सहारनपुर: ₹90 करोड़ बकाया पर किसानों का हल्ला, बजाज की गांगनौली मिल को गन्ना देने से 10 गांवों का इनकार

🚨 BREAKING: सहारनपुर में गन्ना भुगतान को लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। सहकारी गन्ना विकास समिति सहारनपुर की वार्षिक सामान्य निकाय बैठक में किसानों ने बकाया गन्ना मूल्य का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। करीब ₹90 करोड़ से अधिक का गन्ना मूल्य बकाया होने की वजह से 10 गांवों के किसानों ने लिखित प्रस्ताव देकर बजाज की गांगनौली चीनी मिल को इस बार गन्ना देने से साफ इनकार कर दिया है। किसानों ने मांग की है कि गांगनौली मिल का गन्ना क्षेत्र काटकर देवबंद, बिड़वी जैसी अन्य चीनी मिलों को आवंटित कर दिया जाए। बैठक की अध्यक्षता कर रहे समिति अध्यक्ष चौ. मनोज पुंडीर ने किसानों को आश्वासन दिया कि सभी प्रस्तावों को गन्ना एवं चीनी आयुक्त तक भेजा जाएगा और लखनऊ स्तर पर किसानों के हित में प्रभावी पैरवी की जाएगी।
बैठक में गरमाई बहस, सबसे ज्यादा विरोध गांगनौली मिल को लेकर
समिति सभागार में आयोजित बोर्ड बैठक में जिले की छह चीनी मिलों — बिडवी, शेरमऊ, गांगनौली, देवबंद, गागलहेड़ी और सरसावा — के गन्ना क्षेत्र सुरक्षण (कैन एरिया रिजर्वेशन) प्रस्तावों पर चर्चा हुई। जैसे ही गन्ना आवंटन का मुद्दा उठा, किसान मुखर हो गए। किसानों ने साफ कहा कि जिस मिल पर करोड़ों रुपये का पुराना बकाया पड़ा है, उस मिल को नया गन्ना क्षेत्र आवंटित करना किसानों के साथ धोखा होगा।
बैठक में उपस्थित किसानों ने बताया कि बजाज की गांगनौली चीनी मिल पर अभी भी करीब ₹90 करोड़ रुपये से अधिक का गन्ना मूल्य बकाया है। भुगतान में लगातार हो रही देरी से किसान बुरी तरह परेशान हैं। नाराज किसानों ने समिति के सामने लिखित प्रस्ताव रखकर ऐलान किया कि वे आगामी पेराई सत्र 2026-27 में गांगनौली मिल को अपना गन्ना नहीं देंगे।
इन 10 गांवों ने किया बजाज मिल को गन्ना न देने का ऐलान
समिति सचिव अजीत कुमार सिंह के अनुसार, बोर्ड बैठक में 10 गांवों के किसानों ने लिखित प्रस्ताव देकर बजाज की गांगनौली मिल को गन्ना आवंटन नहीं किए जाने की मांग की। इन गांवों में घाटेड़ा, उमरी कलां, पिलखनी, सढ़ौली हरिया, पहांसू, भांकला, जंधेड़ा, सरकड़ी, दीपाखेड़ी और लाखनौर शामिल हैं। किसानों ने अपना गन्ना देवबंद, बिडवी समेत अन्य मिलों को देने की मांग रखी है।
समिति अध्यक्ष चौ. मनोज पुंडीर ने किसानों को आश्वासन दिया कि प्राप्त सभी प्रस्तावों को गंभीरता से लेते हुए गन्ना एवं चीनी आयुक्त को भेजा जाएगा और किसानों के हित में लखनऊ स्तर तक प्रभावी पैरवी की जाएगी। बैठक के आरंभ में सचिव अजीत कुमार सिंह ने बोर्ड अध्यक्ष मनोज पुंडीर और संचालकों का स्वागत किया। बैठक में चीनी मिलों के जीएम, एससीडीआई और बड़ी संख्या में डेलीगेट और किसान मौजूद रहे।
गागलहेड़ी मिल का मुद्दा भी उठा, मिल चलवाने की मांग
बैठक में गांगनौली के साथ-साथ गागलहेड़ी चीनी मिल का मुद्दा भी गरमाया। बैठक में गांगनौली, बिडवी, देवबंद और शेरमऊ चीनी मिलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे, जबकि गागलहेड़ी और सरसावा मिल का कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा। दया शुगर गागलहेड़ी मिल के प्रतिनिधि की गैरमौजूदगी पर किसानों ने मिल संचालन को लेकर सवाल उठाए। किसानों ने गन्ना डायवर्जन (दूसरी मिलों को गन्ना भेजने) की बजाय आगामी पेराई सत्र में गागलहेड़ी मिल चलवाए जाने की मांग की।
इससे पहले न्यूज18 की एक रिपोर्ट (26 अगस्त 2026) में बताया गया था कि सहारनपुर जिले की चीनी मिलों पर किसानों के 100 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है, जिसमें गांगनौली बजाज शुगर मिल पर अकेले ₹98.45 करोड़ और गागलहेड़ी शुगर मिल पर ₹2.54 करोड़ बकाया था। रिपोर्ट के अनुसार यह बकाया हाल-फिलहाल का नहीं बल्कि 2025 से रुका हुआ है। सरकार के 15 दिन में भुगतान और देरी पर ब्याज देने के दावों को सहारनपुर की कुछ मिलें लगातार नजरअंदाज करती आ रही हैं।
किसानों के लिए ये खबर क्यों अहम है
गन्ना सुरक्षण का फैसला सीधे-सीधे किसानों की जेब से जुड़ा है। जिस मिल को गन्ना क्षेत्र आवंटित होता है, उसी मिल को किसान पर्ची पर गन्ना बेच सकते हैं। अगर उस मिल पर पुराना बकाया पड़ा है, तो किसान को भुगतान के लिए फिर से महीनों इंतजार करना पड़ सकता है। यही वजह है कि भुगतान में खराब ट्रैक रिकॉर्ड वाली मिल को गन्ना क्षेत्र देने का विरोध हो रहा है।
- बकाया की रकम: किसानों के अनुसार गांगनौली मिल पर करीब ₹90 करोड़ से अधिक का गन्ना मूल्य बकाया है। न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2026 में यह आंकड़ा ₹98.45 करोड़ था।
- बकाया की अवधि: रिपोर्टों के अनुसार यह बकाया 2025 से रुका हुआ है, यानी किसानों को अपने पैसे के लिए लगभग एक साल से इंतजार करना पड़ रहा है।
- सरकारी दावा बनाम हकीकत: उत्तर प्रदेश सरकार का दावा है कि 2025-26 के पेराई सत्र में चीनी मिलों ने 94.86 प्रतिशत गन्ना मूल्य का भुगतान कर दिया है और 102 निजी मिलों ने शत-प्रतिशत भुगतान पूरा कर लिया है। लेकिन सहारनपुर जैसे जिलों की जमीनी हकीकत इससे अलग तस्वीर पेश कर रही है।
आगे क्या होगा
समिति के निर्णय के अनुसार, 10 गांवों के लिखित प्रस्ताव समेत बैठक के सभी फैसलों को गन्ना एवं चीनी आयुक्त को भेजा जाएगा। अंतिम निर्णय आयुक्त स्तर पर होगा कि गांगनौली मिल का गन्ना क्षेत्र काटा जाता है या नहीं। किसान नेताओं का कहना है कि अगर बकाया का भुगतान जल्द नहीं हुआ तो आगामी पेराई सत्र में और गांव भी इसी तरह के प्रस्ताव दे सकते हैं, जिससे मिल के लिए गन्ना जुटाना मुश्किल हो जाएगा।
किसान क्या कर सकते हैं
- बकाया की जानकारी रखें: अपने गन्ना भुगतान का रिकॉर्ड eGanna ऐप या गन्ना समिति कार्यालय से नियमित रूप से जांचें।
- समिति बैठकों में भाग लें: गन्ना क्षेत्र आवंटन जैसे फैसले समिति की बैठकों में ही होते हैं। इन बैठकों में अपनी बात रखें।
- लिखित शिकायत दें: भुगतान में देरी होने पर जिला गन्ना अधिकारी या गन्ना आयुक्त कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: सहारनपुर में किसानों ने गांगनौली मिल को गन्ना देने से इनकार क्यों किया? जवाब: किसानों के अनुसार बजाज की गांगनौली चीनी मिल पर करीब ₹90 करोड़ से अधिक का गन्ना मूल्य बकाया है। भुगतान में लगातार देरी से नाराज 10 गांवों के किसानों ने समिति बैठक में लिखित प्रस्ताव देकर मिल को गन्ना न देने का ऐलान किया है।
सवाल: किन गांवों ने गांगनौली मिल को गन्ना देने से इनकार किया? जवाब: समिति सचिव अजीत कुमार सिंह के अनुसार इन गांवों में घाटेड़ा, उमरी कलां, पिलखनी, सढ़ौली हरिया, पहांसू, भांकला, जंधेड़ा, सरकड़ी, दीपाखेड़ी और लाखनौर शामिल हैं।
सवाल: किसान अपना गन्ना किस मिल को देना चाहते हैं? जवाब: किसानों ने मांग की है कि गांगनौली मिल का गन्ना क्षेत्र काटकर देवबंद, बिड़वी समेत अन्य चीनी मिलों को आवंटित किया जाए।
सवाल: समिति ने किसानों की मांग पर क्या निर्णय लिया? जवाब: समिति अध्यक्ष चौ. मनोज पुंडीर ने आश्वासन दिया कि प्राप्त सभी प्रस्तावों को गन्ना एवं चीनी आयुक्त को भेजा जाएगा और किसानों के हित में लखनऊ स्तर तक प्रभावी पैरवी की जाएगी।
सवाल: गांगनौली मिल पर कुल कितना बकाया है? जवाब: बैठक में किसानों ने करीब ₹90 करोड़ से अधिक के बकाए की बात कही। न्यूज18 की अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार इस मिल पर ₹98.45 करोड़ बकाया था, जो 2025 से रुका हुआ है।
स्रोत: हिंदुस्तान (Live Hindustan), न्यूज18 हिंदी, चीनीमंडी।
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