५५०० रुपये प्रति टन नहीं मिला तो १३ अक्टूबर से हाईवे जाम: कोल्हापुर में राजू शेट्टी का ऐलान, यूपी की मिलों पर भी सीधा असर

गन्ने के भाव को लेकर देशभर में चल रही खींचतान अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। महाराष्ट्र के कोल्हापुर में 10 अक्टूबर को स्वाभिमानी शेतकरी संघटना की 25वीं ऊस परिषद में पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने साफ कहा — इस सीजन में कटने वाले गन्ने पर 5,500 रुपये प्रति टन की पहली उचल (एडवांस) मिलनी चाहिए, यानी करीब 550 रुपये प्रति क्विंटल। अगर यह मांग पूरी नहीं हुई तो “चीनी मिलों की धुरांडी नहीं जलने देंगे” — मिलें चालू नहीं होने देंगे। साथ ही चेतावनी दी कि आज, 12 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाली केंद्रीय बैठक में अगर कोई हल नहीं निकला तो 13 अक्टूबर से महाराष्ट्र और कर्नाटक के राष्ट्रीय राजमार्गों पर अनिश्चितकालीन चक्का जाम होगा।
सबसे अहम बात यूपी के किसानों के लिए यह है: राजू शेट्टी ने अपने भाषण में महाराष्ट्र और कर्नाटक के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों का नाम भी लिया। उन्होंने कहा कि अगर तीनों राज्यों की मिलें चालू नहीं होने दी गईं तो चीनी का भाव आसमान छू जाएगा। इसका सीधा असर यूपी पर भी पड़ेगा, जहां पश्चिमी जिलों में 20 अक्टूबर से पेराई शुरू होने की तैयारी चल रही है।
कोल्हापुर की ऊस परिषद में क्या-क्या मांगे रखी गईं
10 अक्टूबर को जयसिंगपुर के विक्रमसिंह मैदान में आयोजित रजत महोत्सव वाली इस ऊस परिषद में महाराष्ट्र के साथ-साथ कर्नाटक के हजारों गन्ना किसान भी पहुंचे थे। राजू शेट्टी ने अपने भाषण में ये मुख्य मांगे रखीं:
- 5,500 रुपये प्रति टन पहली उचल: इस सीजन में कटने वाले गन्ने पर पहले भुगतान के तौर पर 5,500 रुपये प्रति टन मिलना चाहिए — यानी करीब 550 रुपये प्रति क्विंटल। उचल नहीं मिली तो मिलों को चालू नहीं होने दिया जाएगा।
- एथेनॉल पर 70 रुपये प्रति लीटर एमएसपी: एथेनॉल पर प्रति लीटर 70 रुपये और चीनी पर 50 रुपये प्रति किलो का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए।
- सूखा मुआवजा: कम बारिश से प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये की सीधी मदद, पैसा सीधे बैंक खातों में।
- अतिरिक्त भुगतान: 15 दिसंबर के बाद कटने वाले गन्ने पर 300 रुपये प्रति टन अतिरिक्त भुगतान, और कटाई में देरी व ढुलाई में रिकवरी घटने पर 500 रुपये प्रति टन सब्सिडी।
- कर्ज़ में राहत: नियमित कर्ज़ चुकाने वाले किसानों की प्रोत्साहन राशि 50,000 से बढ़ाकर 1 लाख रुपये की जाए; चीनी मिलों को 4 प्रतिशत ब्याज पर कर्ज़ और एथेनॉल परियोजनाओं के कर्ज़ पर ब्याज छूट।
- पारदर्शी तौल: मिलों में तौल और रिकवरी के माप में गड़बड़ी के आरोपों पर डिजिटल तौल और ऑनलाइन निगरानी की मांग।
शेट्टी ने किसानों को कटाई में जल्दबाजी न करने की सलाह भी दी। उनके मुताबिक एल-निनो के असर से बारिश कम हुई है, उत्पादन घटेगा और चीनी की कमी हो सकती है — उनका दावा है कि सीजन खत्म होने के बाद केंद्र को 10 लाख टन चीनी का आयात करना पड़ सकता है। चीनी “सोने के भाव” बिकेगी तो किसानों को भाव भी उसी हिसाब से मिलना चाहिए।
आज 12 अक्टूबर को दिल्ली में बैठक — क्या है एजेंडा
इस आंदोलन की सबसे अहम कड़ी आज दोपहर 3 बजे कृषि भवन में होने वाली बैठक है। केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने खुद पत्र लिखकर कर्नाटक के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को दिल्ली बुलाया है — 25 साल के आंदोलन में यह पहला मौका है जब केंद्र ने खुद किसान संगठन को बैठक के लिए बुलाया है। बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद रहेंगे। राजू शेट्टी ने साफ कहा — बैठक में हल नहीं निकला तो 13 अक्टूबर से महाराष्ट्र और कर्नाटक के राष्ट्रीय राजमार्गों पर अनिश्चितकालीन चक्का जाम होगा, शुरुआत कोग्नोली टोल प्लाजा (महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा) से होगी।
यूपी के गन्ना किसानों पर इसका क्या असर होगा
यह खबर सिर्फ महाराष्ट्र-कर्नाटक की नहीं है। राजू शेट्टी ने अपने भाषण में साफ कहा कि “महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश — तीनों राज्यों के कारखाने चालू नहीं होने दिए गए तो चीनी 200 रुपये किलो तक पहुंच सकती है।” यह बात एक तरफ चेतावनी है, दूसरी तरफ यूपी के किसानों के लिए एक बड़ा संकेत भी है।
पहला असर भाव की लड़ाई पर होगा। केंद्र ने 2026-27 सीजन के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो 1 अक्टूबर से लागू हो चुका है। लेकिन यूपी में 2026-27 सीजन के राज्य सलाहकार मूल्य (एसएपी) की घोषणा अभी तक नहीं हुई है — इस बारे में कोई आधिकारिक ऐलान बाकी है। यूपी के किसान संगठन गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, और 20-25 अक्टूबर के आसपास आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है। ऐसे में अगर महाराष्ट्र में 550 रुपये क्विंटल (5,500 रुपये/टन) की मांग जोर पकड़ती है, तो यूपी की 600 रुपये की मांग को भी ताकत मिलेगी।
दूसरा असर पेराई सीजन की शुरुआत पर है। यूपी में पश्चिमी जिलों की चीनी मिलों में 20 अक्टूबर से पेराई शुरू होने की तैयारी है, और कुछ मिलों ने बॉयलर पूजन भी शुरू कर दिया है। अगर पड़ोसी राज्यों में हाईवे जाम और मिल बंद का आंदोलन शुरू होता है, तो उससे आपूर्ति शृंखला, गन्ने की ढुलाई और बाजार के भाव पर असर पड़ सकता है।
तीसरा असर एथेनॉल पर होगा। यूपी की कई चीनी मिलों ने एथेनॉल डिस्टिलरी में निवेश किया है। अगर केंद्र सरकार एथेनॉल पर 70 रुपये प्रति लीटर का हमीभाव तय करती है, तो मिलों की कमाई बढ़ेगी — और यूपी के किसानों के लिए भी भुगतान की स्थिति मजबूत होगी।
किसान अभी क्या करें
भाव पर नजर रखें — 12 अक्टूबर की दिल्ली बैठक और 13 अक्टूबर के आंदोलन की स्थिति से भाव की दिशा तय होगी। कटाई में जल्दबाजी न करें — कच्चे गन्ने में चीनी और वजन दोनों कम मिलता है। सर्वे और खाता जांच लें — तौल पर्ची और भुगतान में दिक्कत न हो, इसके लिए गन्ना सर्वे का ब्यौरा और बैंक खाते की केवाईसी पहले से दुरुस्त रखें।
जवाब जानिए
राजू शेट्टी ने गन्ने के भाव की कितनी मांग रखी है? 5,500 रुपये प्रति टन की पहली उचल (एडवांस) — यानी लगभग 550 रुपये प्रति क्विंटल। उचल नहीं मिली तो मिलों को चालू नहीं होने देने की चेतावनी।
13 अक्टूबर से हाईवे जाम का ऐलान क्यों है? अगर 12 अक्टूबर को दिल्ली बैठक में हल नहीं निकला, तो 13 अक्टूबर से महाराष्ट्र और कर्नाटक के राष्ट्रीय राजमार्गों पर अनिश्चितकालीन चक्का जाम होगा — शुरुआत कोग्नोली टोल प्लाजा से।
आज की दिल्ली बैठक में कौन-कौन है? 12 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे कृषि भवन में — केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी और कर्नाटक के किसान प्रतिनिधि।
इसका यूपी के किसानों पर क्या असर होगा? यूपी का 2026-27 एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है। महाराष्ट्र में 550 रुपये/क्विंटल की मांग जोर पकड़ती है तो यूपी की 600 रुपये/क्विंटल की मांग को भी बल मिलेगा। एथेनॉल पर 70 रुपये/लीटर का हमीभाव तय होने पर मिलों की कमाई बढ़ेगी, जिससे भुगतान की स्थिति सुधरेगी।
क्या गन्ने का भाव 600 रुपये क्विंटल हो सकता है? यह किसान संगठनों की मांग है। केंद्र का एफआरपी 365 रुपये/क्विंटल तय है, यूपी का एसएपी घोषित नहीं हुआ है — अंतिम भाव राज्य सरकार की घोषणा पर निर्भर करेगा।
स्रोत: ईटीवी भारत मराठी (10 अक्टूबर 2026), एग्रीइनसाइट/चीनीमंडी, लोकमत; द बेंगलुरु लाइव (12 अक्टूबर बैठक की जानकारी)।
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