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कोल्हापुर में बाइक रैली लेकर सड़कों पर उतरे गन्ना किसान: ₹4,500 प्रति टन पहली किस्त की मांग, 2 दिन में होगी बड़ी बैठक

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 25, 2026 • 6 min read
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कोल्हापुर में बाइक रैली लेकर सड़कों पर उतरे गन्ना किसान: ₹4,500 प्रति टन पहली किस्त की मांग, 2 दिन में होगी बड़ी बैठक
अंतिम अपडेट: October 25, 2026 5:01 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

रविवार की सुबह कोल्हापुर जिले का हातकणंगले इलाका बाइकों की आवाज से गूंज उठा। स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के अध्यक्ष और पूर्व सांसद राजू शेट्टी के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता और गन्ना किसान अपनी मोटरसाइकिलों के साथ तहसीलदार कार्यालय के बाहर जमा हुए और वहां से जिले की बड़ी चीनी मिलों की ओर बाइक रैली निकाली। रैली की एक ही मांग थी — इस पेराई सत्र के गन्ने पर पहली किस्त के तौर पर 4,500 रुपये प्रति टन का भुगतान मिले। अगले दो दिन में एक उच्च स्तरीय बैठक से गतिरोध का हल निकलने की उम्मीद है।

यूएनआई की 25 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार रैली रविवार सुबह हातकणंगले से शुरू हुई और नरांदे की शरद सहकारी चीनी मिल व वारणानगर की वारणा चीनी मिल से होकर गुजरी। संदेश सीधा था — बिना उचित दाम घोषित किए पेराई आगे नहीं बढ़नी चाहिए।

पहली किस्त के तौर पर 4,500 रुपये की मांग क्यों उठी

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार कोल्हापुर के सरकारी विश्राम गृह में किसान प्रतिनिधियों और मिल प्रबंधनों की बैठक में भी यही आंकड़ा केंद्र में रहा। शेट्टी ने आने वाले सत्र के अनुमानित चीनी भाव और पिछले साल की औसत बिक्री के आधार पर अपना विश्लेषण रखा: खेती की लागत बढ़ी है, रिकवरी घटी है और दर्ज वजन कम हुआ है। इसलिए पहली किस्त के तौर पर 4,500 रुपये प्रति टन वाजिब है।

यह आंकड़ा अचानक नहीं आया है। अक्टूबर की शुरुआत में संगठन ने 5,000 रुपये प्रति टन तक की मांग भी उठाई थी। अब बातचीत पहली किस्त के 4,500 रुपये पर केंद्रित है। किसान नेताओं का कहना है कि दाम पहले घोषित हो, पेराई उसके बाद चले — वरना भुगतान को लेकर विवाद और गहराएगा।

चीनी का एमएसपी 50 रुपये किलो: 8 साल से नहीं बदला

गन्ने के दाम की लड़ाई का दूसरा सिरा चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) से जुड़ा है। किसान संगठन मांग कर रहे हैं कि चीनी का एमएसपी बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो किया जाए। यह बेंचमार्क कीमत पिछले आठ साल से नहीं बदली है, जबकि उत्पादन लागत और बाजार परिस्थितियां बदल चुकी हैं। एमएसपी बढ़ने से मिलों की आर्थिक स्थिति और उधारी क्षमता बढ़ेगी और वे किसानों को बेहतर दाम दे पाएंगे।

कोल्हापुर की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई। मिल प्रबंधनों का कहना है कि ऊंचा गन्ना दाम तभी संभव है जब केंद्र के एमएसपी फैसले और बाजार भाव अनुकूल हों। यानी गन्ना दाम, चीनी एमएसपी और एथेनॉल कीमत — तीनों फैसले एक-दूसरे से जुड़े हैं। इसलिए केंद्र ने कृषि अर्थशास्त्री प्रोफेसर रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति बनाई है, जो किसानों की आय और चीनी एमएसपी पर विचार कर रही है।

दो दिन में उच्च स्तरीय बैठक: गतिरोध टूटने की उम्मीद

कोल्हापुर के पालक मंत्री प्रकाश आबिटकर ने शनिवार को कहा कि गन्ने के दाम पर बना गतिरोध अगले दो दिन में टूट सकता है। उनके अनुसार राज्य सरकार एक उच्च स्तरीय बैठक की योजना बना रही है, जिसमें गन्ने के ऊंचे दाम और मिलों की समस्याओं के बीच बीच का रास्ता निकाला जाएगा। आबिटकर ने कहा कि संगठन ने 4,500 रुपये का उचित और लाभकारी मूल्य मांगा है, जबकि एमएसपी पर फैसला केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सूखे और गन्ने के रकबे को देखते हुए मिलों को जल्द काम शुरू करना जरूरी है।

बैठक में मिलों की ओर से शरद सहकारी चीनी मिल के अध्यक्ष और विधायक राजेंद्र पाटिल यड्रावकर तथा पूर्व सांसद संजय मांडलिक मौजूद थे। अगर दो दिन में होने वाली बैठक में सहमति बनती है, तो महाराष्ट्र में रुकी हुई पेराई को गति मिल सकती है।

कर्नाटक में 26 अक्टूबर को बेलगावी बैठक

कर्नाटक में भी हलचल तेज है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 26 अक्टूबर को बेलगावी के विधान सौध में गन्ना किसानों और मिल प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई है। चिनीमंडी के अनुसार केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने आश्वासन दिया है कि गन्ने से जुड़े मुद्दों पर बनी समिति 20 नवंबर से पहले चीनी एमएसपी पर फैसला लेगी। दोनों राज्यों में एक साथ दबाव बनने से केंद्र पर फैसला लेने का दबाव बढ़ा है।

कृष्णा नदी का पानी भी बना विवाद का मुद्दा

दाम के साथ पानी का मुद्दा भी गरमा गया है। शनिवार सुबह संगठन के कार्यकर्ताओं ने सांगली में कृष्णा नदी के सूखे किनारे पर प्रदर्शन किया। आरोप है कि पेराई सत्र की सुविधा के लिए बांधों से नदियों में पानी छोड़ना रोक दिया गया है, जबकि कोयना बांध में करीब 90 प्रतिशत पानी भरा है। प्रशासन ने कोल्हापुर और सांगली में कृषि पंपों से पानी उठाने पर रोक लगा दी है। शेट्टी ने चेतावनी दी है कि पानी न छोड़ा गया तो प्रदर्शनकारी खुद कोयनानगर जाकर पानी छुड़वाएंगे।

महाराष्ट्र में पेराई की ताजा स्थिति

महाराष्ट्र में पेराई सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है, लेकिन गति धीमी है। 22 अक्टूबर तक 65 मिलों ने पेराई शुरू की थी और 158 मिलों को लाइसेंस जारी हो चुके थे। आंदोलन, असमान बारिश और सूखे के कारण कई इलाकों में काम रुक-रुक कर चल रहा है। चीनी आयुक्तालय का अनुमान है कि इस सत्र में करीब 90 लाख टन चीनी बनेगी। दाम पर सहमति न बनी तो और मिलों के चालू होने में देरी होगी।

यूपी के किसानों के लिए इसका मतलब क्या है

महाराष्ट्र और कर्नाटक की यह लड़ाई सिर्फ उन राज्यों की नहीं है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है और यहां 122 चीनी मिलें हैं। यूपी के किसान भी उचित मूल्य और समय पर भुगतान की मांग उठा रहे हैं। महाराष्ट्र में दाम बढ़ने या चीनी एमएसपी पर फैसला होने का असर पूरे देश के गन्ना बाजार पर पड़ता है, क्योंकि केंद्र की समिति और एमएसपी नीति सभी राज्यों के लिए एक जैसी होती है।

यूपी के किसानों के लिए सबक यही है कि दाम की लड़ाई संगठित दबाव से जीती जाती है। यूपी में भी पेराई सत्र शुरू हो चुका है — किसान अपनी पर्ची, तौल और भुगतान पर नजर रखें। गड़बड़ी या देरी दिखे तो गन्ना समिति और जिला गन्ना अधिकारी को शिकायत दें। टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 हैं, एसएमएस शॉर्टकोड 51969 है।

आगे क्या होगा: नजर किन तारीखों पर रखें

अगले कुछ दिन बेहद अहम हैं। 26 अक्टूबर को कर्नाटक में बेलगावी बैठक होगी, दो दिन में महाराष्ट्र की उच्च स्तरीय बैठक है, और 20 नवंबर तक रमेश चंद समिति से चीनी एमएसपी पर फैसला आने की बात है। तीनों मोर्चों पर सकारात्मक फैसले आए तो बेहतर दाम और समय पर भुगतान की उम्मीद बढ़ेगी। सहमति न बनी तो आंदोलन और तेज हो सकता है। किसान अपनी पर्ची और भुगतान पर नजर रखें।

आपके सवाल

आज कोल्हापुर में क्या हुआ? रविवार 25 अक्टूबर को स्वाभिमानी शेतकरी संघटना ने कोल्हापुर में बाइक रैली निकाली। रैली हातकणंगले से शुरू हुई और नरांदे व वारणानगर की मिलों से होकर गुजरी। मांग है कि पहली किस्त के तौर पर 4,500 रुपये प्रति टन मिले।

4,500 रुपये प्रति टन की मांग किस आधार पर की जा रही है? किसान नेताओं का कहना है कि खेती की लागत बढ़ी है, गन्ने की रिकवरी घटी है और दर्ज वजन कम हुआ है। इन्हीं कारणों से पहली किस्त के तौर पर 4,500 रुपये प्रति टन वाजिब है।

अगले फैसले कब तक आ सकते हैं? कर्नाटक में 26 अक्टूबर को बेलगावी बैठक होगी, महाराष्ट्र में दो दिन में उच्च स्तरीय बैठक की बात कही गई है, और रमेश चंद समिति से 20 नवंबर से पहले चीनी एमएसपी पर फैसला आने की उम्मीद है।

स्रोत: यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (25 अक्टूबर 2026), टाइम्स ऑफ इंडिया (24 अक्टूबर 2026), चिनीमंडी (अक्टूबर 2026)।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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