सितंबर की भारी बारिश से गन्ने में जलभराव का खतरा — गन्ना अनुसंधान परिषद ने जारी की जल निकासी व पोटाश स्प्रे एडवाइजरी

शाहजहांपुर / मुजफ्फरनगर (CaneUp मौसम व कृषि डेस्क): सितंबर के पहले सप्ताह में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और तराई के 22 जनपदों (मुजफ्फरनगर, शामली, बिजनौर, सहारनपुर, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर और बहराइच) में हुई मूसलाधार मानसूनी बारिश के बाद निचले इलाकों के गन्ना खेतों में गंभीर जलभराव (Waterlogging) की स्थिति पैदा हो गई है।
इस परिस्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद (UPCSR), शाहजहांपुर के प्रधान वैज्ञानिकों ने प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए आपातकालीन कृषि एडवाइजरी जारी की है। वैज्ञानिकों का कहना है कि 48 घंटे से अधिक समय तक खेत में खड़ा पानी गन्ने की जड़ों को सड़ा देता है और मिट्टी में फफूंद के बीजाणु सक्रिय होने से लाल सड़न (Red Rot) तथा चोटी बेधक (Top Borer) कीट का भीषण हमला हो सकता है।
🚨 जलभराव के बाद 24 घंटे के भीतर करने योग्य 5 जीवनरक्षक उपाय
UPCSR द्वारा जारी तकनीकी दिशा-निर्देशों के अनुसार किसानों को तुरंत निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
| प्राथमिकता | आवश्यक कार्य | वैज्ञानिक कारण |
|---|---|---|
| कदम 1 (तुरंत) | खेत के निचले छोर पर गहरी नाली काटकर पानी बाहर निकालें | जड़ क्षेत्र में ऑक्सीजन का संचार रुकने से पौधे पीले पड़ने लगते हैं |
| कदम 2 (3 दिन के भीतर) | प्रति एकड़ 25 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) का छिड़काव | पोटाश गन्ने के तने को मजबूत करता है और तेज हवा में फसल गिरने से बचाता है |
| कदम 3 (रोग रोकथाम) | पायराक्लोस्ट्रोबिन + मेटीराम (कैब्रियो टॉप) 300 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी का फोलियर स्प्रे | बारिश के बाद लाल सड़न के फफूंद बीजाणुओं को तुरंत निष्क्रिय करता है |
| कदम 4 (कीट नियंत्रण) | कोराजन (Chlorantraniliprole) 150 मिली प्रति एकड़ ड्रेंचिंग | जलभराव के बाद तीसरे और चौथे पखवाड़े में टॉप बोरर की तितली को अंडे देने से रोकता है |
| कदम 5 (सहारा देना) | 3-3 गन्नों के झुंड को आमने-सामने हरी पत्तियों से ‘कैंचीनुमा’ बांधें (Propping) | अक्टूबर के पहले पखवाड़े की तेज हवाओं में गन्ने को गिरने (Lodging) से बचाता है |
🍂 पीली पड़ रही पत्तियों के लिए जिंक व यूरिया का जादुई घोल
वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन खेतों में 3 दिन से पानी भरा रहा, वहां नाइट्रोजन और सूक्ष्म पोषक तत्वों का निक्षालन (Leaching) हो गया है, जिससे पत्तियां तेजी से पीली हो रही हैं। इसके समाधान हेतु:
- घोल का फॉर्मूला: 2 किलोग्राम यूरिया + 500 ग्राम चिलेटेड जिंक (Chelated Zinc 12%) को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ दोपहर के बाद छिड़काव करें।
- यह छिड़काव 48 घंटे के भीतर पौधों को फिर से गहरा हरा बना देता है और चीनी निर्माण की प्रकाश-संश्लेषण प्रक्रिया तेज हो जाती है।
⚠️ लाल सड़न से ग्रसित पौधों को खेत में न छोड़ें
यदि जल निकासी के बाद किसी खेत में गन्ने की तीसरी और चौथी पत्ती सूखती हुई दिखे और तने को चीरने पर भीतर लाल रंग के चकत्ते और शराब जैसी तीखी बदबू आए, तो:
- उस पौधे को तुरंत जड़ सहित उखाड़कर खेत से दूर ले जाकर गहरा गड्ढा खोदकर दबा दें या जला दें।
- उस स्थान पर 50 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर छिड़कें ताकि पानी के बहाव के साथ फफूंद स्वस्थ पौधों तक न फैले।
कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि किसान समय पर जल निकासी और पोटाश का प्रयोग कर लेते हैं, तो इस बारिश से गन्ने की लंबाई और रस की मात्रा में 15% तक का शुद्ध इजाफा होगा।
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
यह आर्टिकल कैसा लगा?


