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बड़ी राहत की खबर: उत्तर प्रदेश की सहकारी चीनी मिलों (Cooperative Sugar Mills) को लेकर चल रही निजीकरण की अटकलों पर अब पूरी तरह विराम लग गया है। राज्य सरकार ने सहकारी चीनी मिलों को बेचने या निजी हाथों में सौंपने के बजाय उनके आधुनिकीकरण (Modernization) और बड़े निवेश का फैसला लिया है। इसके तहत प्रदेश की सहकारी मिलों में अत्याधुनिक रिफाइंड शुगर प्लांट (Refined Sugar Plant) लगाए जाएंगे।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| सरकारी फैसला | निजीकरण नहीं, सहकारी मिलों का आधुनिकीकरण |
| नई तकनीक | सल्फर-मुक्त रिफाइंड चीनी उत्पादन प्लांट |
| टेंडर जारी | अमरोहा व अन्य प्रमुख सहकारी मिलों के लिए |
| सफल मॉडल | बरेली और बदायूं सहकारी मिलें |
| किसानों को लाभ | अधिक रिकवरी, तेज गन्ना उठान और समय पर भुगतान |
TenderShark और ChinniMandi की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश राज्य चीनी एवं गन्ना विकास विभाग ने सहकारी चीनी मिलों के कायाकल्प की प्रक्रिया तेज़ कर दी है:
सहकारी मिलों के प्रबंधन को लेकर पहले चिंताएं जताई जाती थीं, लेकिन बरेली और बदायूं की सहकारी चीनी मिलों ने समय पर पेराई और बेहतर वित्तीय प्रबंधन का सफल उदाहरण पेश किया है। सरकार अब इसी सफल मॉडल के आधार पर अन्य सभी सहकारी मिलों को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने जा रही है।
सहकारी मिलों में रिफाइंड प्लांट लगने से क्षेत्र के लाखों गन्ना किसानों को कई बड़े लाभ मिलेंगे:
📢 स्रोत: ChinniMandi, TenderShark टेंडर बुलेटिन एवं UP गन्ना विकास विभाग।
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