15 अक्टूबर से जल्दी पेराई तो मिलें बंद! राजू शेट्टी की कटका-बंद चेतावनी, कच्चे गन्ने से ₹500/टन नुकसान

चीनी मिलें इस बार पेराई सत्र 10 दिन पहले शुरू करने जा रही हैं — और इस पर किसान नेता राजू शेट्टी ने ऐसी चेतावनी दी है जिससे पूरे देश के गन्ना किसानों में हलचल मच गई है। शेट्टी ने साफ कहा है कि अगर 15 अक्टूबर से जबरन पेराई शुरू हुई तो संगठन मिलों को बंद कराने के लिए कटका-बंद (तौल कांटों को ठप करने) जैसा आंदोलन शुरू करेगा। उनके आरोप हैं कि चीनी मिलों के मालिक सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के डर से जल्दी पेराई के लिए तैयार हो रहे हैं, जबकि कच्चे गन्ने की जल्द कटाई से किसानों को प्रति टन करीब ₹500 तक का नुकसान हो सकता है।
7 अक्टूबर को राजू शेट्टी ने क्या कहा
महाराष्ट्र के प्रमुख किसान नेता और स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष राजू शेट्टी ने 7 अक्टूबर 2026 को चीनी मिल मालिकों पर तीखा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मिल मालिक ऊंचे चीनी भाव और एथेनॉल की कीमत के लालच में, सरकार के दबाव और ईडी-सीबीआई जांच के डर से जल्दी पेराई शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं।
शेट्टी का दावा है कि सरकार को डर है कि चीनी की कमी से इसका भाव ₹100 प्रति किलो तक जा सकता है, इसलिए मिलों पर दबाव डालकर पेराई जल्द शुरू कराई जा रही है। सबसे कड़ी चेतावनी यह रही: शेट्टी ने कहा कि जब तक चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य ₹50 प्रति किलो, एथेनॉल का भाव ₹70 प्रति लीटर और गन्ने का एमएसपी ₹5,000 प्रति क्विंटल नहीं तय होता, तब तक नवंबर से पहले मिलें शुरू न की जाएं। अगर किसी मिल ने जल्दी पेराई शुरू की तो कटका-बंद आंदोलन होगा।
क्यों है जल्दी पेराई का विरोध — कच्चे गन्ने की मार
राजू शेट्टी के विरोध की जड़ एक तकनीकी तथ्य है: अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में गन्ना पूरी तरह परिपक्व नहीं होता। शेट्टी के मुताबिक, कच्चे गन्ने की पेराई से चीनी रिकवरी करीब 1 से 1.5 प्रतिशत तक घट सकती है, जिससे किसानों को प्रति टन करीब ₹500 तक का नुकसान हो सकता है।
उनकी गणित सीधी है — कच्चे गन्ने में चीनी की मात्रा सिर्फ करीब 8 प्रतिशत रहती है। कम रिकवरी का मतलब है किसान के खाते में कम चीनी बनना और मिल को भी घाटा। उन्होंने चेतावनी दी कि नवंबर से पहले की कटाई से प्रति एकड़ भारी नुकसान होगा, क्योंकि रिकवरी के साथ गन्ने का वजन भी कम बैठेगा। संगठन ने 25वीं गन्ना परिषद 10 अक्टूबर को बुलाने की घोषणा की है, जिसमें आगे के आंदोलन की दिशा तय होगी।
यूपी के किसानों के लिए क्या मायने रखता है यह पूरा विवाद
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य है और यहां की स्थिति पर इस विवाद का सीधा असर पड़ेगा। सहारनपुर के उप गन्ना आयुक्त ओ.पी. सिंह के मुताबिक यूपी में कुल 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें से कम से कम 71 पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हैं।
पश्चिमी यूपी की मिलों ने बॉयलर पूजा और स्टीम ट्रायल अक्टूबर के पहले सप्ताह तक पूरे करने की तैयारी की है, और मौसम की स्थिति के आधार पर 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू हो सकती है — पिछले साल से करीब 10 दिन पहले। गन्ना विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपने सर्वेक्षण रिकॉर्ड — रकबा और किस्म — सत्यापित कर लें और बैंक खाते सक्रिय व पहचान पत्रों से जुड़े रखें। जल्दी पेराई से खेत जल्दी खाली होंगे और गेहूं की बुवाई समय पर हो सकेगी — लेकिन शेट्टी की चेतावनी इस फायदे पर सवाल खड़ा करती है: कच्चा गन्ना कटा तो रिकवरी और वजन दोनों घटेंगे, और नुकसान किसान की जेब से होगा।
एफआरपी ₹365 तय, लेकिन यूपी का एसएपी अभी बाकी
केंद्र सरकार ने पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है (10.25 प्रतिशत मूल रिकवरी पर) — पिछले सत्र के ₹355 से 2.81 प्रतिशत ज्यादा। लेकिन उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए असली भाव राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) तय करता है। पिछले सत्र 2025-26 में एसएपी अगेती किस्मों के लिए ₹400 और सामान्य किस्मों के लिए ₹390 प्रति क्विंटल था — यानी एफआरपी से ₹25-35 प्रति क्विंटल ज्यादा। पेराई सत्र 2026-27 का एसएपी सरकार ने अभी तक घोषित नहीं किया है। राजू शेट्टी की गन्ना एमएसपी ₹5,000 प्रति क्विंटल की मांग इसी बढ़ोतरी की लड़ाई का हिस्सा है।
साथ ही एसएपी की घोषणा पर नजर रखें — 2026-27 का भाव तय होते ही यह तय होगा कि आपको एफआरपी ₹365 से कितना ज्यादा मिलेगा।
सरकार का पक्ष — त्योहारों के लिए चीनी की उपलब्धता
केंद्र ने मिलों को 15 अक्टूबर 2026 से पेराई शुरू करने की सलाह दी है, ताकि त्योहारी सीजन में चीनी की उपलब्धता बेहतर रहे — जारी बयान के मुताबिक अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 3-4 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 10 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा हो जाएगा। यही वह बिंदु है जिसे शेट्टी सरकार का दबाव बताते हैं — उनका कहना है कि चीनी का स्टॉक खत्म होने की कगार पर है, इसलिए सरकार जल्दी पेराई करा रही है, और इसका खामियाजा किसान भुगतेंगे।
यूपी के किसानों के लिए जरूरी सावधानी
इस पूरे विवाद के बीच किसानों के लिए सबसे समझदारी भरा कदम यह है कि पेराई शुरू होने से पहले अपनी तैयारी पूरी कर लें। गन्ना सर्वेक्षण रिकॉर्ड जांच लें, क्रय केंद्र की जानकारी रख लें और बैंक खाते सक्रिय रखें। अगर आपकी मिल 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करती है और आपका गन्ना अभी परिपक्व नहीं है, तो गन्ना अधिकारी या समिति से संपर्क करके सही समय की सलाह जरूर लें — कच्चे गन्ने की जल्द कटाई से रिकवरी और वजन दोनों का नुकसान होता है। साथ ही एसएपी की घोषणा पर नजर रखें।
साथ ही एसएपी की घोषणा पर नजर रखें — 2026-27 का भाव तय होते ही यह तय होगा कि आपको एफआरपी ₹365 से कितना ज्यादा मिलेगा। कटका-बंद की चेतावनी और गन्ना परिषद की बैठक के बाद आगे क्या रुख बनता है, यह भी किसानों के भुगतान और भाव दोनों को प्रभावित करेगा।
आपके सवाल
क्या शेट्टी की चेतावनी का असर यूपी की मिलों पर पड़ेगा? शेट्टी की चेतावनी मुख्य रूप से महाराष्ट्र केंद्रित है, लेकिन उनकी मांगें राष्ट्रीय स्तर की हैं। यूपी की मिलों का कार्यक्रम राज्य सरकार के आदेशों से तय होगा।
जल्दी पेराई से किसान को कितना नुकसान हो सकता है? राजू शेट्टी के दावे के मुताबिक, कच्चे गन्ने की पेराई से रिकवरी 1 से 1.5 प्रतिशत तक घट सकती है और किसान को प्रति टन करीब ₹500 तक का नुकसान हो सकता है।
पेराई सत्र 2026-27 के लिए एफआरपी कितना तय हुआ है? केंद्र सरकार ने सत्र 2026-27 के लिए एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत मूल रिकवरी पर) तय किया है। यूपी का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है; पिछले सत्र में यह ₹400/₹390 था।
कटका-बंद का मतलब क्या है? कटका का अर्थ है मिल का तौल कांटा। कटका-बंद आंदोलन में किसान मिलों के तौल कांटों को ठप कर देते हैं, यानी गन्ना तौलने की प्रक्रिया रुक जाती है — दबाव बनाने का सबसे असरदार तरीका माना जाता है।
पेराई से पहले किसान को क्या जांचना चाहिए? गन्ना सर्वेक्षण रिकॉर्ड (रकबा और किस्म), बैंक खाते की सक्रियता और क्रय केंद्र की जानकारी — ये तीन चीजें पेराई से पहले जरूर जांच लें ताकि भुगतान में देरी न हो।
स्रोत: द हिंदू (7 अक्टूबर 2026), चीनीमंडी हिंदी, किसान इंडिया, टाइम्स ऑफ इंडिया/एग्रीइनसाइट (मिल तैयारी), पीआईबी बयान
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