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13 किसानों के नाम से फर्जी हाईकोर्ट वाद? शामली गन्ना ब्याज विवाद पर भाकियू का बड़ा खंडन, मिल मालिकों पर गंभीर आरोप

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 21, 2026 • 6 min read
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13 किसानों के नाम से फर्जी हाईकोर्ट वाद? शामली गन्ना ब्याज विवाद पर भाकियू का बड़ा खंडन, मिल मालिकों पर गंभीर आरोप
अंतिम अपडेट: October 21, 2026 11:31 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

शामली में गन्ना ब्याज विवाद अब कोर्ट के कागजों तक पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर एक कथित हाईकोर्ट वाद की सूची वायरल हुई है, जिसमें दावा है कि १३ किसानों ने बकाया भुगतान पर ब्याज न लेने की मांग की है। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने इसे फर्जी बताते हुए शुगर मिल मालिकों पर ही इसे दायर कराने का आरोप लगाया है और एसपी शामली से जांच की मांग की है।

क्या वायरल हो रहा है — १३ किसानों वाला दावा

गत दिनों सोशल मीडिया पर एक दस्तावेज की सूची तेजी से फैली, जिसके मुताबिक हाईकोर्ट में एक वाद दायर किया गया है। इसमें १३ किसानों के नाम शामिल बताए गए और कहा गया कि ये किसान गन्ने के बकाया भुगतान पर मिलने वाले ब्याज को न लेने की मांग कर रहे हैं। यानी — किसान खुद कोर्ट में कह रहे हैं कि उन्हें देर से मिले भुगतान पर ब्याज नहीं चाहिए।

यह दावा ऐसे समय में वायरल हुआ है, जब गन्ने के बकाया भुगतान पर ब्याज का मुद्दा देश की सबसे बड़ी अदालतों में चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने ६ अक्टूबर के आदेश में १४ दिन के भीतर भुगतान और १५ प्रतिशत ब्याज को किसानों का अनिवार्य संरक्षण बताया था। ऐसे माहौल में ब्याज न लेने वाला वाद चर्चा में आना स्वाभाविक था — लेकिन भाकियू का कहना है कि यह दावा ही झूठ की बुनियाद पर खड़ा है।

भाकियू का खंडन — “हमें कुछ पता ही नहीं”

शुक्रवार (१६ अक्टूबर) को धीमानपुरा स्थित भाकियू कार्यालय में जिलाध्यक्ष आशीष चौधरी ने गांव भाज्जू के दो किसानों — धीरजपाल और महेशवीर — को साथ बैठाकर खंडन किया। दोनों किसान उन १३ नामों में शामिल बताए गए थे। दोनों ने कहा कि उन्हें वाद की कोई जानकारी नहीं है — न उन्होंने कोई प्रमाणपत्र दिया, न किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। उनका आरोप है कि नाम जोड़कर उन्हें बदनाम किया गया। चौधरी ने कहा कि शुगर मिल मालिकों ने किसानों में मतभेद पैदा करने के लिए यह फर्जी वाद दायर कराया है।

तीन मिलों में से दो का भुगतान साफ — थानाभवन पर बकाया

आशीष चौधरी के अनुसार, शामली की तीन शुगर मिलों में से दो ने अपना बकाया चुका दिया है — सिर्फ थानाभवन स्थित बजाज शुगर मिल पर भुगतान बकाया है। अमर उजाला की १७ अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक यह बकाया ७१ करोड़ रुपये से अधिक है। बार-बार मांग के बावजूद भुगतान न मिलने पर किसानों में नाराजगी है, और ब्याज का विवाद भी इसी मिल के इर्द-गिर्द घूम रहा है।

वायरल सूची में छह जिलों के किसानों के नाम

वायरल सूची में शामली के अलावा लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ, सहारनपुर के गंगनोली, बुढ़ाना, बिलाई, चांदपुर और पीलीभीत की शुगर मिलों से जुड़े किसानों के नाम भी शामिल बताए गए हैं — यानी यह विवाद कई जिलों तक फैला है।

भाकियू ने इसीलिए मामले की शिकायत एसपी से कराकर पूरी जांच की मांग की है। जिलाध्यक्ष के अनुसार संगठन शनिवार को एसपी शामली से मिलकर लिखित शिकायत देगा। इस मौके पर बिल्लू राणा, प्रशांत चौधरी और कृष्णपाल राठी समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

उसी दिन का दूसरा मोर्चा — कलक्ट्रेट पर भाकियू (अराजनीतिक) का धरना

दिलचस्प यह है कि जिस शुक्रवार को भाकियू ने ब्याज-वाद का खंडन किया, उसी दिन शामली में किसानों का दूसरा बड़ा प्रदर्शन भी हुआ। भाकियू (अराजनीतिक) के बैनर तले किसानों ने कलक्ट्रेट परिसर में चार घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया।

मुख्य मांग थी — पेराई सत्र से पहले गन्ने का भाव ५०० रुपये प्रति क्विंटल घोषित हो और मिलों का बकाया तत्काल चुकाया जाए। बाबा राजेंद्र मलिक ने कहा कि लागत बढ़ रही है, लेकिन देरी से भुगतान के कारण खाद-बीज खरीदने में दिक्कत होती है। किसानों ने बारिश के नुकसान का मुआवजा, बेसहारा पशुओं से सुरक्षा और बिजली की समस्याओं का समाधान भी मांगा और ज्ञापन एडीएम को सौंपा।

ब्याज का बैकग्राउंड — क्यों हर जिले में यही लड़ाई है

शामली का यह विवाद अचानक नहीं आया। इसके पीछे एक लंबा कानूनी संघर्ष है:

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट (३१ अगस्त २०२६): मिलों से ₹१,९३६ करोड़ की वसूली बाकी — ₹१,०८७ करोड़ मूल बकाया + ₹८४९.५ करोड़ ब्याज। कोर्ट ने कहा: “ब्याज की दिशा में एक भी पैसा वसूल नहीं हुआ।”
  • सुप्रीम कोर्ट (६ अक्टूबर २०२६): राज्य सरकार की अपील खारिज — १४ दिन में भुगतान और १५ प्रतिशत ब्याज किसानों का “अनिवार्य संरक्षण”। गन्ना अधिनियम १९५३ की धारा १७(३) के तहत ब्याज माफी की सरकारी दलील भी खारिज।

भाकियू का आरोप है कि ब्याज की लड़ाई कमजोर करने के लिए ही मिल मालिकों ने किसानों के नाम पर यह वाद दायर कराया।

पेराई सत्र शुरू — दबाव का दौर

याद रहे कि यूपी में नया गन्ना पेराई सत्र शुरू हो चुका है — २१ मिलों में पेराई चल रही है और ५३ मिलों ने गन्ना खरीद के इंडेंट जारी कर दिए हैं। इसी दबाव के दौर में शामली का विवाद सामने आया है: एक तरफ किसान बकाया ब्याज की लड़ाई लड़ रहे हैं, दूसरी तरफ थानाभवन जैसी मिलों पर ७१ करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया अभी भी खड़ा है।

किसानों के लिए आगे क्या — जरूरी बातें

  • किसी भी कागज पर हस्ताक्षर सोच-समझकर करें: अगर आपके नाम पर कोई वाद या दस्तावेज बताया जाए, तो पहले उसकी प्रामाणिकता जांचें। भाकियू के आरोपों से साफ है कि किसानों के नाम का दुरुपयोग हो सकता है।
  • ब्याज आपका कानूनी हक है: १४ दिन के भीतर भुगतान न होने पर १५ प्रतिशत ब्याज का प्रावधान कानूनन मौजूद है, और सुप्रीम कोर्ट ने इसे अनिवार्य संरक्षण कहा है।
  • बकाया भुगतान की रसीद रखें: पेराई सत्र में गन्ना देते समय पर्ची और भुगतान के रिकॉर्ड संभालकर रखें — ब्याज के दावे में यही सबसे बड़ा सबूत होगा।
  • संदिग्ध दस्तावेज की शिकायत करें: अगर आपके नाम पर बिना जानकारी कोई दस्तावेज बनाया जाए, तो जिला प्रशासन या पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं।

पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: शामली में वायरल हुआ १३ किसानों वाला हाईकोर्ट वाद क्या है? उत्तर: सोशल मीडिया पर एक सूची वायरल हुई थी, जिसमें दावा था कि १३ किसानों ने गन्ना बकाया पर ब्याज न लेने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में वाद दायर किया है। भाकियू ने इसे फर्जी बताते हुए खंडन किया है।

प्रश्न: भाकियू ने क्या आरोप लगाए हैं? उत्तर: जिलाध्यक्ष आशीष चौधरी का आरोप है कि मिल मालिकों ने किसानों के नाम पर फर्जी वाद दायर कराया, ताकि ब्याज की लड़ाई कमजोर पड़े। संगठन ने एसपी शामली से जांच की मांग की है।

प्रश्न: सूची में नाम वाले किसानों का क्या कहना है? उत्तर: गांव भाज्जू के धीरजपाल और महेशवीर ने कहा कि उन्हें वाद की कोई जानकारी नहीं है, न उन्होंने कोई प्रमाणपत्र दिया और न ही किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। उनका कहना है कि नाम जोड़कर उन्हें बदनाम किया गया।

प्रश्न: थानाभवन शुगर मिल पर कितना बकाया है? उत्तर: अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, थानाभवन (बजाज) शुगर मिल पर किसानों का ७१ करोड़ रुपये से अधिक का गन्ना भुगतान बकाया है। शामली की तीन मिलों में से सिर्फ इसी मिल पर बकाया बचा है।

प्रश्न: बकाया गन्ना भुगतान पर कितना ब्याज मिलता है? उत्तर: नियमों के मुताबिक १४ दिन के भीतर भुगतान न होने पर किसानों को १५ प्रतिशत वार्षिक ब्याज का हक है। सुप्रीम कोर्ट ने ६ अक्टूबर २०२६ के आदेश में इसे अनिवार्य संरक्षण बताया है।

स्रोत: रॉयल बुलेटिन (१६ अक्टूबर २०२६), लाइव हिंदुस्तान (१६ अक्टूबर २०२६), अमर उजाला शामली (१७ अक्टूबर २०२६), चिनीमंडी/टाइम्स ऑफ इंडिया (सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट ब्याज आदेशों पर)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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