शामली, बिजनौर और सहारनपुर की चीनी मिलों में बॉयलर पूजा की तारीखें तय — 15 से 22 सितंबर तक शुभ मुहूर्त

शामली / बिजनौर (CaneUp ग्राउंड रिपोर्ट — 8 सितंबर, सुबह 7:05 बजे): पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चीनी उद्योग में नए पेराई सत्र 2026-27 के शुभारंभ का औपचारिक शंखनाद होने जा रहा है। शामली, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और मेरठ जनपद की शीर्ष निजी व सहकारी चीनी मिलों ने अपने स्टीम बॉयलरों में ‘बॉयलर अग्नि प्रज्वलन एवं पूजा (Boiler Puja & Fire Up)’ की शुभ तिथियां घोषित कर दी हैं।
परंपरानुसार बॉयलर पूजा के ठीक 20 से 25 दिनों बाद मिलों में गन्ने की वास्तविक पेराई (Commercial Crushing) शुरू हो जाती है। अधिकांश मिलों ने इस वर्ष 15 से 22 सितंबर 2026 के मध्य शुभ मुहूर्तों में बॉयलर पूजन का कार्यक्रम तय किया है।
📅 पश्चिमी यूपी की प्रमुख मिलों में बॉयलर पूजा व पेराई कैलेंडर
| जनपद | चीनी मिल का नाम | बॉयलर पूजा की तिथि | पेराई प्रारंभ (संभावित) | दैनिक क्षमता (TCD) |
|---|---|---|---|---|
| बिजनौर | धामपुर शुगर मिल (धामपुर) | 15 सितंबर 2026 | 16 अक्टूबर 2026 | 15,000 TCD |
| मुजफ्फरनगर | त्रिवेणी शुगर मिल (खतौली) | 16 सितंबर 2026 | 15 अक्टूबर 2026 | 16,000 TCD |
| सहारनपुर | त्रिवेणी शुगर मिल (देवबंद) | 17 सितंबर 2026 | 17 अक्टूबर 2026 | 12,000 TCD |
| शामली | अपर दोआब शुगर मिल (शामली) | 18 सितंबर 2026 | 18 अक्टूबर 2026 | 8,500 TCD |
| मेरठ | दौराला शुगर वर्क्स (डीसीएम) | 19 सितंबर 2026 | 16 अक्टूबर 2026 | 12,500 TCD |
| बागपत | मलकपुर शुगर मिल (राणा) | 21 सितंबर 2026 | 20 अक्टूबर 2026 | 8,000 TCD |
| अमरोहा | चंदनपुर शुगर मिल (त्रिवेणी) | 22 सितंबर 2026 | 20 अक्टूबर 2026 | 9,000 TCD |
🔧 10 दिन का स्टीम ब्लोइंग व ट्रायल रन
बॉयलर में अग्नि प्रज्वलन के पश्चात स्टीम पाइपलाइन और टरबाइन की क्लीनिंग के लिए 7 से 10 दिनों तक ‘स्टीम ब्लोइंग (Steam Blowing)’ की प्रक्रिया चलेगी:
- मिलों के मुख्य यांत्रिक अभियंता (Chief Mechanical Engineers) द्वारा प्रेशर सेफ्टी वॉल्व और हाइड्रोलिक लिफ्टर की जांच पूरी कर ली गई है।
- क्रय केंद्रों पर वजन तौलने वाले डिजिटल वे-ब्रिजों पर बांट-माप विभाग द्वारा ई-स्टैम्पिंग का काम भी समानांतर रूप से चल रहा है।
- यार्ड में ट्रॉलियों के खड़े होने के लिए जलभराव मुक्त पक्के पेवर ब्लॉक बिछाए गए हैं।
किसानों के लिए बॉयलर पूजा की यह घोषणा अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके साथ ही खेतों में अगेती किस्मों (Early Varieties) की कटाई और इंडेंट पर्ची जारी करने की उलटी गिनती शुरू हो गई है।
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