15 नवंबर से पहले मिलें नहीं चलेंगी: कराड में राजू शेट्टी का धरना, 5000 रुपये प्रति टन गन्ना भाव की मांग — यूपी किसानों के लिए भी संदेश

कराड/सातारा, 17 अक्टूबर। चीनी मिलों के पेराई सत्र को लेकर महाराष्ट्र में टकराव तेज हो गया है। स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष और पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने कराड स्थित कृष्णा सहकारी चीनी मिल के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि जब तक गन्ना किसानों की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक चीनी मिलों को सुचारु रूप से नहीं चलने दिया जाएगा। मिल परिसर के बाहर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे, भारी पुलिस बल तैनात रहा और पुलिस की मध्यस्थता से मिल प्रशासन व शेट्टी के बीच हुई बातचीत में कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।
यह लड़ाई सिर्फ महाराष्ट्र की नहीं है — अगले दो हफ्तों में यूपी की 122 चीनी मिलों में पेराई शुरू होनी है, इसलिए ये सवाल यहां के किसानों के लिए भी उतने ही अहम हैं।
मांगें क्या-क्या हैं: 5000 रुपये प्रति टन गन्ना भाव
किसान तक (16 अक्टूबर 2026) के मुताबिक, तीन मुख्य मांगें हैं: गन्ने का भाव 5000 रुपये प्रति टन (500 रुपये प्रति क्विंटल), चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) 50 रुपये प्रति किलो, और एथेनॉल का खरीद मूल्य 70 रुपये प्रति लीटर।
रूरल वॉयस (16 अक्टूबर 2026) के अनुसार, शेट्टी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर एफआरपी 450 रुपये प्रति क्विंटल और सत्रांत में 50 रुपये बोनस मांगा है — कुल 500 रुपये प्रति क्विंटल। तुलना के लिए: केंद्र का 2026-27 एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत बेस रिकवरी पर) है; यूपी का 2025-26 एसएपी 400/390/370 रुपये प्रति क्विंटल (अगेती/सामान्य/अनुपयुक्त) था — 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है।
जल्दी पेराई से 20 हजार रुपये प्रति एकड़ नुकसान का दावा
आंदोलन की सबसे तेज धार समय से पहले पेराई पर है। शेट्टी का कहना है कि इस समय गन्ने में रिकवरी अपेक्षाकृत कम है; कुछ हफ्ते और इंतजार किया जाए तो गन्ने का वजन और रिकवरी दोनों बढ़ सकते हैं। लेकिन जल्दी कटाई-पेराई से किसानों को प्रति एकड़ लगभग 20 हजार रुपये तक का नुकसान हो सकता है (किसान तक)। उनका तर्क है कि अगर सरकार और उद्योग जल्दी चीनी बाजार में लाना चाहते हैं तो इस नुकसान की भरपाई भी करें — 40 टन प्रति एकड़ उत्पादन मानते हुए 500 रुपये प्रति टन की दर से अनुदान दिया जाए।
रूरल वॉयस के मुताबिक, शेट्टी ने कार्यकर्ताओं से कहा कि इस अवस्था में गन्ना काटने से प्रति एकड़ 50 हजार रुपये तक का नुकसान हो सकता है। लोकसत्ता (7 अक्टूबर 2026) के अनुसार, शेट्टी ने यह भी आरोप लगाया था कि मिल मालिक ईडी-सीबीआई जांच के डर और सरकार को खुश रखने के लिए जल्दी पेराई कर रहे हैं — यह उनका आरोप है, जिस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। उन्होंने कहा था कि फिलहाल किसी जिले में 8 प्रतिशत से ज्यादा रिकवरी वाला गन्ना नहीं है, जबकि अपेक्षा 12-13 प्रतिशत की है — इसलिए पेराई 15 नवंबर के बाद ही शुरू होनी चाहिए।
मिल मालिकों का पक्ष: अल नीनो से गन्ना सूख रहा है
रूरल वॉयस ने उद्योग के सूत्रों के हवाले से दूसरा पक्ष भी रखा है। सूत्रों का कहना है कि अल नीनो के प्रभाव से गन्ने की फसल सूखने लगी है; अगर गन्ना पूरी तरह सूखकर पेराई के लायक न रहा तो किसानों के पास उसे चारे के रूप में इस्तेमाल करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा — और राज्य में चारे की कमी भी है। इसलिए मिलों ने तय समय 15 अक्टूबर से पहले, 8 अक्टूबर से ही पेराई शुरू करने का फैसला किया था।
14 मिलों ने पेराई शुरू कर दी थी और 40 तैयार थीं। लेकिन दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से बैठक में कोई सहमति न बनने के बाद किसान नेताओं के आह्वान पर जिन मिलों ने पेराई शुरू नहीं की थी, उन्होंने योजना स्थगित कर दी। इंडियन एक्सप्रेस (16 अक्टूबर 2026) में पुणे के मिल संचालकों ने सूखे और पानी की कमी की आशंका का हवाला देकर पेराई अभी शुरू करने की बात कही है।
आंदोलन कहां-कहां फैला: कराड से हुब्बली तक
शुक्रवार को संगठन ने सातारा के जरंदेश्वर चीनी मिल में विरोध प्रदर्शन किया — यह मिल महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के परिवार से जुड़ी बताई जाती है। शेट्टी ने कहा कि कुछ मिलों ने काम शुरू किया है, लेकिन उन्हें क्षमता से काफी कम गन्ना मिल रहा है (रूरल वॉयस)।
आंदोलन बेलगावी, धारवाड़, बागलकोट, बीजापुर (कर्नाटक) तथा पुणे, सातारा, कोल्हापुर, सांगली, सोलापुर, बारामती, लातूर (महाराष्ट्र) में फैला है। शेट्टी ने बताया कि 20 अक्टूबर को कर्नाटक के हुब्बली में बड़ा प्रदर्शन होगा, और जरूरत पड़ने पर “कांटा बंद” आंदोलन चलाकर तैयार चीनी को मिलों से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा।
यूपी के किसानों के लिए क्या सबक है
फाइनेंशियल एक्सप्रेस (17 अक्टूबर 2026) के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में अगले दो हफ्तों में पेराई शुरू होते ही चीनी के भाव घटकर 52 रुपये प्रति किलो तक आ सकते हैं।
तीन बातें नोट करें। पहली — एफआरपी 10.25 प्रतिशत बेस रिकवरी से जुड़ा है: रिकवरी जितनी कम, गन्ने का मिलता भाव उतना कम। इसलिए पर्ची कैलेंडर और तुलाई की निगरानी इस सत्र में और जरूरी है। दूसरी — यूपी में 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ; पिछले सत्र के 400/390/370 रुपये प्रति क्विंटल को इस सत्र का भाव न समझें। तीसरी — एनएफसीएसएफ/इस्मा/मिस्मा के अनुमानों के हवाले से चीनी की उत्पादन लागत करीब 48 रुपये प्रति किलो बताई गई है — इसीलिए एमएसपी 50 रुपये मांगा जा रहा है।
आगे क्या: रमेश चंद समिति पर भी सवाल
केंद्र ने गन्ना मूल्य, चीनी बिक्री कीमत, तुलाई और रिकवरी पर विचार के लिए हाल ही में समिति गठित की है। शेट्टी ने इसे टालने की कोशिश करार देते हुए दो दिनों में रिपोर्ट मांगी है (किसान तक); वहीं रूरल वॉयस के मुताबिक उन्होंने कहा कि प्रोफेसर रमेश चंद की अध्यक्षता वाली समिति हाल में बनी है और रिपोर्ट में समय लगेगा — इसलिए किसान पेराई शुरू होने से पहले फैसला चाहते हैं।
20 अक्टूबर का हुब्बली प्रदर्शन इस लड़ाई का अगला बड़ा पड़ाव होगा — असर यूपी की मिलों के पेराई कैलेंडर तक भी पहुंच सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: शेट्टी गन्ने का क्या भाव मांग रहे हैं? उत्तर: 5000 रुपये प्रति टन (500 रुपये प्रति क्विंटल) — एफआरपी 450 रुपये और 50 रुपये बोनस के रूप में (रूरल वॉयस)।
प्रश्न 2: जल्दी पेराई से क्या नुकसान है? उत्तर: अपरिपक्व गन्ने में रिकवरी करीब 8 प्रतिशत है जबकि अपेक्षा 12-13 प्रतिशत की है; इससे प्रति एकड़ 20 हजार रुपये तक का नुकसान हो सकता है (किसान तक)।
प्रश्न 3: चीनी का एमएसपी कितना मांगा जा रहा है? उत्तर: वर्तमान एमएसपी 31 रुपये प्रति किलो है; उत्पादन लागत करीब 48 रुपये बताकर 50 रुपये प्रति किलो की मांग की गई है (रूरल वॉयस)।
प्रश्न 4: मिल मालिक जल्दी पेराई क्यों चाहते हैं? उत्तर: अल नीनो से गन्ना सूख रहा है और चारे की कमी है — गन्ने के पेराई लायक न रहने से पहले काटना जरूरी है (रूरल वॉयस)।
प्रश्न 5: यूपी के किसानों पर क्या असर होगा? उत्तर: अगले दो हफ्तों में 122 मिलों में पेराई शुरू होनी है और 2026-27 का एसएपी घोषित नहीं हुआ — पर्ची, तुलाई और रिकवरी की निगरानी रखें।
स्रोत: किसान तक (16 अक्टूबर 2026), रूरल वॉयस (16 अक्टूबर 2026), इंडियन एक्सप्रेस (16 अक्टूबर 2026), लोकसत्ता (7 अक्टूबर 2026), फाइनेंशियल एक्सप्रेस (17 अक्टूबर 2026)
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