शाहजहांपुर में बनेगा देश का पहला गन्ना विश्वविद्यालय, प्रस्ताव शासन को भेजा गया — 45% गन्ना उगाने वाले यूपी के किसानों को सीधा लाभ

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर शाहजहांपुर से आई है। शाहजहांपुर में देश का पहला गन्ना विश्वविद्यालय बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए गन्ना शोध परिषद को विश्वविद्यालय में उच्चीकृत करने का प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेज दिया गया है। अब इस प्रस्ताव पर कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार है। मंजूरी मिलते ही देश को अपना पहला समर्पित गन्ना विश्वविद्यालय मिल जाएगा, और इसका सीधा फायदा उत्तर प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों को मिलेगा।
यह पहल प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की ओर से की गई है। उन्होंने प्रस्ताव तैयार कराकर शासन को भेजा है। खबरों के अनुसार, इस विषय पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से चर्चा भी हो चुकी है।
क्यों शाहजहांपुर, क्यों गन्ना विश्वविद्यालय
शाहजहांपुर का गन्ने से नाता बहुत पुराना है। यहीं उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद स्थित है, जिसकी स्थापना 1912 में एक शोध केंद्र के रूप में हुई थी। सौ साल से ज्यादा समय से यह परिषद गन्ने की नई प्रजातियों, रोगों और खेती की तकनीक पर शोध कर रही है।
दूसरी बड़ी वजह उत्तर प्रदेश का गन्ना उत्पादन है। देश के कुल गन्ना उत्पादन का करीब 45 प्रतिशत हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश में होता है। इससे चीनी के साथ-साथ शीरा और गुड़ की जरूरत का बड़ा हिस्सा भी पूरा होता है। जिस राज्य में देश का लगभग आधा गन्ना पैदा होता हो, वहां गन्ने की पढ़ाई और शोध के लिए एक समर्पित विश्वविद्यालय होना किसानों के हित में ही है।
विश्वविद्यालय में क्या पढ़ाया जाएगा
प्रस्ताव के अनुसार, नए विश्वविद्यालय में गन्ने की खेती, उससे बनने वाले उत्पादों, उद्यम की संभावनाओं और इनसे जुड़े विषयों की पढ़ाई और शोध होगा। इसका मतलब यह है कि यह सिर्फ डिग्री बांटने वाला संस्थान नहीं होगा, बल्कि गन्ने की पूरी शृंखला पर काम करेगा — खेत में बीज से लेकर मिल में चीनी और उससे आगे एथनॉल व अन्य उत्पादों तक।
किसानों के लिए इसका व्यावहारिक मतलब यह है कि गन्ने की खेती से जुड़ी समस्याओं पर शोध तेज होगा, नई प्रजातियां जल्दी खेत तक पहुंचेंगी और गन्ने से जुड़े रोजगार व उद्यम के नए रास्ते खुलेंगे।
शोध परिषद की अब तक की उपलब्धियां
गन्ना शोध परिषद पहले से ही किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण प्रजातियां विकसित कर चुकी है। परिषद ने रेड रॉट रोग के प्रति मध्यम रोग-रोधी अगेती प्रजातियां कोशा 13235, कोशा 18231, कोशा 17231 और कोशा 19231 विकसित की हैं। ये कोयंबटूर-शाहजहांपुर की नवीनतम प्रजातियां हैं। इसके अलावा परिषद की नई प्रजाति कोशा 23232 किसानों को वितरित की जा रही है।
परिषद की एक और बड़ी उपलब्धि हाल ही में सामने आई थी। शाहजहांपुर में विकसित अगेती किस्म कोशा 17231, जिसे बिस्मिल नाम दिया गया है, को नॉर्थ-वेस्ट जोन के लिए राष्ट्रीय मानक का दर्जा मिला है। अब उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान में तैयार होने वाली नई अगेती किस्मों की तुलना इसी बिस्मिल से की जाएगी। यह सम्मान बताता है कि शाहजहांपुर का शोध राष्ट्रीय स्तर पर कसौटी बन चुका है।
मई 2026 से ही बन रही थी जमीन
गन्ना विश्वविद्यालय का विचार अचानक नहीं आया है। मई 2026 में लखनऊ के डालीबाग स्थित गन्ना संस्थान में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस पर सहमति बनी थी। उस बैठक की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव गन्ना एवं चीनी उद्योग वीणा कुमारी ने की थी और इसमें भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक का प्रतिनिधिमंडल भी शामिल था।
उस बैठक में गन्ना उत्पादन में लगातार आ रही गिरावट, मिट्टी के स्वास्थ्य, कीट प्रबंधन और उन्नतशील बीजों पर चर्चा हुई थी। उसी दौरान एक समर्पित गन्ना विश्वविद्यालय की स्थापना के प्रस्ताव पर सहमति बनी थी। अब वित्त मंत्री की पहल पर वह प्रस्ताव औपचारिक रूप से शासन को भेज दिया गया है।
एक भ्रम से बचें: यह दूसरा शाहजहांपुर विश्वविद्यालय नहीं है
शाहजहांपुर में विश्वविद्यालय की खबर सुनकर किसानों के मन में एक भ्रम हो सकता है, इसलिए इसे साफ कर देना जरूरी है। फरवरी 2026 में विधानसभा में शाहजहांपुर के लिए स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय का विधेयक पारित हुआ था, जो सामान्य उच्च शिक्षा का विश्वविद्यालय है और मुमुक्षु आश्रम ट्रस्ट की संस्थाओं के उन्नयन से बन रहा है।
गन्ना विश्वविद्यालय उससे अलग प्रस्ताव है। यह पूरी तरह गन्ने पर केंद्रित होगा — गन्ने की खेती, शोध, उत्पाद और उद्यम।
किसानों को सीधा क्या फायदा होगा
पहला फायदा बेहतर बीज का होगा। नई प्रजातियों का शोध और परीक्षण तेज होगा, तो रोग-रोधी और ज्यादा पैदावार देने वाली किस्में जल्दी किसानों तक पहुंचेंगी। रेड रॉट जैसी बीमारियों से जूझ रहे किसानों के लिए यह सबसे बड़ी राहत होगी।
दूसरा फायदा जानकारी और प्रशिक्षण का होगा। विश्वविद्यालय से जुड़े वैज्ञानिक और छात्र खेत तक नई तकनीक पहुंचाएंगे। खाद, सिंचाई, कीट प्रबंधन और मिट्टी की सेहत जैसे विषयों पर किसानों को वैज्ञानिक सलाह ज्यादा आसानी से मिलेगी।
तीसरा फायदा युवाओं के लिए होगा। गन्ना बहुल इलाकों के युवा गन्ना तकनीक, चीनी उद्योग और एथनॉल जैसे क्षेत्रों में पढ़ाई करके अपने ही क्षेत्र में रोजगार पा सकेंगे। लंबे समय में इससे गन्ना अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
अब आगे क्या होगा
प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है और मुख्यमंत्री से चर्चा हो चुकी है। अब अगला कदम कैबिनेट की स्वीकृति है। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही विश्वविद्यालय की स्थापना की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। तब तक किसानों को यह समझना चाहिए कि यह प्रस्ताव के स्तर पर है — विश्वविद्यालय बनना अभी बाकी है, लेकिन दिशा तय हो चुकी है।
इस बीच किसान अपनी मौजूदा व्यवस्था पर ही ध्यान रखें। नई प्रजातियों के बीज के लिए गन्ना शोध परिषद और स्थानीय गन्ना समितियों से संपर्क बनाए रखें। विश्वविद्यालय की मंजूरी की खबर आते ही CaneUp पर उसकी पूरी जानकारी दी जाएगी।
आपके सवाल
क्या शाहजहांपुर में गन्ना विश्वविद्यालय बन गया है?
नहीं, अभी यह प्रस्ताव के स्तर पर है। गन्ना शोध परिषद को विश्वविद्यालय बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही विश्वविद्यालय की स्थापना होगी।
यह विश्वविद्यालय किसकी पहल पर बन रहा है?
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की पहल पर प्रस्ताव तैयार कराकर शासन को भेजा गया है। इस विषय पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से चर्चा भी हो चुकी है।
गन्ना विश्वविद्यालय में क्या पढ़ाया जाएगा?
गन्ने की खेती, उससे बनने वाले उत्पादों, उद्यम की संभावनाओं और संबंधित विषयों की पढ़ाई और शोध होगा। यह पूरी तरह गन्ने पर केंद्रित संस्थान होगा।
गन्ना शोध परिषद ने कौन सी नई प्रजातियां विकसित की हैं?
परिषद ने रेड रॉट के प्रति मध्यम रोग-रोधी अगेती प्रजातियां कोशा 13235, कोशा 18231, कोशा 17231 और कोशा 19231 विकसित की हैं। नई प्रजाति कोशा 23232 किसानों को वितरित की जा रही है।
बिस्मिल किस्म क्या है?
बिस्मिल, यानी कोशा 17231, शाहजहांपुर में विकसित अगेती गन्ना किस्म है। इसे नॉर्थ-वेस्ट जोन के लिए राष्ट्रीय मानक का दर्जा मिला है, जिससे नई अगेती किस्मों की तुलना अब इसी से की जाएगी।
क्या यह फरवरी 2026 वाले शाहजहांपुर विश्वविद्यालय जैसा ही है?
नहीं। फरवरी 2026 में पारित स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय सामान्य उच्च शिक्षा का संस्थान है, जबकि गन्ना विश्वविद्यालय पूरी तरह गन्ने की पढ़ाई, शोध और उद्यम पर केंद्रित होगा।
स्रोत: दैनिक जागरण (3 नवंबर 2026), लल्लूराम (3 नवंबर 2026), चिनीमंडी (22 मई 2026), न्यूज़18 हिंदी (23 अक्टूबर 2026)
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
यह आर्टिकल कैसा लगा?


