सहारनपुर मंडल में गन्ने की फसल पर 36 ड्रोन से छिड़काव शुरू, जलभराव के बीच 5 मिनट में 1 एकड़ में दवा का छिड़काव

सहारनपुर मंडल में गन्ने की फसल पर 36 ड्रोन से छिड़काव शुरू, जलभराव के बीच 5 मिनट में 1 एकड़ में दवा का छिड़काव
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Aamir Raza - 2026-08-31
सहारनपुर/मुजफ्फरनगर (विशेष संवाददाता)। मानसून की भारी बारिश और खेतों में जलभराव के बीच गन्ने की फसल को फफूंद जनित रोगों और कीटों से बचाने के लिए उत्तर प्रदेश गन्ना विकास विभाग ने सहारनपुर मंडल में बड़ा तकनीकी अभियान शुरू किया है। मंडल के तीन प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली की सहकारी गन्ना विकास समितियों के माध्यम से 36 आधुनिक किसान ड्रोन तैनात किए गए हैं।
इन ड्रोनों की मदद से 10 से 12 फीट ऊंचे और पानी से लबालब भरे खेतों में बिना उतरे मात्र 5 मिनट में एक एकड़ फसल पर कीटनाशक, फफूंदनाशक और सूक्ष्म पोषक तत्वों का समान रूप से छिड़काव किया जा रहा है।
जलभराव में फसल सुरक्षा की चुनौती का समाधान
सहारनपुर के उप गन्ना आयुक्त ने बताया कि अगस्त और सितंबर के दौरान गन्ने के खेतों में पानी भर जाने से किसान पारंपरिक हैंड-स्प्रेयर या ट्रैक्टर लेकर खेत के अंदर नहीं जा पाते थे। इसके चलते लाल सड़न (रेड रॉट) और टॉप बोरर का प्रकोप तेजी से फैलता था।
उप गन्ना आयुक्त ने कहा, “ड्रोन तकनीक से किसान को खेत में नहीं उतरना पड़ता। रिमोट कंट्रोल से संचालित ड्रोन फसल की छतरी (कैनोपी) के ऊपर उड़ते हुए दवा की बारीक फुहार छोड़ता है। ड्रोन के पंखों की तेज हवा दवा की बूंदों को गन्ने के तने और निचली पत्तियों तक पहुंचा देती है। किसानों को इस छिड़काव के लिए अलग से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ रहा है।”
| जिला | तैनात ड्रोनों की संख्या | नोडल गन्ना समितियां | दैनिक छिड़काव क्षमता |
|---|---|---|---|
| सहारनपुर | 14 ड्रोन | सहारनपुर, देवबंद, नकुड़, रामपुर मनिहारान | 350 एकड़ प्रतिदिन |
| मुजफ्फरनगर | 12 ड्रोन | खतौली, रोहाना, मंसूरपुर, बुढ़ाना | 300 एकड़ प्रतिदिन |
| शामली | 10 ड्रोन | शामली, थानाभवन, ऊन | 250 एकड़ प्रतिदिन |
बारिश में दवा न धुले, इसके लिए ‘स्टिकर’ का फॉर्मूला
कृषि वैज्ञानिकों ने ड्रोन ऑपरेटरों को विशेष निर्देश दिया है कि मानसून के मौसम में दवा के घोल के साथ ‘स्टिकर’ (सर्फेक्टेंट या सिलिकॉन आधारित चिपकाने वाला एजेंट) अनिवार्य रूप से मिलाएं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि स्टिकर मिलाने से कीटनाशक की बूंदें गन्ने की पत्ती पर चिपक जाती हैं और छिड़काव के आधे घंटे बाद भी यदि बारिश होती है, तो दवा धुलती नहीं है और उसका असर 20 से 25 दिनों तक बना रहता है।
शामली के किसान बलबीर सिंह ने बताया, “हमारे खेत में 2 फीट पानी भरा था और टॉप बोरर लग रहा था। हमने समिति में संपर्क किया और ड्रोन पायलट ने 10 मिनट में हमारे दो एकड़ खेत में छिड़काव पूरा कर दिया। यह तकनीक किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है।”
ड्रोन पायलटों को दिया गया विशेष जीपीएस प्रशिक्षण
कृषि विज्ञान केंद्र और गन्ना शोध संस्थान के वैज्ञानिकों ने सहकारी समितियों में तैनात ड्रोन पायलटों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया है।
पायलटों को जीपीएस मैपिंग के जरिए खेत की सटीक सीमाओं को लॉक करने का अभ्यास कराया गया है, जिससे दवा केवल किसान के अपने खेत में ही गिरे और पड़ोसी के अन्य फसलों वाले खेतों पर न जाए। ऑपरेटरों को बैटरी बैकअप और वाटरप्रूफिंग का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है ताकि बारिश के बीच भी लगातार काम जारी रह सके।
पश्चिमी यूपी के अमरोहा जिले की चीनी मिलों जैसे चंदनपुर चीनी मिल, असमौली चीनी मिल और अगवानपुर चीनी मिल के अंतर्गत भी समितियों ने ड्रोन बुकिंग के लिए हेल्पडेस्क शुरू की हैं।
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