होम सितंबर के पहले पखवाड़े के लिए 13 लाख टन …

सितंबर के पहले पखवाड़े के लिए 13 लाख टन चीनी बिक्री कोटा जारी — त्योहारों से पहले बाजार में पर्याप्त आपूर्ति

Randhir Patil Randhir Patil Sep 1, 2026 3 min read
सितंबर के पहले पखवाड़े के लिए 13 लाख टन चीनी बिक्री कोटा जारी — त्योहारों से पहले बाजार में पर्याप्त आपूर्ति
अंतिम अपडेट: September 1, 2026 7:50 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

इस आर्टिकल में: CaneUp पर इस पोस्ट में गन्ना किसानों के लिए उपयोगी जानकारी दी गई है — गन्ना पर्ची कैलेंडर, MSP/FRP रेट, भुगतान स्थिति, सरकारी योजनाएं, eGanna App, खेती के टिप्स, और बिज़नेस आइडियाज। यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

नई दिल्ली / मेरठ: केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के चीनी निदेशालय ने सितंबर 2026 के प्रथम पखवाड़े (1 सितंबर से 15 सितंबर 2026) के लिए देश की सभी 535 चालू चीनी मिलों के लिए 13 लाख मीट्रिक टन (13 LMT) का घरेलू चीनी बिक्री कोटा आधिकारिक रूप से जारी कर दिया है। सरकार द्वारा मासिक कोटा प्रणाली के स्थान पर हाल ही में लागू की गई नई पाक्षिक (Fortnightly) कोटा प्रणाली के तहत यह पहला विस्तृत आवंटन है।

मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक सर्कुलर के अनुसार, इस 13 लाख टन के कोटे में उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों को सर्वाधिक 4.85 लाख मीट्रिक टन का आवंटन प्राप्त हुआ है, जबकि महाराष्ट्र की मिलों को 4.20 लाख मीट्रिक टन और कर्नाटक को 1.95 लाख मीट्रिक टन का कोटा दिया गया है। शेष 2 लाख टन का कोटा तमिलनाडु, गुजरात, बिहार, पंजाब और हरियाणा की मिलों में वितरित किया गया है।

पाक्षिक कोटा प्रणाली से जमाखोरी पर सीधा प्रहार

चीनी उद्योग निदेशालय के वरिष्ठ सांख्यिकी अधिकारी ने बताया, “पहले जब पूरे महीने के लिए एकमुश्त 22 से 24 लाख टन का कोटा जारी होता था, तो कई मिलें और बड़े स्टॉकिस्ट महीने के पहले 20 दिन चीनी रोककर रखते थे और महीने के अंत में कृत्रिम कमी दिखाकर कीमतें बढ़ा देते थे। नई पाक्षिक व्यवस्था के तहत 1 से 15 सितंबर के बीच आवंटित 13 लाख टन चीनी की बिक्री और डिस्पैच 15 सितंबर की मध्यरात्रि तक पूरा करना अनिवार्य है। जो मिलें इस कोटे को निर्धारित 15 दिनों में नहीं बेचेंगी, उनका बचा हुआ स्टॉक अगले पखवाड़े के कोटे से काट लिया जाएगा।”

भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA) के महानिदेशक ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा, “सितंबर माह में गणेश उत्सव, ओणम और आगामी पितृपक्ष व नवरात्र की तैयारियों के चलते मिठाई और पेय पदार्थों की मांग चरम पर रहती है। 15 दिनों के लिए 13 लाख टन का कोटा बाजार की वास्तविक मांग से लगभग 1.5 लाख टन अधिक है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि थोक और खुदरा दोनों स्तरों पर चीनी की कोई कमी न रहे।”

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मिलों को मिली नकदी राहत

उत्तर प्रदेश की प्रमुख निजी मिलों (त्रिवेणी, बलरामपुर चीनी, धामपुर, सिंभावली और डीसीएम श्रीराम समूह) के प्रबंधकों का कहना है कि 15 दिनों के लिए पर्याप्त कोटा मिलने से मिलों से चीनी का दैनिक उठाव तेजी से शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश शुगर मिल्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधि ने बताया कि चीनी की बिक्री से मिलने वाला 85% राजस्व अनिवार्य रूप से एस्क्रो खाते में जमा किया जा रहा है, जिससे मिलें पेराई सत्र शुरू होने से पहले किसानों के लंबित भुगतान और कर्मचारियों के बोनस का समायोजन कर सकेंगी।

खाद्य मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे चीनी मिलों के गेट पर लगे वे-ब्रिज और इलेक्ट्रॉनिक गेट पास सिस्टम की दैनिक निगरानी करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मिलों से चीनी का परिवहन बिना किसी कृत्रिम बाधा के सीधे पंजीकृत थोक मंडियों तक पहुंच रहा है।

पाक्षिक बिक्री न करने वाली मिलों पर दंडात्मक कार्रवाई

चीनी नियंत्रण आदेश (Sugar Control Order, 1966) के तहत जारी अधिसूचना में चेतावनी दी गई है कि यदि कोई चीनी मिल 15 सितंबर 2026 की शाम तक अपने 13 लाख टन के पाक्षिक कोटे का न्यूनतम 90% हिस्सा बाजार में रिलीज नहीं करती है, तो उसके अगले महीने के कोटे में भारी कटौती की जाएगी और उसके कोटे को अन्य सक्रिय मिलों को स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर और मेरठ की गल्ला मंडियों के थोक चीनी व्यापारियों का कहना है कि आज 1 सितंबर से पाक्षिक कोटा लागू होने से मिलों में चीनी की लोडिंग तेज हो गई है। थोक मंडियों में ट्रकों की आवाजाही सामान्य हो गई है और आगामी हफ्तों में खुदरा कीमतों में स्थिरता बनी रहने की पूरी उम्मीद है।

Randhir Patil
लेखक

Randhir Patil

गन्ना उद्योग विशेषज्ञ — ChiniMandi पर 425+ लेख। गन्ना खेती, शुगर मिल, MSP रेट, सरकारी योजनाओं पर विश्वसनीय जानकारी।

यह आर्टिकल कैसा लगा?

📬 गन्ना अपडेट पाएं

MSP रेट, पर्ची कैलेंडर, सरकारी योजनाएं — सीधे आपके इनबॉक्स में