1821 कुंतल उपज लेकर प्रदेश स्तरीय पुरस्कार! राज्य गन्ना प्रतियोगिता 2025-26 के 7 विजेताओं की घोषणा, पहला इनाम ₹51,000

अगर आपके मन में सवाल है कि एक हेक्टेयर से गन्ना कितना निकल सकता है, तो हरदोई के किसान अमर सिंह ने इसका जवाब दे दिया है — 2430 कुंतल प्रति हेक्टेयर। गन्ना विकास विभाग, उत्तर प्रदेश ने इस हफ्ते राज्य गन्ना प्रतियोगिता 2025-26 के परिणामों की घोषणा कर दी है, और इस बार के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। पूरे प्रदेश से 1078 किसानों ने इसमें हिस्सा लिया था, जिनमें से 7 संवर्गों में विजेताओं को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार दिए गए हैं। प्रथम पुरस्कार की राशि 51,000 रुपये है।
सबसे ज्यादा चर्चा बुलंदशहर के रतनपाल सिंह की हो रही है, जिन्होंने ड्रिप सिंचाई वाले पौधा संवर्ग में 1821 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज निकालकर प्रदेश स्तर पर तीसरा स्थान हासिल किया। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक यह उपज राज्य के औसत गन्ना उत्पादन से कई गुना ज्यादा है, और यह साबित करती है कि सही तकनीक अपनाकर किसान अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं।
7 संवर्ग, 1078 आवेदन — ऐसे हुआ फैसला
गन्ना एवं चीनी आयुक्त ने बताया कि इस प्रतियोगिता के लिए 7 संवर्ग तय किए गए थे — शीघ्र पौधा, पेड़ी, सामान्य पौधा, ड्रिप विधि से सिंचाई पौधा व पेड़ी, और युवा गन्ना किसान पौधा व पेड़ी। पूरे प्रदेश से कुल 1078 आवेदन पत्र प्राप्त हुए। विभाग द्वारा नामित कटाई अधिकारियों ने खेतों में जाकर उपज की वास्तविक पैमाइश की, और उन्हीं परिणामों के आधार पर विजेताओं को प्रदेश स्तर पर घोषित किया गया।
प्रतियोगिता आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के चीनी मिल क्षेत्रों में गन्ने की प्रति हेक्टेयर उपज बढ़ाने के लिए किसानों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धी भावना पैदा करना है। गन्ना आयुक्त ने विभागीय अधिकारियों को इस प्रतियोगिता के बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार के निर्देश भी दिए हैं, ताकि अगले साल और ज्यादा किसान समय पर जानकारी पाकर इसमें हिस्सा ले सकें।
विजेताओं की पूरी सूची — 7 संवर्ग, 7 चैंपियन
शीघ्र पौधा संवर्ग: हरदोई जिले के कृषक अमर सिंह ने 2430.00 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त कर प्रथम पुरस्कार जीता। यह इस प्रतियोगिता की सबसे अधिक उपज है।
पेड़ी संवर्ग: शामली के कृषक देवेन्द्र ने 1998.50 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज के साथ प्रथम स्थान हासिल किया। पेड़ी फसल में इतनी उपज यह दिखाती है कि रटून प्रबंधन सही तरीके से किया जाए तो दूसरी फसल भी रिकॉर्ड बना सकती है।
सामान्य पौधा संवर्ग: शाहजहांपुर जिले के कृषक कौशल कुमार ने 1725.50 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त कर प्रथम पुरस्कार अपने नाम किया।
ड्रिप विधि से सिंचाई पौधा संवर्ग: बिजनौर जिले के कृषक अक्षांश सिंह ने 2068.50 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त कर पहला स्थान जीता। ड्रिप सिंचाई वाली श्रेणी में यह सर्वोच्च प्रदर्शन है।
ड्रिप विधि से सिंचाई पेड़ी संवर्ग: शामली के किसान इन्द्रपाल सिंह ने 1865.00 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त कर प्रथम पुरस्कार जीता।
युवा गन्ना किसान पौधा संवर्ग: मुजफ्फरनगर के कृषक नितिन चौधरी ने 1690.00 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज के साथ प्रथम स्थान पाया। युवा किसानों की श्रेणी में यह प्रदर्शन खेती में युवाओं की बढ़ती दिलचस्पी का संकेत है।
युवा गन्ना किसान पेड़ी संवर्ग: शामली के कृषक उज्जवल देशवाल ने 1507.00 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त कर प्रथम पुरस्कार जीता।
पुरस्कार राशि: 51,000, 31,000 और 21,000 रुपये
गन्ना आयुक्त ने घोषणा की है कि राज्य गन्ना प्रतियोगिता के सभी प्रथम पुरस्कार विजेताओं को 51,000 रुपये, द्वितीय पुरस्कार विजेताओं को 31,000 रुपये और तृतीय स्थान पाने वाले किसानों को 21,000 रुपये की धनराशि दी जाएगी। नकद राशि के साथ स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया जाएगा।
इसके अलावा एक अहम घोषणा पूर्वांचल के किसानों के लिए हुई है। विभिन्न संवर्गों के विजेताओं में पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों की सहभागिता न होने के कारण इस क्षेत्र में गन्ना खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 4 किसानों को प्रोत्साहन पुरस्कार के रूप में 5,000-5,000 रुपये दिए गए हैं। विभाग का कहना है कि पूर्वांचल में गन्ने की खेती को प्रोत्साहित करने और किसानों में प्रतियोगिता की भावना विकसित करने के लिए यह पहल की गई है।
बुलंदशहर के रतनपाल सिंह: 11 हेक्टेयर से 1821 कुंतल की कहानी
बुलंदशहर जिले के ग्राम एलमपुर, जोन अगौता के किसान रतनपाल सिंह ने ड्रिप विधि से सिंचाई पौधा संवर्ग में 1821 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त कर तृतीय स्थान हासिल किया। वे लगभग 11 हेक्टेयर भूमि में गन्ने की खेती करते हैं, जिसमें शरदकालीन गन्ने की बुवाई पर विशेष जोर देते हैं।
रतनपाल सिंह का मानना है कि गन्ने की एक ही किस्म को लंबे समय तक लगातार बोते रहने के बजाय समय-समय पर नई किस्मों को अपनाना चाहिए। उनका कहना है कि किसी किस्म को लगभग 5 से 7 वर्ष तक ही बोना चाहिए और फिर नई किस्म लगानी चाहिए, ताकि उपज और गुणवत्ता में निरंतरता बनी रहे। उनकी खेती में आधुनिक सिंचाई, ट्रेंच विधि, उन्नत किस्मों का प्रयोग, सहफसली खेती और रासायनिक के साथ-साथ प्राकृतिक कृषि पद्धतियों का संतुलित उपयोग शामिल है। इससे पहले भी उन्हें सहफसली खेती में उत्कृष्टता के लिए प्रदेश स्तरीय पुरस्कार मिल चुका है।
विजेताओं की खेती से आम किसान क्या सीखें
प्रतियोगिता के परिणाम सिर्फ खबर नहीं हैं, ये एक तरह का रोडमैप भी हैं। इन विजेताओं के तरीकों से कुछ व्यावहारिक सबक निकाले जा सकते हैं।
पहला सबक है ड्रिप सिंचाई। ड्रिप संवर्ग के विजेताओं की उपज — 2068.50 और 1821 कुंतल प्रति हेक्टेयर — यह दिखाती है कि बूंद-बूंद सिंचाई से पानी की बचत के साथ-साथ उपज में भारी बढ़ोतरी होती है। सरकार ड्रिप सिंचाई पर अनुदान भी दे रही है, जिसका किसान फायदा उठा सकते हैं।
दूसरा सबक है नई किस्मों को समय पर अपनाना। रतनपाल सिंह जैसे किसान 5-7 साल में किस्म बदलने की सलाह देते हैं। पुरानी किस्मों में रेड रॉट जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ता है और उपज घटती है। गन्ना शोध संस्थानों द्वारा जारी नई किस्मों पर नजर रखना फायदेमंद रहता है।
तीसरा सबक है सहफसली खेती और ट्रेंच विधि। ट्रेंच विधि से बुवाई में पौधों को ज्यादा जगह और धूप मिलती है, और बीच की खाली पट्टी में सरसों या आलू जैसी सहफसल से अतिरिक्त आमदनी होती है।
चौथा सबक पेड़ी प्रबंधन का है। शामली के देवेन्द्र ने पेड़ी फसल से 1998.50 कुंतल प्रति हेक्टेयर निकाला है — यह साबित करता है कि पेड़ी को “कमजोर फसल” मानने की धारणा गलत है। सही समय पर गुड़ाई, खाद और सिंचाई से पेड़ी भी रिकॉर्ड उपज दे सकती है।
पूछे जाने वाले प्रश्न
राज्य गन्ना प्रतियोगिता 2025-26 में कुल कितने किसानों ने हिस्सा लिया? पूरे प्रदेश से कुल 1078 आवेदन पत्र प्राप्त हुए थे। इनमें से 7 संवर्गों में विजेताओं का चयन विभाग द्वारा नामित कटाई अधिकारियों की वास्तविक पैमाइश के आधार पर किया गया।
प्रथम पुरस्कार की राशि कितनी है? सभी प्रथम पुरस्कार विजेताओं को 51,000 रुपये, द्वितीय को 31,000 रुपये और तृतीय को 21,000 रुपये की धनराशि दी जाएगी। इसके साथ स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र भी मिलेगा।
इस बार सबसे ज्यादा उपज किस किसान ने निकाली? हरदोई के कृषक अमर सिंह ने शीघ्र पौधा संवर्ग में 2430 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज के साथ सर्वोच्च प्रदर्शन किया और प्रथम पुरस्कार जीता।
पूर्वांचल के किसानों को कौन सा विशेष पुरस्कार मिला? पूर्वी उत्तर प्रदेश के 4 गन्ना किसानों को प्रोत्साहन पुरस्कार के रूप में 5,000-5,000 रुपये दिए गए हैं, ताकि इस क्षेत्र में गन्ना खेती और प्रतियोगिता में भागीदारी बढ़े।
क्या यह प्रतियोगिता हर साल होती है? हां, गन्ना विकास विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा राज्य गन्ना प्रतियोगिता हर साल आयोजित की जाती है। अगले सत्र की जानकारी के लिए किसान अपने जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
स्रोत: लाइव हिंदुस्तान, हिंदी कृषि जागरण
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