सहकारी चीनी मिलों में लगेंगे रिफाइंड प्लांट — निजीकरण नहीं, होगा आधुनिकीकरण! किसानों को बड़ा फायदा

बड़ी राहत की खबर: उत्तर प्रदेश की सहकारी चीनी मिलों (Cooperative Sugar Mills) को लेकर चल रही निजीकरण की अटकलों पर अब पूरी तरह विराम लग गया है। राज्य सरकार ने सहकारी चीनी मिलों को बेचने या निजी हाथों में सौंपने के बजाय उनके आधुनिकीकरण (Modernization) और बड़े निवेश का फैसला लिया है। इसके तहत प्रदेश की सहकारी मिलों में अत्याधुनिक रिफाइंड शुगर प्लांट (Refined Sugar Plant) लगाए जाएंगे।
सहकारी मिलों के आधुनिकीकरण का नया प्लान
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| सरकारी फैसला | निजीकरण नहीं, सहकारी मिलों का आधुनिकीकरण |
| नई तकनीक | सल्फर-मुक्त रिफाइंड चीनी उत्पादन प्लांट |
| टेंडर जारी | अमरोहा व अन्य प्रमुख सहकारी मिलों के लिए |
| सफल मॉडल | बरेली और बदायूं सहकारी मिलें |
| किसानों को लाभ | अधिक रिकवरी, तेज गन्ना उठान और समय पर भुगतान |
अमरोहा समेत कई जिलों में टेंडर प्रक्रिया शुरू
TenderShark और ChinniMandi की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश राज्य चीनी एवं गन्ना विकास विभाग ने सहकारी चीनी मिलों के कायाकल्प की प्रक्रिया तेज़ कर दी है:
- 🏭 अमरोहा सहकारी मिल: अत्याधुनिक रिफाइंड शुगर प्लांट स्थापित करने के लिए आधिकारिक टेंडर आमंत्रित किए गए हैं।
- ⚙️ मशीनरी अपग्रेड: पुरानी बॉयलर और पेराई यूनिट्स को उच्च दक्षता वाली नई मशीनों से बदला जाएगा।
- 📉 कम वेस्टेज: आधुनिक तकनीक से शीरा (Molasses) और बगास (Bagasse) का भी बेहतर औद्योगिक इस्तेमाल सुनिश्चित होगा।
बरेली और बदायूं का सफल मॉडल बना प्रेरणा
सहकारी मिलों के प्रबंधन को लेकर पहले चिंताएं जताई जाती थीं, लेकिन बरेली और बदायूं की सहकारी चीनी मिलों ने समय पर पेराई और बेहतर वित्तीय प्रबंधन का सफल उदाहरण पेश किया है। सरकार अब इसी सफल मॉडल के आधार पर अन्य सभी सहकारी मिलों को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने जा रही है।
किसानों को क्या मिलेगा सीधा फायदा?
सहकारी मिलों में रिफाइंड प्लांट लगने से क्षेत्र के लाखों गन्ना किसानों को कई बड़े लाभ मिलेंगे:
- ज्यादा शुगर रिकवरी: आधुनिक प्लांट से गन्ने के रस की रिकवरी 0.5% से 1% तक बढ़ जाती है, जिससे मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
- प्रीमियम क्वालिटी चीनी: रिफाइंड चीनी बाजार में उच्च दरों पर बिकती है, जिससे मिलों की आमदनी में भारी इजाफा होगा।
- तेज गन्ना तौल और पेराई: पेराई क्षमता बढ़ने से सीजन के दौरान किसानों को क्रय केंद्रों और मिल गेट पर लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
- समय पर गन्ना भुगतान: मिलों के मुनाफे में आने से गन्ना किसानों का भुगतान 14 दिनों के भीतर सीधे बैंक खाते में मिलना आसान होगा।
📢 स्रोत: ChinniMandi, TenderShark टेंडर बुलेटिन एवं UP गन्ना विकास विभाग।
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