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सहारनपुर की दया शुगर मिल पर बंदी का खतरा: 22 अक्टूबर को 15 KM पैदल मार्च कर कलक्ट्रेट पहुंचे किसान — अब क्या होगा?

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 24, 2026 • 6 min read
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सहारनपुर की दया शुगर मिल पर बंदी का खतरा: 22 अक्टूबर को 15 KM पैदल मार्च कर कलक्ट्रेट पहुंचे किसान — अब क्या होगा?
अंतिम अपडेट: October 24, 2026 7:48 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े गन्ना उत्पादक जिले सहारनपुर में दया शुगर मिल (गागलहेड़ी) के नए पेराई सत्र 2026-27 में चलने को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मिल प्रबंधन ने अभी तक गन्ना सुरक्षण का प्रस्ताव नहीं दिया है और मरम्मत कार्य की प्रगति भी साफ नहीं है। इस स्थिति के बाद गन्ना आयुक्त ने मिल से जुड़ा गन्ना क्षेत्र आसपास की दूसरी चीनी मिलों की ओर डायवर्ट कर दिया है। इससे क्षेत्र के करीब 100 गांवों के गन्ना किसान चिंता में हैं। 22 अक्टूबर को किसानों ने गागलहेड़ी से सहारनपुर कलक्ट्रेट तक करीब 15 किलोमीटर पैदल मार्च निकाला, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन सौंपा और मिल के संचालन की मांग की। किसानों की चेतावनी साफ है — अगर मिल समय पर चालू नहीं हुई तो आंदोलन और बड़ा होगा।

इस खबर में जानते हैं कि विवाद की जड़ कहां है, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की पंचायत में क्या-क्या दावे और जवाबी दावे सामने आए, मिल के ठेकेदार की तरफ से क्या कहा गया और आने वाले दिनों में गन्ना किसानों के लिए इसका क्या मतलब है।

मिल के संचालन पर अनिश्चितता क्यों बढ़ी

रॉयल बुलेटिन की रिपोर्ट के मुताबिक गागलहेड़ी स्थित दया शुगर मिल के आगामी पेराई सत्र में संचालन को लेकर अनिश्चितता इसलिए पैदा हुई क्योंकि मिल प्रबंधन की ओर से गन्ना सुरक्षण का प्रस्ताव विभाग को नहीं मिला और मरम्मत कार्य की स्थिति भी स्पष्ट नहीं हो पाई है। ऐसी स्थिति में गन्ना विभाग ने मिल से जुड़े गन्ना क्षेत्र को आसपास की दूसरी चीनी मिलों को आवंटित कर दिया है।

किसानों का कहना है कि अगर दया शुगर मिल चालू नहीं हुई तो उन्हें गन्ने की आपूर्ति के लिए दूसरी मिलों पर निर्भर रहना पड़ेगा। इससे परिवहन खर्च, समय और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़ी परेशानियां बढ़ जाएंगी। यही वजह है कि इलाके में मिल की बंदी की खबर को लेकर किसानों के बीच भारी आक्रोश है।

22 अक्टूबर को गागलहेड़ी से कलक्ट्रेट तक 15 KM का पैदल मार्च

मिल के भविष्य को लेकर बढ़ती आशंकाओं के बीच किसानों ने 22 अक्टूबर को गागलहेड़ी से सहारनपुर कलक्ट्रेट तक करीब 15 किलोमीटर का पैदल मार्च निकाला। रॉयल बुलेटिन के अनुसार इस मार्च में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। कलक्ट्रेट पहुंचकर किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन सौंपा और मिल को निर्धारित समय पर चालू कराने की मांग की।

किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। यह पैदल मार्च पहले से तय कार्यक्रम था — भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की पंचायत में इसका निर्णय लिया गया था।

BKU पंचायत: ठेकेदार के दावे पर किसानों और कर्मचारियों का आरोप

धारा लक्ष्य समाचार की रिपोर्ट बताती है कि भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की पंचायत निरीक्षण भवन मक्काबांस में आयोजित हुई थी, जिसकी अध्यक्षता मास्टर रघुवीर ने और संचालन नरेंद्र यादव ने किया। पंचायत में दया शुगर मिल को चालू कराने और किसानों की समस्याओं पर चर्चा हुई और 22 अक्टूबर को गागलहेड़ी के अग्रसेन चौक से पैदल मार्च कर जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव करने का निर्णय लिया गया।

पंचायत में मंडल सचिव डॉ. नरेश यादव ने आरोप लगाया कि पहले एक पंचायत के बाद मिल प्रबंधन की ओर से जानकारी दी गई थी कि अरुण भाटी ने मिल लीज (ठेके) पर ले ली है और मिल चलाई जाएगी। इस आश्वासन के बाद किसानों ने अपना आंदोलन अगली कार्रवाई तक स्थगित कर दिया था। लेकिन बाद में स्थिति बदली — मिल कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने पंचायत में बताया कि प्रबंधन की ओर से अभी तक आवश्यक सामान उपलब्ध नहीं कराया गया है और मरम्मत का कोई काम शुरू नहीं हुआ है।

कर्मचारियों और किसानों दोनों ने मिल प्रबंधन पर गुमराह करने का आरोप लगाया है। पंचायत में किसानों ने आंदोलन को आगे बढ़ाने पर एकजुटता जताई।

ठेकेदार बोले — 15 नवंबर से शुरू हो सकती है पेराई

दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट (16 अक्टूबर) के अनुसार सहारनपुर जनपद की चीनी मिलों में पेराई सत्र की तैयारियां जोरों पर हैं। मिल से अनुबंध पर लेने वाले अरुण कुमार भाटी ने जागरण को बताया था कि गागलहेड़ी मिल में पेराई सत्र शुरू करने की संभावित तिथि 15 नवंबर हो सकती है। जागरण के अनुसार गागलहेड़ी चीनी मिल का पेराई सत्र जिले में सबसे आखिर में शुरू होने की संभावना है।

जागरण की ही रिपोर्ट में बताया गया था कि सहारनपुर जनपद में कुल आठ चीनी मिलें हैं, जिनमें टोडरपुर मिल पिछले साल से बंद है। यानी कागज पर ठेकेदार ने 15 नवंबर की तारीख जरूर दी है, लेकिन जमीन पर मरम्मत और सामग्री की स्थिति को लेकर किसान और मिल कर्मचारी — दोनों — संतुष्ट नहीं हैं। यही भरोसे का संकट 22 अक्टूबर के पैदल मार्च में फूटा है। अगर मिल चालू नहीं हुई तो गन्ना दूसरी मिलों तक पहुंचाने में भाड़ा और समय दोनों बढ़ेंगे, पर्ची-क्रय केंद्र की व्यवस्था बदलनी पड़ेगी और भुगतान की अनिश्चितता भी रहेगी। बता दें कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत हो चुकी है और मिलें एक-एक करके चालू हो रही हैं — ऐसे समय में दया शुगर मिल का असमंजस क्षेत्र के किसानों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

अब आगे क्या हो सकता है

22 अक्टूबर के ज्ञापन के बाद अब सबकी नजर गन्ना विभाग और शासन के अगले कदम पर है। किसानों की मांग सीधी है — मिल को निर्धारित समय पर चालू कराया जाए और गन्ना क्षेत्र दूसरी मिलों को देने का फैसला वापस लिया जाए।

अगर अगले कुछ दिनों में मिल प्रबंधन मरम्मत का ठोस प्रमाण नहीं दिखाता और शासन कोई निर्णायक कदम नहीं उठाता, तो BKU (टिकैत) ने आंदोलन को और बड़ा करने की चेतावनी दी है। हमारी सलाह — क्षेत्र के किसान अपनी पर्ची, सर्वे रिकॉर्ड और मोबाइल नंबर की जानकारी अपडेट रखें, ताकि गन्ना जिस भी मिल में जाए, आपूर्ति और भुगतान में कोई अड़चन न आए।

आपके सवाल

दया शुगर मिल क्यों नहीं चल रही?

मिल प्रबंधन की ओर से गन्ना सुरक्षण का प्रस्ताव न मिलने और मरम्मत कार्य की प्रगति स्पष्ट न होने के बाद गन्ना आयुक्त ने मिल का गन्ना क्षेत्र दूसरी चीनी मिलों को आवंटित कर दिया है। मिल कर्मचारी भी कह रहे हैं कि न सामग्री आई है, न मरम्मत शुरू हुई है।

22 अक्टूबर को किसानों ने क्या किया?

गागलहेड़ी से सहारनपुर कलक्ट्रेट तक करीब 15 किलोमीटर पैदल मार्च निकालकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और मिल चालू कराने की मांग की। किसानों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी।

मिल के ठेकेदार ने क्या कहा है?

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार मिल अनुबंध पर लेने वाले अरुण कुमार भाटी ने 15 नवंबर को पेराई शुरू करने की संभावित तिथि बताई है। लेकिन किसान और कर्मचारी जमीन पर हो रहे काम को लेकर संतुष्ट नहीं हैं।

गन्ना क्षेत्र दूसरी मिलों को जाने से किसान को क्या नुकसान है?

परिवहन खर्च और समय बढ़ेगा, पर्ची-क्रय केंद्र की व्यवस्था बदलनी पड़ेगी और भुगतान की अनिश्चितता बढ़ेगी। इसीलिए किसान अपनी मिल को समय पर चलाने की मांग कर रहे हैं।

सहारनपुर जिले में कितनी चीनी मिलें हैं?

दैनिक जागरण के अनुसार जनपद में कुल आठ चीनी मिलें हैं, जिनमें से टोडरपुर मिल पिछले साल से बंद है।

स्रोत: रॉयल बुलेटिन (24 अक्टूबर 2026), धारा लक्ष्य समाचार (20 अक्टूबर 2026), दैनिक जागरण (16 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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