4 नवंबर को महाराष्ट्र पहुंचेगी रमेश चंद समिति, 20 नवंबर तक गन्ना दाम पर फैसले की उम्मीद — यूपी के किसानों को क्या मिलेगा?

गन्ना दाम को लेकर चल रही खींचतान में अब अगला बड़ा पड़ाव सामने आ गया है। केंद्र सरकार की ओर से गठित रमेश चंद समिति 4 नवंबर को महाराष्ट्र का दौरा करेगी, जहां वह किसान संगठनों और चीनी मिल प्रतिनिधियों से सीधे बात करेगी। किसान नेता और पूर्व सांसद राजू शेट्टी के अनुसार समिति की रिपोर्ट जल्द आ सकती है और केंद्र सरकार 20 नवंबर तक गन्ना दाम पर फैसला ले सकती है।
यह खबर यूपी के किसानों के लिए भी सीधे मायने रखती है। समिति जिन दो सवालों की जांच कर रही है — लाभकारी मूल्य और चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य — वे पूरे देश के गन्ना भुगतान से जुड़े हैं। यूपी में पेराई सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है, पर इस सत्र का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है।
एक बात साफ रहे: 20 नवंबर सरकार की आधिकारिक तारीख नहीं, राजू शेट्टी की ओर से जताई गई उम्मीद है। सरकारी विज्ञप्ति में रिपोर्ट “यथाशीघ्र” देने की बात है, कोई तय तारीख नहीं है।
समिति बनी क्यों और इसमें कौन है
केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को इस समिति का गठन किया था। यह कदम कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसानों के प्रतिनिधियों की केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ 12 अक्टूबर को हुई बैठक के बाद उठाया गया। समिति की अध्यक्षता नीति आयोग के पूर्व सदस्य और प्रख्यात कृषि अर्थशास्त्री प्रोफेसर रमेश चंद कर रहे हैं। उनके अलावा समिति में कृषि आयुक्त, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के संयुक्त सचिव (चीनी) और उपभोक्ता मामलों के विभाग के संयुक्त सचिव (विधिक माप विज्ञान) शामिल हैं।
समिति सभी पक्षों से परामर्श कर सिफारिशें सौंपेगी। राजू शेट्टी ने कहा है कि एमएसपी बढ़ाने जैसी मांगें मिल मालिकों को खुद उठानी चाहिए थीं, पर अंत में किसानों को सड़क पर उतरना पड़ा, तब समिति बनी।
समिति क्या-क्या जांचेगी
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार समिति के दायरे में पांच बड़े मुद्दे हैं। पहला, खेती की लागत को ध्यान में रखते हुए किसानों को अधिक लाभकारी मूल्य दिलाने की मांग। दूसरा, उत्पादन लागत और मिलों की वित्तीय हालत को देखते हुए चीनी के एमएसपी में संशोधन की मांग। तीसरा, चीनी रिकवरी की स्वतंत्र जांच व्यवस्था। चौथा, तौल की सटीकता। पांचवां, मशीन से कटे गन्ने के वजन में कटौती की प्रथा।
कर्नाटक के किसानों ने मांग रखी है कि एफआरपी खेत स्तर पर तय हो और कटाई-ढुलाई के नाम पर कटौती बंद हो। यूपी के किसानों के लिए भी तौल में कमी, रिकवरी का आंकड़ा और कटाई-ढुलाई कटौती रोज की शिकायतें हैं — इसलिए समिति की पारदर्शी व्यवस्था की सिफारिश का असर पूरे देश पर पड़ेगा।
31 रुपये पर अटका चीनी का न्यूनतम दाम
समिति के सामने सबसे बड़ा आंकड़ों का विरोधाभास यही है। चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य फरवरी 2019 से 31 रुपये प्रति किलो पर जमा हुआ है — सात साल से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ। इसी दौरान गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 2,750 रुपये प्रति टन से बढ़कर 2026-27 सत्र के लिए 3,650 रुपये प्रति टन (365 रुपये प्रति क्विंटल) तक पहुंच गया है।
किसानों का तर्क सीधा है: जब गन्ना महंगा हुआ, तो चीनी का न्यूनतम दाम क्यों नहीं बढ़ा? कर्नाटक की मिलों ने आश्वासन दिया है कि एमएसपी बढ़ोतरी किसानों तक पहुंचाई जाएगी।
मांगों में अलग-अलग आंकड़े भी सामने आ रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया और मनीकंट्रोल के अनुसार किसानों की मांग चीनी का एमएसपी 31 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो करने और इथेनॉल का खरीद मूल्य 70 रुपये प्रति लीटर करने की है। वहीं कर्नाटक में समिति के सामने हुई बैठक में कुछ प्रतिनिधियों ने एमएसपी 60 रुपये प्रति किलो तक ले जाने की मांग भी रखी है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में आंदोलन की स्थिति
महाराष्ट्र में पेराई आंदोलन से रुकी हुई है। स्वाभिमानी शेतकरी संघटना ने 27 अक्टूबर से ‘चावणी आंदोलन’ शुरू किया है, जिसमें मिलों तक गन्ना ले जाने वाले वाहन रोके जा रहे हैं। मांग है कि पहली किस्त के रूप में 4,500 रुपये प्रति टन का भाव घोषित हो। संगठन ने 3 नवंबर को राजमार्ग जाम की चेतावनी भी दी है।
कर्नाटक में किसान 5,500 रुपये प्रति टन मांग रहे हैं, जबकि एफआरपी 3,650 रुपये प्रति टन है। राज्य गन्ना उत्पादक संघ के अनुसार पिछले वर्ष एक टन गन्ने की लागत 4,450 रुपये थी। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने चेतावनी दी है कि कटाई में देरी से रस घटता है और आग का खतरा बढ़ता है।
यूपी के किसानों पर क्या असर पड़ेगा
यह समझना जरूरी है कि यह केंद्रीय समिति सीधे यूपी का एसएपी तय नहीं करती। यूपी का एसएपी राज्य सरकार की कैबिनेट तय करती है, और 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 के लिए एसएपी अगेती किस्म के लिए 400 रुपये, सामान्य के लिए 390 रुपये और अनुपयुक्त किस्म के लिए 355 रुपये प्रति क्विंटल था। राष्ट्रीय लोक दल ने एसएपी बढ़ाने की मांग की है; किसान संगठन 500 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक मांग रहे हैं।
फिर भी केंद्रीय फैसला यूपी को तीन तरह से छूएगा। पहला, एमएसपी बढ़ने से मिलों की आय और भुगतान क्षमता बढ़ेगी। दूसरा, तौल-रिकवरी-कटौती पर पारदर्शी व्यवस्था पूरे देश के लिए नजीर बनेगी। तीसरा, केंद्र के फैसले से राज्य सरकार पर एसएपी जल्द घोषित करने का दबाव बढ़ेगा।
जब तक एसएपी घोषित नहीं होता, पर्ची, तौल रसीद और भुगतान का रिकॉर्ड संभालकर रखें। देरी की शिकायत पर जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें; सरकारी टोल-फ्री 1800-121-3203, 1800-180-5129 और एसएमएस शॉर्टकोड 51969 का इस्तेमाल करें।
आगे की तारीखें: क्या देखें, क्या न मानें
अगले तीन हफ्ते अहम रहेंगे: 3 नवंबर को महाराष्ट्र में राजमार्ग जाम की चेतावनी है, 4 नवंबर को समिति का दौरा है, और 20 नवंबर तक फैसले की उम्मीद है।
तीन भ्रम न पालें: समिति की सिफारिश अंतिम फैसला नहीं होगी, फैसला केंद्र सरकार लेगी; एमएसपी बढ़ते ही यूपी का एसएपी नहीं बढ़ेगा; और 20 नवंबर एक उम्मीद है, आधिकारिक समय-सीमा नहीं। दिल्ली में जो तय होगा, उसका असर यूपी की पर्ची, भुगतान और एसएपी तीनों पर पड़ेगा।
जवाब जानिए
रमेश चंद समिति क्या है? 14 अक्टूबर 2026 को गठित चार सदस्यीय समिति; अध्यक्ष नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद हैं।
समिति महाराष्ट्र कब जा रही है? किसान नेता राजू शेट्टी के अनुसार, कर्नाटक के दौरे के बाद 4 नवंबर को समिति महाराष्ट्र का दौरा करेगी।
20 नवंबर तक किस फैसले की उम्मीद है? राजू शेट्टी के अनुसार 20 नवंबर तक केंद्र गन्ना दाम और एमएसपी पर फैसला ले सकता है। यह आधिकारिक समय-सीमा नहीं है।
चीनी का एमएसपी अभी कितना है? फरवरी 2019 से 31 रुपये प्रति किलो। किसान समूह 50 रुपये की मांग कर रहे हैं; कुछ ने 60 रुपये भी मांगा है।
2026-27 के लिए गन्ने का एफआरपी कितना है? 3,650 रुपये प्रति टन (365 रुपये प्रति क्विंटल), जो 10.25 प्रतिशत रिकवरी के आधार पर तय है।
क्या यह समिति यूपी का एसएपी तय करेगी? नहीं। यूपी का एसएपी राज्य कैबिनेट तय करती है और 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।
भुगतान में देरी हो तो कहां शिकायत करें? पर्ची और तौल रसीद रखें, जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें। टोल-फ्री 1800-121-3203, 1800-180-5129; एसएमएस शॉर्टकोड 51969।
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी), टाइम्स ऑफ इंडिया, चीनीमंडी/एग्रीइनसाइट, मनीकंट्रोल, गांव जंक्शन, ईटीवी भारत, इंडिया टुडे हिंदी।
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