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चीनी MSP 31 रुपये से बढ़ेगा? रमेश चंद कमेटी की पहली बैठक में किसान-मिल-वैज्ञानिकों से बातचीत का फैसला, यूपी पर असर

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 22, 2026 • 6 min read
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चीनी MSP 31 रुपये से बढ़ेगा? रमेश चंद कमेटी की पहली बैठक में किसान-मिल-वैज्ञानिकों से बातचीत का फैसला, यूपी पर असर
अंतिम अपडेट: October 22, 2026 3:36 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

केंद्र सरकार की ओर से चीनी क्षेत्र के लिए गठित रमेश चंद समिति ने कामकाज शुरू कर दिया है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर बताया कि पूर्व नीति आयोग सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता वाली इस समिति ने 21 अक्टूबर को पहली बैठक की। इसमें फैसला हुआ कि प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में किसानों, चीनी मिल संघों, शोध संस्थानों, वैज्ञानिकों और कृषि विश्वविद्यालयों से व्यापक परामर्श किया जाएगा — परामर्श प्रक्रिया जल्द शुरू होगी और मकसद चीनी क्षेत्र के लिए एक टिकाऊ रोडमैप तैयार करना है।

यूपी के गन्ना किसानों के लिए यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी, गन्ना रिकवरी की पारदर्शिता और किसानों के दाम जैसे बड़े फैसले इसी समिति की सिफारिशों पर टिके हैं। पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने वाला है और यूपी के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।

21 अक्टूबर की बैठक में क्या-क्या तय हुआ

डीएफपीडी की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक बैठक में तय हुआ कि हितधारकों से बातचीत कई चरणों में होगी — खेत में खड़ा किसान भी सुना जाएगा और मिल मालिक भी। विभाग ने कहा कि वैज्ञानिक आंकड़ों और शोध संस्थानों की राय के साथ विभिन्न दृष्टिकोण जुटाए जाएंगे ताकि चीनी क्षेत्र की समस्याओं का स्थायी समाधान निकले।

केंद्र ने यह समिति 14 अक्टूबर को कर्नाटक-महाराष्ट्र के किसान प्रतिनिधियों की केंद्रीय कृषि मंत्री और खाद्य मंत्री से बैठक के बाद गठित की थी। अध्यक्ष के अलावा कृषि आयुक्त, संयुक्त सचिव (चीनी), संयुक्त सचिव (लीगल मेट्रोलॉजी) और निदेशक (चीनी) इसके सदस्य हैं। कमेटी को कोई अंतिम तारीख नहीं दी गई है — अधिसूचना में कहा गया है कि समिति “जितनी जल्दी हो सके” रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपेगी।

समिति के सामने पांच बड़े सवाल

समिति के विचारार्थ विषय (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) सीधे किसानों की जेब से जुड़े हैं। मुख्य बिंदु:

1. किसानों के दाम: समिति खेती की लागत और अन्य प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखते हुए अधिक लाभकारी मूल्य की मांग की जांच करेगी।

2. चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य: एक्स-मिल चीनी के एमएसपी की समीक्षा होगी। यह दर 2019 से 31 रुपये प्रति किलो पर टिकी है — आठ साल से कोई बदलाव नहीं, जबकि लागत और बाजार भाव दोनों बदल चुके हैं। किसान संगठन इसे 50 रुपये प्रति किलो तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

3. गन्ना रिकवरी की पारदर्शिता: मिलें गन्ने से कितनी चीनी निकालती हैं (रिकवरी), इसकी जांच और रिपोर्टिंग की व्यवस्था की समीक्षा होगी। रिकवरी दर ही तय करती है कि किसान को कितना दाम मिलेगा, इसलिए इसके पारदर्शी सत्यापन पर जोर है।

4. तौल की प्रैक्टिस: मिलों में गन्ने की तौल, कांटों का कैलिब्रेशन और निरीक्षण पर्याप्त है या नहीं — यह भी जांच के दायरे में है।

5. मशीन से कटाई पर कटौती: यांत्रिक कटाई वाले गन्ने के वजन में की जाने वाली कटौती असल नुकसान के बराबर है या नहीं, और इसका किसानों के दाम पर क्या वित्तीय असर पड़ता है — समिति इसका आकलन करेगी।

यूपी के किसानों पर क्या असर पड़ेगा

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है — यहां करीब 122 चीनी मिलें हैं। यहां दाम दो स्तरों पर तय होता है: केंद्र का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) और राज्य का राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी)। 2026-27 सीजन के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय हो चुका है। वहीं, पेराई सत्र 2025-26 के लिए यूपी का एसएपी अगेती प्रजाति पर 400 रुपये प्रति क्विंटल था। 2026-27 सत्र के लिए यूपी के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है — किसान संगठन इसे 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

यहां समिति का रोल अहम हो जाता है। अगर चीनी का एमएसपी 31 रुपये से बढ़ता है, तो मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और बकाया चुकाने की क्षमता बढ़ेगी। इसके उलट, अगर एमएसपी नहीं बढ़ा और एसएपी बढ़ा दिया गया, तो मिलों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा — जिसका सीधा असर भुगतान में देरी के रूप में किसानों पर पड़ेगा। अखिल भारतीय किसान सभा ने सीएसीपी के आकलन को चुनौती देते हुए गन्ने का दाम कम से कम 575 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है।

20 नवंबर से पहले फैसले का दावा

महाराष्ट्र के किसान नेता राजू शेट्टी ने कोल्हापुर में किसानों को संबोधित करते हुए दावा किया कि केंद्रीय खाद्य मंत्री ने किसान संगठनों को आश्वासन दिया है कि चीनी के एमएसपी में संशोधन पर समिति 20 नवंबर से पहले फैसला लेगी। शेट्टी ने मिलों से 2026-27 सत्र के लिए गन्ना खरीद मूल्य का तत्काल ऐलान और 25 अक्टूबर को जिला-व्यापी मोटरसाइकिल रैली की घोषणा की है। उनका कहना है कि जो मिलें सत्र शुरू होने से पहले स्वीकार्य खरीद मूल्य घोषित नहीं करेंगी, किसान उनकी पेराई का विरोध करेंगे।

हालांकि 20 नवंबर की कोई आधिकारिक समय-सीमा समिति की ओर से घोषित नहीं हुई है।

30 दिन में रिपोर्ट की मांग

अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) ने मांग की है कि समिति 30 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपे और सिफारिशों को मौजूदा पेराई सत्र में ही लागू किया जाए। संगठन का तर्क है कि पेराई सत्र शुरू हो चुका है और देर से आई सिफारिशों का इस साल के किसानों को कोई फायदा नहीं मिलेगा। कर्नाटक में किसानों का आंदोलन छठे दिन में प्रवेश कर चुका है और वहां के मुख्यमंत्री 26 अक्टूबर को बेलगावी में किसान नेताओं से मिलेंगे — ऐसे में समिति पर तेज फैसला लेने का दबाव बढ़ रहा है।

आगे क्या होगा

डीएफपीडी के मुताबिक परामर्श प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। समिति किसानों, मिल संघों, राज्य सरकारों और विशेषज्ञों से बात कर सिफारिशें तैयार करेगी। रिपोर्ट की कोई तय तारीख न होने से किसान संगठन 30 दिन की समय-सीमा की मांग कर रहे हैं।

जवाब जानिए

रमेश चंद समिति क्या है? केंद्र ने 14 अक्टूबर 2026 को पूर्व नीति आयोग सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में चीनी क्षेत्र पर समिति गठित की है। यह किसानों के दाम, चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य, गन्ना रिकवरी की पारदर्शिता, तौल व्यवस्था और मशीन कटाई पर कटौती जैसे मुद्दों की जांच करेगी।

समिति की पहली बैठक कब हुई और क्या तय हुआ? 21 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में गन्ना किसानों, चीनी मिल संघों, शोध संस्थानों, वैज्ञानिकों और कृषि विश्वविद्यालयों से व्यापक परामर्श का फैसला लिया गया।

चीनी का एमएसपी अभी कितना है? एक्स-मिल चीनी का एमएसपी 2019 से 31 रुपये प्रति किलो पर स्थिर है। किसान संगठन इसे 50 रुपये प्रति किलो तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

क्या समिति ने 20 नवंबर की समय-सीमा तय की है? नहीं। यह दावा किसान नेता राजू शेट्टी ने किया है, जो उनके मुताबिक केंद्रीय खाद्य मंत्री के आश्वासन पर आधारित है। समिति की ओर से कोई आधिकारिक समय-सीमा घोषित नहीं हुई है।

यूपी के किसानों पर इसका क्या असर होगा? यूपी में 2026-27 सत्र के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। चीनी का एमएसपी बढ़ा तो मिलों की भुगतान क्षमता सुधरेगी और बकाया में तेजी आ सकती है। समिति की सिफारिशें एसएपी तय करने में भी सरकार के लिए आधार बनेंगी।

क्या किसान भी समिति के सामने अपनी बात रख सकेंगे? हां। परामर्श में गन्ना किसान, मिल संघ, राज्य सरकारें, शोध संस्थान और विशेषज्ञ सभी शामिल होंगे।

स्रोत: चीनीमंडी (22 अक्टूबर 2026), बिजनेस स्टैंडर्ड (14 अक्टूबर 2026), द हिंदू बिजनेसलाइन (14 अक्टूबर 2026), रूरल वॉइस अंग्रेज़ी (अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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