए राज्य सरकार ने अगेती प्रजाति के गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) ₹400 प्रति क्विंटल और सामान्य प्रजाति का ₹390 प्रति क्विंटल तय किया था। एफआरपी और एसएपी के अंतर को समझने के लिए यह गाइड पढ़ें।
पेराई सत्र 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है — सरकार की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। पिछले सीजन का भाव ही इस सीजन का भाव मान लेना गलत होगा, इसलिए किसान किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और सिर्फ आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें। प्रदेश में फिलहाल 122 चीनी मिलें संचालित हैं।
किसान परिवार के लिए अभी के 3 जरूरी काम
पहला काम — बकाया भुगतान चेक करें। caneup पोर्टल पर भुगतान की स्थिति ऑनलाइन देखने की पूरी प्रक्रिया यहां दी गई है। पैसा अटका हो तो जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें, या टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 / 1800-180-5129 पर शिकायत दर्ज कराएं।
दूसरा काम — पेराई सत्र 2026-27 की पर्ची और कैलेंडर पर नजर रखें। गन्ना पर्ची ऑनलाइन चेक करने का तरीका जान लें, ताकि मिल खुलते ही सप्लाई में देरी न हो।
तीसरा काम — रबी की बुवाई की योजना अभी से बनाएं। गेहूं के ₹2,610 और सरसों के ₹6,613 के नए एमएसपी को देखते हुए सहफसली या अलग खेत में रबी की बुवाई किसान की आमदनी बढ़ा सकती है। सरकारी खरीद के लिए किसान पंजीकरण और दस्तावेज पहले से दुरुस्त रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रबी फसलों के नए एमएसपी कब से लागू होंगे? यह बढ़ोतरी विपणन वर्ष 2027-28 के लिए है, यानी इस रबी सीजन (2026-27) में बोई गई फसल जो अगले साल बेची जाएगी, उस पर नई दरें लागू होंगी। गेहूं का नया एमएसपी ₹2,610, सरसों का ₹6,613 और कुसुम का ₹7,215 प्रति क्विंटल तय हुआ है।
गेहूं के एमएसपी में कितनी बढ़ोतरी हुई है? गेहूं के एमएसपी में ₹25 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है, जिससे नई दर ₹2,610 प्रति क्विंटल हो गई है। पिछले विपणन वर्ष में यह ₹2,585 प्रति क्विंटल थी।
किस फसल के एमएसपी में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई? कुसुम के एमएसपी में सबसे ज्यादा ₹675 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है, नई दर ₹7,215 प्रति क्विंटल। इसके बाद सरसों-रेपसीड में ₹413 और मसूर में ₹390 प्रति क्विंटल का इजाफा हुआ है।
गन्ना किसानों को 30 अक्टूबर तक कितना भुगतान मिलेगा? जी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा है कि 30 अक्टूबर तक ढाई हजार करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान करा दिया जाएगा। यह मंत्री का बयान है, जिसकी पुष्टि विभागीय आंकड़ों से होती रहेगी।
पेराई सत्र 2026-27 का एसएपी (गन्ना भाव) घोषित हुआ क्या? नहीं, पेराई सत्र 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पेराई सत्र 2025-26 का एसएपी अगेती प्रजाति के लिए ₹400 और सामान्य प्रजाति के लिए ₹390 प्रति क्विंटल था — इसे नए सीजन का भाव न समझें।
गन्ना भुगतान अटका हो तो किसान कहां शिकायत करे? जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें, या टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 / 1800-180-5129 पर शिकायत दर्ज कराएं। एसएमएस जानकारी के लिए सरकारी शॉर्टकोड 51969 भी उपलब्ध है।
स्रोत: एबीपी न्यूज, द प्रिंट (हिंदी), राष्ट्र प्रेस, जी न्यूज, फ्री प्रेस जर्नल, द स्टेट्समैन
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