2026-27 के लिए गन्ना मूल्य बढ़ाओ: रालोद ने सीएम योगी को सौंपा ज्ञापन, सत्ता पक्ष के अंदर से भी दबाव बढ़ा

पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने से ठीक पहले उत्तर प्रदेश की गन्ना राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है — अब दबाव सिर्फ किसान संगठनों से नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के भीतर से भी उठ रहा है। पीटीआई की खबर के अनुसार, रालोद के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल सिंह बालियान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन सौंपकर 2026-27 के लिए गन्ने का मूल्य बढ़ाने की मांग की है। ज्ञापन में बढ़ती उत्पादन लागत का हवाला है — डीजल, खाद, बीज, कीटनाशक और मजदूरी महंगी हुई है, इसलिए पुराने भाव पर गन्ना बेचना घाटे का सौदा बनता जा रहा है।
यह ज्ञापन ऐसे समय आया है जब किसान पहले से ही मूल्य वृद्धि का इंतजार कर रहे हैं। एक दिन बाद, 23 अक्टूबर को लखनऊ में भाकियू की महापंचायत में राकेश टिकैत ने गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग रख दी। अब एक ही मुद्दे पर दो मोर्चों से दबाव है — सत्ता पक्ष के सहयोगी दल से और किसान संगठन से।
ज्ञापन में क्या मांग की गई
पीटीआई की 23 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, रालोद नेता ने मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में 2026-27 के लिए गन्ना मूल्य में वृद्धि की मांग की है। मांग का आधार सीधा है — खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, इसलिए गन्ने का भाव भी उसी अनुपात में बढ़ना चाहिए। रिपोर्ट में किसी खास आंकड़े का जिक्र नहीं है, यानी रालोद ने कोई एक निश्चित भाव नहीं मांगा है, बल्कि सिद्धांत के तौर पर मूल्य वृद्धि की मांग रखी है।
रालोद की यह पहल इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्टी भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की सहयोगी है। पीटीआई ने रेखांकित किया है कि रालोद ने लखनऊ में गुरुवार (22 अक्टूबर) को एक कार्यक्रम भी आयोजित किया था — भाकियू की महापंचायत से ठीक एक दिन पहले।
मेरठ से लखनऊ तक: रालोद का दबाव कैसे बढ़ा
यह ज्ञापन अचानक नहीं आया है। इससे ठीक पहले, 19 अक्टूबर को रालोद नेता ऐश्वर्य राज सिंह पहली बार मेरठ पहुंचे थे, जहां उन्होंने कहा था कि पार्टी सरकार में रहकर किसानों की पैरवी कर रही है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के हवाले से चीनीमंडी ने 20 अक्टूबर को लिखा था कि केंद्रीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी के प्रयासों से गन्ने का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल हुआ है, और आगे भी मूल्य वृद्धि के लिए पार्टी प्रयास करती रहेगी।
यहां एक बात साफ समझ लेनी चाहिए, क्योंकि इसी में किसानों के लिए सबसे बड़ा भ्रम छिपा है। जिस 400 रुपये प्रति क्विंटल का जिक्र रालोद नेता के बयान में है, वह पेराई सत्र 2025-26 का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) है — अगेती किस्म के लिए 400 रुपये और सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल। नए सत्र 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। इसलिए मेरठ के बयान को नए सत्र के भाव की घोषणा समझना गलत होगा।
दूसरी तरफ टिकैत का 600 रुपये का अल्टीमेटम
रालोद के ज्ञापन के अगले ही दिन, 23 अक्टूबर को लखनऊ के डालीबाग स्थित गन्ना संस्थान में भाकियू की किसान-मजदूर महापंचायत हुई। पीटीआई के अनुसार, भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने वहां मांग की कि सरकार गन्ने का मूल्य बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा करे, बकाया भुगतान कराए और धान की खरीद लाभकारी दरों पर सुनिश्चित करे। महापंचायत से एक शाम पहले गन्ना संस्थान का गेट बंद मिलने पर टिकैत और किसान नेता करीब दो से तीन घंटे तक गेट नंबर एक के बाहर धरने पर भी बैठे थे।
महापंचायत में टिकैत ने कहा कि चीनी के दाम बढ़े हैं तो गन्ने के दाम क्यों नहीं बढ़ने चाहिए। इस तरह अब दो अलग-अलग स्तर की मांगें सामने हैं — रालोद की सिद्धांत के तौर पर मूल्य वृद्धि की मांग, और भाकियू की 600 रुपये प्रति क्विंटल की ठोस मांग। दोनों का लक्ष्य एक ही है: पेराई शुरू होने से पहले नए सत्र का भाव घोषित हो।
2026-27 का सच: एसएपी की घोषणा अभी बाकी है
किसानों के लिए सबसे जरूरी जानकारी यही है कि 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश के गन्ना मूल्य (एसएपी) की घोषणा अभी तक नहीं हुई है। केंद्र ने 2026-27 के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी दर के लिए है। यह पूरे देश के लिए न्यूनतम भाव है — इससे नीचे कोई मिल गन्ना नहीं खरीद सकती।
उत्तर प्रदेश में आमतौर पर एसएपी एफआरपी से ऊपर तय होता है। पिछले सत्र (2025-26) में एसएपी 400 रुपये (अगेती) और 390 रुपये (सामान्य) था, जो एफआरपी 355 रुपये से ऊपर था। इस सत्र में एफआरपी 365 रुपये हो गया है, इसलिए सबकी नजर इस बात पर है कि प्रदेश सरकार एसएपी कितना घोषित करती है।
इस बीच पेराई की तैयारियां जोरों पर हैं। प्रदेश में 122 चीनी मिलें हैं, और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई मिलों में पेराई शुरू होने वाली है — मुजफ्फरनगर की 8 मिलों का कार्यक्रम सामने आ चुका है और नंगलामल मिल 2 नवंबर से पेराई शुरू करने की तैयारी में है।
किसानों के लिए इसका मतलब क्या है
इस हलचल का सीधा असर यह है कि गन्ना मूल्य का मुद्दा अब सरकार के एजेंडे पर ऊपर आ गया है। लेकिन जब तक आधिकारिक घोषणा नहीं होती, किसानों को तीन काम जरूर कर लेने चाहिए: गन्ना सर्वे का रिकॉर्ड जांच लें — रकबा और किस्म सही दर्ज है या नहीं; बैंक खाता सक्रिय रखें और आधार से जुड़ा होना सुनिश्चित करें; और पर्ची व कैलेंडर पर नजर रखें, क्योंकि पेराई शुरू होते ही पर्ची की व्यवस्था यह तय करेगी कि गन्ना कब और किस केंद्र पर जाएगा।
कानूनी तौर पर यह भी जान लें कि मिलों को गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है, और देरी पर 15 प्रतिशत ब्याज का प्रावधान है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर के आदेश में भी मुहर लगाई है। शिकायत के लिए गन्ना विभाग का टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और एसएमएस शॉर्टकोड 51969 उपलब्ध है।
आगे क्या होगा
अब सबकी नजर प्रदेश सरकार के फैसले पर है। रालोद का ज्ञापन और भाकियू की महापंचायत — दोनों ने यह संदेश दे दिया है कि गन्ना मूल्य का मुद्दा अब टालने लायक नहीं रहा। 2027 के चुनाव से पहले यह मुद्दा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान बहुल जिलों — बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ और बिजनौर — में सबसे ज्यादा असर डालेगा। एसएपी को लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, इसलिए सोशल मीडिया में आए किसी भी आंकड़े को आधिकारिक घोषणा न समझें।
पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: रालोद ने सीएम योगी को ज्ञापन में क्या मांग की है? उत्तर: पीटीआई के अनुसार, रालोद ने 2026-27 के लिए गन्ने का मूल्य बढ़ाने की मांग की है, जिसका आधार बढ़ती उत्पादन लागत है। ज्ञापन में किसी एक निश्चित आंकड़े का जिक्र नहीं है।
प्रश्न: 2026-27 के लिए गन्ने का भाव घोषित हो गया है क्या? उत्तर: नहीं। 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। केंद्र का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत रिकवरी पर) तय है, लेकिन प्रदेश का एसएपी अलग से घोषित होता है।
प्रश्न: 400 रुपये वाला आंकड़ा किस सत्र का है? उत्तर: 400 रुपये (अगेती) और 390 रुपये (सामान्य) का भाव पेराई सत्र 2025-26 का एसएपी है। इसे नए सत्र का भाव समझना गलत होगा।
प्रश्न: गन्ना भुगतान में देरी हो तो किसान क्या कर सकते हैं? उत्तर: मिलों को 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है, देरी पर 15 प्रतिशत ब्याज का प्रावधान है। शिकायत के लिए टोल-फ्री 1800-121-3203 और एसएमएस शॉर्टकोड 51969 उपलब्ध है।
स्रोत: पीटीआई (स्वदेशी न्यूज़, 23 अक्टूबर 2026), चीनीमंडी (20 अक्टूबर 2026), दैनिक जागरण (चीनीमंडी के हवाले से)।
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
यह आर्टिकल कैसा लगा?


