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₹400 से आगे बढ़ेगा गन्ने का भाव: रालोद प्रदेश अध्यक्ष का मेरठ में दावा — पेराई सत्र से पहले जानिए 2026-27 SAP का सच

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 20, 2026 • 6 min read
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₹400 से आगे बढ़ेगा गन्ने का भाव: रालोद प्रदेश अध्यक्ष का मेरठ में दावा — पेराई सत्र से पहले जानिए 2026-27 SAP का सच
अंतिम अपडेट: October 20, 2026 4:23 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत से ठीक पहले उत्तर प्रदेश की गन्ना राजनीति में नया मोड़ आ गया है। राष्ट्रीय लोकदल के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष ऐश्वर्य राज सिंह ने रविवार को पहली बार मेरठ पहुंचकर साफ कहा कि पार्टी सरकार में रहकर किसानों की वकील बनकर उनके हितों की पैरवी कर रही है — और केंद्रीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी के प्रयासों से ही गन्ने का मूल्य ₹400 प्रति क्विंटल हुआ है। उनका दावा है कि भाव बढ़ाने का यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा।

मेरठ के पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में पत्रकार वार्ता में सिंह ने कहा कि रालोद किसानों और कमेरों की पार्टी है। सवाल यह है कि जब पेराई शुरू होने को है और 2026-27 के लिए नया गन्ना मूल्य (एसएपी) घोषित होना बाकी है, तब यह बयान किसानों के लिए क्या मायने रखता है।

मेरठ में क्या बोले रालोद प्रदेश अध्यक्ष

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार 19 अक्टूबर को मेरठ पहुंचे ऐश्वर्य राज सिंह ने पत्रकारों से कहा कि राष्ट्रीय लोकदल किसानों के हितों की पैरवी सरकार में रहकर कर रही है। उन्होंने दो बड़े दावे किए — पहला, जयंत चौधरी के प्रयासों से गन्ना मूल्य ₹400 प्रति क्विंटल हुआ; दूसरा, आगे भी मूल्य वृद्धि के लिए पार्टी प्रयास करती रहेगी।

पत्रकार वार्ता में उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी बयान दिए — प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर रालोद एनडीए उम्मीदवारों को जिताने के लिए पूरी ताकत लगाएगी, और सीटों का फैसला रालोद व घटक दलों के संसदीय बोर्ड द्वारा होगा। युवाओं के बीच पैठ बनाने के लिए पार्टी “कैंपस कनेक्ट” अभियान भी चलाएगी। उन्होंने रोहटा में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में भी हिस्सा लिया, जिसमें विधायक गुलाम मोहम्मद, जिला अध्यक्ष अनिकेत भारद्वाज समेत कई नेता मौजूद रहे।

चीनी उद्योग के प्रकाशन चीनीमंडी ने 20 अक्टूबर को इस खबर को उठाते हुए लिखा कि रालोद किसानों के हितों के लिए सरकार के भीतर दबाव बनाना जारी रखेगी।

₹400 वाला आंकड़ा किस सत्र का है — यही सबसे जरूरी सवाल

यहां किसानों को सबसे बड़ी सावधानी बरतनी है। रालोद नेता के बयान में जिस ₹400 प्रति क्विंटल का जिक्र है, वह पेराई सत्र 2025-26 का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) है — अगेती किस्म के लिए ₹400 और सामान्य किस्म के लिए ₹390 प्रति क्विंटल। यह भाव पिछले सत्र के लिए घोषित हुआ था।

2026-27 सत्र के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। अक्टूबर की शुरुआत में हुई योगी कैबिनेट की बैठक में नया गन्ना भाव घोषित नहीं हुआ था, और गन्ना विभाग के ताजा संकेतों के अनुसार भी नई घोषणा का इंतजार है। इसका मतलब साफ है — मिलें भले ही अक्टूबर के आखिरी हफ्ते से नवंबर की शुरुआत तक पेराई शुरू कर दें, लेकिन किसानों को इस सत्र का भाव कब और कितना मिलेगा, यह अभी तय नहीं हुआ है।

केंद्र सरकार की ओर से 2026-27 के लिए उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) पहले ही घोषित हो चुका है — ₹365 प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत चीनी परता पर)। लेकिन यूपी में मिलें एसएपी पर भुगतान करती हैं, इसलिए असली सवाल राज्य की घोषणा पर टिका है।

पेराई से पहले भाव की जंग तेज क्यों है

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मिलें अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं — मुजफ्फरनगर, बिजनौर, सहारनपुर और मेरठ मंडल की मिलों में ट्रायल और मेंटेनेंस अंतिम चरण में है। इसी बीच किसान संगठनों की मांगें भी तेज हो गई हैं। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) 21 अक्टूबर को बिजनौर में महापंचायत बुलाकर ₹600 प्रति क्विंटल गन्ना भाव की मांग कर रही है। संयुक्त किसान मोर्चा ने 23 अक्टूबर को जिलाधिकारी कार्यालयों पर धरने का ऐलान किया है। हापुड़ और बुलंदशहर में भी किसान ₹500–600 भाव की मांग को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं।

ऐसे में रालोद का यह बयान — कि पार्टी सरकार के भीतर भाव बढ़ाने का दबाव बनाए रखेगी — सीधे इन्हीं मांगों से जुड़ता है। रालोद पश्चिमी यूपी के जाट-किसान बेल्ट की पार्टी है और जयंत चौधरी केंद्र में मंत्री हैं, इसलिए गन्ना भाव पर उनका रुख किसानों के लिए मायने रखता है।

दूसरी ओर, मिल मालिकों का तर्क है कि चीनी के दाम और उत्पादन लागत को देखते हुए ज्यादा भाव देना मुश्किल है — और यही वजह है कि एसएपी की घोषणा में देरी हो रही है।

किसानों के लिए 5 काम की बातें

1. नए एसएपी की घोषणा पर नजर रखें: जैसे ही राज्य सरकार 2026-27 का भाव घोषित करेगी, वह गन्ना विभाग के पोर्टल (caneup.in) और प्रमुख अखबारों में प्रकाशित होगा। किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें — आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करें।

2. पुराने बकाए का हिसाब रखें: अगर पिछली पेराई का भुगतान बाकी है, तो रसीदें और पर्ची संभालकर रखें। इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद बकाए पर 15 प्रतिशत ब्याज का प्रावधान लागू है।

3. पर्ची-कैलेंडर की जांच कर लें: पेराई शुरू होने से पहले अपना गन्ना सर्वे रिकॉर्ड, रकबा और किस्म की जानकारी पोर्टल पर सत्यापित कर लें। गलत रिकॉर्ड की वजह से पर्ची में देरी होती है।

4. बैंक खाता सक्रिय रखें: भुगतान सीधे बैंक खाते में आता है। खाता निष्क्रिय हो या केवाईसी अधूरी हो, तो पैसा अटक सकता है। पेराई से पहले एक बार खाते की स्थिति जरूर देख लें।

5. भाव की राजनीति से ज्यादा अपने हक पर ध्यान दें: चाहे कोई भी दल कितना भी दावा करे, कानूनी नियम साफ है — गन्ना देने के 14 दिन के भीतर भुगतान अनिवार्य है। देरी पर ब्याज का प्रावधान है।

आगे क्या होगा

पेराई सत्र शुरू होने के साथ ही एसएपी पर फैसला टल नहीं सकता — सरकार को अक्टूबर-नवंबर में भाव घोषित करना ही होगा। रालोद के बयान से इतना तय है कि सत्ता पक्ष के भीतर भी भाव बढ़ाने का दबाव बन रहा है। अंतिम आंकड़ा क्या होगा, यह अगले कुछ हफ्तों में साफ हो जाएगा।

तब तक किसानों के लिए सबसे समझदारी भरा कदम यही है — अपना रिकॉर्ड दुरुस्त रखें, बकाए का हिसाब रखें और आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रालोद नेता ने गन्ना भाव को लेकर क्या दावा किया? ऐश्वर्य राज सिंह ने 19 अक्टूबर को मेरठ में कहा कि जयंत चौधरी के प्रयासों से गन्ना मूल्य ₹400 प्रति क्विंटल हुआ है और पार्टी आगे भी मूल्य वृद्धि के लिए प्रयास करती रहेगी।

₹400 प्रति क्विंटल किस सत्र का भाव है? यह 2025-26 सत्र का एसएपी है (अगेती किस्म के लिए ₹400, सामान्य के लिए ₹390)। 2026-27 सत्र के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।

2026-27 का एसएपी कब घोषित होगा? अभी कोई आधिकारिक तारीख नहीं है। पेराई सत्र शुरू होने के साथ अक्टूबर-नवंबर में घोषणा की उम्मीद है। गन्ना विभाग के पोर्टल caneup.in पर नजर रखें।

किसान संगठन कितने भाव की मांग कर रहे हैं? भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) और संयुक्त किसान मोर्चा ₹600 प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं। कई जिलों में ₹450–500 भाव की मांग को लेकर प्रदर्शन हो चुके हैं।

केंद्र का एफआरपी 2026-27 कितना है? ₹365 प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत चीनी परता पर), जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। लेकिन यूपी में मिलें राज्य के एसएपी पर भुगतान करती हैं।

स्रोत: दैनिक जागरण (मेरठ, 19 अक्टूबर 2026), चीनीमंडी (20 अक्टूबर 2026); एसएपी/एफआरपी आंकड़े — गन्ना विभाग व केंद्रीय मंत्रिमंडल की घोषणाएं।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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